उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना 2026: अपने गांव में बनवाएं स्कूल-अस्पताल, 60% पैसा आप दें, 40% सरकार देगी, ऐसे करें आवेदन
उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना 2026: ऑनलाइन पोर्टल, पात्रता, विकास कार्य और अपनी मातृभूमि के लिए योगदान की पूरी जानकारी
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों का विकास करने, गांवों को हाई-टेक और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने तथा प्रवासी भारतीय (NRIs) व देश के बड़े शहरों में रह रहे नागरिकों को उनकी जड़ों (मातृभूमि) से दोबारा जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना (Uttar Pradesh Matrubhumi Yojana) एक अत्यंत अनूठी, भावनात्मक और दूरदर्शी योजना है [जो स्थानीय विकास को बढ़ावा देती है]। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन सक्षम नागरिकों, उद्योगपतियों और अप्रवासी भारतीयों (NRIs) को एक पारदर्शी मंच प्रदान करना है, जो अपने पैतृक गांव या मातृभूमि के विकास के लिए व्यक्तिगत रूप से कोई सामाजिक कार्य (जैसे स्कूल, अस्पताल, बारात घर, या लाइब्रेरी) करवाना चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज विभाग (Panchayati Raj Department, UP) द्वारा संचालित इस योजना की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी विशेषता यह है कि यदि कोई नागरिक अपने गांव में किसी विकास कार्य के लिए परियोजना की कुल लागत का 60% हिस्सा दान (Donation) करता है, तो बाकी बचा हुआ 40% का वित्तीय हिस्सा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इतना ही नहीं, उस विकास कार्य या भवन का नामकरण उस दानदाता नागरिक के पूर्वजों या उसकी इच्छानुसार रखा जाएगा।
यदि आप भी उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, या आपके पूर्वज यूपी के किसी गांव से ताल्लुक रखते थे और आज आप देश-विदेश में एक सफल मुकाम पर पहुँच चुके हैं और अपनी मातृभूमि का कर्ज चुकाना चाहते हैं, तो यह विस्तृत लेख आपके लिए एक स्वर्णिम मार्गदर्शिका साबित होगा। इस लेख में हम आपको उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना 2026 से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जैसे कि पात्रता मानदंड, योजना के वित्तीय मॉडल (60:40 का गणित), कराए जाने वाले विकास कार्यों की सूची, आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन की चरण-दर-चरण प्रक्रिया और महत्वपूर्ण प्रशासनिक नियमों के बारे में विस्तार से बताएंगे ताकि आप पूरी पारदर्शिता के साथ अपने गांव को एक आदर्श ग्राम बना सकें।
Table of Contents
1. उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना: एक नज़र में (Overview)
| विवरण (Particulars) | महत्वपूर्ण जानकारी (Details) |
|---|---|
| योजना का नाम | उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना (UP Matrubhumi Yojana) |
| राज्य का नाम | उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) |
| संचालित विभाग | पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार |
| नोडल एजेंसी | उत्तर प्रदेश मातृभूमि सोसाइटी (UP Matrubhumi Society) |
| वित्तीय सहभागिता मॉडल | 60% दानदाता (Citizen) : 40% उत्तर प्रदेश सरकार (State Govt) |
| योजना का मुख्य लाभ | गांव में आधुनिक बुनियादी ढांचा + भवन का नामकरण पूर्वजों के नाम पर |
| मुख्य लाभार्थी | यूपी के समस्त ग्राम पंचायतें एवं ग्रामीण नागरिक |
| आवेदन का तरीका | ऑनलाइन (समर्पित मातृभूमि पोर्टल के माध्यम से) |
| आधिकारिक वेबसाइट | UP Matrubhumi Official Portal |
2. योजना की पृष्ठभूमि और मुख्य उद्देश्य (Vision and Objective)
भारत की आत्मा गांवों में बसती है, और उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के विकास का रास्ता भी ग्रामीण सुदृढ़ीकरण से होकर ही गुजरता है। उत्तर प्रदेश के लाखों प्रतिभावान और आर्थिक रूप से सक्षम नागरिक आज दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे महानगरों के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, खाड़ी देशों और यूरोप में बड़े पदों पर कार्यरत हैं या सफल व्यवसाय चला रहे हैं। इन प्रवासियों के मन में हमेशा अपने पैतृक गांव के प्रति एक गहरा लगाव और कुछ अच्छा करने की इच्छा होती है, लेकिन पहले प्रशासनिक जटिलताओं, पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार के डर से वे कदम आगे नहीं बढ़ा पाते थे।
इसी विसंगति को दूर करने और जनभागीदारी (Public Participation) के माध्यम से ग्रामीण कायाकल्प करने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना’ को एक आधिकारिक और कानूनी स्वरूप (मातृभूमि सोसाइटी के रूप में) दिया गया है।
इस योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- जनभागीदारी से विकास: ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास में सीधे आम नागरिकों और कॉर्पोरेट जगत (CSR) को शामिल करना।
- प्रवासियों को जड़ों से जोड़ना: देश-विदेश में रह रहे संपन्न उत्तर प्रदेश वासियों को अपने गांव की प्रगति में सीधे योगदान करने का एक सुरक्षित और पारदर्शी माध्यम देना।
- पारदर्शिता और सुरक्षा: दान दी गई एक-एक पाई का उपयोग सीधे चयनित प्रोजेक्ट में होना सुनिश्चित करना, ताकि बिचौलियों का हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त हो।
- पूर्वजों को सम्मान: दानदाताओं को यह अधिकार देना कि वे करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट का नाम अपने माता-पिता, दादा-दादी या स्वयं के नाम पर रख सकें, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बने।
3. योजना का वित्तीय सहभागिता मॉडल (60:40 का गणित)
उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना का वित्तीय ढांचा बेहद आकर्षक और प्रेरक बनाया गया है। इसे 60:40 अनुपात मॉडल के तहत संचालित किया जाता है:
- दानदाता का अंश (60%): यदि आप अपने गांव में कोई सामुदायिक भवन बनवाना चाहते हैं जिसकी कुल अनुमानित लागत ₹50 लाख है, तो आपको उस परियोजना के लिए ₹30 लाख (कुल लागत का 60%) का योगदान करना होगा।
- सरकार का अंश (40%): जैसे ही आपका 60% का अंशदान ‘उत्तर प्रदेश मातृभूमि सोसाइटी’ के बैंक खाते में प्राप्त हो जाता है, राज्य सरकार अपने बजट से शेष ₹20 लाख (कुल लागत का 40%) की धनराशि तुरंत जारी कर देगी।
- नामकरण का विशेष अधिकार: परियोजना के पूरी तरह सफल होने के बाद, उस निर्मित भवन, संस्थान या जन-सुविधा परिसर के मुख्य द्वार पर दानदाता द्वारा निर्दिष्ट नाम (जैसे- “स्वर्गीय श्री [नाम] स्मृति सामुदायिक केंद्र”) का बोर्ड बड़े अक्षरों में लगाया जाएगा।
4. योजना के तहत गांवों में कराए जा सकने वाले मुख्य विकास कार्य
इस योजना के अंतर्गत कोई भी नागरिक अपनी ग्राम पंचायत में जनहित से जुड़े निम्नलिखित विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव भेज सकता है और अंशदान कर सकता है:
- स्वास्थ्य सुविधाएं: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), उप-केंद्र, प्रसव कक्ष (Delivery Room), या एम्बुलेंस सेवा का सुदृढ़ीकरण।
- शिक्षा का आधुनिकीकरण: सरकारी प्राथमिक या उच्च प्राथमिक विद्यालयों के भवनों का जीर्णोद्धार, स्मार्ट क्लासरूम (Smart Class), कंप्यूटर लैब, विज्ञान प्रयोगशाला या खेल के मैदान का निर्माण।
- डिजिटल बुनियादी ढांचा: आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी (Digital Library), वाई-फाई चौपाल, या ग्राम सचिवालय का कायाकल्प।
- सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्थल: बारात घर (Marriage Hall), सामुदायिक मिलन केंद्र, वृद्ध आश्रम, या सार्वजनिक पार्कों और पार्कों में ओपन जिम (Open Gym) की स्थापना।
- पर्यावरण और जल संरक्षण: तालाबों का सौंदर्यीकरण (Amrit Sarovar की तर्ज पर), रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, और ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइट (Solar Lights) की स्थापना।
- कचरा एवं स्वच्छता प्रबंधन: सार्वजनिक शौचालय परिसर, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली (STP/WMP प्लांट)।
- सुरक्षा व्यवस्था: ग्राम पंचायतों के मुख्य चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी (CCTV) कैमरा नेटवर्क और कंट्रोल रूम की स्थापना।
5. पात्रता और कौन कर सकता है आवेदन? (Who is Eligible?)
उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना का दायरा अत्यधिक व्यापक रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें:
- भारत का कोई भी नागरिक: भारत के किसी भी शहर में रह रहा व्यक्ति जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश का है या यूपी के ग्रामीण विकास में रुचि रखता है।
- अनिवासी भारतीय (NRIs): विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिक (ओसीआई कार्ड धारक भी) जिनके पूर्वज उत्तर प्रदेश के किसी गांव से संबंधित थे।
- कॉर्पोरेट और कंपनियां (Corporate Sector): कोई भी बड़ी निजी कंपनी या व्यावसायिक घराना जो अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR Fund) के तहत उत्तर प्रदेश के गांवों का विकास करना चाहता है।
- स्वयंसेवी संस्थाएं और एनजीओ (NGOs): सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यों में लगी प्रामाणिक पंजीकृत संस्थाएं।
6. आवश्यक दस्तावेजों की सूची (Required Documents List)
ऑनलाइन पोर्टल पर अपना प्रस्ताव (Proposal) पंजीकृत करते समय आवेदक के पास निम्नलिखित वैध दस्तावेज होना अत्यंत आवश्यक है:
- आवेदक का पहचान पत्र: आधार कार्ड, पैन कार्ड, या एनआरआई उम्मीदवारों के लिए वैध पासपोर्ट (Passport)।
- उत्तर प्रदेश से जुड़ाव का प्रमाण: पैतृक गांव का पता, राशन कार्ड, पुरानी खतौनी (जमीन का रिकॉर्ड), या परिवार रजिस्टर की नकल (यदि उपलब्ध हो, अन्यथा केवल घोषणा पत्र)।
- पैन कार्ड और बैंक विवरण: दान की जाने वाली धनराशि के वैध स्रोत के सत्यापन के लिए पैन कार्ड और बैंक खाता पासबुक की प्रति।
- कॉर्पोरेट आवेदकों के लिए: कंपनी का पंजीकरण प्रमाण पत्र, सीसआर (CSR) नंबर और प्राधिकृत बोर्ड संकल्प (Board Resolution)।
- घोषणा पत्र (Declaration Form): एक डिजिटल शपथ पत्र कि अंशदान की जाने वाली 60% धनराशि वैध माध्यमों से ट्रांसफर की जाएगी।
7. ऑनलाइन आवेदन और प्रस्ताव पंजीकरण की चरण-दर-चरण प्रक्रिया
पंचायती राज विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को नौकरशाही के फेर से मुक्त करने के लिए एक अत्याधुनिक और पारदर्शी वेब पोर्टल लॉन्च किया है। इच्छुक नागरिक नीचे दिए गए स्टेप्स का पालन करके अपने गांव के लिए प्रस्ताव भेज सकते हैं:
- आधिकारिक मातृभूमि पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना के आधिकारिक वेब पोर्टल matrubhumi.up.gov.in पर जाएं।
- रजिस्ट्रेशन / लॉगिन सेक्शन: होमपेज पर दिए गए “Donor Registration” (दाता पंजीकरण) या “प्रस्ताव भेजें” वाले लिंक पर क्लिक करें।
- प्रोफ़ाइल तैयार करें: अपना नाम, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर (देश के कोड के साथ यदि आप विदेश में हैं) दर्ज करें। आपके मोबाइल/ईमेल पर एक ओटीपी आएगा, जिसे भरकर अपना अकाउंट एक्टिवेट करें।
- ग्राम पंचायत का चयन करें: लॉगिन करने के बाद, उस विशिष्ट स्थान का चयन करें जहाँ आप विकास कार्य कराना चाहते हैं:
- जिला (District)
- विकास खंड (Block)
- ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) / गांव का नाम।
- विकास कार्य (Project) का चयन करें: ड्रॉपडाउन मेनू में दी गई सूची में से उस कार्य का चयन करें जिसे आप करवाना चाहते हैं (जैसे- डिजिटल लाइब्रेरी या बारात घर)। यदि आपका कार्य सूची में नहीं है, तो आप “अन्य” (Others) चुनकर उसका विस्तृत विवरण लिख सकते हैं।
- परियोजना की अनुमानित लागत दर्ज करें: यदि आपके पास कार्य की अनुमानित लागत (Estimated Cost) का अंदाजा है, तो उसे दर्ज करें। यदि अंदाजा नहीं है, तो आप पंचायती राज विभाग के तकनीकी इंजीनियरों से एस्टीमेट तैयार करने का अनुरोध (Request for Estimate) ऑनलाइन टिक कर सकते हैं।
- दस्तावेज़ अपलोड करें: अपना आधार कार्ड/पासपोर्ट और पैन कार्ड स्कैन करके पीडीएफ फॉर्मेट में अपलोड करें।
- नामकरण का विवरण लिखें: फॉर्म में दिए गए विशिष्ट कॉलम में वह नाम साफ-साफ अक्षरों (हिंदी और अंग्रेजी) में लिखें जो आप उस नवनिर्मित भवन पर लिखवाना चाहते हैं (जैसे अपने माता-पिता का नाम)।
- प्रिव्यू और सबमिट: पूरे प्रस्ताव की एक बार समीक्षा करें और “Submit Proposal” पर क्लिक करें। आपको एक प्रस्ताव संख्या (Proposal ID) मिल जाएगी।
- मातृभूमि सोसाइटी द्वारा समीक्षा: आपका प्रस्ताव सीधे ‘उत्तर प्रदेश मातृभूमि सोसाइटी’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और संबंधित जिले के जिलाधिकारी (DM) के पास ऑनलाइन चला जाएगा।
8. प्रशासनिक सत्यापन और प्रोजेक्ट क्रियान्वयन की प्रक्रिया
प्रस्ताव ऑनलाइन सबमिट होने के बाद धरातल पर काम शुरू होने तक की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है, जिसे आप ऑनलाइन ट्रैक भी कर सकते हैं:
- तकनीकी मूल्यांकन (Technical Estimate): जिलाधिकारी (DM) के निर्देश पर जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के मुख्य इंजीनियर आपके द्वारा प्रस्तावित कार्य का एक आधिकारिक और विस्तृत तकनीकी एस्टीमेट (Detailed Project Report – DPR) तैयार करते हैं।
- दानदाता को सूचना: डीपीआर तैयार होने के बाद वास्तविक लागत की जानकारी पोर्टल के माध्यम से दानदाता को भेजी जाती है। उदाहरण के लिए, यदि सरकारी इंजीनियरों के अनुसार बारात घर की वास्तविक लागत ₹40 लाख बैठती है, तो दानदाता को उसका 60% यानी ₹24 लाख जमा करने का लिंक भेजा जाएगा।
- धनराशि का हस्तांतरण: दानदाता यह राशि सीधे उत्तर प्रदेश मातृभूमि सोसाइटी के केंद्रीकृत और सुरक्षित एस्क्रो बैंक खाते (Escrow Account) में ऑनलाइन ट्रांसफर करता है। जैसे ही यह राशि प्राप्त होती है, सरकार अपने हिस्से के 40% (₹16 लाख) का बजट तुरंत उसी खाते में रिलीज कर देती है।
- पारदर्शी कार्य संचालन: कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा टेंडर जारी किया जाता है। दानदाता को यह पूरा अधिकार होता है कि वह वेबकैम या पोर्टल पर अपलोड होने वाली जियो-टैग्ड (Geo-tagged) तस्वीरों के माध्यम से अपने देश या विदेश में बैठकर काम की लाइव प्रोग्रेस (Physical Progress) देख सके।
- लोकार्पण समारोह: कार्य पूर्ण होने पर दानदाता या उसके परिवार की उपस्थिति में भव्य लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया जाता है और शिलालेख पर उनके पूर्वजों का नाम स्थायी रूप से अंकित कर दिया जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना केवल ईंट, गारे और कंक्रीट से ग्रामीण बुनियादी ढांचे को खड़ा करने की एक साधारण सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह प्रवासियों की अपनी मिट्टी के प्रति अगाध श्रद्धा, सम्मान और देशभक्ति की भावनाओं को धरातल पर उतारने का एक पवित्र और भावनात्मक माध्यम है। 60:40 का यह अनोखा पार्टनरशिप मॉडल सक्षम नागरिकों को यह विश्वास दिलाता है कि उनके द्वारा दान किए गए धन का सदुपयोग सीधे उनके अपने गांव के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को बेहतर बनाने में हो रहा है। साल 2026 में पूरी आवेदन और ट्रैकिंग प्रणाली को ऑनलाइन कर दिए जाने से प्रवासियों का भरोसा सरकार पर और अधिक सुदृढ़ हुआ है। यदि आप भी उत्तर प्रदेश की पावन धरती से ताल्लुक रखते हैं और आज जीवन में इस योग्य हैं कि समाज को कुछ वापस दे सकें, तो बिना समय गंवाए तुरंत matrubhumi.up.gov.in पोर्टल पर जाएं और अपनी मातृभूमि का कर्ज चुकाकर अपने गांव को देश का एक अग्रणी डिजिटल और आधुनिक आदर्श ग्राम बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान दें।
उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: यह उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा शुरू की गई एक जनभागीदारी योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य देश-विदेश में रह रहे उत्तर प्रदेश के सक्षम नागरिकों और अप्रवासी भारतीयों (NRIs) को अपने पैतृक गांव में स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों में सीधे वित्तीय योगदान करने का एक पारदर्शी मंच देना है।
प्रश्न 2: इस योजना का वित्तीय सहभागिता मॉडल (60:40) कैसे काम करता है?
उत्तर: योजना के नियमों के अनुसार, यदि कोई नागरिक अपने गांव में कोई विकास कार्य (जैसे- बारात घर या डिजिटल लाइब्रेरी) करवाना चाहता है, तो उस परियोजना की कुल लागत का 60% हिस्सा दानदाता को देना होगा, और शेष 40% का हिस्सा उत्तर प्रदेश सरकार अपने बजट से देगी।
प्रश्न 3: क्या इस योजना के तहत नवनिर्मित भवन का नाम दानदाता के पूर्वजों के नाम पर रखा जा सकता है?
उत्तर: हाँ, इस योजना की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) यही है। जो नागरिक कुल लागत का 60% अंशदान करता है, उसे यह पूरा कानूनी अधिकार मिलता है कि वह उस निर्मित भवन या जन-सुविधा परिसर का नामकरण अपने माता-पिता, दादा-दादी या अपने परिवार के किसी भी पूजनीय पूर्वज के नाम पर स्थायी रूप से रखवा सके।
प्रश्न 4: इस योजना के तहत गांवों में मुख्य रूप से कौन-कौन से कार्य कराए जा सकते हैं?
उत्तर: इसके अंतर्गत ग्राम सचिवालय का कायाकल्प, प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बारात घर, आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी, सोलर स्ट्रीट लाइट्स, सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण, और गांवों के मुख्य चौराहों पर सुरक्षा हेतु सीसीटीवी (CCTV) कैमरा नेटवर्क की स्थापना जैसे जनहित के कार्य कराए जा सकते हैं।
प्रश्न 5: क्या केवल विदेशों में रहने वाले एनआरआई (NRIs) ही इस योजना के पात्र हैं?
उत्तर: नहीं, इस योजना का दायरा बहुत व्यापक है। विदेशों में रहने वाले अप्रवासी भारतीयों (NRIs/OCIs) के साथ-साथ भारत के किसी भी शहर (जैसे दिल्ली, मुंबई आदि) में रह रहा कोई भी सक्षम नागरिक, व्यावसायिक घराने (CSR Fund के तहत), प्राइवेट कंपनियां और पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाएं (NGOs) भी इसमें भाग लेने के लिए पूरी तरह पात्र हैं।
प्रश्न 6: क्या दानदाता अपनी पसंद के ठेकेदार से गांव में काम करवा सकता है?
उत्तर: नहीं, पारदर्शिता और निर्माण की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए काम का संपादन सरकारी नियमों और टेंडर प्रक्रिया के तहत पंचायती राज विभाग की नोडल एजेंसी ‘उत्तर प्रदेश मातृभूमि सोसाइटी’ के तकनीकी इंजीनियरों की देखरेख में किया जाता है। हालांकि, दानदाता को काम की गुणवत्ता की लाइव निगरानी करने का पूरा अधिकार होता है।
प्रश्न 7: क्या इस योजना के तहत दान की जाने वाली धनराशि पर टैक्स में कोई छूट मिलती है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश मातृभूमि सोसाइटी एक पंजीकृत संस्था है। सरकार द्वारा इस योजना के तहत दिए जाने वाले डोनेशन को आयकर अधिनियम (Income Tax Act) की धारा 80G के तहत टैक्स में विशेष छूट के दायरे में लाने और कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए इसे CSR (Corporate Social Responsibility) गतिविधियों के तहत पूरी तरह मान्य करने का प्रशासनिक प्रावधान किया गया है।
प्रश्न 8: योजना के तहत अपने गांव के लिए विकास का प्रस्ताव ऑनलाइन कैसे पंजीकृत करें?
उत्तर: इच्छुक दानदाताओं को इसके समर्पित आधिकारिक वेब पोर्टल matrubhumi.up.gov.in पर जाना होगा। वहां “Donor Registration” लिंक पर जाकर अपना अकाउंट बनाना होगा, अपने जिले, ब्लॉक व ग्राम पंचायत का चयन करना होगा और अपने पंसदीदा प्रोजेक्ट व नामकरण के विवरण के साथ प्रस्ताव ऑनलाइन सबमिट करना होगा।
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