उत्तर प्रदेश पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना 2026: 1962 हेल्पलाइन व लाभ

उत्तर प्रदेश पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना के तहत 1962 मोबाइल वेटरनरी यूनिट और मुफ्त टीकाकरण सेवाएं

उत्तर प्रदेश पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना राज्य के पशुपालकों, डेयरी किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कल्याणकारी योजना है। उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक पशुधन आबादी वाले राज्यों में अग्रणी है। यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर टिकी हुई है। ऐसे में पशुओं को घातक और संक्रामक बीमारियों से बचाना, उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और उच्च गुणवत्ता वाले टीकों का वितरण करना इस योजना का मुख्य लक्ष्य है।

पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा इस योजना के अंतर्गत पशुओं में होने वाले खुरपका-मुँहपका (FMD), मंकीपॉक्स या लम्पी स्किन डिजीज (LSD), ब्रुसेलोसिस, और पीपीआर (PPR) जैसे गंभीर रोगों के नियंत्रण के लिए 100% मुफ्त टीकाकरण और उपचार की सुविधा प्रदान की जाती है। इसके साथ ही, किसानों के द्वार पर ही आधुनिक आपातकालीन चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए मोबाईल वेटरनरी यूनिट्स (MVUs) का संचालन भी इसी योजना के तहत किया जा रहा है।


योजना की विस्तृत रूपरेखा एवं प्रमुख घटक

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना का क्रियान्वयन केंद्र सरकार के सहयोग से ‘पशु रोग नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP)’ और राज्य की क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप किया जा रहा है। योजना के मुख्य स्तंभ निम्नलिखित हैं:

योजना के प्रमुख घटक / सेवाएंलक्षित पशुधन समूहवित्तीय सहायता / सब्सिडीमुख्य उद्देश्य
निःशुल्क राष्ट्रव्यापी टीकाकरण कार्यक्रमगाय, भैंस, भेड़, बकरी और सुअर।100% मुफ्त (शून्य लागत)खुरपका-मुँहपका (FMD), ब्रुसेलोसिस और पीपीआर रोगों का पूर्ण उन्मूलन।
मोबाईल वेटरनरी यूनिट (1962 MVU)दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों के सभी बीमार पशु।निःशुल्क आपातकालीन सेवाकिसानों के घर पर ही एम्बुलेंस के माध्यम से पशु चिकित्सा और सर्जरी उपलब्ध कराना।
पशुधन बीमा एवं स्वास्थ्य कार्डपंजीकृत दुधारू और दुग्ध उत्पादक पशु।प्रीमियम पर भारी सब्सिडीपशु की आकस्मिक मृत्यु पर किसानों को वित्तीय सुरक्षा देना।
पशु पहचान और सुलभता (Ear Tagging)सभी पालतू और व्यावसायिक पशुधन।मुफ्त टैगिंग‘इनाफ’ (INAPH) पोर्टल पर 12 अंकों के यूनीक आईडी कोड के जरिए डिजिटल ट्रैकिंग।

1. संक्रामक रोगों के खिलाफ निःशुल्क टीकाकरण अभियान

पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना का सबसे बड़ा हिस्सा पशुओं को महामारी जनित रोगों से सुरक्षित करना है। इसके अंतर्गत राज्य सरकार साल में दो बार वृहद स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाती है:

क) खुरपका-मुँहपका रोग (Foot and Mouth Disease – FMD) नियंत्रण:

यह गायों और भैंसों में होने वाला एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है। इससे पशु अत्यधिक कमजोर हो जाते हैं, उनके दूध उत्पादन में 80% तक की भारी गिरावट आती है और कई बार पशुओं की मृत्यु भी हो जाती है। योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में शत-प्रतिशत पशुओं का साल में दो बार मुफ्त टीकाकरण किया जाता है।

ख) ब्रुसेलोसिस नियंत्रण (Brucellosis Control):

यह रोग न केवल पशुओं में गर्भपात का कारण बनता है, बल्कि यह दूध के माध्यम से इंसानों में भी फैल सकता है (जूनोटिक बीमारी)। इस योजना के अंतर्गत 4 से 8 महीने की आयु की बछड़ियों (Female Calves) को जीवन में एक बार ब्रुसेलोसिस का टीका पूरी तरह मुफ्त लगाया जाता है ताकि भविष्य में डेयरी क्षेत्र सुरक्षित रहे।

ग) पीपीआर और गोट पॉक्स नियंत्रण (PPR & Goat Pox):

भेड़ और बकरियों के पालकों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए ‘पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स’ (PPR) और गोट पॉक्स का टीका लगाया जाता है। यह छोटे और सीमांत गरीब किसानों की आजीविका को सुरक्षा देता है।


2. मोबाईल वेटरनरी यूनिट (1962 Emergency Service)

ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर योग्य पशु चिकित्सकों या अस्पतालों की कमी होती है। किसी गंभीर बीमारी या प्रसव (Delivery) के समय पशु को अस्पताल ले जाना किसानों के लिए बेहद कठिन और खर्चीला होता है। इसी समस्या के समाधान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 1962 मोबाईल वेटरनरी एम्बुलेंस सेवा की शुरुआत की है।

इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • टोल-फ्री नंबर 1962: किसान अपने बीमार पशु की जानकारी देने के लिए टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर सकते हैं।
  • घर पर चिकित्सा (Doctor at Doorstep): कॉल करने के कुछ ही समय के भीतर एक आधुनिक एम्बुलेंस वाहन (जिसमें एक पशु चिकित्सक, एक पैरा-वेटरनरी स्टाफ और आवश्यक दवाएं होती हैं) सीधे किसान के घर पहुंचती है।
  • मुफ्त जांच और उपचार: एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से किया जाने वाला प्राथमिक उपचार, इंजेक्शन और मामूली सर्जरी पूरी तरह निशुल्क होती है।
  • जियो-टैग्ड मॉनिटरिंग: इन सभी गाड़ियों की ट्रैकिंग लाइव की जाती है ताकि भ्रष्टाचार या लापरवाही की गुंजाइश न रहे।

3. पशु पहचान और डिजिटल ट्रैकिंग (Ear Tagging)

इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हर पशु को एक विशिष्ट पहचान देना है। इसके तहत पशुओं के कानों में एक पीले रंग का प्लास्टिक का टैग (Ear Tag) लगाया जाता है, जिस पर 12 अंकों का एक विशिष्ट नंबर दर्ज होता है।

इस डिजिटल ट्रैकिंग के लाभ:

  • डिजिटल पासबुक (INAPH): इस नंबर को केंद्र सरकार के इनाफ पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। इसमें पशु की उम्र, नस्ल, मालिक का नाम, टीकाकरण का इतिहास और दूध उत्पादन की क्षमता का पूरा विवरण ऑनलाइन सुरक्षित रहता है।
  • बीमा और क्रय-विक्रय में आसानी: बिना इयर टैग के किसी भी पशु का बीमा नहीं किया जा सकता। साथ ही, पशु मेलों या बाजारों में पशु खरीदते समय धोखाधड़ी की संभावना खत्म हो जाती है।

योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता और शर्तें

उत्तर प्रदेश पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना का लाभ उठाने की शर्तें बेहद सरल और जन-केंद्रित हैं:

  • मूल निवासी: पशु मालिक अनिवार्य रूप से उत्तर प्रदेश का मूल या स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • पशुओं की श्रेणियाँ: योजना के तहत गाय, भैंस, सांड, बछड़े-बछड़ियां, भेड़, बकरी, सुअर और ऊंट पालने वाले सभी छोटे, सीमांत व बड़े किसान पात्र हैं।
  • पंजीकरण: पशु का इयर टैगिंग (Ear Tagging) होना आवश्यक है, ताकि उसे सरकारी रिकॉर्ड में शामिल किया जा सके।
  • भेदभाव रहित लाभ: यह योजना किसी भी जाति, वर्ग या जोत सीमा (Land Holding) से परे है। राज्य का हर वह नागरिक जिसके पास कम से कम एक भी पालतू पशु है, इसका पूरा लाभ उठा सकता है।

आवश्यक दस्तावेज एवं जानकारियां (Required Details)

सामन्य उपचार और टीकाकरण के लिए किसी विशेष कागजी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन विशेष शिविरों, आपातकालीन सेवाओं या दवाओं के वितरण के समय निम्नलिखित दस्तावेजों की मांग की जा सकती है:

  1. पशुपालक का आधार कार्ड: पहचान के सत्यापन के लिए।
  2. मोबाइल नंबर: जो आधार कार्ड या किसान पंजीकरण से जुड़ा हो, ताकि वेटरनरी यूनिट के आने पर संपर्क किया जा सके।
  3. पशु का टैग नंबर (Tag Number): 12 अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर।
  4. बैंक पासबुक (यदि लागू हो): केवल पशुधन बीमा क्लेम या किसी विशेष सरकारी प्रोत्साहन राशि को सीधे खाते में प्राप्त करने के लिए (DBT हेतु)।

किसान कैसे उठाएं इस योजना का लाभ? (How to Apply/Avail)

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना का लाभ उठाने की प्रक्रिया को बेहद सुगम और जमीनी स्तर पर क्रियान्वित किया है। किसानों को किसी जटिल ऑनलाइन फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होती:

1. नजदीकी पशु चिकित्सालय संपर्क:

किसान अपने ग्राम पंचायत या विकास खंड (Block) स्तर पर स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय (Government Veterinary Hospital) में जाकर सीधे डॉक्टरों से संपर्क कर सकते हैं। वहाँ पर आवश्यक दवाएं और कृत्रिम गर्भाधान (AI) की सुविधाएं बहुत ही रियायती या मुफ्त दरों पर उपलब्ध होती हैं।

2. ग्रामीण स्वास्थ्य शिविर (Veterinary Camps):

पशुपालन विभाग द्वारा समय-समय पर गांवों में विशेष पशु आरोग्य शिविरों का आयोजन किया जाता है। इन शिविरों में विशेषज्ञ डॉक्टर आते हैं जो बांझपन (Infertility), क्रोनिक बीमारियों और पोषण संबंधी समस्याओं की जांच करते हैं तथा मुफ्त में कीड़े मारने की दवाएं (Deworming Medicines) और मिनरल मिक्सचर बांटते हैं।

3. 1962 हेल्पलाइन का उपयोग:

किसी भी आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में, किसान तुरंत अपने फोन से 1962 डायल करें। ऑपरेटर को अपना नाम, पूरा पता, ब्लॉक का नाम और पशु के लक्षण नोट करवाएं। आपके नजदीकी क्षेत्र में तैनात मोबाईल वेटरनरी यूनिट आपके घर का रुख करेगी।


योजना का आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव

उत्तर प्रदेश पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना ने राज्य के ग्रामीण परिदृश्य में व्यापक बदलाव लाया है:

  • लागत में कमी: पहले संक्रामक बीमारियों की वजह से निजी डॉक्टरों पर किसानों का हजारों रुपया खर्च हो जाता था, जो अब मुफ्त टीकाकरण से पूरी तरह बच रहा है।
  • दूध उत्पादन में स्थिरता: खुरपका-मुँहपका और लम्पी जैसे रोगों पर प्रभावी नियंत्रण से राज्य के कुल दुग्ध उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे ‘श्वेत क्रांति’ को बल मिल रहा है।
  • पशुपालकों का भरोसा: मोबाईल वेटरनरी यूनिट्स के शुरू होने से दूर-दराज के गरीब किसानों को यह भरोसा मिला है कि उनके पशुओं की जान समय पर इलाज मिलने से बचाई जा सकती है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा संचालित पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना वास्तव में राज्य के मूक पशुओं की सुरक्षा और उनके मालिकों की समृद्धि का एक मजबूत जरिया बन चुकी है। 100% मुफ्त टीकाकरण और अत्याधुनिक 1962 एम्बुलेंस सेवा जैसी पहलों ने पशु चिकित्सा विज्ञान को सीधे किसान के खूंटे तक पहुँचा दिया है। इस योजना का पूरा लाभ उठाने के लिए हर पशुपालक को अपने पशुओं की इयर टैगिंग जरूर करवानी चाहिए और स्वास्थ्य शिविरों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए, ताकि उत्तर प्रदेश का पशुधन पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित रह सके।

क्या आप अपने क्षेत्र के लिए 1962 मोबाइल वेटरनरी यूनिट की उपलब्धता और कार्य समय के बारे में जानना चाहते हैं, या पशुपालकों के लिए उपलब्ध सस्ते पशु बीमा (Livestock Insurance) की आवेदन प्रक्रिया की जानकारी चाहते हैं?

यहाँ उत्तर प्रदेश पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना (UP Pashudhan Swasthya evam Rog Niyantran Yojana) से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) दिए गए हैं:

1. सामान्य एवं बीमारी संबंधी प्रश्न (General & Disease FAQs)

  • यह योजना मुख्य रूप से किस उद्देश्य के लिए है?
    यह उत्तर प्रदेश सरकार के पशुपालन विभाग द्वारा चलाई जा रही एक प्रमुख योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य गाय, भैंस, भेड़, बकरी जैसे दुधारू और पालतू पशुओं को संक्रामक महामारियों से बचाना, उनका मुफ्त टीकाकरण करना और गंभीर स्थिति में सीधे किसानों के घर पर इलाज पहुंचाना है।
  • योजना के तहत पशुओं को किन-किन बीमारियों के खिलाफ टीके लगाए जाते हैं?
    इसके अंतर्गत पशुओं की जानलेवा बीमारियों जैसे खुरपका-मुँहपका (FMD), ब्रुसेलोसिस (Brucellosis), लम्पी स्किन डिजीज (LSD) और पीपीआर (PPR) के खिलाफ साल में दो बार बड़े पैमाने पर मुफ्त टीकाकरण अभियान चलाया जाता है।
  • क्या इस योजना में इलाज और टीकों के लिए कोई पैसा देना पड़ता है?
    नहीं। सरकारी डॉक्टरों या स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा इस योजना के तहत चलाया जाने वाला सभी टीकाकरण और आपातकालीन प्राथमिक उपचार 100% निःशुल्क (पूरी तरह मुफ्त) होता है।

2. आपातकालीन सेवा एवं 1962 हेल्पलाइन (Emergency & 1962 MVU)

  • पशु आपातकालीन सेवा (1962) क्या है और यह कैसे काम करती है?
    यह सरकार द्वारा शुरू की गई मोबाईल वेटरनरी यूनिट (MVU) एम्बुलेंस सेवा है। जब कोई पशु गंभीर रूप से बीमार हो जाता है, तो किसान टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर सकते हैं। कॉल करने के बाद डॉक्टरों और दवाओं से लैस एक सरकारी एम्बुलेंस सीधे किसान के घर (खूंटे तक) आकर पशु का मुफ्त इलाज करती है।
  • क्या 1962 एम्बुलेंस सेवा का लाभ उठाने के लिए कोई शुल्क देना होता है?
    नहीं। 1962 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करना और मोबाइल वेटरनरी यूनिट द्वारा किसान के घर जाकर इलाज करना पूरी तरह निःशुल्क है। दवाओं और प्राथमिक इंजेक्शनों का भी कोई पैसा नहीं लिया जाता।
  • क्या यह सेवा रात में भी उपलब्ध होती है?
    वर्तमान में मोबाईल वेटरनरी यूनिट्स (MVUs) आमतौर पर सुबह 8:00 बजे से रात 8:00 बजे तक (12 घंटे) सक्रिय रूप से काम करती हैं। हालांकि, टोल-फ्री कंट्रोल रूम पर आप किसी भी समय कॉल करके सलाह या आपातकालीन सहायता दर्ज करा सकते हैं।

3. इयर टैगिंग (Ear Tagging) और पंजीकरण

  • पशुओं के कान में पीला टैग (Ear Taging) लगाना क्यों जरूरी है?
    प्लास्टिक का यह पीला टैग पशु का ‘आधार कार्ड’ माना जाता है, जिस पर 12 अंकों का एक यूनीक नंबर होता है। इसे केंद्र सरकार के इनाफ (INAPH) पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। इसके बिना पशु का टीकाकरण रिकॉर्ड ट्रैक नहीं हो सकता और न ही भविष्य में उस पशु का सरकारी पशु बीमा (Livestock Insurance) कराया जा सकता है।
  • क्या टैग लगाने से पशु को कोई नुकसान होता है?
    नहीं। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और दर्द रहित होती है। यह ठीक वैसे ही है जैसे इंसानों के कान छिदवाए जाते हैं। पशुपालकों को इससे घबराना नहीं चाहिए।

4. शिविर और लाभ प्राप्ति प्रक्रिया

  • यदि एम्बुलेंस न आ पाए, तो सामान्य दिनों में मुफ्त दवाएं कहाँ से मिलेंगी?
    किसान भाई अपने ब्लॉक या विकास खंड स्तर पर स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय (Government Veterinary Hospital) में जाकर सीधे डॉक्टरों से परामर्श ले सकते हैं। वहाँ पर भी दवाइयाँ और कृत्रिम गर्भाधान (AI) की सुविधा सरकारी रियायती या मुफ्त दरों पर उपलब्ध होती है।
  • गाँवों में लगने वाले पशु आरोग्य शिविरों की जानकारी कैसे मिलेगी?
    कृषि और पशुपालन विभाग द्वारा समय-समय पर ग्राम पंचायतों में मुनादी (घोषणा) करवाकर या विकास खंड कार्यालय के माध्यम से इन विशेष शिविरों की तारीखें तय की जाती हैं। इनमें पशुओं के बांझपन और अन्य जटिल रोगों की मुफ्त जांच की जाती है।

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