Navratri 2026 Date: कब से शुरू होंगे शारदीय नवरात्र? जानें अष्टमी, नवमी और दशहरे की तारीख

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शारदीय नवरात्रि 2026: कब से शुरू होंगे नवरात्र? जानें घटस्थापना, अष्टमी, नवमी और दशहरे की सही तारीख और शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का त्योहार सबसे पवित्र और हर्षोल्लास से मनाए जाने वाले पर्वों में से एक है। साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रही है, जिसका समापन 19 अक्टूबर 2026 को महानवमी के साथ होगा और अगले दिन 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को विजयादशमी (दशहरा) का महापर्व मनाया जाएगा

यह नौ दिन माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग दिव्य स्वरूपों की आराधना, व्रत, और साधना के लिए समर्पित होते हैं। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले इस उत्सव की रौनक देश भर में देखने को मिलती है। आइए इस विस्तृत लेख में जानते हैं घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, तिथि की गणना, अष्टमी-नवमी का संयोग और दशहरे से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ।


शारदीय नवरात्रि 2026: मुख्य तिथियां और कैलेंडर (At a Glance)

इस वर्ष पंचांग के अनुसार तिथियों का क्रम कुछ इस प्रकार रहने वाला है:

पर्व / तिथिदिनांक (Date)दिन (Day)
घटस्थापना (कलश स्थापना) व प्रतिपदा11 अक्टूबर 2026रविवार
दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी)19 अक्टूबर 2026सोमवार
महानवमी19 अक्टूबर 2026सोमवार
विजयादशमी (दशहरा)20 अक्टूबर 2026मंगलवार

घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना को सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है, जिसे कलश स्थापना भी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रतिपदा तिथि के उदयातिथि मुहूर्त में कलश स्थापित करना सबसे फलदायी होता है।

  • प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ: 10 अक्टूबर 2026 को रात 09:19 बजे से
  • प्रतिपदा तिथि का समापन: 11 अक्टूबर 2026 को रात 09:30 बजे तक

घटस्थापना के लिए विशेष शुभ मुहूर्त:

  • सुबह का मुहूर्त: 11 अक्टूबर 2026 को सुबह 06:19 बजे से 10:12 बजे तक (दिल्ली और आसपास के पंचांग के अनुसार)। कुछ स्थानों पर यह उत्तम चौघड़िया व स्थानीय सूर्योदय के अनुसार सुबह 06:31 बजे से 10:27 बजे तक भी रहेगा।
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से 12:49 बजे तक। यदि कोई व्यक्ति सुबह के समय कलश स्थापित न कर पाए, तो वह इस अभिजित मुहूर्त में पूजन आरंभ कर सकता है।

महाअष्टमी और महानवमी का अनूठा संयोग

साल 2026 के पंचांग की सबसे विशेष बात यह है कि इस बार दुर्गा अष्टमी और महानवमी दोनों तिथियां एक ही दिन यानी 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को पड़ रही हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण इस बार अष्टमी का व्रत और नवमी का हवन-पूजन एक ही दिन संपन्न किया जाएगा।

  • महाअष्टमी (19 अक्टूबर): इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। घरों में कुलदेवी की पूजा के साथ-साथ कई श्रद्धालु इस दिन कन्या पूजन भी करते हैं।
  • महानवमी (19 अक्टूबर): इसी दिन दोपहर या संध्या काल की गणना के अनुसार नवमी तिथि मान्य होने से मां सिद्धिदात्री की अर्चना की जाएगी। नवरात्रि व्रत का समापन, पूर्णाहूति हवन और महाप्रसाद का वितरण भी इसी दिन संपन्न होगा।

विजयादशमी (दशहरा) 2026 की तारीख

नवरात्रि के ठीक अगले दिन 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को विजयादशमी यानी दशहरा का महापर्व पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से यह दिन बेहद खास है:

  • महिषासुर मर्दिनी: मान्यता है कि मां दुर्गा ने नौ दिनों के भीषण युद्ध के बाद इसी दिन महिषासुर का वध कर देवताओं और पृथ्वी वासियों को अधर्म से मुक्ति दिलाई थी।
  • श्री राम की विजय: इसी पावन दिन भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का संहार कर माता सीता को मुक्त कराया था। बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत के प्रतीक स्वरूप इस दिन देश के विभिन्न हिस्सों में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।

नवरात्रि के 9 दिन और देवी के 9 स्वरूप

11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक चलने वाले इन पावन दिनों में आदिशक्ति के नौ रूपों की क्रमानुसार पूजा की जाएगी:

  1. प्रथम दिन (11 अक्टूबर): मां शैलपुत्री पूजा (घटस्थापना)
  2. द्वितीय दिन (12 अक्टूबर): मां ब्रह्मचारिणी पूजा
  3. तृतीय दिन (13 अक्टूबर): मां चंद्रघंटा पूजा
  4. चतुर्थ दिन (14 अक्टूबर): मां कुष्मांडा पूजा
  5. पंचम दिन (15 अक्टूबर): मां स्कंदमाता पूजा
  6. षष्ठ दिन (16 अक्टूबर): मां कात्यायनी पूजा
  7. सप्तम दिन (17 अक्टूबर): मां कालरात्रि पूजा
  8. अष्टम दिन (18/19 अक्टूबर): मां महागौरी (अष्टमी तिथि का विस्तार 19 अक्टूबर को मुख्य रूप से फलित होगा)
  9. नवमी दिन (19 अक्टूबर): मां सिद्धिदात्री पूजा व हवन

शारदीय नवरात्रि के शुरू होते ही देश में त्योहारों की एक लंबी श्रृंखला शुरू हो जाती है। इसके बाद करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा लगातार मनाए जाते हैं, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और उत्सवपूर्ण बना रहता है।


1. शारदीय नवरात्रि 2026: तिथि और पंचांग गणना

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का विशेष महत्व होता है क्योंकि इसी दिन से माता रानी के स्वागत की तैयारियाँ शुरू होती हैं।

  • प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ: 10 अक्टूबर 2026 की रात करीब 09:19 बजे से
  • प्रतिपदा तिथि का समापन: 11 अक्टूबर 2026 की रात करीब 09:30 बजे तक

उदयातिथि का महत्व: सनातन धर्म में उदय कालीन तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) को ही व्रत और पूजा-अनुष्ठान के लिए सर्वोपरि माना जाता है। चूँकि 11 अक्टूबर को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए शारदीय नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्टूबर 2026 को ही माना जाएगा और इसी दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाएगी।


2. घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना को सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश में सभी देवी-देवताओं, तीर्थों और ब्रह्मांडीय शक्तियों का वास होता है। सही और शुभ मुहूर्त में की गई कलश स्थापना घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाती है।

वर्ष 2026 में घटस्थापना के लिए ज्योतिषविदों ने दो बेहद शुभ मुहूर्त बताए हैं:

क) सुबह का मुख्य मुहूर्त

  • मय: सुबह 06:31 बजे से सुबह 10:27 बजे तक
  • अवधि: लगभग 3 घंटे 56 मिनट
    (नोट: दिल्ली और इसके आस-पास के क्षेत्रों में स्थानीय पंचांग के अनुसार यह समय सुबह 06:19 बजे से 10:12 बजे तक भी रहेगा। स्थानीय सूर्योदय के आधार पर इसमें कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है।)

ख) अभिजित मुहूर्त (दोपहर का शुभ समय)

यदि किसी कारणवश आप सुबह के समय कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो दोपहर के समय अभिजित मुहूर्त में इसे करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

  • समय: दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक
  • अवधि: 48 मिनट

3. नवरात्रि 2026 का पूरा कैलेंडर (9 दिनों की तिथियाँ और देवियाँ)

इस साल पंचांग के कुछ विशेष फेरबदल के कारण तिथियों का विशेष संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार नवरात्रि की नौ प्रमुख देवियों की पूजा की सूची नीचे दी गई है:

दिन और तारीखनवरात्रि का दिनपूजनीय देवी स्वरूपमहत्व और धार्मिक मान्यता
11 अक्टूबर 2026, रविवारपहला दिन (प्रतिपदा)माँ शैलपुत्रीघटस्थापना, अखंड ज्योति की शुरुआत और हिमालय पुत्री की पूजा।
12 अक्टूबर 2026, सोमवारदूसरा दिन (द्वितीया)माँ ब्रह्मचारिणीतपस्या और कठिन साधना की देवी की पूजा।
13 अक्टूबर 2026, मंगलवारतीसरा दिन (तृतीया)माँ चंद्रघंटासिंह पर सवार, मस्तक पर घंटे के आकार का चंद्रमा धारण करने वाली देवी।
14 अक्टूबर 2026, बुधवारचौथा दिन (चतुर्थी)माँ कुष्मांडाब्रह्मांड की रचना करने वाली आदि-शक्ति की आराधना।
15 अक्टूबर 2026, गुरुवारपांचवां दिन (पंचमी)माँ स्कंदमाताभगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता स्वरूप की पूजा।
16 अक्टूबर 2026, शुक्रवारछठा दिन (षष्ठी)माँ कात्यायनीमहिषासुर का वध करने वाली और ऋषि कात्यायन की पुत्री।
17 अक्टूबर 2026, शनिवारसातवां दिन (सप्तमी)माँ कालरात्रिदुष्टों का नाश करने वाली, भय से मुक्ति दिलाने वाली देवी।
18 अक्टूबर 2026, रविवारआठवां दिन (अष्टमी)माँ महागौरीइस दिन से अष्टमी का पूजन और कुछ स्थानों पर विशेष हवन आरंभ।
19 अक्टूबर 2026, सोमवारनौवां दिन (महानवमी)माँ सिद्धिदात्रीमहागौरी और सिद्धिदात्री दोनों का मुख्य पूजन, कन्या पूजन और महाहवन।

4. महाष्टमी और महानवमी 2026: तिथियों का विशेष संयोग

साल 2026 के शारदीय नवरात्रि में तिथियों के क्षय और विस्तार के चलते एक विशेष ज्योतिषीय स्थिति बन रही है। इस बार दुर्गा अष्टमी और महानवमी दोनों मुख्य रूप से 19 अक्टूबर 2026 को ही मनाई जा रही हैं।

  • दुर्गा अष्टमी (19 अक्टूबर): इस दिन माँ महागौरी की विशेष पूजा की जाती है। बहुत से घरों में कुलदेवी की पूजा के साथ-साथ इस दिन उपवास का पारण और कन्या पूजन किया जाता है।
  • महानवमी (19 अक्टूबर): इसी दिन माँ सिद्धिदात्री की भी पूजा होगी जो भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करती हैं। नवरात्रि के पूर्ण समापन की आहुति और विशेष महाहवन इसी दिन संपन्न किया जाएगा।

जो लोग अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं, वे सुबह के समय पूजन कर सकते हैं और जो नवमी को करते हैं, वे दोपहर या शुभ मुहूर्त में कन्याओं को भोजन कराकर माता का आशीर्वाद ले सकते हैं।


5. विजयादशमी (दशहरा) 2026 की तारीख

शारदीय नवरात्रि की समाप्ति के ठीक अगले दिन 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को देश भर में विजयादशमी यानी दशहरा का त्योहार मनाया जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध करके माता सीता को मुक्त कराया था और धरती को अधर्म से मुक्ति दिलाई थी। इसके साथ ही, इसी दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से बचाया था। इस दिन को “बुराई पर अच्छाई की जीत” और “अधर्म पर धर्म की विजय” के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। देश के कोने-कोने में इस दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।


6. घटस्थापना की सरल पूजा विधि और सामग्री

नवरात्रि की पूजा पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ की जानी चाहिए। यहाँ घटस्थापना की सरल विधि दी गई है जिसे आप आसानी से घर पर कर सकते हैं:

आवश्यक सामग्री:

  • मिट्टी या तांबे का कलश, साफ मिट्टी और जौ (जवारे बोने के लिए)।
  • गंगाजल, कलावा (मौली), रोली, अक्षत (बिना टूटे चावल)।
  • कलश में रखने के लिए सिक्का, सुपारी, लौंग, इलायची और सर्वऔषधि।
  • आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते।
  • एक पानी वाला नारियल और उस पर लपेटने के लिए लाल कपड़ा या चुनरी।
  • माता की चौकी के लिए लाल कपड़ा, फल, फूल, मिठाई और धूप-दीप।

पूजा विधि स्टेप-बाय-स्टेप:

  1. स्थान की सफाई: नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा घर को साफ कर गंगाजल छिड़कें।
  2. चौकी स्थापना: एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  3. जौ बोना: एक मिट्टी के बड़े पात्र में थोड़ी साफ मिट्टी डालें और उसमें जौ के बीज बिखेरें। फिर ऊपर से हल्की मिट्टी की परत और पानी का छिड़काव करें।
  4. कलश की तैयारी: तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। कलश के अंदर गंगाजल, जल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें।
  5. पल्लव और नारियल: कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें। नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलावे से बांध लें और उसे कलश के ऊपर स्थापित करें।
  6. स्थापना और संकल्प: इस तैयार कलश को जौ वाले पात्र के ठीक बीच में रख दें। हाथ में अक्षत और फूल लेकर नौ दिनों के व्रत और पूजा का संकल्प लें और माँ दुर्गा का आह्वान करें।

7. माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों का धार्मिक महत्व और दिव्य मंत्र

नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी के एक विशिष्ट स्वरूप की पूजा होती है, जो मनुष्य के जीवन में अलग-अलग गुणों और शक्तियों का संचार करते हैं:

1. माँ शैलपुत्री (प्रथम दिन)

  • महत्व: यह स्थिरता और दृढ़ता की प्रतीक हैं। इनकी पूजा से जीवन में स्थिरता आती है।
  • मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

2. माँ ब्रह्मचारिणी (द्वितीय दिन)

  • महत्व: यह तप, ज्ञान और वैराग्य की देवी हैं। इनकी साधना से आंतरिक शक्ति और संयम बढ़ता है।
  • मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

3. माँ चंद्रघंटा (तृतीय दिन)

  • महत्व: यह शांति और कल्याण की देवी हैं, लेकिन अन्याय के खिलाफ इनका रूप अत्यंत उग्र हो जाता है। यह नकारात्मक शक्तियों को दूर रखती हैं।
  • मंत्र: ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः॥

4. माँ कुष्मांडा (चतुर्थ दिन)

  • महत्व: माँ की मंद मुस्कान से ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई थी। इनकी पूजा से आयु, यश और स्वास्थ्य का लाभ होता है।
  • मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

5. माँ स्कंदमाता (पंचम दिन)

  • महत्व: कार्तिकेय की माता होने के कारण यह भक्तों पर पुत्रवत स्नेह लुटाती हैं। इनकी कृपा से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है और संतान सुख मिलता है।
  • मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

6. माँ कात्यायनी (षष्ठ दिन)

  • महत्व: यह महिषासुर मर्दिनी हैं। विवाह योग्य कन्याओं के विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए इनकी पूजा अचूक मानी जाती है।
  • मंत्र: ॐ देवी कात्यायण्यै नमः॥

7. माँ कालरात्रि (सप्तमी दिन)

  • महत्व: यह देवी का अत्यंत भयानक स्वरूप है, लेकिन यह केवल दुष्टों के लिए है। अपने भक्तों के लिए यह अत्यंत शुभ फल देने वाली हैं, इसीलिए इन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है।
  • मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

8. माँ महागौरी (अष्टमी दिन)

  • महत्व: कठिन तपस्या के बाद इनका वर्ण पूर्णतः गौर हो गया था। यह पवित्रता, शांति और शांति की देवी हैं। इनकी पूजा से सभी पाप धुल जाते हैं।
  • मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

9. माँ सिद्धिदात्री (नवमी दिन)

  • महत्व: यह सभी प्रकार की सिद्धियों और अष्ट सिद्धियों को देने वाली देवी हैं। स्वयं भगवान शिव ने भी इनसे ही सिद्धियाँ प्राप्त की थीं।
  • मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

8. कन्या पूजन (कुमारी पूजन) की विधि और नियम

नवरात्रि की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक कि कन्या पूजन न किया जाए। सनातन परंपरा में 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को साक्षात माँ दुर्गा का स्वरूप माना गया है।

  • कन्याओं की संख्या: कन्या पूजन में कम से कम 9 कन्याओं को आमंत्रित करना चाहिए। उनके साथ एक छोटे बालक (जिन्हें लांगुरिया या भैरव का रूप माना जाता है) को भी बिठाना अनिवार्य होता है।
  • पूजन विधि: जब कन्याएं घर आएं, तो सबसे पहले उनके पैर स्वच्छ पानी या दूध से धोएं। उन्हें साफ आसन पर बिठाएं और माथे पर कुमकुम व अक्षत का तिलक लगाएं।
  • भोजन: कन्याओं को पूरी, काले चने की सब्जी, सूजी का हलवा और फल श्रद्धापूर्वक परोसें।
  • दक्षिणा और विदाई: भोजन के बाद कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें, उन्हें सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, वस्त्र या लाल चुनरी भेंट करें और खुशी-खुशी विदा करें।

9. नवरात्रि के दौरान क्या करें और क्या न करें?

नौ दिनों की इस पावन अवधि में कुछ विशेष नियमों का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है:

क्या करें:

  • रोजाना सुबह और शाम माता रानी की आरती करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
  • घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाएं और आम के पत्तों का तोरण लगाएं।
  • यदि अखंड ज्योति जलाई है, तो घर को कभी भी खाली या अकेला न छोड़ें।
  • ब्रह्मचर्य के नियमों का पूरी तरह पालन करें।

क्या न करें:

  • घर में पूरी तरह तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रवेश वर्जित रखें।
  • इन नौ दिनों में नाखून काटना, बाल कटवाना और दाढ़ी बनवाना अशुभ माना जाता है।
  • किसी के प्रति मन में कटुता, क्रोध या द्वेष की भावना न लाएं और न ही किसी का अनादर करें।
  • चमड़े की वस्तुओं (जैसे बेल्ट, पर्स, जूते) का उपयोग पूजा के समय न करें।

शारदीय नवरात्रि का यह पावन पर्व आपके और आपके परिवार के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए, माँ जगदम्बा से यही प्रार्थना है। जय माता दी!

शारदीय नवरात्रि 2026 से जुड़े मुख्य सवाल (FAQs)

Q1. साल 2026 में शारदीय नवरात्रि कब से शुरू हो रहे हैं?

Ans. वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रही है। इसी दिन प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाएगी।

Q2. साल 2026 में दशहरा (विजयादशमी) किस तारीख को है?

Ans. इस साल विजयादशमी यानी दशहरा का महापर्व 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन रावण दहन और शस्त्र पूजा का विधान है।

Q3. क्या इस साल नवरात्रि 8 दिनों की है या 9 दिनों की?

Ans. पंचांग की गणना के अनुसार, इस साल नवरात्रि पूरे 9 दिनों की ही रहेगी। हालांकि, तिथियों के विशेष संयोग के कारण अष्टमी और नवमी तिथि का पूजन एक ही दिन यानी 19 अक्टूबर 2026 को पड़ रहा है, लेकिन माता के सभी नौ स्वरूपों की पूजा पूरे नौ दिनों (11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर) तक विधि-विधान से की जाएगी।

Q4. घटस्थापना (कलश स्थापना) के लिए सबसे शुभ मुहूर्त कौन सा है?

Ans. 11 अक्टूबर 2026 को कलश स्थापना के लिए दो मुख्य मुहूर्त हैं:

  • सुबह का मुख्य मुहूर्त: सुबह 06:31 बजे से सुबह 10:27 बजे तक।
  • अभिजीत मुहूर्त (दोपहर): दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक।

Q5. अष्टमी और नवमी तिथि के व्रत और कन्या पूजन की सही तारीख क्या है?

Ans. साल 2026 में महाष्टमी और महानवमी दोनों मुख्य रूप से 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को मनाई जाएंगी। जो लोग अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं, वे इस दिन सुबह के समय और जो नवमी को करते हैं, वे दोपहर के शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन संपन्न कर सकते हैं।

Q6. क्या नवरात्रि के दौरान बाल, दाढ़ी या नाखून कटवा सकते हैं?

Ans. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों तक पवित्रता और साधना का माहौल रहता है। इसलिए इन दिनों में बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना और नाखून काटना वर्जित माना जाता है। यदि संभव हो, तो नवरात्रि शुरू होने से पहले ही ये कार्य कर लेने चाहिए।

Q7. कन्या पूजन में बेटियों की उम्र कितनी होनी चाहिए और उनके साथ बालक का बैठना क्यों जरूरी है?

Ans. कन्या पूजन के लिए 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को आमंत्रित करना सबसे उत्तम माना जाता है। कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को बिठाना अनिवार्य होता है, जिसे भैरव बाबा या लांगुरिया का रूप माना जाता है। उनके बिना माँ दुर्गा की पूजा अधूरी मानी जाती है।

Q8. यदि कोई पूरे 9 दिन का व्रत न रख पाए, तो कौन से दिन उपवास रखना चाहिए?

Ans. यदि आप स्वास्थ्य या किसी अन्य कारण से पूरे नौ दिन व्रत नहीं रख सकते, तो नवरात्रि के पहले दिन (प्रतिपदा) और आठवें दिन (अष्टमी) का व्रत रखना बेहद फलदायी माना जाता है। इसे ‘जोड़ा व्रत’ भी कहा जाता है।

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