UP Free Boring Yojana 2026: किसानों को मिलेगी मुफ्त बोरिंग और पंपसेट सब्सिडी, ऐसे भरें फॉर्म!

Uttar Pradesh Free Boring Yojana 2026 Registration Process and Minor Irrigation Scheme Details Banner

यूपी निःशुल्क बोरिंग योजना 2026: (निःशुल्क पंजीकरण) ऑनलाइन आवेदन फॉर्म, पात्रता और लाभार्थी सूची की पूरी जानकारी

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र को समृद्ध बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन्हीं में से एक बेहद लोकप्रिय और लाभकारी योजना है—मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश निःशुल्क बोरिंग योजना (UP Free Boring Yojana)। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के लघु और सीमांत किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बोरिंग की सुविधा प्रदान करना है, ताकि उन्हें पानी की कमी के कारण फसल खराब होने की समस्या से न जूझना पड़े।

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई ऐसे छोटे किसान हैं जिनके पास सिंचाई के आधुनिक साधन (जैसे ट्यूबवेल या पंपसेट) उपलब्ध नहीं हैं। पैसे की कमी के कारण वे खुद का बोरिंग नहीं करा पाते हैं, जिससे उनकी फसलों की पैदावार प्रभावित होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को मुफ्त बोरिंग की सेवा और पंपसेट खरीदने के लिए भारी सब्सिडी (वित्तीय अनुदान) प्रदान कर रही है।

यदि आप भी उत्तर प्रदेश के एक किसान हैं और अपने खेतों के लिए इस सिंचाई योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस विस्तृत लेख में हम आपको UP Nishulk Boring Yojana 2026 से जुड़ी प्रत्येक छोटी-बड़ी जानकारी जैसे—योजना का उद्देश्य, मिलने वाली सब्सिडी राशि, आवश्यक पात्रता (Eligibility), जरूरी दस्तावेज (Documents List) और ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यम से निःशुल्क पंजीकरण (Registration Process) करने की पूरी चरण-दर-चरण प्रक्रिया विस्तार से बताएंगे।


Table of Contents

उत्तर प्रदेश निःशुल्क बोरिंग योजना 2026: एक नजर में (Overview)

योजना की मूल रूपरेखा और 2026 के नवीनतम नियमों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेप में समझें:

विवरण (Particulars)मुख्य जानकारी (Key Details)
योजना का नामउत्तर प्रदेश निःशुल्क बोरिंग योजना (UP Free Boring Scheme)
किसके द्वारा शुरू की गईमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश सरकार
संबंधित विभागलघु सिंचाई विभाग (Minor Irrigation Department), उत्तर प्रदेश
मुख्य लाभार्थीउत्तर प्रदेश के लघु (Small) और सीमांत (Marginal) किसान
योजना का लाभखेतों में मुफ्त बोरिंग की सुविधा + पंपसेट पर सब्सिडी
पंजीकरण का शुल्कपूरी तरह से निःशुल्क (Free Registration)
आवेदन का माध्यमऑनलाइन (Online Portal) एवं ऑफलाइन (विकास खंड कार्यालय)
आधिकारिक वेबसाइटMinor Irrigation UP Portal

यूपी मुफ्त बोरिंग योजना का मुख्य उद्देश्य (Objective of the Scheme)

इस योजना को शुरू करने के पीछे उत्तर प्रदेश सरकार के कई दूरगामी और कल्याणकारी उद्देश्य हैं:

  1. सिंचाई की समस्या का समाधान: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भूजल स्तर या नहरों की कमी के कारण किसानों को समय पर पानी नहीं मिल पाता। मुफ्त बोरिंग के जरिए किसानों को अपने खेत में ही पानी का स्थायी स्रोत मिल जाता है।
  2. किसानों की आत्मनिर्भरता: इस योजना के बाद किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जमींदारों या दूसरों के ट्यूबवेल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और न ही भारी किराया चुकाना पड़ता है।
  3. फसल उत्पादन में वृद्धि: जब खेतों को समय पर और पर्याप्त पानी मिलेगा, तो फसलों की गुणवत्ता बेहतर होगी और पैदावार में भारी बढ़ोतरी होगी।
  4. आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को संबल: लघु और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वे ₹20,000 से ₹40,000 खर्च करके बोरिंग करवा सकें। सरकार इस खर्च को खुद उठाकर उनका आर्थिक बोझ कम करती है।

श्रेणीवार मिलने वाली सब्सिडी और वित्तीय सहायता (Subsidies & Financial Aid)

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत किसानों की जोत (भूमि के आकार) और उनकी जातिगत श्रेणी के आधार पर अलग-अलग वित्तीय सहायता और सब्सिडी तय की है। योजना के तहत मिलने वाला लाभ इस प्रकार है:

1. सीमांत किसान (Marginal Farmers – जिनके पास 1 हेक्टेयर से कम जमीन है):

  • सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (General / OBC): इन किसानों को बोरिंग के निर्माण (मजदूरी और सामग्री) के लिए अधिकतम ₹5,000 तक का अनुदान सरकार द्वारा दिया जाता है।
  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC / ST): इन वर्गों के सीमांत किसानों को बोरिंग निर्माण के लिए अधिकतम ₹10,000 तक की वित्तीय सहायता दी जाती है।

2. लघु किसान (Small Farmers – जिनके पास 1 से 2 हेक्टेयर तक जमीन है):

  • लघु किसानों को उनकी श्रेणी के अनुसार बोरिंग कार्य के लिए अधिकतम ₹7,000 तक की सरकारी सहायता प्रदान की जाती है।

3. पंपसेट खरीदने पर अतिरिक्त सब्सिडी (Subsidies on Pumpsets):

मुफ्त बोरिंग की सुविधा देने के साथ-साथ, सरकार किसानों को खेतों से पानी निकालने के लिए पंपसेट (Pump Sets) खरीदने पर भी बैंक लोन और सब्सिडी की व्यवस्था करती है:

  • सामान्य/ओबीसी श्रेणी के किसानों के लिए: पंपसेट खरीदने पर अधिकतम ₹4,500 तक का अनुदान।
  • एससी/एसटी श्रेणी के किसानों के लिए: पंपसेट खरीदने पर अधिकतम ₹6,000 तक का भारी अनुदान दिया जाता है।
  • नोट: यदि किसान एचडीपीई (HDPE) पाइप का उपयोग करना चाहता है, तो उसे सिंचाई विभाग द्वारा अतिरिक्त पाइप भी रियायती दरों पर या मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं।

निःशुल्क बोरिंग योजना के लिए पात्रता मापदंड (Eligibility Criteria)

इस योजना का लाभ केवल उन्हीं आवेदकों को मिल सकता है जो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित निम्नलिखित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं:

  • स्थायी निवासी: आवेदक किसान अनिवार्य रूप से उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • किसान की श्रेणी: आवेदक केवल लघु (Small) या सीमांत (Marginal) वर्ग का किसान होना चाहिए। बड़े भूस्वामियों (जिनके पास 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि है) को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
  • न्यूनतम भूमि सीमा: किसान के पास कृषि कार्य के लिए न्यूनतम 0.2 हेक्टेयर (लगभग 1 बीघा) खेती योग्य भूमि होनी चाहिए। यदि किसी किसान के पास इतनी जमीन नहीं है, तो दो या तीन किसान मिलकर ‘समूह (Group)’ बनाकर भी सामूहिक बोरिंग के लिए आवेदन कर सकते हैं।
  • अन्य योजनाओं का लाभ न लिया हो: आवेदक किसान ने पहले सरकार की किसी अन्य बोरिंग योजना (जैसे नाबार्ड या केंद्रीय सिंचाई योजना) के तहत लाभ न लिया हो।
  • डार्क ज़ोन में जमीन न हो: सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि किसान का खेत किसी ऐसे क्षेत्र (Dark Zone/Over-exploited block) में नहीं होना चाहिए जहाँ सरकार ने गिरते भूजल स्तर के कारण बोरिंग करने पर कानूनी प्रतिबंध लगा रखा हो।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Documents Required for UP Free Boring)

निःशुल्क पंजीकरण फॉर्म भरते समय या कार्यालय में जमा करते समय किसानों के पास निम्नलिखित दस्तावेजों का होना अनिवार्य है:

  1. आधार कार्ड (Aadhaar Card): किसान की पहचान के सत्यापन के लिए।
  2. भूमि के कागजात (Land Records): खेत की नवीनतम खतौनी (भूलेख रिकॉर्ड), खसरा नंबर और जमाबंदी की प्रमाणित प्रति।
  3. जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate): ओबीसी, एससी और एसटी श्रेणी के किसानों के लिए आरक्षण और अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ लेने हेतु आवश्यक (सामान्य वर्ग के लिए अनिवार्य नहीं)।
  4. आय प्रमाण पत्र (Income Certificate): लघु/सीमांत किसान होने के प्रमाण स्वरूप तहसीलदार द्वारा जारी नवीनतम आय प्रमाण पत्र।
  5. निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate): उत्तर प्रदेश का निवासी होने का प्रमाण (या बिजली बिल/वोटर आईडी)।
  6. बैंक खाता पासबुक (Bank Passbook): यदि पंपसेट की सब्सिडी आनी हो, तो खाता आधार से लिंक होना चाहिए (DBT सक्रिय)।
  7. पासपोर्ट साइज फोटो: आवेदन फॉर्म पर चिपकाने या ऑनलाइन अपलोड करने के लिए दो नवीनतम रंगीन फोटो।
  8. मोबाइल नंबर: जो आधार से लिंक हो ताकि योजना के अपडेट मिल सकें।

यूपी निःशुल्क बोरिंग योजना 2026: आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Application Process)

उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए इस प्रक्रिया को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से खुला रखा है। किसान अपनी सुविधा के अनुसार नीचे दी गई विधियों से आवेदन कर सकते हैं:

विधि 1: ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया (सबसे सरल और प्रचलित माध्यम)

चूंकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच कम होती है, इसलिए ऑफलाइन माध्यम सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है:

  1. फॉर्म प्राप्त करें: सबसे पहले किसान को अपने नजदीकी विकास खंड कार्यालय (Block Office) या लघु सिंचाई विभाग (Minor Irrigation Department) के कार्यालय में जाना होगा। वहाँ से “निःशुल्क बोरिंग योजना आवेदन फॉर्म” प्राप्त करें। (आप इसे आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड भी कर सकते हैं)।
  2. जानकारी भरें: फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियां जैसे—किसान का नाम, पिता का नाम, ग्राम पंचायत का नाम, विकास खंड, जिला, आधार नंबर, मोबाइल नंबर और अपनी जमीन (खतौनी) का विवरण ध्यानपूर्वक और साफ अक्षरों में भरें।
  3. दस्तावेज संलग्न करें: आवेदन फॉर्म के साथ ऊपर बताए गए सभी आवश्यक दस्तावेजों (आधार, खतौनी, जाति प्रमाण पत्र आदि) की स्व-प्रमाणित (Self-Attested) फोटोकॉपी संलग्न (Attach) करें।
  4. फोटो चिपकाएं: निर्धारित स्थान पर अपनी पासपोर्ट साइज फोटो चिपकाएं और नीचे हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लगाएं।
  5. फॉर्म जमा करें: पूरी तरह से तैयार आवेदन फॉर्म को अपने ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी (BDO) या लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता/अवर अभियंता (JE/AE) के पास जमा कर दें।
  6. रसीद लें: फॉर्म जमा करने के बाद वहां के कर्मचारी से एक पावती रसीद (Acknowledgement Receipt) अवश्य लें, जिसमें आपका आवेदन नंबर दर्ज हो।

विधि 2: ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया (e-Mitra / CSC / Self Portal)

यदि आप इंटरनेट का उपयोग करना जानते हैं या आपके पास कोई जन सेवा केंद्र (CSC) है, तो आप ऑनलाइन पंजीकरण भी कर सकते हैं:

  1. लघु सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट mifb.up.gov.in पर जाएं।
  2. होमपेज पर “किसान पंजीकरण / ऑनलाइन आवेदन” (Farmer Registration) के लिंक पर क्लिक करें।
  3. अपने मोबाइल नंबर और आधार की मदद से पोर्टल पर एक नया अकाउंट (User Profile) बनाएं।
  4. लॉगिन करने के बाद “मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना – निःशुल्क बोरिंग” का चयन करें।
  5. स्क्रीन पर खुले डिजिटल फॉर्म में अपनी सभी व्यक्तिगत और भूलेख (Land Details) जानकारियां दर्ज करें।
  6. अपने सभी दस्तावेजों को पीडीएफ (PDF) या जेपीईजी (JPEG) फॉर्मेट में सही साइज में अपलोड करें।
  7. फॉर्म को अच्छी तरह जांचने के बाद “Submit” बटन पर क्लिक करें और भरे हुए फॉर्म का एक प्रिंटआउट निकालकर अपने पास सुरक्षित रख लें।

चयन प्रक्रिया और बोरिंग की विधि (Selection & Execution Process)

आपका आवेदन जमा होने के बाद विभाग निम्नलिखित चरणों में काम करता है:

  • भौतिक सत्यापन (Physical Verification): लघु सिंचाई विभाग के तकनीकी अधिकारी (अवर अभियंता) आपके गांव और खेत का दौरा करेंगे। वे जांच करेंगे कि आपकी जमीन डार्क जोन में तो नहीं है और आपके पास वास्तव में आवश्यक भूमि है या नहीं।
  • पात्रता सूची (Beneficiary List): सत्यापन में सही पाए गए किसानों की एक मेरिट/लाभार्थी सूची तैयार की जाएगी जिसे ब्लॉक कार्यालय के नोटिस बोर्ड और ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
  • बोरिंग की शुरुआत: सूची में नाम आने के बाद, विभाग द्वारा पंजीकृत ठेकेदारों या सरकारी रिग मशीनों के माध्यम से आपके खेत में बोरिंग का काम मुफ्त में शुरू करवा दिया जाएगा। बोरिंग पूरा होने के बाद आपको इसके सफल होने का एक प्रमाण पत्र भी दिया जाता है।

निष्कर्ष और किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

यूपी निःशुल्क बोरिंग योजना 2026 उत्तर प्रदेश के गरीब और मध्यम वर्गीय किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। पानी की उचित व्यवस्था होने से न केवल किसान साल में तीन-तीन फसलें उगा सकते हैं, बल्कि उनकी बाजार पर निर्भरता भी कम होती है।

सभी पात्र किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खरीफ या रबी की फसल के सीजन की शुरुआत से पहले ही अपने ब्लॉक कार्यालय में जाकर इसके लिए निःशुल्क पंजीकरण अवश्य करा लें, क्योंकि प्रत्येक ब्लॉक के लिए हर साल एक निश्चित ‘लक्ष्य (Target कोटा)’ निर्धारित होता है। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर आवेदन करने वाले किसानों को वरीयता दी जाती है।


उत्तर प्रदेश निःशुल्क बोरिंग योजना (UP Free Boring Scheme) 2026 से जुड़े कुछ सबसे मुख्य और अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs):

1. क्या यूपी निःशुल्क बोरिंग योजना के तहत पंजीकरण के लिए कोई फीस देनी पड़ती है?

नहीं। इस योजना के तहत पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क (Free Registration) है 💸। यदि कोई व्यक्ति या जन सेवा केंद्र संचालक आपसे फॉर्म जमा करने के नाम पर अतिरिक्त पैसों की मांग करता है, तो आप इसकी शिकायत लघु सिंचाई विभाग में कर सकते हैं।

2. इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसान के पास न्यूनतम कितनी जमीन होनी चाहिए?

योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास कम से कम 0.2 हेक्टेयर (लगभग 1 बीघा) कृषि योग्य भूमि होना अनिवार्य है। यदि किसी छोटे किसान के पास इससे कम जमीन है, तो वह अपने गाँव के अन्य छोटे किसानों के साथ मिलकर एक ‘समूह (Group)’ बना सकता है और सामूहिक बोरिंग के लिए संयुक्त आवेदन कर सकता है।

3. क्या इस योजना के तहत बड़े किसानों को भी लाभ मिल सकता है?

नहीं। यह योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर लघु (Small) और सीमांत (Marginal) किसानों के लिए ही बनाई गई है। जिन किसानों के पास 2 हेक्टेयर (लगभग 8-10 बीघा) से अधिक कृषि भूमि है, वे इस योजना के पात्र नहीं हैं।

4. क्या मुफ्त बोरिंग के साथ पंपसेट (पंपिंग सेट) भी मुफ्त मिलता है?

बोरिंग का काम पूरी तरह मुफ्त किया जाता है, लेकिन पंपसेट मुफ्त नहीं मिलता है। हालांकि, सरकार किसानों को नया पंपसेट खरीदने के लिए बैंक लोन और भारी सब्सिडी (वित्तीय अनुदान) प्रदान करती है। सामान्य व ओबीसी किसानों को ₹4,500 और एससी/एसटी किसानों को अधिकतम ₹6,000 तक की सब्सिडी दी जाती है ⚙️।

5. “डार्क ज़ोन” (Dark Zone) क्या होता है और क्या वहां बोरिंग कराई जा सकती है?

डार्क ज़ोन उन क्षेत्रों को कहा जाता है जहाँ भूजल स्तर (Groundwater Level) अत्यधिक नीचे गिर चुका है और सरकार ने वहां पानी के संकट को देखते हुए नए बोरिंग करने पर कानूनी प्रतिबंध लगा रखा है। यदि आपका खेत डार्क ज़ोन में आता है, तो आपको इस योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा ❌।

6. बोरिंग के लिए सरकारी सहायता राशि (अनुदान) कितनी मिलती है?

यह सहायता सीधे काम और सामग्री के रूप में दी जाती है:

  • सामान्य और ओबीसी सीमांत किसान: अधिकतम ₹5,000 तक।
  • लघु किसान (सभी वर्ग): अधिकतम ₹7,000 तक।
  • अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) सीमांत किसान: अधिकतम ₹10,000 तक।

7. आवेदन स्वीकृत हुआ है या नहीं, यह कैसे पता करें?

आवेदन जमा करने के बाद लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता (JE) खेत का भौतिक सत्यापन करते हैं। इसके बाद पात्र किसानों की एक लाभार्थी सूची (Beneficiary List) तैयार की जाती है। आप अपने ब्लॉक (विकास खंड) कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर या विभाग की आधिकारिक वेबसाइट mifb.up.gov.in पर जाकर सूची में अपना नाम देख सकते हैं 📝।


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