UP Matikala Kaushal Vikas Yojana 2026: कुम्हार भाइयों को मिलेगी मुफ्त ट्रेनिंग और लोन, ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई

उत्तर प्रदेश माटीकला कौशल विकास योजना बैनर लेआउट विवरण (UP Matikala Kaushal Vikas Yojana banner infographic details)

उत्तर प्रदेश माटीकला कौशल विकास योजना राज्य के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार (खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल है। उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा संचालित इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के पारंपरिक माटी शिल्पियों, कुम्हारों और प्रजापति समाज के नागरिकों को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण (Technical Skill Training) प्रदान करना है।

इस योजना के तहत माटी शिल्प से जुड़े कारीगरों को नि:शुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण के साथ-साथ बाजार की बदलती मांग के अनुसार नए डिजाइनों के निर्माण, आधुनिक मशीनों (जैसे इलेक्ट्रिक चाक और पग मिल) के संचालन और व्यापारिक प्रबंधन की बारीकियां सिखाई जाती हैं। प्रशिक्षण पूरा होने पर कारीगरों को प्रमाण पत्र, नियत मानदेय (Stipend) और बाजार में अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए वित्तीय मदद की राह भी दिखाई जाती है।


योजना की आवश्यकता और दूरदर्शी उद्देश्य

मिट्टी से सुंदर आकृतियाँ, दैनिक उपयोग के बर्तन और कलाकृतियाँ बनाने का हुनर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा रहा है। हालांकि, तकनीकी पिछड़ेपन, आधुनिक उपकरणों के अभाव और प्लास्टिक व चीनी मिट्टी (चाइनीज) के सस्ते उत्पादों की बाढ़ के कारण यह पारंपरिक व्यवसाय धीरे-धीरे दम तोड़ रहा था। पुरानी पीढ़ी के जाने के बाद युवा वर्ग इस काम में कम आय और अत्यधिक शारीरिक श्रम देखकर शहरों की तरफ पलायन करने लगा था।

इसी संकट को दूर करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ (Vocal for Local) तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने के लिए माटीकला कौशल विकास योजना को लागू किया गया।

योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. हुनर को आधुनिक बनाना: पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और मशीनरी के साथ जोड़ना ताकि उत्पादन में तेजी आए।
  2. उत्पादों की फिनिशिंग और डिजाइनिंग में सुधार: कारीगरों को वैश्विक मानकों के अनुरूप फैंसी दीये, मूर्तियां, टेराकोटा उत्पाद और आधुनिक बर्तनों (जैसे क्ले वॉटर बोतल, प्रेशर कुकर) का निर्माण सिखाना।
  3. रोजगार की क्षमता बढ़ाना: युवाओं और महिलाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाकर उन्हें कुशल कारीगर और उद्यमी के रूप में स्थापित करना।
  4. बाजार लिंकेज प्रदान करना: कारीगरों को न केवल सामान बनाना सिखाना, बल्कि उन्हें ई-कॉमर्स पोर्टल्स और राज्य-स्तरीय प्रदर्शनियों के माध्यम से उत्पादों को बेचने की कला सिखाना।

मुख्य बिंदु और योजना की रूपरेखा (Key Highlights)

विशेषताविवरण
योजना का नामउत्तर प्रदेश माटीकला कौशल विकास योजना
नोडल एजेंसी/विभागउत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड (खादी एवं ग्रामोद्योग)
प्रशिक्षण की अवधिपाठ्यक्रम के अनुसार 05 दिन से 15 दिन तक (पूर्णतः आवासीय/गैर-आवासीय)
प्रशिक्षण शुल्कपूरी तरह से नि:शुल्क (Free)
प्रशिक्षण के लाभमानदेय (Stipend), टूल-किट सहायता और कौशल प्रमाण पत्र
लक्षित लाभार्थीपारंपरिक कुम्हार, प्रजापति समाज एवं मिट्टी शिल्प के इच्छुक युवा
आवेदन का तरीकाऑनलाइन एवं ऑफलाइन (जिला ग्रामोद्योग कार्यालय के माध्यम से)

प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत सिखाए जाने वाले मुख्य मॉड्यूल (Training Modules)

माटीकला कौशल विकास योजना के तहत केवल पारंपरिक मटके या दीये बनाना नहीं सिखाया जाता, बल्कि इसमें व्यावसायिक रूप से अत्यधिक मांग वाले आधुनिक पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है:

  • इलेक्ट्रिक चाक संचालन (Electric Pottery Wheel Training): पैर और हाथों के नियंत्रण से बिजली से चलने वाले आधुनिक चाक पर कम समय में अत्यधिक फिनिशिंग के साथ सैकड़ों बर्तन तैयार करने की कला।
  • पीओपी मोल्ड्स और डिजाइनिंग (POP Molds & Casting): प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) के आधुनिक सांचों की मदद से एक ही आकार और डिजाइन की सुंदर देव-मूर्तियां, कलाकृतियां और फैंसी दीये मिनटों में तैयार करना।
  • मिट्टी की आधुनिक प्रोसेसिंग (Clay Processing & Pug Mill): मिट्टी में से कंकड़-पत्थर अलग करने, वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी को छानने और पग मिल (Pug Mill) मशीन की सहायता से उसे उत्तम तरीके से गूंथने की तकनीक।
  • टेराकोटा और ग्लेज़िंग (Terracotta & Glazing): मिट्टी के बर्तनों को सुंदर रासायनिक और प्राकृतिक रंगों (ग्लेज) से चमकाना, जिससे वे वाटरप्रूफ और आकर्षक दिखें।
  • पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग: तैयार उत्पादों को टूटने से बचाने के लिए आधुनिक पैकेजिंग और उन्हें अमेज़न (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart) या ओडीओपी (ODOP) के माध्यम से ऑनलाइन बेचने का प्रशिक्षण।

पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)

इस नि:शुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने निम्नलिखित सामान्य और व्यावहारिक शर्तें रखी हैं:

  1. निवास स्थान: आवेदक अनिवार्य रूप से उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना चाहिए।
  2. आयु सीमा: आवेदन करने वाले युवक या युवती की आयु न्यूनतम 18 वर्ष होनी चाहिए।
  3. पारंपरिक संबंध/रुचि: आवेदक पारंपरिक रूप से प्रजापति या कुम्हार समाज से हो, अथवा वह माटी शिल्प की कला सीखने में वास्तविक रुचि रखता हो।
  4. शैक्षणिक योग्यता: इस योजना के तहत बुनियादी प्रशिक्षण के लिए किसी उच्च शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं है। साक्षर (लिखने-पढ़ने में सक्षम) होना ही पर्याप्त है।
  5. महिलाओं को प्राथमिकता: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं और ग्रामीण युवतियों को इस योजना में विशेष प्राथमिकता दी जाती है ताकि महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल सके।

आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)

आवेदन करते समय निम्नलिखित दस्तावेजों की प्रतियां स्व-प्रमाणित करके जमा करनी होती हैं:

  • आधार कार्ड: पहचान और पते के सत्यापन के लिए।
  • निवास प्रमाण पत्र: उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होने का साक्ष्य।
  • जाति / शिल्पी प्रमाण पत्र: लेखपाल/तहसीलदार या ग्राम प्रधान द्वारा जारी यह साक्ष्य कि आवेदक माटीकला कार्य से संबद्ध है।
  • बैंक पासबुक विवरण: प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाले स्टाइपेंड (मानदेय) के ट्रांसफर के लिए।
  • नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो और चालू मोबाइल नंबर।

आवेदन करने की विस्तृत प्रक्रिया Step-by-Step

इच्छुक नागरिक इस योजना का लाभ उठाने के लिए दो माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं:

ऑनलाइन माध्यम (Online Process):

  1. सबसे पहले उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड के आधिकारिक वेब पोर्टल upmatikalaboard.in पर जाएं।
  2. होमपेज पर “कौशल विकास प्रशिक्षण आवेदन” (Skill Development Training Application) के लिंक पर क्लिक करें।
  3. अपना मोबाइल नंबर दर्ज करके ओटीपी (OTP) के माध्यम से लॉगिन करें।
  4. आवेदन फॉर्म में अपना नाम, पिता का नाम, पता, आयु और जिस माटीकला मॉड्यूल में आप प्रशिक्षण लेना चाहते हैं, उसका चयन करें।
  5. आधार कार्ड और फोटो अपलोड करके फॉर्म को फाइनल सबमिट करें और रसीद का प्रिंट ले लें।

ऑफलाइन माध्यम (Offline Process):

  • आवेदक अपने जिले के जिला ग्रामोद्योग अधिकारी (District Khadi and Village Industries Office – KVIO) के कार्यालय में जाकर नि:शुल्क आवेदन फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। Form भरकर सभी दस्तावेजों के साथ इसे सीधे कार्यालय में जमा कर दें।

प्रशिक्षण के बाद मिलने वाले लाभ (Post-Training Benefits)

यह योजना केवल ट्रेनिंग देकर समाप्त नहीं हो जाती, बल्कि इसके बाद कारीगर को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए निम्नलिखित लाभ दिए जाते हैं:

  • सरकारी कौशल प्रमाण पत्र (Skill Certificate): माटीकला बोर्ड द्वारा जारी यह प्रमाण पत्र कारीगर को एक ‘कुशल शिल्पकार’ के रूप में मान्यता देता है, जो भविष्य में किसी भी सरकारी प्रदर्शनी या ऋण आवेदन में काम आता है।
  • नि:शुल्क टूल-किट वितरण: प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सर्वश्रेष्ठ और जरूरतमंद कारीगरों को माटीकला टूल-किट्स वितरण योजना के तहत मुफ्त इलेक्ट्रिक चाक और मोल्ड्स दिए जाते हैं।
  • आर्थिक लोन सहायता: जो कारीगर अपना बड़ा कुटीर उद्योग लगाना चाहते हैं, उन्हें मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत ₹10 लाख तक के बैंक लोन पर 25% की सरकारी सब्सिडी दिलाने में मदद की जाती है।
  • बाजार और मेलों में स्टॉल: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित होने वाले विभिन्न मेलों (जैसे लखनऊ महोत्सव, दीपोत्सव अयोध्या, या नोएडा हाट) में इन कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने के लिए मुफ्त स्टॉल आवंटित किए जाते हैं।

सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन पर प्रभाव

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर (टेराकोटा शिल्प के लिए प्रसिद्ध), आजमगढ़, और बुलंदशहर (खुर्जा पॉटरी) जैसे जिलों में इस कौशल विकास योजना ने अद्भुत परिणाम दिए हैं:

  • पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा: इस योजना से प्रशिक्षित कारीगरों ने प्लास्टिक के कप और गिलासों के स्थान पर बड़े पैमाने पर इको-फ्रेंडली ‘मिट्टी के कुल्हड़’ और बर्तनों का निर्माण शुरू किया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है।
  • महिलाओं का आर्थिक स्वावलंबन: ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अब घर के काम के साथ-साथ इलेक्ट्रिक चाक और आधुनिक सांचों की मदद से डिजाइनर दीये और सजावटी गमले बनाकर हर महीने ₹8,000 से ₹15,000 तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।
  • चाइनीज उत्पादों का बहिष्कार: दीपावली और अन्य त्यौहारों पर अब चीनी लाइटों और मूर्तियों के मुकाबले माटीकला बोर्ड के प्रशिक्षित कारीगरों द्वारा बनाए गए फैंसी दीये और सुंदर लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बाजार में ग्राहकों की पहली पसंद बन रही हैं।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश माटीकला कौशल विकास योजना परंपरा और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम का प्रतीक है। यह मिट्टी के फनकारों के हुनर को तराशकर उन्हें आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में सीना तानकर खड़े होने की हिम्मत दे रही है। यह योजना न केवल एक प्राचीन और गौरवशाली भारतीय कला को विलुप्त होने से बचा रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश के हजारों ग्रामीण परिवारों के आर्थिक अंधकार को दूर कर उनके जीवन में समृद्धि का नया प्रकाश फैला रही है।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: माटीकला कौशल विकास प्रशिक्षण कितने दिनों का होता है?
उत्तर: पाठ्यक्रम और चुनी गई विधा के आधार पर यह प्रशिक्षण आम तौर पर 05 से 15 दिनों का होता है, जिसमें थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल (हाथ से काम करने) पर जोर दिया जाता है।

प्रश्न 2: क्या इस ट्रेनिंग के लिए कोई फीस या पैसा देना पड़ता है?
उत्तर: नहीं, यह प्रशिक्षण उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूरी तरह से नि:शुल्क (Free) प्रदान किया जाता है। यहाँ तक कि प्रशिक्षण के दौरान कुछ कोर्सेज में रहने और खाने की व्यवस्था भी सरकार द्वारा की जाती है।

प्रश्न 3: ट्रेनिंग पूरी होने के बाद क्या मुझे मुफ्त इलेक्ट्रिक चाक मिल सकता है?
उत्तर: हाँ, जो लाभार्थी इस कौशल विकास प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक और अच्छे अंकों/ग्रेड के साथ पूरा करते हैं, उन्हें विभाग की ‘टूल-किट्स वितरण योजना’ के अंतर्गत वरीयता के आधार पर नि:शुल्क इलेक्ट्रिक चाक और टूल्स दिए जाते हैं।

प्रश्न 4: क्या इस योजना के तहत केवल कुम्हार समाज के लोग ही पात्र हैं?
उत्तर: प्राथमिकता पारंपरिक रूप से इस काम से जुड़े कुम्हार और प्रजापति समाज के नागरिकों को दी जाती है। हालांकि, यदि कोई अन्य वर्ग का व्यक्ति या महिला स्वयं सहायता समूह इस कला को सीखने और इसे रोजगार के रूप में अपनाने के इच्छुक हैं, तो वे भी आवेदन कर सकते हैं।


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