8th Pay Commission: 8वां वेतन आयोग, फिटमेंट फैक्टर, पेंशन रिवीजन और भत्ते: कब लागू होगी नई सैलरी?
8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) का गठन केंद्र सरकार द्वारा नवंबर 2025 में आधिकारिक रूप से कर दिया गया है, जिसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित यह आयोग 8th Central Pay Commission (8CPC) वर्तमान में देश के विभिन्न शहरों (चंडीगढ़, चेन्नई, बेंगलुरु) में कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संघों के साथ परामर्श दौर (Consultation Phase) का संचालन कर रहा है。 आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए आवंटित 18 महीनों में से 10 महीने से अधिक का समय पूरा हो चुका है, और उम्मीद जताई जा रही है कि इसकी अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 के मध्य तक केंद्र सरकार को प्रस्तुत की जाएगी।
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8वां वेतन आयोग, फिटमेंट फैक्टर, पेंशन रिवीजन और भत्ते: एक विस्तृत और व्यापक विश्लेषण
भारतीय प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों तथा सामाजिक सुरक्षा (पेंशन) की समीक्षा के लिए हर दस वर्ष में एक केंद्रीय वेतन आयोग (Pay Commission) का गठन किया जाता है। इसी कड़ी में, 7वें वेतन आयोग की दस वर्षीय अवधि समाप्त होने के बाद, केंद्र सरकार ने आधिकारिक रूप से 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) की घोषणा कर इसके कामकाज को गति दे दी है।
इस आयोग के निर्णय से सीधे तौर पर देश के लगभग 49 लाख से अधिक सेवारत केंद्रीय कर्मचारियों और 68 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के जीवन स्तर पर सीधा असर पड़ने वाला है। कर्मचारी संगठनों द्वारा जहां न्यूनतम वेतन को बढ़ाने के लिए उच्च फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की पुरजोर मांग की जा रही है, वहीं पेंशनभोगी संगठन सम्मानजनक पेंशन रिवीजन (Pension Revision) और भत्तों में सुधार की लड़ाई लड़ रहे हैं।
इस व्यापक और विस्तृत लेख में हम 8वें वेतन आयोग की संरचना, टाइमलाइन, फिटमेंट फैक्टर का गणित, पेंशन संशोधन के नियम, भत्तों में होने वाले बदलावों और इससे जुड़े तमाम महत्वपूर्ण कानूनी व प्रशासनिक पहलुओं का गहन विश्लेषण करेंगे।
🗒 1. 8वें वेतन आयोग की पृष्ठभूमि, संरचना और वर्तमान स्थिति
ऐतिहासिक रूप से, भारत में पहला वेतन आयोग वर्ष 1946 में गठित किया गया था। तब से लेकर अब तक वेतन संरचना को आधुनिक आर्थिक मानकों और महंगाई दर के अनुरूप ढालने के लिए समय-समय पर वेतन आयोगों का गठन होता रहा है।
🏛 आयोग की आधिकारिक संरचना
8वें केंद्रीय वेतन आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली के जनपथ स्थित चंदरलोक बिल्डिंग में स्थापित है। सरकार ने इसके संचालन के लिए देश के शीर्ष विशेषज्ञों को इसमें शामिल किया है:
- अध्यक्ष (Chairperson): जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश)。
- सदस्य (Part-time Member): प्रो. पुलक घोष (वित्त विशेषज्ञ और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य)。
- सदस्य-सचिव (Member-Secretary): श्री पंकज जैन (पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी)。
⏳ क्रियान्वयन की समय-सीमा (Timeline)
केंद्रीय कैबिनेट ने आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया है। आयोग ने देशव्यापी परामर्श प्रक्रिया (Consultation Process) शुरू कर दी है। सितंबर 2026 के मध्य में आयोग की टीम ने चंडीगढ़ का दौरा कर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के क्षेत्रीय कर्मचारी संगठनों से मुलाकात की, जिसके बाद अगली बड़ी बैठकें 7 और 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में प्रस्तावित हैं。 हालांकि, रिपोर्ट सौंपने की अंतिम तिथि मध्य 2027 निर्धारित है, लेकिन वित्तीय गणनाओं और एरियर (Arrears) के निर्धारण के लिए इसकी संदर्भ तिथि 1 जनवरी 2026 ही मानी जाएगी।
📈 2. फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) क्या है और इस पर क्या है विवाद?
8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों की सैलरी में कितनी वृद्धि होगी, यह पूरी तरह से फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) पर निर्भर करता है। सरल शब्दों में कहें तो, फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला या ‘मल्टीप्लायर’ (Multiplier) है जिसका उपयोग पिछले वेतन आयोग के मूल वेतन (Basic Pay) को नए वेतन आयोग के संशोधित मूल वेतन में बदलने के लिए किया जाता है।
📊 पिछले वेतन आयोगों का ट्रेंड:
- 6ठा वेतन आयोग: इसमें पहली बार फिटमेंट फैक्टर की अवधारणा को व्यवस्थित रूप से पेश किया गया।
- 7वां वेतन आयोग: सरकार ने 2.57x का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसके कारण कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर सीधे ₹18,000 प्रति माह हो गया था।
🔎 8वें वेतन आयोग के लिए संभावित बनाम मांग का गणित
वर्तमान में फिटमेंट फैक्टर को लेकर तीन अलग-अलग परिदृश्य (Scenarios) और मांगें सामने आ रही हैं:
- विशेषज्ञों और शुरुआती प्रस्तावों का अनुमान (2.28x से 2.46x): कुछ आंतरिक नीतिगत विश्लेषणों के अनुसार, यदि सरकार राजकोषीय विवेक (Fiscal Prudence) और आर्थिक संतुलन बनाए रखती है, तो 2.28x का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया जा सकता है। यदि इसे लागू किया जाता है, तो न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर लगभग ₹41,040 हो जाएगा।
- कर्मचारी यूनियनों की आधिकारिक मांग (3.25x से 4.0x): शिव गोपाल मिश्रा की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय परिषद (स्टाफ साइड) और संयुक्त सलाहकार तंत्र (JCM) की मसौदा समिति ने शुरुआत में 3.25x फिटमेंट फैक्टर की वकालत की थी। वहीं, हालिया परामर्श बैठकों में कुछ आक्रामक कर्मचारी यूनियनों ने महंगाई के उच्च स्तर को देखते हुए इसे 4.0x करने की मांग रखी है, जिससे न्यूनतम मूल वेतन सीधे ₹72,000 हो जाए।
📊 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर न्यूनतम मूल वेतन का सटीक गणित (Python गणना):
नीचे दी गई तालिका स्पष्ट करती है कि अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर वर्तमान मूल वेतन किस प्रकार बदल सकता है:
| वर्तमान मूल वेतन (7th CPC) | 1.92x फिटमेंट पर नई बेसिक | 2.28x फिटमेंट पर नई बेसिक | 2.57x फिटमेंट पर नई बेसिक | 2.86x फिटमेंट पर नई बेसिक | 3.25x फिटमेंट पर नई बेसिक |
|---|---|---|---|---|---|
| ₹18,000 (Level 1) | ₹34,560 | ₹41,040 | ₹46,260 | ₹51,480 | ₹58,500 |
| ₹25,000 (Level 2) | ₹48,000 | ₹56,999 | ₹64,249 | ₹71,500 | ₹81,250 |
| ₹44,900 (Level 7) | ₹86,208 | ₹102,371 | ₹115,393 | ₹128,414 | ₹145,925 |
| ₹67,700 (Level 11) | ₹129,984 | ₹154,356 | ₹173,989 | ₹193,622 | ₹220,025 |
(नोट: ऊपर दिए गए आंकड़े विशुद्ध रूप से गणितीय गणनाओं और संभावित मॉडलों पर आधारित हैं। सरकार अंतिम निर्णय आयोग की रिपोर्ट के बाद ही लेगी।)
💡 3. क्या इस बार बदल जाएगा वेतन तय करने का फॉर्मूला?
वेतन आयोग की हालिया चर्चाओं से यह संकेत भी मिल रहे हैं कि जरूरी नहीं कि सरकार केवल पारंपरिक फिटमेंट फैक्टर पर ही निर्भर रहे। नीति निर्माताओं के बीच वेतन संशोधन के लिए कुछ नए विकल्पों और वैकल्पिक सिद्धांतों पर भी विचार किया जा रहा है:
- वेतन मैट्रिक्स का सरलीकरण: कर्मचारी संगठनों की मांग है कि वर्तमान में मौजूद 18 स्तरों (Levels) के जटिल पे-मैट्रिक्स को कम किया जाए और निचले स्तर के वेतन ग्रेडों को आपस में मर्ज (Merge) किया जाए ताकि असमानता कम हो सके।
- ऑटोमैटिक पे रिवीज़न फॉर्मूला (Aykroyd Formula): भूतकाल में यह सुझाव दिया गया था कि जब भी महंगाई भत्ता (DA) मूल वेतन के 50% या उससे अधिक को पार कर जाए, तो कर्मचारियों के वेतन में स्वतः (Automatically) संशोधन हो जाना चाहिए, ताकि हर 10 साल में नए वेतन आयोग के गठन की आवश्यकता ही न पड़े। हालांकि, आयोग इस बार इस ऑटोमैटिक फॉर्मूले को नए सुरक्षा मानकों के साथ लागू करने की सिफारिश कर सकता है।
📊 4. पेंशन रिवीजन (Pension Revision): पेंशनभोगियों के लिए क्या बदलेगा?
8वें वेतन आयोग के गठन से देश के 68 लाख से अधिक सेवानिवृत्त केंद्रीय कर्मचारियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों (Family Pensioners) को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। कर्मचारियों की तरह ही पेंशनभोगियों की न्यूनतम और अधिकतम पेंशन का निर्धारण भी नए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर ही किया जाएगा।
📌 न्यूनतम पेंशन में वृद्धि की उम्मीद:
7वें वेतन आयोग के तहत वर्तमान में न्यूनतम मूल पेंशन (Minimum Basic Pension) ₹9,000 प्रति माह निर्धारित है। 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर के आधार पर इसमें भारी बढ़ोतरी होने जा रही है:
- यदि 2.28x का न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर अपनाया जाता है, तो न्यूनतम पेंशन बढ़कर ₹20,520 हो जाएगी।
- यदि कर्मचारी संगठनों की मांग के अनुरूप उच्च फिटमेंट फैक्टर (2.86x) स्वीकार किया जाता है, तो न्यूनतम पेंशन ₹25,740 तक पहुंच सकती है।
- लेवल-7 के अधिकारियों (जैसे सेवानिवृत्त वरिष्ठ अनुभाग अधिकारी) की न्यूनतम पेंशन वर्तमान के ₹22,450 से बढ़कर सीधे ₹57,697 तक पहुँचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
⚠️ पेंशनर्स एसोसिएशन (REWA) की आपत्तियां और मांगें
रेलवे एम्प्लॉइज एंड पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन (REWA) और अन्य वरिष्ठ नागरिक संघों ने हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखकर आयोग के ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- पेंशन और वेतन का पूर्ण समतुल्यीकरण (Full Parity): पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन को नए सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के समान वेतन स्तर के आधार पर संशोधित किया जाए, ताकि वरिष्ठता का नुकसान न हो।
- अतिरिक्त पेंशन की आयु सीमा घटाना: वर्तमान व्यवस्था में 80 वर्ष की आयु पार करने के बाद मूल पेंशन में 20% की अतिरिक्त वृद्धि की जाती है। पेंशनभोगी संगठनों की मांग है कि बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं और घटती जीवन प्रत्याशा को देखते हुए इस अतिरिक्त वित्तीय सहायता की शुरुआत 65 या 70 वर्ष की आयु से ही कर दी जानी चाहिए।
- फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) में बढ़ोतरी: गैर-सीजीएचएस (Non-CGHS) क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनभोगियों के लिए वर्तमान चिकित्सा भत्ता केवल ₹1,000 प्रति माह है, जिसे बढ़ाकर ₹20,000 प्रति माह करने की मांग आयोग के समक्ष मजबूती से उठाई गई है।
➡️ 5. भत्तों (Allowances) का पुनर्गठन और महत्वपूर्ण मांगें
वेतन आयोग केवल मूल वेतन (Basic Pay) तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न प्रकार के भत्तों की समीक्षा और उनके स्लैब में भी आमूलचूल बदलाव करता है। 8वें वेतन आयोग में मुख्य रूप से निम्नलिखित भत्तों पर चर्चा केंद्रित है:
1. महंगाई भत्ता (Dearness Allowance – DA) और महंगाई राहत (DR)
वर्तमान में सेवारत कर्मचारियों को डीए (DA) और पेंशनभोगियों को डीआर (DR) दिया जाता है।
- मर्जर की मांग (DA Merger): माना जा रहा है कि क्रियान्वयन तिथि (जनवरी 2026) तक महंगाई भत्ता लगभग 70% के स्तर को छू सकता है। कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि इस बढ़े हुए डीए को नए मूल वेतन (Base Salary) में पूरी तरह मर्ज कर दिया जाए और 8वें वेतन आयोग के लागू होने के साथ ही डीए का मीटर पुनः 0% से शुरू किया जाए।
2. मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance – HRA)
7वें वेतन आयोग के नियमों के मुताबिक, शहरों को उनकी आबादी के आधार पर X, Y और Z श्रेणियों में बांटा गया है। वर्तमान में एचआरए की दरें क्रमशः 30%, 20% और 10% के अधिकतम स्तर पर हैं। 8वें वेतन आयोग में महंगाई के वास्तविक सूचकांक को देखते हुए इन स्लैब को संशोधित कर 35%, 25% और 15% करने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
3. अन्य महत्वपूर्ण भत्ते और सेवा शर्तें (Union Demands):
- सालाना वेतन वृद्धि (Annual Increment): वर्तमान में वार्षिक वेतन वृद्धि दर 3% है, जिसे कर्मचारी संगठनों ने बढ़ाकर 7% करने की मांग की है।
- लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment): सेवानिवृत्ति के समय अधिकतम 300 दिनों की अर्जित छुट्टी के बदले नकद भुगतान (Leave Encashment) की सीमा को बढ़ाकर 400 दिन करने का प्रस्ताव है।
- फैमिली यूनिट (Family Unit) का विस्तार: वेतन और न्यूनतम भत्तों के निर्धारण के लिए वर्तमान में परिवार की इकाई 3 सदस्यों की मानी जाती है। यूनियनों का तर्क है कि माता-पिता की जिम्मेदारी और बच्चों की उच्च शिक्षा के खर्च को देखते हुए इस ‘फैमिली यूनिट’ को बढ़ाकर 5 सदस्य किया जाना चाहिए।
- CGEGIS (केंद्रीय सरकारी कर्मचारी समूह बीमा योजना) संशोधन: इस बीमा योजना के तहत मिलने वाली सुरक्षा राशि और उसके प्रीमियम के स्लैब को दशकों बाद आधुनिक जीवन लागत के अनुसार संशोधित करने की मांग भी इस बार तेजी से उठी है।
📊 6. राजकोषीय प्रभाव और अर्थव्यवस्था पर इसका असर
8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करना केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा वित्तीय और प्रशासनिक कार्य है। इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर दोतरफा प्रभाव देखने को मिल सकता है:
⚠️ सरकार पर वित्तीय बोझ (Fiscal Burden)
वेतन और पेंशन में 20% से 35% तक की संभावित बढ़ोतरी के कारण सरकारी खजाने पर सालाना हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सरकार को इस अतिरिक्त खर्च को संतुलित करने के लिए अपने कर राजस्व (Tax Revenue) को बढ़ाना होगा या अन्य विकासात्मक योजनाओं के पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में सामंजस्य स्थापित करना होगा। यही कारण है कि वित्त मंत्रालय के अधिकारी और आयोग के सदस्य ‘राजकोषीय विवेक’ (Fiscal Prudence) का हवाला देते हुए फिटमेंट फैक्टर को बहुत अधिक बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।
📈 बाजार में मांग और खपत में वृद्धि (Economic Boost)
सकारात्मक पक्ष की बात करें तो, जब 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हाथ में अधिक पैसा (Disposable Income) आएगा, तो बाजार में उपभोक्ता वस्तुओं, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में मांग (Demand) तेजी से बढ़ेगी। यह देश की जीडीपी (GDP) वृद्धि दर को गति देने में मददगार साबित हो सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
8वां केंद्रीय वेतन आयोग केवल सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों परिवारों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील ढांचा है。 हालांकि, सोशल मीडिया और अनधिकृत प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे 4.0 फिटमेंट फैक्टर या वेतन के सीधे चार गुना होने के दावे अभी केवल कयास और यूनियनों के शुरुआती प्रस्ताव मात्र हैं। आधिकारिक तौर पर अंतिम फिटमेंट फैक्टर, वेतन संरचना और पेंशन संशोधन का स्वरूप जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई समिति की अंतिम रिपोर्ट और उसके बाद केंद्रीय कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। प्रभावित कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले आधिकारिक सरकारी अधिसूचनाओं (Official Gazettes) पर ही भरोसा करना चाहिए।
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission), फिटमेंट फैक्टर, पेंशन संशोधन और भत्तों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):
Q1. 8वें वेतन आयोग के गठन की वर्तमान स्थिति क्या है?
- उत्तर: केंद्र सरकार द्वारा नवंबर 2025 में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का आधिकारिक रूप से गठन कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में यह आयोग वर्तमान में विभिन्न राज्यों और शहरों का दौरा कर कर्मचारी यूनियनों तथा पेंशनभोगी संगठनों के साथ परामर्श (Consultation Phase) कर रहा है।
Q2. 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें कब से लागू मानी जाएंगी?
- उत्तर: वेतन आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए कैबिनेट द्वारा 18 महीने का समय दिया गया है। हालांकि आयोग की अंतिम रिपोर्ट मध्य 2027 तक आने की उम्मीद है, लेकिन वित्तीय गणनाओं, नए वेतनमान और एरियर (Arrears) के निर्धारण के लिए इसकी संदर्भ तिथि 1 जनवरी 2026 ही प्रभावी मानी जाएगी।
Q3. फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) क्या है और इस बार कितना होने की उम्मीद है?
- उत्तर: फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला या मल्टीप्लायर है जिसका उपयोग कर्मचारियों के पुराने मूल वेतन (7th CPC) को नए मूल वेतन में बदलने के लिए किया जाता है। वर्तमान में कर्मचारी यूनियनों द्वारा 3.25x से 4.0x तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग की जा रही है, जबकि सरकारी नीतिगत विशेषज्ञों के अनुसार राजकोषीय संतुलन बनाए रखने के लिए यह 2.28x से 2.57x के बीच तय हो सकता है।
Q4. 8वें वेतन आयोग के बाद न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Basic Pay) कितना हो जाएगा?
- उत्तर: 7वें वेतन आयोग के तहत वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 है। 8वें वेतन आयोग में यदि सरकार 2.28x फिटमेंट फैक्टर लागू करती है, तो न्यूनतम वेतन बढ़कर ₹41,040 हो जाएगा। यदि यूनियनों की न्यूनतम मांग 3.25x मान ली जाती है, तो यह बढ़कर ₹58,500 तक पहुंच सकता है।
Q5. पेंशनभोगियों के लिए पेंशन रिवीजन (Pension Revision) में क्या बदलाव होंगे?
- उत्तर: सेवारत कर्मचारियों की तरह पेंशनभोगियों की न्यूनतम मूल पेंशन भी नए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर संशोधित होगी। वर्तमान न्यूनतम पेंशन ₹9,000 से बढ़कर संभावित रूप से ₹20,520 (2.28x पर) या इससे अधिक हो सकती है। इसके अलावा पेंशनभोगी संघों ने बढ़ती उम्र के साथ अतिरिक्त पेंशन मिलने की आयु सीमा को 80 वर्ष से घटाकर 65 या 70 वर्ष करने की मांग की है।
Q6. क्या महंगाई भत्ता (DA) मूल वेतन में मर्ज (Merge) कर दिया जाएगा?
- उत्तर: कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में से एक यह है कि जनवरी 2026 की प्रभावी तिथि तक बढ़े हुए कुल महंगाई भत्ते (जो लगभग 70% तक पहुंचने का अनुमान है) को नए मूल वेतन (Base Salary) में पूरी तरह समाहित (Merge) कर दिया जाए और 8वें वेतन आयोग की शुरुआत के साथ डीए (DA) का मीटर पुनः 0% से शुरू किया जाए।
Q7. मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य भत्तों में क्या संशोधन प्रस्तावित हैं?
- उत्तर: शहरों की श्रेणियों (X, Y और Z) के आधार पर मिलने वाले वर्तमान अधिकतम एचआरए स्लैब (30%, 20%, 10%) को महंगाई के वास्तविक सूचकांक के अनुरूप बढ़ाकर 35%, 25% और 15% करने का प्रस्ताव है। साथ ही, सालाना इनक्रीमेंट रेट को 3% से बढ़ाकर 7% करने और फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) में भी भारी बढ़ोतरी की मांग की गई है।
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