किसान कर्ज माफी योजना 2026: 14.22 लाख किसानों को बड़ी राहत, जानिए किसे मिलेगा लाभ – किसानों का ₹50,000 तक का कर्ज माफ!

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तमिलनाडु सरकार ने राज्य के 14.22 लाख किसानों को बड़ी राहत देते हुए सहकारी बैंकों से लिए गए फसल ऋण की माफी की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के इस ऐतिहासिक फैसले के तहत छोटे और सीमांत किसानों का ₹50,000 तक का कर्ज पूरी तरह माफ किया जाएगा, जबकि बड़े किसानों को ₹5,000 तक की राहत मिलेगी। जानिए इस योजना के पात्रता नियम और लाभ उठाने की पूरी प्रक्रिया।

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टिकोरे से खटाई तक: जानिए सुतुही से छिलने वाली नर्म कल्ली की खटाई की निर्माण प्रक्रिया और बचपन की यादें!

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हवा से गिरे आम के छोटे टिकोरों को सहेजकर मां के हाथों सुतुही से बनाई जाने वाली ‘नर्म कल्ली की खटाई’ आज भी ग्रामीण रसोई की सबसे अनूठी धरोहर है। जानिए तीखी धूप में सुखाए जाने वाले इन टिकोरों की अद्भुत निर्माण प्रक्रिया, लग्गी से आम तोड़ने की कला, पेड़ पर छिपे ‘माटा’ (चींटों) का खौफ और हमारे बचपन की वो मीठी डांट से जुड़ी एक बेहद जीवंत कहानी।

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पेड़ से टपका आम, आधी रात की आंधी और टॉर्च की रोशनी: भूल नहीं पाएंगे गांव की ये यादें!

देशी आमों के नाम टपका आम

करियवा, मिठव्वा, सेनुरिहवा और मालदह… ये सिर्फ आमों के नाम नहीं, बल्कि हमारे बचपन की सुनहरी यादें हैं। जानिए हमारे गांवों की बगिया में मिलने वाले इन 15 अनोखे देशी आमों की विशेषताएं, आधी रात की आंधी में आम बीनने का वो रोमांच और बिना किसी लालच के अपनों में खुशियाँ बांटने वाले बड़े दिल वाले गांवों की ये अनूठी कहानी।

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Kandaura (कंडौरा) क्या है? जानिए कंडा-चिपरी सहेजने की पारंपरिक तकनीक और ग्रामीण भारत में ईंधन सुरक्षा का बेहतरीन तरीका!

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रसोई गैस के इस दौर में भी ‘कंडौरा’ और ‘भीटहुर’ ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भर जीवनशैली की खूबसूरत मिसाल हैं। उत्तर प्रदेश के गोण्डा-बस्ती क्षेत्र की इस पारंपरिक रीत, भीटहुर उजाड़ने के दौरान बच्चों के उस अनोखे रोमांच और पूरे साल के लिए कंडे-चिपरी सुरक्षित रखने की इस अद्भुत देसी इंजीनियरिंग की कहानी को करीब से जानिए।

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घूघू-चारा (Antlion) का इतिहास: जानिए इस अनोखे कीड़े और मिट्टी के खेल के बचपन की यादें!

घूघू-चारा कीड़ा एंटलायन क्या है?

“हो सकता है कि यह नाम आपको अजीब लगे, मगर बचपन में हम इस नन्हें कीड़े को यही कहते थे—घूघू-चारा!”—जानिए भुरभुरी मिट्टी में मौत का कुआँ बनाकर चींटियों का शिकार करने वाले इस अनोखे शातिर शिकारी (Antlion) की कहानी। तिनके के चारे से लेकर धागा बांधकर ‘मिशन 2.0’ तक, यादों के झरोखे से हमारे बचपन के सबसे दिलचस्प और अनमोल खेल का एक सजीव विश्लेषण।

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सतुआ का इतिहास: जानिए पारंपरिक सातंजा सत्तू का महत्व और देशी तरीके – अवध में सतुआ की दिलचस्प कहानी!

Desi Superfood Sattu

“मां के हाथ की सिलबट्टे वाली अमिया की चटनी और गाढ़ा घुला सतुआ!”—जानिए अवध के इस पारंपरिक सुपरफूड की पूरी कहानी। परदादा जी के मुकदमों के सफर की पोटली से लेकर शाम को बाबा के ‘ककरौन’ और ‘पिंडी’ के स्वाद तक, कैसे सात अनाजों से बनने वाला यह सातंजा सत्तू स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी अनोखा खजाना है।

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ओखली और मूसल का इतिहास: जानिए अवधी संस्कृति में ‘पहरुवा’ का महत्व और पारंपरिक रस्में!

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“जब ओखरी में मूड़ परि गय, तव पहरुवा कौन गिनती!”—जानिए अवध की लोक संस्कृति और गृहस्थी के सबसे मजबूत स्तंभ ‘पहरुवा’ (मूसल) की पूरी कहानी। धान कूटने और चावल निखारने के पारंपरिक तौर-तरीकों से लेकर शादी-ब्याह की मांगलिक रस्मों तक, कैसे यह पारंपरिक उपकरण आज भी हमारी जड़ों का मूक पहरेदार बना हुआ है।

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UP Panchayat Chunav: नए आरक्षण नियमों के बीच सर्दियों में चुनाव की तैयारी, जानिए प्रधानी के लिए जरूरी शर्तें

“उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। योगी कैबिनेट ने ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है, वहीं मतदाता सूची जारी करने की तारीख भी 10 जून तक बढ़ा दी गई है। 26 मई को कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में प्रशासक राज लौटने की संभावना है। जानिए कब और कैसे होंगे यूपी में प्रधानी के चुनाव।”

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अमोढ़ा खास में विलेज टूरिज्म कमेटी गठित – एग्री रूरल एंड गंगे ग्राम प्रोजेक्ट के तहत बढ़ेगा ग्रामीण पर्यटन

विकासखंड विक्रमजोत के पर्यटन ग्राम अमोढ़ा खास में ‘एग्री रूरल एंड गंगे ग्राम रूरल टूरिज्म प्रोजेक्ट’ के तहत विलेज टूरिज्म कमेटी (VTC) का गठन किया गया है। ग्राम प्रधान रीना देवी की अध्यक्षता में यह समिति रामरेखा मंदिर और राजा जालिम सिंह किले जैसे ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, होमस्टे संचालन और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।

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गाँव की संस्कृति: क्या है छपरा छवाई और इसमें छिपी सामूहिकता का महत्व?

ग्रामीण भारत में छपरा छवाई कैसे होती है? जानिए बांस, मूंज और अरहर की कौंची से फूस की छत बनाने का पारंपरिक तरीका, गाँव की सामूहिकता और देसी व्यंजन घुघुरी का मजा।

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टिकूई फेरना क्या है? जानें गांव की शादी की यह अनोखी रस्म और लोक परंपरा

“टिकूई फेरना क्या है? जानिए यूपी-बिहार के पारंपरिक विवाह रीति-रिवाज, फूफा जी के उखल-धान कूटने की रस्म, नेग का महत्व और बारात विदाई के बाद महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले पारंपरिक गाली गीतों का सजीव चित्रण।”

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गाँव की लोक परंपराएं: मेंढक का विवाह, काल कलाउटी और बारिश के पारंपरिक रिवाज!

मेघा रे पानी दे! जानिए गाँव के उस अल्हड़ बचपन की कहानी जहाँ बारिश के लिए बच्चे ‘काल कलाउटी’ खेलते थे और पेड़ की छाँव में पत्तों पर खिचड़ी-चोखा का आनंद लेते थे। साथ ही जानिए आधी रात को महिलाओं द्वारा हल चलाने और मेंढक विवाह जैसे बारिश कराने के अनोखे पारंपरिक लोक गीत के बारे में।

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Kharif Crops MSP Price List 2026-27: केंद्र सरकार ने बढ़ाई खरीफ फसलों की MSP, यहाँ देखें धान, दाल और तिलहन के नए दाम!

खरीफ फसलों की नई MSP 2026-27: मोदी कैबिनेट ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए धान, मक्का, कपास और दालों समेत सभी 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इस फैसले से किसानों को उनकी लागत पर कम से कम 50% से 61% तक का सीधा मुनाफा मिलेगा। जानिए अपनी फसल के नए सरकारी दाम और हुई बढ़ोतरी की पूरी सूची।

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लखपति दीदी योजना यूपी: उत्तर प्रदेश की महिलाओं की बदली तकदीर | पूरी जानकारी 2026

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में ‘लखपति दीदी योजना’ एक नई क्रांति लेकर आई है। ड्रोन पायलट से लेकर बैंकिंग सखी तक, यूपी की लाखों महिलाएं अब सालाना 1 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। जानिए कैसे सीएम योगी के नेतृत्व में यह योजना गांवों की आर्थिक तस्वीर बदल रही है और आप इसका लाभ कैसे उठा सकती हैं।

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यूपी पंचायत चुनाव 2026: 26 मई को खत्म हो रहा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल, अब किसके हाथ में होगी गांव की सत्ता?

उत्तर प्रदेश में 26 मई 2026 को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। चुनाव में देरी की स्थिति में गांवों में प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं। जानें कौन बनेगा प्रशासक और क्या है प्रधानों की मांग?

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यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी: चुनाव में देरी और सरकार के नए विकल्पों पर एक रिपोर्ट

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा ग्राम पंचायतों को लेकर है। प्रदेश की ग्राम पंचायतों का वर्तमान कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त होने जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चुनाव की तैयारियां अब तक अधूरी हैं। ऐसे में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने या उन्हें प्रशासक नियुक्त करने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

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वीरपुर खरहरा: आजादी के दशकों बाद भी सरयू नहर पर पुल का इंतजार, ग्रामीणों ने विधायक से लगाई गुहार

बस्ती (उत्तर प्रदेश): हर्रैया विधानसभा के ग्रामसभा वीरपुर खरहरा और मल्लुपुर घोरसाय के हजारों ग्रामीणों के लिए विकास की राह में ‘सरयू नहर’ एक बड़ी बाधा बनी हुई है। नहर पर पक्का पुल न होने के कारण ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। शुक्रवार को ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक श्री अजय सिंह को मांग पत्र सौंपकर जल्द से जल्द पक्के पुल के निर्माण की अपील की।

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क्यों प्रसिद्ध है राजघाट बुद्धा नदी के किनारे बेलहर क्षेत्र में स्थित श्री राम जानकी मंदिर और बाबा मोहकम दास जी का स्थान!

संत कबीर नगर के बेलहर क्षेत्र में स्थित राजघाट बुद्धा नदी के किनारे श्री राम जानकी मंदिर और बाबा मोहकम दास जी का स्थान है। यहां भगवान राम जानकी का भव्य मंदिर बना हुआ है और मंदिर के तीन तरफ नदी का किनारा है। जो आगे 1 किमी० चलकर आमी नदी में इसका संगम होता है । वह स्थान त्रिमोहानी के नाम से जाना जाता है।

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जो आनंद इन बेर को खाने में है वो स्वाद बड़े बड़े मन को लुभाने वाले बाजारी बेर में कहाँ है।

आनंद बेर को खाने में है

बचपन में इन बेर को खाने और तोड़ने के लिए न जाने कितनी बार नानी से डाँट खाई है फिर भी पता नहीं कितने कांटो की चुभन सहकर इन्हें तोड़ने का सफल प्रयास किया है। हमारा गांव छोटा था वहाँ झरबेरी के पेड़ बहुत कम थे हमारे साथियों को पता […]

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दो पीढ़ियों का अंतर – हमारा और हमारे बच्चों का बचपन

Do pidhiyon ka bachpan

छोटा सा गांव मेरा, मुट्ठी भर लोग चारो तरफ धन धान्य से परिपूर्ण खेत, फलदार बाग, फूलों से भरे बगीचे, दूर तक हरी चादर ओढ़े जमीन, लबालब पानी भरे ताल तलैया और इस जन्नत जैसी जमी के बीच मेरा घर मेरा अपना घर और उस घर मे मैं इकलौती बच्ची […]

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गांव का बचपन और बचपन की कुछ यादें

VillagePrimarySchool

चलिये थोड़ा गांव का बचपन याद करते हैं…जानते हैं ये क्या है ? हाहाहा… जितने लोग हमारे जैसे प्राइमरी स्कूल में पढ़े होंगे वो सब बहुत ही अच्छी तरह से इसे पहचानते होंगे। जी हां ये वही “बेहया” है जिसके बिना मास्टर साहब का सिखाया गया पाठ याद नहीं होता […]

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महुआ और महुवारी की वो मदहोश करने वाली खुश्बू

Mahua Flower and fruit

ये महुआ (महुवा) है और महुवा को कैसे भूल सकते हैं, बचपन में नानी रोज सुबह सुबह मुझे महुवा बीनने के लिए उठा देती थी। जो मेरे लिए किसी दण्ड से कम नही होता था क्योकि देर तक सोने की लालची थी और मैं गुस्से से मुह फुला कर टोकरी लेकर अपनी सहेलियों की टोली के साथ महुवा बीनने महुवारी के लिए चल पड़ती थी लेकिन वहाँ पहुँचते ही सारा गुस्सा काफूर हो जाता था।

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अमोढ़ा-बस्ती: पौराणिक स्थल रामरेखा मंदिर, अमोढ़ा-छावनी !!

Ramrekha Mandir

हर्रैया के विधायक अजय सिंह ने 60.91 लाख की लागत से पर्यटन विकास योजनान्तर्गत चौरासी कोसी परिक्रमा के पहले पड़ाव, ऐतिहासिक व पौराणिक स्थल रामरेखा मंदिर (Ramrekha Mandir), अमोढ़ा-छावनी में पर्यटन विकास कार्य तथा राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत राम रेखा मंदिर पर शिलान्यास किया। रामरेखा बहुत ही पौराणिक स्थल […]

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अमोढ़ा-बस्ती: Amorha ग्रामवासियों का दिखा गुस्सा, केवल कागजो में हुए काम को लेकर नाराज थे

Amorha Village

अमोढ़ा-बस्ती: बस्ती जिले में अमोढ़ा (Amorha) गांव के लोगों ने रास्ता रोक कर विरोध किया, विरोध तेज होता देख जिलाधिकारी सरकारी गाड़ी से निकल गए। सांसद आदर्श ग्राम अमोढ़ा में विकास कार्यों के निरीक्षण के दौरान  नाराज अमोढ़ा ग्रामवासियों का दिखा गुस्सा। केवल कागजो में हुए काम को लेकर और […]

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बस्ती: अमोढ़ा राज्य में स्थित प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर !!

Chaturbhuji Mandir Amorha

बस्ती: अमोढ़ा राज्य के छावनी थाना क्षेत्र में स्थित प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर (Chaturbhuji Mandir Amorha) प्रांगण में बुढ़वा मंगल के दिन हर वर्ष मेला लगता है। वैसे तो हर मंगलवार को लोग चतुर्भुजी बाबा अर्थात चतुर्भुज भगवान के दर्शन करने के लिए आते है लेकिन बुढ़वा मंगल के दिन एक बड़े […]

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