TET परीक्षा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी! राहत के लिए किन 3 विकल्पों पर चल रहा विचार, यहाँ देखें!

tet passing marks rules, ctet passing marks in hindi, teacher eligibility test new rules, ncte new guidelines for tet exam, uptet passing marks percentage, reet safe score and passing criteria, bihar ctet female passing marks, tet minimum qualifying marks, tet passing marks reduced update, central teacher eligibility test 2026, shikshak bharti eligibility rules, b.ed deled tet exam update, tet relaxation for obc sc st, govt teacher exam updates hindi, national education policy tet rules, tet exam structure and score validity, ctet 150 marks criteria, state tet latest news, grace marks in tet exam, sectional cutoff in teacher exams

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET – Teacher Eligibility Test) को लेकर इस समय देश भर के शिक्षण गलियारों और सरकारी महकमों में एक बहुत बड़ी हलचल चल रही है। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) और विभिन्न राज्यों के शिक्षा विभागों के बीच इस बात को लेकर गहन मंथन जारी है कि क्या टीईटी परीक्षा में पासिंग मार्क्स (अर्हता अंक) को कम किया जाना चाहिए? लंबे समय से देश के लाखों शिक्षक अभ्यर्थी यह मांग कर रहे हैं कि परीक्षा के कठिन स्तर और विभिन्न राज्यों में शिक्षकों के खाली पड़े लाखों पदों को देखते हुए पासिंग मार्क्स में कुछ ढील दी जाए।

ताजा रिपोर्टों और विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय और संबंधित बोर्ड्स अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देने के लिए मुख्य रूप से 3 बड़े विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। यदि इन विकल्पों में से किसी एक पर भी अंतिम मुहर लगती है, तो यह देश भर के लाखों बीएड (B.Ed.), डीएलएड (D.El.Ed.) और बीटीसी (BTC) डिग्री धारकों के लिए एक ऐतिहासिक और जीवन बदलने वाला फैसला साबित हो सकता है।

इस बेहद विस्तृत और शोध-परक लेख में हम टीईटी परीक्षा के वर्तमान नियमों, पासिंग मार्क्स कम करने की उठ रही मांगों के पीछे के मुख्य कारणों और सरकार की मेज पर चल रहे उन 3 विकल्पों की पूरी समीक्षा हिंदी में प्रस्तुत कर रहे हैं।


Table of Contents

टीईटी (TET) परीक्षा और पासिंग मार्क्स का वर्तमान ढांचा

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) के लागू होने के बाद से भारत में कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य कर दिया गया था। केंद्र सरकार इसके लिए सीटीईटी (CTET) का आयोजन करती है, जबकि राज्य सरकारें यूपीटीईटी (UPTET), रीट (REET), बीटीईटी (BTET), एमपीटेट (MPTET) जैसी राज्य स्तरीय परीक्षाओं का आयोजन करती हैं।

वर्तमान में, लगभग सभी राज्यों और केंद्रीय स्तर पर पासिंग मार्क्स का ढांचा इस प्रकार है:

  • सामान्य श्रेणी (General / UR): परीक्षा में सफल होने के लिए कुल 150 अंकों में से 60% अंक यानी न्यूनतम 90 अंक लाना अनिवार्य है।
  • आरक्षित श्रेणी (OBC/SC/ST/PwD): इन श्रेणियों के उम्मीदवारों को 5% की छूट दी जाती है। इन्हें सफल होने के लिए 55% अंक यानी न्यूनतम 82 अंक लाने होते हैं।

वर्षों से चले आ रहे इस कड़े नियम के कारण हर साल लाखों अभ्यर्थी मात्र 1 या 2 अंकों से परीक्षा पास करने से चूक जाते हैं, जिससे उनका सरकारी शिक्षक बनने का सपना अधूरा रह जाता है।


पासिंग मार्क्स कम करने की मांग क्यों उठ रही है? (मुख्य कारण)

शिक्षकों के लिए पात्रता मानदंडों में ढील देने या पासिंग मार्क्स को घटाने के पीछे कई ठोस सामाजिक, व्यावहारिक और प्रशासनिक कारण हैं, जिन पर सरकार चाहकर भी आंखें नहीं मूंद सकती:

1. परीक्षा का लगातार बढ़ता कठिन स्तर (Hard Difficulty Level)

पिछले कुछ वर्षों में टीईटी और सीटीईटी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों का स्तर बहुत कठिन हो गया है। विशेष रूप से शिक्षा शास्त्र (Pedagogy) और बाल विकास (Child Development) खंडों में पूछे जाने वाले प्रश्न अब केवल रटने पर आधारित नहीं होते, बल्कि वे अत्यधिक विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक होते हैं। इस कारण पासिंग प्रतिशत लगातार गिर रहा है।

2. बेहद निराशाजनक पासिंग प्रतिशत (Low Success Rate)

अगर हम पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों को उठाकर देखें, तो टीईटी परीक्षाओं का कुल पासिंग प्रतिशत महज 8% से 15% के बीच सिमट कर रह जाता है। उदाहरण के लिए, कई बार सीटीईटी परीक्षा में 15 लाख अभ्यर्थी बैठते हैं और उनमें से केवल 1.5 से 2 लाख छात्र ही पास हो पाते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि देश में बड़ी संख्या में युवा डिग्री लेकर तैयार हैं, लेकिन वे पात्रता परीक्षा के कड़े नियमों को पार नहीं कर पा रहे हैं।

3. सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लाखों पद खाली

एक तरफ जहां देश के लाखों प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ योग्य अभ्यर्थियों की कमी बनी हुई है क्योंकि वे पात्रता परीक्षा पास नहीं कर पा रहे हैं। पासिंग मार्क्स कम होने से योग्य उम्मीदवारों का एक बड़ा पूल तैयार होगा, जिससे सरकार को बंपर शिक्षक भर्तियों को भरने में आसानी होगी।


राहत के लिए किन 3 विकल्पों पर चल रहा है विचार!

शिक्षक अभ्यर्थियों के बढ़ते दबाव और शिक्षा व्यवस्था में संतुलन बनाने के लिए सरकार के उच्च अधिकारियों के बीच इस समय तीन विशेष फॉर्मूलों या विकल्पों पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। आइए इन तीनों विकल्पों को गहराई से समझते हैं:


विकल्प 1: पासिंग मार्क्स में सीधे 5% की सामान्य कटौती (Flat 5% Cut in Passing Marks)

इस विकल्प के तहत सभी श्रेणियों के लिए निर्धारित न्यूनतम उत्तीर्ण अंकों में सीधे तौर पर 5 प्रतिशत की कमी करने का प्रस्ताव है। यदि इस फॉर्मूले को लागू किया जाता है, तो नया पासिंग मार्क्स ढांचा कुछ इस तरह दिखाई देगा:

  • सामान्य श्रेणी (General): वर्तमान के 60% (90 अंक) को घटाकर 55% (82 अंक) किया जा सकता है।
  • आरक्षित श्रेणी (OBC/SC/ST): वर्तमान के 55% (82 अंक) को घटाकर 50% (75 अंक) किया जा सकता है।

इस विकल्प का लाभ: इस कदम से उन लाखों छात्रों को सबसे बड़ी राहत मिलेगी जो बार-बार 87, 88 या 89 अंकों पर आकर अटक जाते हैं। इससे पास होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में एकाएक भारी बढ़ोतरी होगी।


विकल्प 2: विषय-वार न्यूनतम अंकों की बाध्यता को हटाना (Removing Sectional Cut-off / Over-all Balancing)

कई राज्यों में टीईटी के अंदर विषय-वार या खंड-वार (Section-wise) न्यूनतम अंक लाने का भी एक अदृश्य दबाव रहता है, या फिर प्रश्नपत्रों का संतुलन ऐसा होता है कि छात्र किसी एक विषय (जैसे गणित या अंग्रेजी) में कमजोर होने के कारण ओवरऑल 90 अंक नहीं ला पाते।

इस दूसरे विकल्प के तहत विचार किया जा रहा है कि यदि कोई उम्मीदवार किसी विशिष्ट विषय (जैसे विज्ञान या कला) में असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन करता है, तो उसके कुल प्राप्तांकों के आधार पर उसे कुछ विशेष ग्रेस अंक (Grace Marks) या ‘ओवरऑल रिलैक्सेशन’ देकर पास घोषित कर दिया जाए। यानी, कुल 150 अंकों में से एक नया लचीला स्कोरिंग सिस्टम तैयार किया जाए जो अभ्यर्थी की समग्र क्षमता को मापे, न कि किसी एक कठिन खंड के कारण उसे फेल करे।


विकल्प 3: अनुभव और आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर ‘वेटेज’ या अतिरिक्त छूट (Weightage based on Experience or Socio-Economic Criteria)

तीसरा और सबसे व्यावहारिक विकल्प यह है कि जो अभ्यर्थी पिछले कई वर्षों से निजी स्कूलों में संविदा (Contract), तदर्थ (Ad-hoc) या शिक्षा मित्र के रूप में पढ़ा रहे हैं और उनके पास शिक्षण का वास्तविक व्यावहारिक अनुभव है, उन्हें टीईटी परीक्षा में विशेष रियायत दी जाए।

  • अनुभव के आधार पर: प्रति वर्ष के शिक्षण अनुभव के लिए पासिंग मार्क्स में 1 या 2 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जा सकती है।
  • सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि: ग्रामीण, दूरदराज के क्षेत्रों या बेहद पिछड़े सामाजिक परिवेश से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए पासिंग मार्क्स को और लचीला बनाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में समावेशिता (Inclusivity) को बढ़ावा दिया जा सके।

यदि पासिंग मार्क्स कम होते हैं, तो इसके क्या प्रभाव होंगे?

इस संभावित फैसले के दोनों पक्ष हैं। जहां एक तरफ यह अभ्यर्थियों के लिए उत्सव जैसा होगा, वहीं शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी कुछ सवाल खड़े हो सकते हैं:

सकारात्मक प्रभाव (Pros):

  1. बेरोजगारी में कमी: लाखों योग्य युवाओं को सरकारी नौकरी की मुख्य परीक्षाओं (Super TET, शिक्षक भर्ती परीक्षा आदि) में बैठने का मौका मिलेगा।
  2. शिक्षकों की कमी होगी दूर: ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में जहां वर्षों से शिक्षकों के पद रिक्त हैं, वहां तेजी से नियुक्तियां की जा सकेंगी।
  3. मानसिक तनाव से मुक्ति: सालों से तैयारी कर रहे छात्रों का मानसिक तनाव कम होगा और उनका मनोबल बढ़ेगा।

नकारात्मक प्रभाव/चुनौतियां (Cons):

  1. शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल: कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पात्रता मानदंडों को कम करने से स्कूलों में शिक्षा के स्तर और गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
  2. प्रतिस्पर्धा में भारी वृद्धि: टीईटी पास अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने से मुख्य भर्ती परीक्षाओं में कंपटीशन बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।

अंतिम निर्णय कब तक आने की उम्मीद है?

वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि शिक्षा मंत्रालय विभिन्न राज्यों के शिक्षा बोर्ड्स के साथ मिलकर एक साझा आम सहमति (Consensus) बनाने का प्रयास कर रहा है, क्योंकि शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले महीनों में होने वाली उच्च स्तरीय बैठकों के बाद इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना या नई गाइडलाइंस जारी की जा सकती हैं।


अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्टों, सूत्रों और जारी चर्चाओं पर आधारित है। टीईटी परीक्षा के पासिंग मार्क्स में किसी भी प्रकार का बदलाव पूरी तरह से केंद्र सरकार, एनसीटीई (NCTE) और संबंधित राज्य सरकारों के नीतिगत निर्णयों पर निर्भर करता है। छात्रों को किसी भी आधिकारिक बदलाव की पुष्टि के लिए केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइटों और नोटिफिकेशन का ही अवलोकन करना चाहिए।

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े इन बेहद महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नीचे विस्तार से दिए गए हैं:


1. विभिन्न राज्यों में टीईटी (TET) नियमों की वर्तमान स्थिति

भारत के प्रमुख राज्यों में टीईटी के नियमों और पासिंग मार्क्स को लेकर वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:

  • उत्तर प्रदेश (UPTET): उत्तर प्रदेश में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षक बनने के लिए UPTET या CTET पास होना अनिवार्य है। यहाँ सामान्य वर्ग के लिए 60% (90 अंक) और ओबीसी/एससी/एसटी के लिए 55% (82 अंक) का नियम कड़ाई से लागू है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन के बाद नियमों को और अधिक सुव्यवस्थित किया जा रहा है।
  • बिहार (BTET / STET): बिहार सरकार ने प्रारंभिक स्कूलों के लिए अलग से BTET कराने के बजाय CTET को ही मुख्य आधार बना दिया है। हालांकि, बिहार में महिलाओं और आरक्षित श्रेणियों को पासिंग मार्क्स में विशेष छूट दी जाती है। उदाहरण के लिए, सामान्य महिला उम्मीदवारों को CTET में 55% (82 अंक) और अनुसूचित जाति/जनजाति व दिव्यांग उम्मीदवारों को केवल 50% (75 अंक) लाने पर भी बिहार शिक्षक बहाली (BPSC TRE) में पात्र मान लिया जाता है।
  • राजस्थान (REET): राजस्थान में REET परीक्षा दो चरणों में होती है—पात्रता परीक्षा और मुख्य भर्ती परीक्षा। REET पात्रता परीक्षा में सामान्य वर्ग के लिए 60% अंक अनिवार्य हैं, जबकि टीएसपी (TSP) और नॉन-टीएसपी (Non-TSP) क्षेत्रों के अनुसूचित जनजाति (ST) के उम्मीदवारों को पासिंग मार्क्स में 36% से 55% तक की विशेष रियायत दी जाती है।
  • मध्य प्रदेश (MPTET): मध्य प्रदेश में भी पात्रता परीक्षा के अंकों का एक निश्चित प्रतिशत (सामान्य के लिए 60% और आरक्षित वर्ग के लिए 50%) लाना जरूरी होता है, जिसके बाद अभ्यर्थियों को मुख्य चयन परीक्षा (Selection Test) में बैठना होता है।

2. सीटीईटी (CTET) के आगामी सत्र का सिलेबस और परीक्षा पैटर्न

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित होने वाली CTET परीक्षा के पैटर्न में पिछले कुछ समय से वैचारिक (Conceptual) और व्यावहारिक प्रश्नों की संख्या बढ़ाई गई है। इसका मुख्य विवरण इस प्रकार है:

परीक्षा का ढांचा (Exam Structure)

यह परीक्षा दो पेपरों में विभाजित होती है और इसमें कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होती है:

  • पेपर 1: कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षकों के लिए।
  • पेपर 2: कक्षा 6 से 8 तक के शिक्षकों के लिए।

विषय और अंक विभाजन

पेपरविषय (Subjects)प्रश्नों की संख्याकुल अंक
पेपर 1बाल विकास और शिक्षाशास्त्र (CDP)3030
भाषा 1 (अनिवार्य)3030
भाषा 2 (अनिवार्य)3030
गणित (Mathematics)3030
पर्यावरण अध्ययन (EVS)3030
पेपर 2बाल विकास और शिक्षाशास्त्र (CDP)3030
भाषा 1 और भाषा 260 (30+30)60
गणित और विज्ञान या सामाजिक विज्ञान6060

नया बदलाव: सिलेबस में अब रटने वाली प्रवृत्तियों को खत्म करके राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत क्रिटिकल थिंकिंग, केस स्टडीज और रियल-लाइफ क्लासरूम सिचुएशन पर आधारित प्रश्न अधिक पूछे जा रहे हैं।


3. टीईटी (TET) सर्टिफिकेट की वैधता (Validity) का नया नियम

शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर इसके सर्टिफिकेट की वैधता को लेकर आ चुकी है:

  • लाइफटाइम वैलिडिटी (Lifetime Validity): राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) और शिक्षा मंत्रालय के आदेशानुसार, अब CTET और लगभग सभी राज्यों के TET सर्टिफिकेट की वैधता को आजीवन (Lifetime) कर दिया गया है।
  • पहले का नियम: इससे पहले टीईटी पास करने पर सर्टिफिकेट केवल 5 या 7 वर्षों के लिए ही मान्य होता था, जिसके खत्म होने के बाद उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा पास करनी पड़ती थी।
  • लाभ: इस ऐतिहासिक फैसले से उन अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा देने के आर्थिक और मानसिक तनाव से मुक्ति मिल गई है जो एक बार अच्छे अंकों से टीईटी पास कर चुके हैं। अब वे सीधे मुख्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।\

यहाँ शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के पासिंग मार्क्स और संभावित बदलावों से जुड़े कुछ सबसे महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) दिए गए हैं:

1. क्या टीईटी (TET) के पासिंग मार्क्स में बदलाव की आधिकारिक घोषणा हो गई है?

नहीं, अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) और शिक्षा मंत्रालयों के बीच पासिंग मार्क्स कम करने की संभावनाओं और विकल्पों पर गहन विचार-विमर्श चल रहा है।

2. वर्तमान नियमों के अनुसार टीईटी पास करने के लिए कितने अंक चाहिए?

  • सामान्य श्रेणी (General): कुल 150 अंकों में से 60% यानी न्यूनतम 90 अंक लाना अनिवार्य है।
  • आरक्षित श्रेणी (OBC/SC/ST): कुल 150 अंकों में से 55% यानी न्यूनतम 82 अंक लाना अनिवार्य है।

3. राहत देने के लिए सरकार किन 3 विकल्पों पर विचार कर रही है?

अधिकारियों के बीच मुख्य रूप से इन 3 फॉर्मूलों पर मंथन चल रहा है:

  1. पासिंग मार्क्स में सीधे 5% की कटौती करना।
  2. विषय-वार कठिन स्तर को देखते हुए ओवरऑल बैलेंसिंग या ग्रेस अंक देना।
  3. संविदा (Contract) शिक्षकों के व्यावहारिक अनुभव के आधार पर अतिरिक्त वेटेज देना।

4. क्या सीटेट (CTET) और राज्यों के टेट (जैसे UPTET, REET) के नियम अलग-अलग होते हैं?

हाँ, शिक्षा समवर्ती सूची का विषय होने के कारण राज्यों को अपने स्तर पर नियमों में ढील देने का अधिकार है। उदाहरण के लिए, बिहार (BTET/STET) में महिला और दिव्यांग अभ्यर्थियों को पासिंग मार्क्स में विशेष छूट दी जाती है, जो कि केंद्रीय CTET के सामान्य नियमों से अलग है।

5. एक बार टीईटी पास करने पर सर्टिफिकेट कितने समय तक मान्य रहता है?

केंद्र सरकार और NCTE के नए नियमों के अनुसार, अब CTET और अधिकांश राज्यों की TET परीक्षाओं के सर्टिफिकेट की वैधता आजीवन (Lifetime Validity) कर दी गई है। अब उम्मीदवारों को हर 5 या 7 साल में दोबारा परीक्षा देने की जरूरत नहीं है।

6. क्या टीईटी परीक्षा में कोई नेगेटिव मार्किंग (Negative Marking) होती है?

नहीं, वर्तमान में सीटीईटी (CTET) और लगभग सभी राज्य स्तरीय टीईटी परीक्षाओं में कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होती है। उम्मीदवारों को सभी 150 प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करना चाहिए।

#TETPassingMarks, #TETExamUpdate, #TeacherEligibilityTest, #CTET2026, #NCTENewRules, #UPTET2026, #REET2026, #BiharSTET, #TeacherRecruitment, #BEdStudents, #DElEdUpdates, #ShikshakBharti, #GovtTeacherJobs, #EducationMinistry, #TETValidityLifetime, #NEP2020, #SarkariNaukri, #TETExams, #TeachingAspirants, #PedagogyPrep

Leave a Reply