उत्तर प्रदेश कृषि उपकरण सब्सिडी योजना 2026: ऑनलाइन टोकन व आवेदन प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश कृषि उपकरण सब्सिडी योजना के तहत आधुनिक कृषि यंत्रों की सूची और सब्सिडी प्रतिशत

उत्तर प्रदेश कृषि उपकरण सब्सिडी योजना (UP Krishi Yantra Subsidy Yojana) राज्य के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत कृषि यंत्रों से जोड़ने की उत्तर प्रदेश सरकार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और कल्याणकारी पहल है। देश और राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले किसानों की आय दोगुनी करने, खेती की लागत को कम करने और कम समय में अधिक पैदावार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा इस योजना को संचालित किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के लघु एवं भारी कृषि उपकरणों की खरीद पर 40% से लेकर अधिकतम 80% तक की भारी सब्सिडी (अनुदान) प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में प्रदान की जाती है।

पारंपरिक खेती की तुलना में मशीनीकृत खेती (Farm Mechanization) न केवल श्रम और समय की बचत करती है, बल्कि यह फसलों की बर्बादी को रोककर उत्पादकता को भी बढ़ाती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार प्रतिवर्ष विभिन्न कृषि यंत्रों पर बंपर सब्सिडी योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करती है।


योजना की विस्तृत रूपरेखा एवं प्रमुख श्रेणियाँ

उत्तर प्रदेश सरकार कृषि यंत्रों पर सब्सिडी वितरण को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए इसे मुख्य रूप से दो प्रमुख योजनाओं/घटकों के अंतर्गत संचालित करती है:

योजना / घटक का नामलक्षित उपकरणसब्सिडी का प्रतिशतमुख्य उद्देश्य
इन-सीटू क्रॉप रेसिड्यू मैनेजमेंट योजनासुपर सीडर, हैप्पी सीढर, मल्चर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, रोटर कटर आदि।50% से 80% तकपराली प्रबंधन को बढ़ावा देना और पर्यावरण प्रदूषण को कम करना।
सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (SMAM)ट्रैक्टर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, थ्रेशर, लेजर लैंड लेवलर, पावर टिलर आदि।40% से 50% तकखेती का आधुनिकीकरण करना और छोटे किसानों को महंगे यंत्र उपलब्ध कराना।
कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) / फार्म मशीनरी बैंककृषि यंत्रों का पूरा सेट (समूहों के लिए)।अधिकतम 80% (₹12 लाख तक)ग्रामीण युवाओं और किसान समूहों को रोजगार एवं किराए पर यंत्र उपलब्ध कराना।

कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी का विवरण (Yantra Wise Subsidy Breakdown)

योजना के तहत अलग-अलग यंत्रों पर किसानों की श्रेणी (लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति/जनजाति और महिला किसान) के आधार पर अलग-अलग अनुदान निर्धारित किया गया है:

1. भारी एवं उन्नत कृषि यंत्र (Heavy Farm Machinery)

  • ट्रैक्टर (Tractor): छोटे और मध्यम श्रेणी के ट्रैक्टरों की खरीद पर सरकार द्वारा अधिकतम 40% से 50% तक की सब्सिडी दी जाती है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹75,000 से ₹1,00,000 तक हो सकती है।
  • लेजर लैंड लेवलर (Laser Land Leveler): खेतों को समतल करने वाले इस आधुनिक यंत्र पर किसानों को 50% तक का अनुदान मिलता है, जिससे सिंचाई के पानी की भारी बचत होती है।
  • रोटावेटर (Rotavator): मिट्टी को भुरभुरा और उपजाऊ बनाने के लिए सबसे उपयोगी इस यंत्र पर लगभग ₹35,000 से ₹40,000 तक की सब्सिडी देय होती है।

2. पराली प्रबंधन के उपकरण (Crop Residue Management Tools)

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों में पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए सरकार इन उपकरणों पर विशेष ध्यान दे रही है:

  • सुपर सीडर (Super Seeder) और हैप्पी सीडर: धान की कटाई के तुरंत बाद गेहूं की बुआई करने वाले इन यंत्रों पर व्यक्तिगत किसान को 50% और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) या सहकारी समितियों को 80% तक की भारी छूट दी जाती है।
  • मल्चर (Mulcher) और चॉपर: पराली को छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में मिलाने वाले इन उपकरणों पर भी 50% से 80% तक का अनुदान मिलता है।

3. कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक

लघु और सीमांत किसान जो महंगे कृषि यंत्र नहीं खरीद सकते, उन्हें किराए पर यंत्र उपलब्ध कराने के लिए सरकार ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ की स्थापना पर 80% तक का अनुदान (अधिकतम ₹12 लाख की सीमा तक) देती है। यह लाभ मुख्य रूप से किसान समूहों, पंजीकृत समितियों और एफपीओ (FPO) को दिया जाता है।


योजना के लिए पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)

कृषि उपकरण सब्सिडी योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदकों को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना आवश्यक है:

  • मूल निवासी: आवेदक अनिवार्य रूप से उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी और वास्तविक किसान होना चाहिए।
  • कृषि विभाग में पंजीकरण: किसान का उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल) पर पंजीकृत होना अनिवार्य है और उनके पास एक वैध किसान आईडी (Farmer ID) होनी चाहिए।
  • भूमि स्वामित्व: किसान के नाम पर कृषि योग्य भूमि (खतौनी में नाम) होनी आवश्यक है। बटाईदार किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर से किराए पर यंत्र लेने की सुविधा होती है, लेकिन व्यक्तिगत सब्सिडी के लिए भूमि स्वामित्व जरूरी है।
  • बैंक खाता लिंक: लाभार्थी का बैंक खाता चालू स्थिति में होना चाहिए और वह आधार कार्ड से लिंक (DBT Enabled) होना चाहिए।
  • पूर्व लाभ की सीमा: यदि किसी किसान ने पिछले 3 से 5 वर्षों के भीतर किसी विशेष कृषि यंत्र पर सब्सिडी का लाभ लिया है, तो वह उसी यंत्र पर दोबारा सब्सिडी पाने के लिए पात्र नहीं होगा। हालांकि, वह दूसरे नए यंत्र के लिए आवेदन कर सकता है।

आवश्यक दस्तावेज (Required Documents List)

ऑनलाइन आवेदन करते समय और सब्सिडी क्लेम जमा करते समय निम्नलिखित दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियों की आवश्यकता होती है:

  1. पहचान पत्र: आवेदक किसान का आधार कार्ड (अनिवार्य)।
  2. भूमि के दस्तावेज: नवीनतम खतौनी (जमीन का रिकॉर्ड) की प्रति।
  3. पंजीकरण विवरण: पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल पर दर्ज किसान पंजीकरण संख्या (Farmer Registration Number)।
  4. बैंक विवरण: बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की प्रति या कैंसिल्ड चेक (जिसमें आईएफएससी कोड और खाता संख्या स्पष्ट हो)।
  5. संपर्क माध्यम: आधार से लिंक सक्रिय मोबाइल नंबर (ओटीपी सत्यापन के लिए)।
  6. जाति प्रमाण पत्र: केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के किसानों के लिए, ताकि उन्हें अतिरिक्त अनुदान का लाभ मिल सके।

आवेदन एवं लॉटरी चयन प्रक्रिया (Step-by-Step Online Application Process)

उत्तर प्रदेश सरकार ने बिचौलियों और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कृषि यंत्रों पर सब्सिडी की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और ‘पहले आओ-पहले पाओ’ या ‘ई-लॉटरी (E-Lottery)’ प्रणाली पर आधारित कर दिया है।

ऑनलाइन आवेदन करने के चरण:

  1. आधिकारिक पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट upagriculture.com पर जाएं।
  2. यंत्र चयन करें: होमपेज पर दिए गए “कृषि यंत्रों पर अनुदान हेतु बुकिंग करें” या “टोकन जनरेट करें” वाले विकल्प पर क्लिक करें।
  3. किसान आईडी दर्ज करें: अपनी 13 अंकों की किसान पंजीकरण संख्या दर्ज करें। आपकी पूरी जानकारी (नाम, पता, जिला) स्क्रीन पर आ जाएगी।
  4. यंत्र का चुनाव और बुकिंग: आप जिस कृषि यंत्र पर सब्सिडी पाना चाहते हैं, उसका चयन करें और मोबाइल पर आए ओटीपी के जरिए बुकिंग की पुष्टि करें।
  5. जमानत राशि (टोकन मनी) जमा करना: बुकिंग सफल होने के बाद, निर्धारित समय-सीमा (प्रायः 7 से 14 दिन) के भीतर आपको पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन या चालान द्वारा जमानत राशि (Token Money) जमा करनी होती है। छोटे यंत्रों के लिए यह राशि ₹2,500 और भारी यंत्रों के लिए ₹5,000 या ₹10,000 तक हो सकती है। यदि आपका चयन लॉटरी में नहीं होता है, तो यह राशि वापस कर दी जाती है।

ई-लॉटरी और भौतिक सत्यापन (Verification Process)

आवेदन बंद होने के बाद, यदि निर्धारित लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो जिला स्तरीय समिति की देखरेख में पारदर्शी ई-लॉटरी निकाली जाती है।

  • जिन किसानों का नाम लॉटरी सूची में आता है, उन्हें यंत्र खरीदने के लिए एक निश्चित अवधि (प्रायः 30 से 45 दिन) दी जाती है।
  • किसान को सरकार द्वारा अनुमोदित (Approved) निर्माताओं या स्थानीय पंजीकृत डीलरों से ही यंत्र खरीदना होता है और उसका पक्का जीएसटी (GST) बिल पोर्टल पर अपलोड करना होता है।
  • इसके बाद कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर यंत्र का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करते हैं, यंत्र के साथ किसान की फोटो लेते हैं और जियो-टैगिंग की जाती है।
  • सत्यापन सफल होने के बाद, सब्सिडी की धनराशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाती है।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण नियम और सावधानियां

  • समय-सीमा का ध्यान रखें: टोकन जनरेट करने के बाद निर्धारित दिनों के भीतर बुकिंग राशि जमा न करने पर टोकन स्वतः निरस्त हो जाता है।
  • पंजीकृत विक्रेता से ही खरीद: हमेशा कृषि विभाग की सूची में शामिल प्रमाणित वेंडर्स से ही कृषि यंत्र खरीदें, अन्यथा सब्सिडी रोक दी जाएगी।
  • यंत्र को बेचना वर्जित: सब्सिडी पर खरीदे गए कृषि यंत्र को अगले 3 से 5 वर्षों तक किसी अन्य व्यक्ति को बेचना या हस्तांतरित करना कानूनी रूप से वर्जित है। पकड़े जाने पर सब्सिडी की राशि ब्याज सहित वसूली जा सकती है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश कृषि उपकरण सब्सिडी योजना राज्य के किसानों को सशक्त, आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इस योजना के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी आधुनिक और महंगे कृषि उपकरणों का उपयोग करना संभव हो सका है। कृषि में यंत्रों के बढ़ते प्रयोग से न केवल फसलों की लागत कम हो रही है, बल्कि युवाओं के लिए ग्रामीण स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। यदि आप भी उत्तर प्रदेश के एक किसान हैं, तो आपको इस योजना के तहत अपने पसंदीदा कृषि यंत्र की बुकिंग समय पर अवश्य करनी चाहिए।


उत्तर प्रदेश कृषि उपकरण सब्सिडी योजना (UP Krishi Yantra Subsidy Yojana) से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

1. सामान्य एवं पात्रता संबंधी प्रश्न (General & Eligibility FAQs)

  • उत्तर प्रदेश कृषि उपकरण सब्सिडी योजना क्या है?
    यह उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही एक योजना है, जिसके तहत किसानों को उन्नत और आधुनिक कृषि यंत्र (जैसे ट्रैक्टर, रोटावेटर, सुपर सीडर आदि) खरीदने पर 40% से 80% तक की सब्सिडी दी जाती है।
  • इस योजना के लिए कौन से किसान पात्र हैं?
    उत्तर प्रदेश के वे सभी स्थायी निवासी किसान पात्र हैं जिनके नाम पर कृषि योग्य भूमि (खतौनी) है और जिन्होंने कृषि विभाग के ‘पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल’ (upagriculture.com) पर अपना पंजीकरण कराया हुआ है।
  • क्या महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों को कोई विशेष छूट मिलती है?
    हाँ। सामान्य वर्ग के किसानों की तुलना में महिला किसानों, लघु व सीमांत किसानों, और अनुसूचित जाति (SC) व अनुसूचित जनजाति (ST) के किसानों को 10% तक का अतिरिक्त अनुदान या प्राथमिकता दी जाती है।

2. टोकन और आवेदन प्रक्रिया (Token & Application Process)

  • कृषि यंत्रों की बुकिंग के लिए ‘टोकन मनी’ (जमानत राशि) क्या है?
    योजना में केवल गंभीर किसान ही आवेदन करें, इसके लिए सरकार ने टोकन मनी की व्यवस्था की है। छोटे यंत्रों के लिए यह ₹2,500 और बड़े या भारी यंत्रों (जैसे ट्रैक्टर, सुपर सीडर, कस्टम हायरिंग सेंटर) के लिए यह ₹5,00, ₹10,000 या अधिक हो सकती है। यदि लॉटरी में आपका चयन नहीं होता है, तो यह राशि आपके खाते में वापस कर दी जाती है।
  • टोकन जनरेट करने के बाद पैसे जमा करने के लिए कितना समय मिलता है?
    ऑनलाइन टोकन जनरेट करने के बाद निर्धारित जमानत राशि को ऑनलाइन या यूनियन बैंक की किसी भी शाखा में चालान के माध्यम से जमा करने के लिए आमतौर पर 7 से 14 दिनों का समय दिया जाता है। इस अवधि में पैसा जमा न करने पर टोकन स्वतः निरस्त हो जाता है।
  • क्या मैं एक साथ कई कृषि यंत्रों के लिए आवेदन कर सकता हूँ?
    हाँ, एक किसान एक वित्तीय वर्ष में एक से अधिक अलग-अलग प्रकार के यंत्रों के लिए आवेदन कर सकता है। लेकिन ध्यान रहे, पिछले 3 से 5 वर्षों में आप जिस यंत्र पर सब्सिडी ले चुके हैं, उसी समान यंत्र पर दोबारा सब्सिडी नहीं मिलेगी।

3. चयन और सब्सिडी भुगतान (Selection & Payment FAQs)

  • सब्सिडी के लिए किसानों का चयन कैसे किया जाता है?
    पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार ‘ई-लॉटरी (E-Lottery)’ प्रणाली का उपयोग करती है। लक्ष्य से अधिक आवेदन आने पर जिला स्तरीय समिति की देखरेख में कंप्यूटर द्वारा लॉटरी निकाली जाती है, जिसकी सूची पोर्टल पर सार्वजनिक की जाती है।
  • लॉटरी में नाम आने के बाद यंत्र कहाँ से खरीदना होता है?
    नाम आने के बाद आपको कृषि विभाग द्वारा सूचीबद्ध और अनुमोदित (Approved) पंजीकृत डीलरों या निर्माताओं से ही यंत्र खरीदना होगा। यंत्र खरीदने के बाद उसका पक्का जीएसटी (GST) बिल और सीरियल नंबर पोर्टल पर अपलोड करना होता है।
  • सब्सिडी का पैसा किसान को कब और कैसे मिलता है?
    यंत्र खरीदने और बिल अपलोड करने के बाद कृषि विभाग के अधिकारी ब्लॉक/गांव स्तर पर आकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) और जियो-टैगिंग करते हैं। सत्यापन सफल होने के बाद सब्सिडी की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे किसान के आधार-लिंक बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।

4. कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC)

  • कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) क्या है और इस पर कितनी सब्सिडी है?
    यह एक ऐसा केंद्र है जहाँ कई आधुनिक कृषि यंत्रों का बैंक होता है, जिससे छोटे किसान किराए पर यंत्र ले सकते हैं। किसान समूहों, सहकारी समितियों या एफपीओ (FPO) को कस्टम हायरिंग सेंटर या फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिए अधिकतम 80% (₹12 लाख तक) का भारी अनुदान दिया जाता है।

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