NEET UG 2026 Result – Rank vs College: किस रैंक पर कौन-सा मेडिकल कॉलेज मिलेगा? सरकारी या प्राइवेट!

NEET UG 2026 Result Rank vs Medical College Analysis (नीट यूजी 2026 रैंक बनाम मेडिकल कॉलेज विश्लेषण)

NEET UG 2026 Result Rank vs College: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा घोषित किया जा चुका है और इस साल परीक्षा में लगभग 20 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिनमें से रिकॉर्ड 11.21 लाख अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है. परीक्षा परिणाम सामने आने के बाद अब देश भर के मेडिकल एस्पिरेंट्स के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी ऑल इंडिया रैंक (AIR) पर उन्हें कौन सा मेडिकल कॉलेज मिलेगा. क्या उन्हें एक प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में एमबीबीएस (MBBS) की सीट मिलेगी या फिर उन्हें प्राइवेट मेडिकल कॉलेज या डीम्ड यूनिवर्सिटी का रुख करना होगा?

नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) के अनुसार, वर्ष 2026 के लिए देश भर में कुल 1,36,939 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। इनमें से 63,296 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हैं, जबकि 73,643 सीटें प्राइवेट और डीम्ड विश्वविद्यालयों में हैं। इस साल पिछले वर्ष की तुलना में करीब 9,911 नई सीटें भी जोड़ी गई हैं, जिससे छात्रों को कुछ अतिरिक्त अवसर मिलेंगे।

इस विस्तृत लेख में हम समझेंगे कि आपकी रैंक के अनुसार आपको कौन सा कॉलेज मिल सकता है, ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और स्टेट कोटा (State Quota) के क्या नियम हैं, और सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों का विस्तृत रैंक विश्लेषण क्या है।


Table of Contents

NEET UG 2026: परिणाम की मुख्य विशेषताएं (Result Highlights)

काउंसलिंग की प्राथमिकताओं को समझने से पहले इस साल के आधिकारिक आंकड़ों पर नज़र डालना जरूरी है, जो इस बार की कड़ी प्रतिस्पर्धा को दर्शाते हैं:

  • सर्वोच्च स्कोर: इस साल किसी भी छात्र ने 720 में से 720 अंक हासिल नहीं किए हैं। परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले दो उम्मीदवारों का स्कोर 715/720 रहा है।
  • योग्यता अंक (Qualifying Cutoff): इस साल सामान्य (UR) और EWS श्रेणी के लिए क्वालिफाइंग मार्क्स 213 से 715 (50वीं परसेंटाइल) रहे हैं। वहीं, OBC, SC और ST श्रेणियों के लिए क्वालिफाइंग मार्क्स 177 से 212 (40वीं परसेंटाइल) घोषित किए गए हैं।
  • महिला उम्मीदवारों का दबदबा: इस वर्ष परीक्षा पास करने वाले कुल छात्रों में महिलाओं की संख्या 58% से अधिक है।

रैंक बनाम कॉलेज आवंटन: ऑल इंडिया रैंक (AIR) विश्लेषण

नीट में कॉलेज का मिलना पूरी तरह से आपकी ऑल इंडिया रैंक (AIR), श्रेणी (Category), और राज्य के डोमिसाइल पर निर्भर करता है। पिछले कुछ वर्षों के काउंसलिंग ट्रेंड और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के डेटा के आधार पर नीचे ऑल इंडिया रैंक (AIR) के अनुसार संभावित कॉलेजों का वर्गीकरण दिया गया है:

1. रैंक 1 से 100 (टॉप-टियर एम्स और संस्थान)

यदि आपकी ऑल इंडिया रैंक 1 से 100 के बीच है, तो आप देश के सबसे प्रीमियम मेडिकल संस्थानों में प्रवेश पाने के हकदार हैं।

2. रैंक 101 से 1,000 (शीर्ष सरकारी और क्षेत्रीय एम्स)

इस रैंक ब्रैकेट में आने वाले छात्रों को देश के अग्रणी केंद्रीय विश्वविद्यालय और शीर्ष स्तर के सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलते हैं।

  • संभावित कॉलेज: AIIMS Jodhpur, AIIMS Bhopal, AIIMS Bhubaneswar, JIPMER Puducherry, और Lady Hardinge Medical College (LHMC), New Delhi (केवल महिलाओं के लिए)।
  • संभावित कोर्स: MBBS.

3. रैंक 1,001 से 5,000 (प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय सरकारी कॉलेज)

इस रैंक के तहत छात्रों को विभिन्न राज्यों के सबसे बेहतरीन और पुराने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ऑल इंडिया कोटा (15% AIQ) के तहत आसानी से प्रवेश मिल जाता है।

4. रैंक 5,001 से 20,000 (सुरक्षित सरकारी एमबीबीएस सीट)

सामान्य (General) और ओबीसी (OBC) श्रेणी के छात्रों के लिए ऑल इंडिया कोटा के माध्यम से सरकारी सीट सुनिश्चित करने का यह बेहद सुरक्षित ज़ोन माना जाता है।

  • संभावित कॉलेज: देश के मध्यम स्तर के या नए खुले सरकारी मेडिकल कॉलेज (जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, और बिहार के जिला स्तरीय सरकारी कॉलेज)।
  • काउंसलिंग रूट: MCC द्वारा आयोजित ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग के पहले और दूसरे राउंड में ही सीटें आवंटित हो जाती हैं।

5. रैंक 20,001 से 35,000 (बॉर्डरलाइन सरकारी या स्टेट कोटा)

सामान्य और ओबीसी श्रेणी के उन उम्मीदवारों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति होती है जो केवल ऑल इंडिया कोटा पर निर्भर रहते हैं। हालांकि, आरक्षित श्रेणियों (SC/ST) के लिए यह रैंक बहुत मजबूत मानी जाती है।

  • सामान्य/ओबीसी स्थिति: ऑल इंडिया कोटा के तीसरे (Mop-up) या स्ट्रे वैकेंसी राउंड में सरकारी सीट मिलने की संभावना रहती है (पिछले साल सामान्य श्रेणी के लिए आखिरी सरकारी सीट AIR 26,178 पर बंद हुई थी)।
  • स्टेट कोटा का लाभ: यदि उम्मीदवार उत्तर प्रदेश, बिहार, या राजस्थान जैसे हाई-कटऑफ राज्यों को छोड़कर कम कटऑफ वाले राज्यों (जैसे कर्नाटक, गुजरात, या पूर्वोत्तर राज्यों) से है, तो 85% स्टेट कोटा के तहत उसे इस रैंक पर भी आसानी से सरकारी कॉलेज मिल सकता है।

6. रैंक 35,001 से 75,000 (प्राइवेट कॉलेज और आरक्षित वर्ग के लिए सरकारी सीटें)

इस रैंक सीमा पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए सरकारी एमबीबीएस सीट मिलना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

  • सामान्य/ओबीसी उम्मीदवार: इन्हें शीर्ष प्राइवेट मेडिकल कॉलेज (कम फीस वाले या सेमी-गवर्नमेंट सीटें) या डीम्ड यूनिवर्सिटी की ओर रुख करना पड़ता है।
  • SC/ST उम्मीदवार: अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए इस रैंक पर भी 15% ऑल इंडिया कोटा या 85% स्टेट कोटा के तहत शानदार सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की पूरी संभावना रहती है।

7. रैंक 75,001 से 1,50,000+ (प्राइवेट कॉलेज, डीम्ड यूनिवर्सिटी और वैकल्पिक कोर्स)

  • एमबीबीएस के लिए विकल्प: इस रैंक पर केवल प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, डीम्ड यूनिवर्सिटी (जैसे कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, भारती विद्यापीठ, आदि) की मैनेजमेंट कोटा सीटें ही उपलब्ध होती हैं।
  • अन्य बेहतरीन विकल्प: यदि छात्र भारी-भरकम प्राइवेट फीस नहीं देना चाहते, तो वे सरकारी कॉलेजों से बीडीएस (BDS), बीएएमएस (BAMS-आयुर्वेद), बीएचएमएस (BHMS), या बीएससी नर्सिंग जैसे प्रतिष्ठित कोर्सेज में आसानी से प्रवेश पा सकते हैं।

मार्क्स और रैंक का गणित (NEET 2026 Marks vs Rank Analysis)

काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेते समय मार्क्स और रैंक के बीच के संतुलन को समझना बहुत आवश्यक है। इस साल के परिणाम के आधार पर अंक और उनके समकक्ष ऑल इंडिया रैंक (AIR) का अनुमानित विवरण निम्नलिखित है:

नीट 2026 प्राप्तांक (Marks)संभावित ऑल इंडिया रैंक (AIR Range)सरकारी एमबीबीएस की संभावनाएं (Chances)
700 से अधिक1 से 150एम्स दिल्ली और देश के टॉप 5 कॉलेज
650 – 699150 से 7,000टॉप 20 सरकारी कॉलेज और क्षेत्रीय एम्स
620 – 6497,000 से 20,000ऑल इंडिया कोटा से निश्चित सरकारी सीट
600 – 61920,000 से 35,000स्टेट कोटा पर निर्भर, सुरक्षित स्थिति
550 – 59935,000 से 70,000कुछ कम कटऑफ वाले राज्यों में स्टेट कोटा या प्राइवेट कॉलेज
500 – 54970,000 से 1,20,000आरक्षित वर्ग के लिए सरकारी, सामान्य के लिए प्राइवेट या बीडीएस/आयुष
500 से कम1,20,000 से अधिककेवल प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, डीम्ड यूनिवर्सिटी या अन्य चिकित्सा कोर्स

सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) के लिए संभावित कटऑफ (Category-wise)

यदि आप देश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के इच्छुक हैं, तो विभिन्न काउंसलिंग राउंड के बाद अपेक्षित ‘सुरक्षित स्कोर और अंतिम रैंक’ कुछ इस प्रकार रह सकती है:

  1. सामान्य श्रेणी (General/UR): ऑल इंडिया कोटा के लिए सुरक्षित रैंक 24,000 से 26,000 के भीतर होनी चाहिए। इसके लिए उम्मीदवारों का स्कोर 610+ होना आवश्यक है।
  2. ओबीसी श्रेणी (OBC): ओबीसी उम्मीदवारों का कटऑफ सामान्य वर्ग के बेहद करीब ही रहता है। ऑल इंडिया कोटा के तहत 26,000 तक की रैंक पर सरकारी कॉलेज की उम्मीद की जा सकती है।
  3. ईडब्ल्यूएस श्रेणी (EWS): सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी कटऑफ 600-610 अंकों के आसपास बंद होने की संभावना है।
  4. अनुसूचित जाति (SC): एससी श्रेणी के छात्र 1.30 लाख से 1.40 लाख तक की ऑल इंडिया रैंक पर भी सरकारी एमबीबीएस सीट सुरक्षित कर सकते हैं (अपेक्षित अंक: 520+)।
  5. अनुसूचित जनजाति (ST): एसटी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 1.60 लाख तक की रैंक पर ऑल इंडिया कोटा से सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने के मजबूत अवसर रहेंगे (अपेक्षित अंक: 490+)।

राज्य स्तरीय काउंसलिंग (85% State Quota) का महत्व

नीट परीक्षा के माध्यम से होने वाले दाखिलों को दो प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें समझना प्रत्येक छात्र के लिए बेहद जरूरी है:

1. ऑल इंडिया कोटा (15% AIQ)

इस कोटा के तहत देश के सभी राज्यों के सरकारी कॉलेजों की 15% सीटें आरक्षित होती हैं, जिन पर देश का कोई भी योग्य छात्र अपनी ऑल इंडिया रैंक के आधार पर दावा कर सकता है। इसकी काउंसलिंग मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) द्वारा आयोजित की जाती है। इसके तहत सभी एम्स (AIIMS), जिपमेर (JIPMER), और केंद्रीय विश्वविद्यालयों (BHU, AMU) की 100% सीटें भी शामिल होती हैं।

2. स्टेट कोटा (85% State Quota)

प्रत्येक राज्य अपने सरकारी मेडिकल कॉलेजों की शेष 85% सीटों और अपने राज्य के अंतर्गत आने वाले सभी प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की सीटों पर प्रवेश के लिए खुद काउंसलिंग आयोजित करता है। इसके लिए संबंधित राज्य का डोमिसाइल (मूल निवास प्रमाण पत्र) होना अनिवार्य है।

विभिन्न राज्यों के कटऑफ का तुलनात्मक विवरण (सामान्य श्रेणी के लिए अनुमानित सुरक्षित स्कोर):

  • हाई कटऑफ वाले राज्य (High-Cutoff States): दिल्ली (620-640), राजस्थान (610-630), उत्तर Pradesh (600-620), बिहार (595-615), और केरल (600-620)। इन राज्यों के छात्रों को अपने ही राज्य में सरकारी सीट पाने के लिए कड़ी मेहनत और उच्च स्कोर की आवश्यकता होती है।
  • लो कटऑफ वाले राज्य (Low-Cutoff States): कर्नाटक (595-615), गुजरात (585-605), मध्य प्रदेश (590-610), पश्चिम बंगाल (595-615), और पूर्वोत्तर राज्य (540-580)। इन राज्यों में कम अंकों और थोड़ी पीछे की रैंक पर भी डोमिसाइल वाले छात्रों को सरकारी कॉलेज आवंटित हो जाते हैं।

प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और डीम्ड यूनिवर्सिटी: कम रैंक वालों के लिए मार्गदर्शक

यदि आपकी रैंक 1 लाख से अधिक है और आपका सपना सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टर बनने का ही है, तो भारत में आपके पास प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के रूप में बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। प्राइवेट कॉलेजों में प्रवेश को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

क) राज्यों के ओपन स्टेट प्राइवेट कॉलेज (Open States Private Colleges)

उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, और केरल जैसे राज्य ‘ओपन स्टेट’ कहलाते हैं। इसका मतलब है कि इन राज्यों के प्राइवेट कॉलेजों की सीटों पर दूसरे राज्यों के छात्र भी काउंसलिंग के जरिए एडमिशन ले सकते हैं।

  • फायदा: उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों के कुछ प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस अन्य राज्यों की तुलना में काफी व्यवस्थित (लगभग 11 से 14 लाख रुपये प्रति वर्ष) होती है।
  • रैंक आवश्यकता: यदि छात्र नीट केवल क्वालिफाई भी कर चुका है (यानी 200 से 400 के बीच अंक हैं), तो भी उसे इन कॉलेजों में सीट मिल सकती है।

ख) डीम्ड यूनिवर्सिटी (Deemed Universities)

देश में कई बड़े और प्रतिष्ठित मेडिकल हब डीम्ड यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आते हैं (जैसे कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज-मनिपाल, हमदर्द इंस्टीट्यूट-दिल्ली, डीवाई पाटिल-मुंबई, भारती विद्यापीठ-पुणे)।

  • पॉजिटिव पॉइंट: इनका इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लिनिकल एक्सपोजर, और पढ़ाई का स्तर कई सरकारी कॉलेजों से भी बेहतर होता है।
  • नेगेटिव पॉइंट: इनकी फीस बहुत अधिक होती है (सालाना 18 लाख से 26 लाख रुपये तक)।
  • कटऑफ: यहाँ एडमिशन के लिए बहुत उच्च रैंक की आवश्यकता नहीं होती। यदि आपकी रैंक 2 लाख या 3 लाख भी है, तो भी आपको आसानी से सीट मिल सकती है।

काउंसलिंग के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें (Counselling Tips)

परिणाम आने के बाद कॉलेज का चयन करना एक रणनीतिक काम है। सिर्फ अच्छे अंक लाना ही काफी नहीं होता, बल्कि चॉइस फिलिंग (Choice Filling) को सही तरीके से करना भी बेहद जरूरी है। छात्रों को निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  1. चॉइस लॉकिंग में जल्दबाजी न करें: कॉलेजों की प्राथमिकता सूची (Preference List) बनाते समय कॉलेजों की एनआईआरएफ (NIRF) रैंकिंग, उनके स्थापना वर्ष, ओपीडी (OPD) फुटफॉल (मरीजों की संख्या) और पीजी बॉन्ड (PG Bond) की शर्तों को अच्छी तरह जांच लें।
  2. फ्री एग्जिट नियमों को समझें: ऑल इंडिया और स्टेट काउंसलिंग के पहले राउंड में आमतौर पर ‘फ्री एग्जिट’ की सुविधा होती है। नियमों की पूरी जानकारी रखें ताकि आपकी सिक्योरिटी मनी (Security Deposit) जब्त न हो।
  3. प्राइवेट कॉलेजों की छिपी हुई फीस (Hidden Charges): किसी भी प्राइवेट कॉलेज को चुनने से पहले उसकी ट्यूशन फीस के अलावा हॉस्टल फीस, मिसलेनियस चार्ज, और सिक्योरिटी डिपोजिट की पूरी जानकारी संबंधित राज्य की काउंसलिंग वेबसाइट के आधिकारिक ब्रोशर से जरूर निकाल लें।

निष्कर्ष (Conclusion)

NEET UG 2026 का परिणाम यह स्पष्ट करता है कि चिकित्सा क्षेत्र में जाने की चाह रखने वाले युवाओं के बीच प्रतिस्पर्धा हर साल नए रिकॉर्ड तोड़ रही है। यदि आपकी ऑल इंडिया रैंक 25,000 के भीतर है, तो आप निश्चिंत होकर ऑल इंडिया या स्टेट कोटा के जरिए सरकारी कॉलेज चुन सकते हैं। वहीं, बॉर्डरलाइन या उससे पीछे की रैंक वाले छात्रों को हताश होने की आवश्यकता नहीं है; वे अपने बजट के अनुसार प्राइवेट संस्थानों का चयन कर सकते हैं या फिर बीडीएस और बीएएमएस जैसे वैकल्पिक परंतु बेहतरीन चिकित्सा क्षेत्रों में अपना शानदार करियर बना सकते हैं।


NEET UG 2026 परिणाम, रैंक और कॉलेज आवंटन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) दिए गए हैं, जो आपकी काउंसलिंग प्रक्रिया को आसान बनाएंगे:

1. सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में एमबीबीएस सीट पाने के लिए सुरक्षित नीट स्कोर और रैंक क्या है?

सामान्य (General) और ओबीसी (OBC) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए ऑल इंडिया कोटा (15% AIQ) के तहत सरकारी सीट सुरक्षित करने के लिए 610+ का स्कोर और 24,000 से 26,000 के भीतर ऑल इंडिया रैंक (AIR) को सुरक्षित माना जाता है [careers360.com]. यदि आपके पास कम कटऑफ वाले राज्य (जैसे कर्नाटक या मध्य प्रदेश) का डोमिसाइल है, तो स्टेट कोटा (85%) के तहत इससे कुछ पीछे की रैंक पर भी सीट मिल सकती है.

2. ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और स्टेट कोटा (State Quota) काउंसलिंग में क्या अंतर है?

  • 15% ऑल इंडिया कोटा (AIQ): इसकी काउंसलिंग मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) द्वारा आयोजित की जाती है. इसमें देश के सभी सरकारी कॉलेजों की 15% सीटों और एम्स (AIIMS), जिपमेर (JIPMER) व केंद्रीय विश्वविद्यालयों की 100% सीटों पर देश का कोई भी छात्र रैंक के आधार पर प्रवेश ले सकता है.
  • 85% स्टेट कोटा: इसकी काउंसलिंग संबंधित राज्य की अथॉरिटी करती है. इसमें राज्य के सरकारी कॉलेजों की शेष 85% सीटें और सभी प्राइवेट कॉलेजों की सीटें शामिल होती हैं, जिन पर केवल उसी राज्य के डोमिसाइल (मूल निवासी) छात्र ही दावा कर सकते हैं.

3. मेरी रैंक 50,000 से अधिक है, क्या मुझे सरकारी कॉलेज में MBBS मिल सकता है?

यदि आप सामान्य, ओबीसी या ईडब्ल्यूएस श्रेणी से हैं, तो ऑल इंडिया कोटा या स्टेट कोटा के माध्यम से 50,000+ रैंक पर सरकारी एमबीबीएस सीट मिलना लगभग असंभव है. हालांकि, यदि आप अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी से संबंधित हैं, तो आपको इस रैंक पर बहुत अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज आसानी से मिल सकते हैं.

4. ‘ओपन स्टेट’ (Open States) क्या होते हैं और इनका क्या फायदा है?

उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल और बिहार जैसे राज्य ‘ओपन स्टेट’ कहलाते हैं. इसका मतलब है कि इन राज्यों के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की सीटों पर दूसरे राज्यों के छात्र भी बिना डोमिसाइल के एडमिशन ले सकते हैं. कम नीट स्कोर या पीछे की रैंक वाले छात्रों के लिए बजट के अनुसार प्राइवेट एमबीबीएस सीट पाने का यह सबसे अच्छा तरीका है.

5. क्या काउंसलिंग के पहले राउंड में कॉलेज अलॉट होने के बाद उसे छोड़ सकते हैं?

हाँ, MCC (All India Quota) और अधिकांश राज्यों के काउंसलिंग नियमों के अनुसार पहले राउंड (Round 1) में ‘फ्री एग्जिट’ (Free Exit) की सुविधा होती है. इसका मतलब है कि यदि आपको पहले राउंड में कोई कॉलेज मिलता है और आप वहां एडमिशन नहीं लेते हैं, तो आपकी सिक्योरिटी मनी (Security Deposit) जब्त नहीं होगी और आप बिना किसी पेनाल्टी के दूसरे राउंड में भाग ले सकते हैं.

6. नीट क्वालिफाइंग कटऑफ (Qualifying Cutoff) और एडमिशन कटऑफ में क्या अंतर है?

  • क्वालिफाइंग कटऑफ: यह परीक्षा को पास करने का न्यूनतम अंक (जैसे इस साल सामान्य वर्ग के लिए 213 अंक) है, जिससे आप केवल काउंसलिंग प्रक्रिया या प्राइवेट/डीम्ड कॉलेजों में प्रवेश के लिए पात्र (Eligible) बनते हैं.
  • एडमिशन कटऑफ: यह वह वास्तविक और अंतिम अंक/रैंक होती है जिस पर किसी कॉलेज की आखिरी सीट बंद होती है (जैसे सरकारी कॉलेज के लिए 610+ अंक).

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