2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के भारतीय पदक विजेता: ग्लास्गो में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन!

Glasgow 2026 Commonwealth Games mein swarn padak ke sath vijayi Bharatiya mukkebaz aur bharottolak (Indian boxers and weightlifters celebrating with gold medals at Glasgow 2026)

ग्लास्गो 2026 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में भारत ने ऐतिहासिक और जुझारू प्रदर्शन करते हुए कुल 39 पदक जीते, जिनमें 13 स्वर्ण (Gold), 17 रजत (Silver) और 9 कांस्य (Bronze) पदक शामिल हैं

23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक स्कॉटलैंड के ग्लास्गो शहर में आयोजित इन 23वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय 122 सदस्यीय दल ने अद्वितीय खेल भावना का परिचय दिया और देश को पदक तालिका में चौथे स्थान पर बनाए रखा।

यह सफलता इसलिए अत्यंत असाधारण है क्योंकि 2026 के खेल कार्यक्रम में भारी बजटीय और ढांचागत कटौती की गई थी। खेल प्रेमियों के बीच यह आशंका थी कि निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और हॉकी जैसे भारत के पारंपरिक पदक-बहुल खेलों को हटाने से भारत की स्थिति बेहद खराब हो जाएगी। पिछले बर्मिंघम 2022 खेलों में भारत के 61 पदकों में से 25 मेडल इन्हीं खेलों से आए थे। परंतु, भारत ने मुक्केबाजी, जूडो, एथलेटिक्स और भारोत्तोलन जैसी स्पर्धाओं में नई ताकत बनकर उभरते हुए इस चुनौती को एक स्वर्णिम अवसर में बदल दिया।


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📊 खेल-वार भारत की पदक तालिका: एक व्यापक विश्लेषण

सीमित खेल विधाओं में प्रतिस्पर्धा करने के बावजूद, भारत की सफलता दर (Success Rate) इस बार सर्वोच्च रही। विभिन्न खेलों में भारत के पदकों का वर्गीकरण इस प्रकार है:

खेल (Sport)🥇 स्वर्ण (Gold)🥈 रजत (Silver)🥉 कांस्य (Bronze)कुल पदक (Total)
मुक्केबाजी (Boxing)73010
एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स47516
भारोत्तोलन (Weightlifting)1517
जूडो (Judo)2114
पैरा पावरलिफ्टिंग0011
कुल योग1317939

🥊 मुक्केबाजी (Boxing): भारतीय मुक्केबाजों का ऐतिहासिक स्वर्णिम पंच

ग्लास्गो 2026 में भारत के पूरे अभियान की रीढ़ भारतीय मुक्केबाजी टीम रही, जिसने रिकॉर्ड 10 पदक अपने नाम किए। स्कॉटिश इवेंट्स सेंटर (SEC) के रिंग में भारतीय मुक्केबाजों ने 7 स्वर्ण और 3 रजत जीतकर इतिहास का सबसे सफल मुक्केबाजी अभियान दर्ज किया। यह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में किसी भी देश द्वारा एक ही संस्करण में मुक्केबाजी में जीते गए सर्वाधिक स्वर्ण पदकों का विश्व रिकॉर्ड है।

भारतीय मुक्केबाजी: 🥇🥇🥇🥇🥇🥇🥇 | 🥈🥈🥈 | (कुल 10 पदक)

1. स्वर्ण पदक विजेता (Gold Medalists)

  • साक्षी चौधरी (महिला 51 किग्रा वर्ग): साक्षी ने पूरे टूर्नामेंट में अपनी अविश्वसनीय गति का परिचय दिया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने अपनी तकनीकी श्रेष्ठता के दम पर जजों को सर्वसम्मति से निर्णय (5-0) देने पर मजबूर किया।
  • प्रीति पवार (महिला 54 किग्रा वर्ग): प्रीति ने अपने आक्रामक काउंटर-अटैक गेमप्ले से प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ा और देश की झोली में शानदार स्वर्ण पदक डाला।
  • जैस्मिन लैम्बोरिया (महिला 57 किग्रा वर्ग): बर्मिंघम 2022 की कांस्य पदक विजेता जैस्मिन ने इस बार अपने खेल का स्तर और ऊंचा किया। उन्होंने अपने लंबे कद और सटीक प्रहारों से स्वर्ण पदक जीता। समापन समारोह में उन्हें भारत की ध्वजवाहक (Flag Bearer) बनने का ऐतिहासिक गौरव भी प्राप्त हुआ।
  • प्रिया घंघास (महिला 60 किग्रा वर्ग): प्रिया ने क्लोज-रेंज फाइटिंग (करीब से मुक्के मारना) में गजब की दक्षता दिखाई और खिताबी मुकाबले में एकतरफा जीत हासिल की।
  • अरुंधति चौधरी (महिला 70 किग्रा वर्ग): मिडलवेट वर्ग में खेलते हुए अरुंधति का डिफेंस इतना मजबूत था कि विरोधी खिलाड़ी उनके गार्ड को भेदने में नाकाम रहे। उन्होंने भारत को महिला वर्ग का एक और स्वर्ण दिलाया।
  • सचिन सिवाच (पुरुष 60 किग्रा वर्ग): पुरुषों के लाइटवेट वर्ग में सचिन ने अपनी फुर्तीली रिंग मूवमेंट (रिंग में तेजी से घूमना) और घातक अपर-कट्स के दम पर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
  • अнкुश पंघाल (पुरुष 80 किग्रा वर्ग): लाइट हैवीवेट वर्ग में अंकुश के शक्तिशाली हुक्स का विरोधियों के पास कोई जवाब नहीं था। फाइनल मैच जीतकर उन्होंने भारत को सातवां मुक्केबाजी स्वर्ण दिलाया।

2. रजत पदक विजेता (Silver Medalists)

  • लवलीना बोरगोहेन (महिला 75 किग्रा वर्ग): टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना उद्घाटन समारोह में भारत की बेटन-धारक (Baton-Bearer) थीं। 75 किग्रा के फाइनल में कड़ी टक्कर के बावजूद वे स्वर्ण से चूक गईं, लेकिन रजत पदक सुनिश्चित किया।
  • जदुमणि सिंह मंडेंगशाम (पुरुष 55 किग्रा वर्ग): फ्लाईवेट श्रेणी के इस युवा मुक्केबाज ने फाइनल में स्कॉटिश दर्शकों के भारी दबाव के बीच जुझारू मुकाबला किया और रजत पदक हासिल किया।
  • नरेंद्र बेरवाल (पुरुष +90 किग्रा वर्ग): सुपर हैवीवेट वर्ग में नरेंद्र ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी ताकत का परिचय दिया और रजत पदक जीता।

🏋️‍♂️ भारोत्तोलन (Weightlifting): मीराबाई की स्वर्णिम हैट्रिक और दो नए कीर्तिमान

भारतीय भारोत्तोलकों (Weightlifters) ने ग्लास्गो में कड़े नियमों और कड़े शेड्यूल के बीच कुल 7 पदक (1 स्वर्ण, 5 रजत और 1 कांस्य) अपने नाम किए।

1. मीराबाई चानू – स्वर्ण पदक (महिला 48 किग्रा वर्ग)

भारत की सबसे भरोसेमंद वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में अद्भुत शारीरिक नियंत्रण दिखाते हुए स्वर्ण पदक जीता। उद्घाटन समारोह में भारत की ध्वजवाहक रहीं मीराबाई ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों राउंड में प्रतिद्वंद्वियों को बहुत पीछे छोड़ दिया। यह राष्ट्रमंडल खेलों में उनका लगातार तीसरा स्वर्ण पदक (2018 गोल्ड कोस्ट, 2022 बर्मिंघम, 2026 ग्लास्गो) है। वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली केवल दूसरी भारतीय एथलीट बन गई हैं।

2. रजत और कांस्य पदक विजेता (नए रिकॉर्ड्स के साथ)

  • अजय बाबू वल्लूरी (पुरुष 79 किग्रा वर्ग): अजय बाबू ने पुरुषों के 79 किग्रा वर्ग के स्नैच राउंड में नया राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड स्थापित कर इतिहास रचा। हालांकि कुल वजन के मामले में वे मामूली अंतर से रजत पदक पर रहे, पर उनका यह रिकॉर्ड गेम का बड़ा आकर्षण रहा।
  • लवप्रीत सिंह (पुरुष +110 किग्रा वर्ग): सुपर-हैवीवेट श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करते हुए लवप्रीत ने स्नैच राउंड में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया और देश के लिए रजत पदक जीता।
  • ऋषिकांत सिंह चनम्बम (पुरुष 60 किग्रा वर्ग): ऋषिकांत ने बेहतरीन लिफ्टिंग की और सामान्य वर्ग के तहत ग्लास्गो खेलों में भारत को पहला पदक (रजत) दिलाया।
  • राजा मुथुपंडी (पुरुष 65 किग्रा वर्ग): राजा ने बेहद सधे हुए प्रयासों के साथ रजत पदक पर कब्जा किया।
  • ज्ञानेश्वरी यादव (महिला 53 किग्रा वर्ग): इस युवा महिला वेटलिफ्टर ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क में संतुलित लिफ्ट्स के साथ रजत पदक हासिल किया।
  • हरजिंदर कौर (महिला 69 किग्रा वर्ग): बर्मिंघम की पदक विजेता हरजिंदर ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा और बेहद कड़े मुकाबले में रजत पदक जीता।
  • बिंदियारानी देवी (महिला 58 किग्रा वर्ग): बिंदियारानी ने मजबूत प्रदर्शन के दम पर भारत के लिए भारोत्तोलन में कांस्य पदक हासिल कर पोडियम पर स्थान पाया।

🏃 एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स (Athletics): ट्रैक एंड फील्ड पर भारतीय क्रांति

ट्रैक, फील्ड और पैरा-एथलेटिक्स स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने अभूतपूर्व गहराई का परिचय देते हुए कुल 16 पदक (4 स्वर्ण, 7 रजत और 5 कांस्य) जीते।

1. गुलवीर सिंह का ऐतिहासिक ‘डबल पोडियम’ कारनामा

लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने ग्लास्गो 2026 में वह कर दिखाया जो आज तक कोई भारतीय ट्रैक एथलीट नहीं कर पाया था। वह एक ही राष्ट्रमंडल खेलों के संस्करण में दो व्यक्तिगत मेडल जीतने वाले भारत के पहले ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बने:

  • पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में उन्होंने बेहतरीन टाइमिंग के साथ रजत पदक जीता।
  • पुरुषों की 5,000 मीटर दौड़ में असाधारण स्टैमिना दिखाते हुए उन्होंने कांस्य पदक भी अपने नाम किया।

2. नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह – भाला फेंक में डबल पोडियम

चोट के कारण बर्मिंघम 2022 से बाहर रहे भारत के ट्रैक एंड फील्ड सुपरस्टार नीरज चोपड़ा ने राष्ट्रमंडल खेलों के पोडियम पर वापसी की। पुरुषों के जैवलिन थ्रो फाइनल में उन्होंने 85.83 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक अपने नाम किया। इसी स्पर्धा में भारत के युवा एथलीट यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर कांस्य पदक हासिल किया, जिससे भारत को इस स्पर्धा में ‘डबल पोडियम’ फिनिश मिली।

3. पैरा-एथलेटिक्स में भारत का सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

भारत ने ग्लास्गो में 28 सदस्यीय पैरा-स्पोर्ट्स दल भेजा था, जिसने ऐतिहासिक 7 पदक जीते। इनमें से 6 पदक पैरा-एथलेटिक्स से आए, जिसने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के 20 साल के पैरा-पोडियम सूखे को समाप्त किया।

  • F57 शॉट पुट (गोला फेंक) में दोहरा दबदबा: महिलाओं के वर्ग में शर्मिला धनखड़ ने स्वर्ण पदक जीता और शिल्पा श्याला ने कांस्य पदक हासिल किया। पुरुषों के इसी इवेंट में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि हमवतन शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत का क्लीन स्वीप पूरा किया।
  • T47 100 मीटर स्प्रिंट: भारत के उड़ता सितारे दिलीप गावित ने अविश्वसनीय रफ्तार से दौड़ते हुए स्वर्ण पदक जीता। उनके ठीक पीछे भारत के ही मोहम्मद बासित ने फिनिश लाइन पार कर रजत पदक हासिल किया।

4. जंप और मल्टी-इवेंट्स में पदक विजेता

  • मुरली श्रीशंकर (पुरुष लंबी कूद): श्रीशंकर ने चोट के बाद वापसी करते हुए रजत पदक पर छलांग लगाई।
  • सर्वेश कुशारे (पुरुष ऊंची कूद): सर्वेश ने उत्कृष्ट वर्टिकल लिफ्ट के साथ हाई जंप में भारत के लिए रजत पदक सुनिश्चित किया।
  • प्रीन चित्रवेल और सेल्वा प्रभु तिरुमारन (पुरुष ट्रिपल जंप): ट्रिपल जंप में भारत को दोहरा पदक मिला; प्रवीण ने रजत और सेल्वा प्रभु ने कांस्य पदक जीता।
  • तेजस्विन शंकर (पुरुष डेकाथलॉन): तेजस्विन राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली 10-इवेंट स्पर्धा (डेकाथलॉन) में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कांस्य पदक जीता।
  • सीमा कालीरमना (महिला डिस्कस थ्रो): अनुभवी सीमा ने चक्का फेंक स्पर्धा में भारत को मूल्यवान कांस्य पदक दिलाया।

🥋 जूडो (Judo): मैट पर भारतीय मार्शल आर्ट्स का स्वर्णिम पुनर्जन्म

ग्लास्गो 2026 में भारतीय जूडो टीम सबसे बड़ा ‘सरप्राइज पैकेज’ साबित हुई, जिसने अपने इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य सहित कुल 4 पदक जीते।

  • अस्मिता डे (महिला 48 किग्रा वर्ग) – स्वर्ण पदक: अस्मिता डे ने फाइनल मुकाबले के ‘गोल्डन स्कोर’ पीरियड में अपनी प्रतिद्वंद्वी को ‘उची-माता’ (Uchi-Mata) दांव से चित (Ippon) करते हुए स्वर्ण जीता। वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला चैंपियन बनीं।
  • हर्ष सिंह (पुरुष 60 किग्रा वर्ग) – स्वर्ण पदक: अस्मिता की ऐतिहासिक जीत के कुछ ही घंटों बाद, हर्ष सिंह ने भी पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में आक्रामक ग्राउंड ट्रांजिशन दिखाते हुए स्वर्ण पदक जीता और जूडो मैट पर भारत का दूसरा गोल्ड पक्का किया।
  • यामिनी मौर्य (महिला 57 किग्रा वर्ग) – रजत पदक: यामिनी ने मैट पर शानदार रक्षात्मक कौशल का परिचय दिया और रजत पदक अपने नाम किया।
  • उन्नति शर्मा (महिला 63 किग्रा वर्ग) – कांस्य पदक: उन्नति ने रेपेचेज राउंड के माध्यम से जोरदार वापसी की और भारत की झोली में एक कांस्य पदक डाला।

♿ पैरा पावरलिफ्टिंग (Para Powerlifting): देश का पहला मेडल

  • झंडू कुमार (पुरुष हैवीवेट वर्ग) – कांस्य पदक: पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुषों के हैवीवेट वर्ग में अपनी मानसिक और शारीरिक शक्ति का अद्भुत प्रदर्शन किया। उन्होंने कुल भार उठाने में पोडियम स्थान हासिल किया और वास्तव में ग्लास्गो 2026 में भारत का पहला पदक (कांस्य) जीतकर देश के पदक अभियान की शुरुआत की थी।

🌟 इस बार के प्रदर्शन के मायने और निष्कर्ष

ग्लास्गो 2026 राष्ट्रमंडल खेल भारतीय खेल इतिहास में सदैव एक मील का पत्थर के रूप में याद रखे जाएंगे। आम तौर पर जब कुश्ती (49 स्वर्ण पदक का ऐतिहासिक आधार), निशानेबाजी (63 स्वर्ण पदक) और बैडमिंटन जैसे कोर खेलों को हटाया जाता है, तो किसी भी देश की पदक तालिका ध्वस्त हो जाती है। परंतु भारत के 39 पदक यह दर्शाते हैं कि ‘खेलो इंडिया’ (Khelo India) और ‘टॉप्स’ (TOPS – Target Olympic Podium Scheme) जैसी सरकारी खेल विकास योजनाओं के कारण भारतीय खेलों का विविधीकरण (Diversification) हो चुका है। भारत अब केवल दो-तीन खेलों पर निर्भर रहने वाला देश नहीं बल्कि एक ‘ऑल-राउंड मल्टी-स्पोर्ट’ वैश्विक शक्ति बन चुका है।

मुक्केबाजी में विश्व रिकॉर्ड, जूडो में पहली बार ऐतिहासिक दोहरे स्वर्ण और पैरा-एथलीटों का अब तक का सबसे गौरवशाली अभियान इस बात का प्रमाण है कि भारत में खेलों की नई पौध तैयार हो चुकी है।

इन खेलों के समापन समारोह में एक और ऐतिहासिक पल आया जब स्कॉटलैंड ने आधिकारिक तौर पर राष्ट्रमंडल खेलों का ध्वज और औपचारिक बेटन भारत को सौंप दिया। भारत का अहमदाबाद शहर 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों के इस शताब्दी संस्करण (Centenary Edition) की मेजबानी करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्रालय ने सभी 39 पदक विजेताओं की उनके असाधारण और प्रेरणादायी प्रदर्शन के लिए सराहना की है। ग्लास्गो 2026 के ये सभी विजेता केवल एथलीट नहीं हैं, बल्कि वे नए, आत्मनिर्भर और शक्तिशाली खेल भारत के चमकते हुए प्रतीक हैं।


ग्लास्गो 2026 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में भारत के प्रदर्शन और आयोजनों से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs):

📊 पदक तालिका और समग्र प्रदर्शन

प्रश्न 1: ग्लास्गो 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का अंतिम स्थान और पदक तालिका क्या रही?

  • स्थान: भारत पदक तालिका में चौथे स्थान (4th Place) पर रहा।
  • कुल पदक: भारत ने कुल 39 पदक जीते, जिनमें 13 स्वर्ण (Gold), 17 रजत (Silver) और 9 कांस्य (Bronze) शामिल हैं।

प्रश्न 2: बर्मिंघम 2022 (61 पदक) की तुलना में इस बार भारत के पदकों की संख्या कम क्यों रही?

  • खेलों में कटौती: ग्लास्गो 2026 खेलों के बजट और समय की कमी के कारण खेल कार्यक्रम को काफी छोटा कर दिया गया था।
  • भारत के मुख्य खेल हटाए गए: भारत के सबसे ज्यादा पदक दिलाने वाले खेल जैसे—कुश्ती, निशानेबाजी (Shooting), बैडमिंटन, हॉकी, क्रिकेट और टेबल टेनिस को इस बार पूरी तरह हटा दिया गया था। 2022 में भारत के 25 पदक इन्हीं खेलों से आए थे। इसके बावजूद, भारत चौथे स्थान पर बने रहने में सफल रहा।

🥊 मुक्केबाजी और भारोत्तोलन (Weightlifting)

प्रश्न 3: ग्लास्गो 2026 में भारत का सबसे सफल खेल कौन सा रहा?

  • मुक्केबाजी (Boxing): भारतीय मुक्केबाजी दल पूरे अभियान की सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ, जिसने रिकॉर्ड 10 पदक (7 स्वर्ण और 3 रजत) जीते। यह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में किसी भी देश द्वारा एक ही सीजन में मुक्केबाजी में जीते गए सबसे अधिक स्वर्ण पदकों का विश्व रिकॉर्ड है। [1]

प्रश्न 4: उद्घाटन और समापन समारोह में भारत के ध्वजवाहक (Flag Bearers) कौन थे?

  • उद्घाटन समारोह: भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने ध्वजवाहक के रूप में भारतीय दल का नेतृत्व किया।
  • समापन समारोह: मुक्केबाजी में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली जैस्मिन लैम्बोरिया को तिरंगा थामने का गौरव मिला।
  • (नोट: ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन उद्घाटन समारोह के दौरान भारत की आधिकारिक बेटन-धारक थीं।)

प्रश्न 5: मीराबाई चानू ने ग्लास्गो में कौन सा ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया?

  • स्वर्ण पदकों की हैट्रिक: मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। यह राष्ट्रमंडल खेलों में उनका लगातार तीसरा स्वर्ण पदक (2018 गोल्ड कोस्ट, 2022 बर्मिंघम, और 2026 ग्लास्गो) है। वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में लगातार तीन स्वर्ण जीतने वाली केवल दूसरी भारतीय खिलाड़ी बनी हैं।

🏃 एथलेटिक्स और जूडो

प्रश्न 6: क्या नीरज चोपड़ा ने ग्लास्गो 2026 में पदक जीता?

  • हाँ: नीरज चोपड़ा ने पुरुषों के भाला फेंक (Javelin Throw) स्पर्धा में 85.83 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक (Silver Medal) जीता। इसी स्पर्धा में भारत के युवा खिलाड़ी यशवीर सिंह ने भी 85.41 मीटर का थ्रो फेंककर कांस्य पदक (Bronze Medal) हासिल किया, जिससे भारत को इस स्पर्धा में ‘डबल पोडियम’ फिनिश मिली।

प्रश्न 7: ग्लास्गो खेलों में भारत के सबसे सफल ट्रैक एथलीट कौन रहे?

  • गुलवीर सिंह: इस लंबी दूरी के धावक ने इतिहास रच दिया। वह एक ही राष्ट्रमंडल खेलों के संस्करण में दो व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एथलीट बने। उन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत और 5,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता।

प्रश्न 8: जूडो में भारत का प्रदर्शन ऐतिहासिक क्यों माना जा रहा है?

  • पहला महिला स्वर्ण: अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जिससे वह राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो स्वर्ण जीतने वाली भारत की पहली महिला बनीं। इसके तुरंत बाद हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा में भी गोल्ड जीता। भारत ने जूडो में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 4 पदक (2 स्वर्ण, 1 रजत, 1 कांस्य) जीते।

♿ पैरा-स्पोर्ट्स और आगामी खेल

प्रश्न 9: पैरा-स्पोर्ट्स श्रेणियों में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा?

  • ऐतिहासिक अभियान: भारत ने 28 सदस्यीय पैरा-एथलीट दल भेजा था जिसने कुल 7 पदक जीते।
  • पहला पदक: पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुषों के हैवीवेट वर्ग में कांस्य पदक जीता, जो ग्लास्गो खेलों में भारत का सबसे पहला पदक भी था।
  • पैरा-एथलेटिक्स: यहाँ भारत को 6 पदक मिले, जिनमें शर्मिला धनखड़ (महिला F57 शॉट पुट), सोमन राणा (पुरुष F57 शॉट पुट), और दिलीप गावित (पुरुष T47 100 मीटर स्प्रिंट) के स्वर्ण पदक शामिल हैं।

प्रश्न 10: अगले राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games) कहाँ आयोजित किए जाएंगे?

  • अहमदाबाद, भारत (2030): ग्लास्गो में समापन समारोह के दौरान राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (CGF) का आधिकारिक ध्वज और औपचारिक बेटन भारत को सौंप दिया गया। भारत का अहमदाबाद शहर 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा, जो इस खेल आयोजन का ऐतिहासिक शताब्दी संस्करण (100वीं वर्षगांठ) होगा।

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