उत्तर प्रदेश भूजल सप्ताह 2026: पहले दिन की मुख्य बातें और Day-2 का पूरा प्लान!

उत्तर प्रदेश भूजल सप्ताह 2026 के उद्घाटन समारोह में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह।

उत्तर प्रदेश भूजल सप्ताह-2026: जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का शंखनाद – प्रथम दिन की मुख्य विशेषताएं और द्वितीय दिन की विस्तृत कार्ययोजना

Table of Contents

जल ही जीवन का एकमात्र आधार

जल संरक्षण का करें संकल्प, इसका नहीं है कोई विकल्प।” इस शाश्वत और प्रेरणादायी संदेश के साथ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में गिरते भूजल स्तर को सुधारने और जल संचयन के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए भूजल सप्ताह-2026‘ का शंखनाद कर दिया है. 16 जुलाई से 22 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस सात दिवसीय व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण को केवल सरकारी फाइलों या दफ्तरों तक सीमित न रखकर इसे राज्य के प्रत्येक नागरिक के दैनिक जीवन का हिस्सा और एक सशक्त जनआंदोलन बनाना है.

उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जहाँ कृषि, घरेलू उपयोग और तेजी से बढ़ते उद्योगों की लगभग 70 से 80 प्रतिशत जरूरतें पूरी तरह से भूजल संसाधनों पर निर्भर हैं. लगातार बढ़ते दोहन, अनियंत्रित शहरीकरण और वर्षा जल के उचित संचयन के अभाव में राज्य के कई जिलों और प्रमुख शहरों का भूजल स्तर खतरनाक स्तर तक नीचे चला गया है. इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए इस वर्ष का भूजल सप्ताह केंद्र सरकार के महत्वकांक्षी अभियान ‘जल संचय जनभागीदारी: कैच द रेन-2026’ से जोड़कर मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है.


Day-1 (16 जुलाई 2026): भव्य उद्घाटन और प्रथम दिन की मुख्य विशेषताएं (Highlights)

भूजल सप्ताह 2026 के पहले दिन पूरे उत्तर प्रदेश में उत्साह और संकल्प का माहौल देखने को मिला. राज्य की राजधानी लखनऊ से लेकर सुदूर गांवों और नगर निकायों तक जल चेतना की एक नई लहर दौड़ गई.

1. भव्य उद्घाटन समारोह (लोहिया पार्क एम्फीथिएटर)

अभियान का औपचारिक और भव्य शुभारंभ गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को लखनऊ के गोमती नगर स्थित लोहिया पार्क एम्फीथिएटर में किया गया. उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह ने दीप प्रज्वलित कर इस राज्यव्यापी अभियान का उद्घाटन किया. समारोह में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव सहित जल विज्ञान विशेषज्ञ, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और लखनऊ के अनेक स्कूलों से आए हजारों छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

2. ‘एक लोटा पानी’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ का महासंकल्प

उद्घाटन सत्र के दौरान जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने जनता को संबोधित करते हुए एक बेहद भावुक और व्यावहारिक अपील की. उन्होंने कहा कि पानी प्रकृति का एक अनमोल उपहार है, जिसे फैक्ट्रियों में नहीं बनाया जा सकता. उन्होंने राज्य के हर नागरिक से अपनी दैनिक दिनचर्या में बदलाव लाने का आग्रह करते हुए ‘प्रतिदिन एक लोटा पानी बचाने’ का संकल्प दिलाया. इसके साथ ही, पर्यावरण संतुलन और जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक आह्वान से प्रेरित ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाने की प्रतिज्ञा भी उपस्थित जनसमूह को दिलाई गई.

3. जल आर्ट गैलरी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

उद्घाटन स्थल पर एक विशेष ‘जल आर्ट गैलरी’ का शुभारंभ किया गया, जिसमें जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और प्राचीन जल स्रोतों के पुनरुद्धार को दर्शाने वाली सुंदर कलाकृतियों और मॉडलों की प्रदर्शनी लगाई गई. कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. श्रेया द्वारा तैयार किया गया ‘जल-एन्थम’ (Jal Anthem) पढ़ा गया, जिसने वहां मौजूद युवाओं और बच्चों में देश और जल के प्रति कर्तव्य भावना को जगाया. इसके अतिरिक्त, स्थानीय कलाकारों द्वारा नुक्कड़ नाटकों और पारंपरिक जल गीतों के माध्यम से पानी की बर्बादी रोकने का एक बेहद प्रभावी और मर्मस्पर्शी संदेश दिया गया.

4. ‘स्कूल ऑफ जलवीर सम्मान’ और मेधावियों का उत्साहवर्धन

योगी सरकार ने इस बार युवाओं को जल संरक्षण की कमान सौंपने का निर्णय लिया है. इसी कड़ी में, पहले दिन ऑनलाइन भूजल क्विज प्रतियोगिता और जल संरक्षण विषय पर आयोजित कला व निबंध प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं को जल शक्ति मंत्री द्वारा ‘स्कूल ऑफ जलवीर सम्मान’ से नवाजा गया. इन बच्चों को ‘जलवीर’ के रूप में समाज में जल दूत बनकर काम करने के लिए प्रेरित किया गया.

5. ग्राम पंचायत स्तर पर सामुदायिक भागीदारी की शुरुआत

पहले दिन की गतिविधियां सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं थीं. प्रदेश के सभी जिलों (जैसे कि प्रयागराज, सहारनपुर, जालौन और अलीगढ़) में जिलाधिकारियों के नेतृत्व में ग्राम पंचायत स्तर पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम शुरू हुए. गांवों में जल शक्ति मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अमृत सरोवरों, प्राचीन कुओं और तालाबों की सफाई के लिए ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान किया. पारंपरिक कुओं का पूजन कर जल स्रोतों के सम्मान की पुरानी भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित किया गया, और ग्रामीण महिलाओं व किसानों को सामूहिक जल शपथ दिलाई गई.


Day-2 (17 जुलाई 2026): आज का विस्तृत प्लान (Day-2 Plan for Today)

आज, शुक्रवार 17 जुलाई 2026 को भूजल सप्ताह का दूसरा दिन है. पहले दिन जहां जन-जागरूकता और संकल्प पर जोर था, वहीं आज का दिन पूरी तरह से वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी संवाद और औद्योगिक सहभागिता पर केंद्रित है. आज के प्रमुख कार्यक्रमों की विस्तृत योजना निम्नलिखित है:

1. वैज्ञानिकों और भूजल विशेषज्ञों के साथ ‘भूजल संवाद’

आज का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम राज्य स्तर और जिला स्तर पर आयोजित होने वाला ‘भूजल संवाद’ है. लखनऊ स्थित भूगर्भ जल विभाग के मुख्यालय और प्रमुख केंद्रों पर आज देश और प्रदेश के ख्यातिलब्ध जल वैज्ञानिकों, हाइड्रोलॉजिस्ट (भूजल विदों) और पर्यावरणविदों की एक उच्चस्तरीय संगोष्ठी हो रही है.

  • मुख्य एजेंडा: इस संवाद में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और पूर्वांचल) की अनूठी भौगोलिक और भूगर्भीय स्थितियों के आधार पर जल पुनर्भरण (Aquifer Recharge) की नई तकनीकों पर चर्चा की जाएगी.
  • फोकस: वैज्ञानिक इस बात पर खाका तैयार करेंगे कि कम समय में होने वाली अत्यधिक मानसूनी बारिश के पानी को जमीन के भीतर कुशलतापूर्वक कैसे उतारा जाए.

2. उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक

शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में भूजल का दोहन सबसे अधिक होता है. इसी को ध्यान में रखते हुए आज सरकार और भूगर्भ जल विभाग के अधिकारी विभिन्न औद्योगिक संगठनों (जैसे CII, FICCI और स्थानीय व्यापार मंडलों) के प्रतिनिधियों और उद्यमियों के साथ एक विशेष बैठक कर रहे हैं.

  • Zero Liquid Discharge (ZLD): उद्योगों को अपने परिसरों में ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ नीति अपनाने और प्रयुक्त जल को रीसायकल (Recycle) कर दोबारा उपयोग में लाने के लिए कड़े निर्देश और प्रोत्साहन दिए जाएंगे.
  • अनिवार्य रूफटॉप हार्वेस्टिंग: औद्योगिक क्षेत्रों की बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों और गोदामों की छतों पर ‘रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग’ सिस्टम को अनिवार्य रूप से क्रियान्वित करने और उसकी वर्तमान स्थिति की ऑडिट करने की योजना पर सहमति बनाई जाएगी.

3. 10 ‘अतिदोहित’ शहरों के लिए विशेष कार्ययोजना का क्रियान्वयन

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस वर्ष राज्य के 10 अतिदोहित शहरों (जहां भूजल का निष्कर्षण सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक हो चुका है) की पहचान की है. इन शहरों में आज से विशेष क्लस्टर-आधारित अभियान शुरू किए जा रहे हैं. आज इन चिन्हित शहरों के नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों के साथ बैठक कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नए आवासीय और व्यावसायिक भवनों के नक्शे तब तक पास न किए जाएं, जब तक कि उनमें वाटर हार्वेस्टिंग का पुख्ता इंतजाम न हो.

4. जमीनी स्तर (ग्राम पंचायत) पर निरंतर अभियान

आज भूजल सप्ताह के चरणबद्ध कार्यक्रम के अनुसार ग्राम पंचायत स्तर की गतिविधियों का दूसरा और अंतिम दिन है. आज राज्य की हजारों ग्राम पंचायतों में निम्नलिखित कार्य किए जा रहे हैं:

  • जल चौपाल: गांवों के पंचायत भवनों में ‘जल चौपाल’ का आयोजन किया जा रहा है, जहां किसानों को कम पानी में अधिक पैदावार देने वाली सिंचाई तकनीकों, जैसे – ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) और स्प्रिंकलर (फव्वारा सिंचाई) के प्रति जागरूक किया जा रहा है.
  • सरोवरों का निरीक्षण: गांवों में मनरेगा के तहत खोदे गए अमृत सरोवरों और इनलेट चैनलों का निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि आने वाले मानसूनी पानी का एक-एक कतरा बिना किसी अवरोध के तालाबों तक पहुंच सके.

उत्तर प्रदेश में भूजल संकट का परिदृश्य और इस अभियान की प्रासंगिकता

यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि योगी सरकार को इतने बड़े पैमाने पर भूजल सप्ताह आयोजित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी. उत्तर प्रदेश की भूगर्भीय स्थिति और जल उपयोग के पैटर्न पर नजर डालें तो स्थिति काफी चिंताजनक रही है:

उपयोग का क्षेत्रभूजल पर निर्भरता (प्रतिशत में)संकट का मुख्य कारण
कृषि और सिंचाईलगभग 70% से अधिकपारंपरिक ‘बाढ़ सिंचाई’ (Flood Irrigation) पद्धति के कारण पानी की अत्यधिक बर्बादी.
पेयजल (शहरी व ग्रामीण)लगभग 85% से अधिकतेजी से बढ़ती आबादी और सबमर्सिबल पंपों के माध्यम से अनियंत्रित और बेहिसाब पानी का दोहन.
औद्योगिक इकाइयाँलगभग 80%अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण न करना और भूजल का व्यावसायिक दोहन.

यदि वर्तमान समय में वर्षा जल का कृत्रिम पुनर्भरण (Artificial Recharge) नहीं किया गया, तो आने वाले कुछ ही वर्षों में राज्य के कई प्रमुख शहरों में ‘डे जीरो’ (पानी पूरी तरह समाप्त होने की स्थिति) जैसे हालात पैदा हो सकते हैं. इसी भावी विभीषिका को भांपते हुए इस सात दिवसीय अभियान के तहत आने वाले दिनों (18 से 22 जुलाई) में स्कूलों, कॉलेजों, मॉल्स (जैसे लखनऊ के फीनिक्स और लुलु मॉल) तथा राज्य स्तर पर विभिन्न कार्यशालाओं की एक पूरी श्रृंखला तैयार की गई है, ताकि समाज का कोई भी वर्ग इस जिम्मेदारी से अछूता न रहे.


निष्कर्ष और आह्वान: जल बचाएं, भविष्य सुरक्षित करें

उत्तर प्रदेश भूजल सप्ताह-2026 केवल एक साप्ताहिक आयोजन या सरकारी औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व को बचाने का एक भगीरथ प्रयास है. जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का यह कथन कि “जल नहीं होगा तो विकास और जीवन की रफ्तार थम जाएगी”, आज के संदर्भ में अक्षरसः सत्य है.

सरकार नीतियां बना सकती है, कानून लागू कर सकती है और संरचनाएं खड़ी कर सकती है, लेकिन जब तक राज्य का प्रत्येक नागरिक ब्रश करते समय नल बंद रखने, वर्षा जल को सहेजने और पानी की हर बूंद की कीमत समझने का संकल्प नहीं लेगा, तब तक यह अभियान पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकता. आइए, इस भूजल सप्ताह में हम सब मिलकर प्रतिज्ञा करें कि हम अपने घरों, कार्यस्थलों और खेतों में पानी की बर्बादी को रोकेंगे और उत्तर प्रदेश को एक ‘जल-सुरक्षित’ और समृद्ध राज्य बनाएंगे. क्योंकि “जल है तो कल है”!

उत्तर प्रदेश भूजल सप्ताह 2026 के उद्घाटन समारोह में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह।

उत्तर प्रदेश भूजल सप्ताह 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: उत्तर प्रदेश भूजल सप्ताह 2026 कब से कब तक आयोजित किया जा रहा है?

उत्तर: उत्तर प्रदेश में भूजल सप्ताह का आयोजन 16 जुलाई से 22 जुलाई 2026 तक किया जा रहा है. यह सात दिनों तक चलने वाला एक व्यापक राज्यव्यापी जागरूकता और तकनीकी अभियान है.

प्रश्न 2: इस वर्ष (2026) के भूजल सप्ताह का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में लगातार गिरते भूजल स्तर के प्रति जनता को जागरूक करना, वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को बढ़ावा देना और जल संरक्षण को एक जनआंदोलन (Mass Movement) बनाना है. इस वर्ष इसे केंद्र सरकार के ‘जल संचय जनभागीदारी: कैच द रेन-2026’ अभियान से जोड़ा गया है.

प्रश्न 3: भूजल सप्ताह के पहले दिन (Day-1) जल शक्ति मंत्री द्वारा क्या मुख्य संकल्प दिलाए गए?

उत्तर: उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह ने लखनऊ के लोहिया पार्क से अभियान की शुरुआत करते हुए आम जनता को दो मुख्य संकल्प दिलाए:

  1. ‘प्रतिदिन एक लोटा पानी’ बचाने का व्यावहारिक संकल्प, ताकि दैनिक जीवन में पानी की बर्बादी रुके.
  2. पर्यावरण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाने का संकल्प.

प्रश्न 4: ‘स्कूल ऑफ जलवीर सम्मान’ क्या है और यह किन्हें दिया जा रहा है?

उत्तर: यह योगी सरकार द्वारा छात्रों को जल संरक्षण के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया गया एक विशेष सम्मान है. भूजल सप्ताह के दौरान आयोजित ऑनलाइन क्विज, निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को ‘जलवीर’ की उपाधि और सम्मान से नवाजा जा रहा है, ताकि वे समाज में ‘जल दूत’ बनकर काम कर सकें.

प्रश्न 5: भूजल सप्ताह के दूसरे दिन (Day-2) का मुख्य फोकस क्या है?

उत्तर: दूसरे दिन (17 जुलाई) का मुख्य फोकस वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी संवाद और औद्योगिक जवाबदेही पर है. इसके तहत भूजल वैज्ञानिकों के साथ ‘भूजल संवाद’ (संगोष्ठी) आयोजित की जा रही है और उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ (ZLD) नीति तथा अनिवार्य वाटर हार्वेस्टिंग लागू करने पर रणनीतियां बनाई जा रही हैं.

प्रश्न 6: क्या शहरी क्षेत्रों में नए भवनों के निर्माण के लिए भूजल विभाग के कोई कड़े नियम हैं?

उत्तर: हाँ, भूजल सप्ताह के दूसरे दिन की कार्ययोजना के अनुसार, विशेष रूप से राज्य के 10 अतिदोहित (Over-exploited) शहरों में नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नए आवासीय या व्यावसायिक भवनों के नक्शे तब तक पास न करें, जब तक कि उनमें ‘रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग’ (Rooftop Rainwater Harvesting) की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित न हो.

प्रश्न 7: ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर सुधारने के लिए इस अभियान के तहत क्या किया जा रहा है?

उत्तर: ग्रामीण इलाकों में ग्राम पंचायतों के माध्यम से बड़े पैमाने पर कार्यक्रम चल रहे हैं:

  • पुराने कुओं, तालाबों और अमृत सरोवरों की सफाई और पुनरुद्धार के लिए सामूहिक श्रमदान किया जा रहा है.
  • ‘जल चौपाल’ के माध्यम से किसानों को कम पानी में अधिक पैदावार देने वाली आधुनिक सिंचाई पद्धतियों, जैसे – टपक सिंचाई (Drip Irrigation) और फव्वारा सिंचाई (Sprinkler) को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

प्रश्न 8: एक आम नागरिक के रूप में मैं ‘भूजल सप्ताह’ में कैसे योगदान दे सकता हूँ?

उत्तर: आप अपने स्तर पर कई छोटे लेकिन प्रभावी कदम उठाकर इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं:

  • अपने घर की छत पर वर्षा जल संचयन प्रणाली (Rainwater Harvesting System) लगवाएं.
  • दैनिक कार्यों (जैसे ब्रश करते समय, गाड़ी धोते समय या नहाते समय) में पानी का अनावश्यक बहाव रोकें.
  • अपने आस-पास के लोगों को पानी रीसायकल करने और पौधों में बचा हुआ पानी डालने के लिए प्रेरित करें.
  • अपने क्षेत्र में आयोजित होने वाली जल चौपालों, रैलियों या नुक्कड़ नाटकों में भाग लें.

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