उत्तर प्रदेश विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2026: ऑनलाइन आवेदन व टूलकिट लाभ
उत्तर प्रदेश विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना (UP Vishकर्मा Shram Samman Yojana) राज्य के पारंपरिक कारीगरों, हस्तशिल्पियों और छोटे व्यवसायों (जैसे बढ़ई, लोहार, सुनार, मोची, दर्जी, नाई, टोकरी बुनकर आदि) को आधुनिक समाज में एक नई पहचान, सम्मान और सशक्त आर्थिक आधार प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी, दूरदर्शी और कल्याणकारी सामाजिक सुरक्षा पहल है। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आर्थिक रीढ़ हमेशा से ये पारंपरिक हस्तशिल्पी और कारीगर रहे हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी इन कलाओं को जीवित रखे हुए हैं। हालांकि, आधुनिक तकनीकी बदलावों, पूंजी की कमी और बाजार की बदलती मांगों के कारण ये वर्ग धीरे-धीरे आर्थिक रूप से पिछड़ते जा रहे थे।
इसी गंभीर समस्या को दूर करने, ग्रामीण व शहरी हस्तशिल्प को पुनर्जीवित करने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना का सफल संचालन किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को बिना किसी शुल्क के उच्च स्तरीय व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिदिन मानदेय/स्टाइपेंड दिया जाता है, और सफलतापूर्वक कोर्स पूरा करने पर आधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाली उन्नत टूलकिट (मुफ्त टूलकिट वितरण) प्रदान की जाती है। इसके साथ ही, अपना खुद का व्यवसाय (Self-employment) शुरू करने के लिए बैंकों के माध्यम से रियायती दरों पर बिना गारंटी के ऋण (Loan) भी मुहैया कराया जाता है।
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योजना की विस्तृत रूपरेखा एवं प्रमुख श्रेणियाँ
उत्तर प्रदेश सरकार ने समाज के उन 18 पारंपरिक व्यवसायों को इस योजना के दायरे में शामिल किया है जो सदियों से स्थानीय आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था (Rural Economy) का आधार रहे हैं:
| योजना का नाम | संचालित करने वाला विभाग / बोर्ड | मुख्य लाभ और सहायता | लक्षित लाभार्थी समूह |
|---|---|---|---|
| विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना | सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग, उत्तर प्रदेश | मुफ्त कौशल प्रशिक्षण, उन्नत टूलकिट वितरण, दैनिक स्टाइपेंड और बिना गारंटी बैंक ऋण सहायता। | बढ़ई, दर्जी, मोची, नाई, लोहार, सुनार, कुम्हार, राजमिस्त्री, हलवाई, टोकरी बुनकर आदि (कुल 18 ट्रेड)। |
योजना के अंतर्गत शामिल 18 पारंपरिक ट्रेड (List of Eligible Trades)
इस योजना का दायरा बहुत व्यापक है और इसके तहत निम्नलिखित 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को पूरी तरह कवर किया जाता है:
- बढ़ई (Carpenter): लकड़ी का काम करने वाले, फर्नीचर बनाने वाले कारीगर।
- दर्जी (Tailor): सिलाई-कढ़ाई का काम करने वाले युवक-युवतियां।
- टोकरी बुनकर (Basket Weaver): बांस और प्राकृतिक रेशों से टोकरी व चटाई बनाने वाले।
- नाई (Barber/Hairdresser): सैलून और बाल काटने का पारंपरिक कार्य करने वाले।
- सुनार (Goldsmith): सोने-चांदी के पारंपरिक आभूषण बनाने वाले छोटे कारीगर।
- लोहार (Blacksmith): लोहे के औजार और कृषि उपकरण बनाने वाले।
- कुम्हार (Potter): मिट्टी के बर्तन, दीये और खिलौने बनाने वाले।
- हलवाई (Confectioner): पारंपरिक मिठाई और खाद्य पदार्थ बनाने वाले।
- मोची (Cobbler): चमड़े का काम और जूते-चप्पल बनाने/सुधारने वाले।
- राजमिस्त्री (Mason): भवन निर्माण और चिनाई का काम करने वाले मजदूर/कारीगर।
- धोबी (Washerman): कपड़ों की धुलाई और इस्त्री (Ironing) का काम करने वाले।
- मूर्तिकार (Sculptor): पत्थर, मिट्टी या धातु की मूर्तियां बनाने वाले कलाकार।
- झाड़ू निर्माता (Broom Maker): पारंपरिक झाड़ू बनाने वाले गरीब परिवार।
- चटाई बुनकर (Mat Weaver): विभिन्न प्रकार की पारंपरिक चटाइयां बनाने वाले।
- मालाकार (Florist): फूलों की खेती और मालाएं/गुलदस्ते बनाने वाले।
- ताला बनाने वाले (Locksmith): ताले और चाबियां बनाने व मरम्मत करने वाले।
- नाव निर्माता (Boat Builder): लकड़ी की पारंपरिक नावें बनाने वाले कारीगर।
- अस्त्रकार (Armourer/Toolsmith): पारंपरिक छोटे घरेलू कृषि औजार व धारदार उपकरण बनाने वाले।
योजना के तहत मिलने वाले मुख्य लाभ और वित्तीय सहायता (Benefits Breakdown)
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना कारीगरों को केवल तात्कालिक वित्तीय मदद नहीं देती, बल्कि उन्हें बाजार में एक स्वतंत्र उद्यमी (Entrepreneur) के रूप में स्थापित करने के लिए बहुआयामी सहयोग प्रदान करती है:
1. निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण (Free Skill Development Training)
चयनित कारीगरों को उनके संबंधित ट्रेड में 6 दिवसीय उन्नत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। यह प्रशिक्षण राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) या प्रतिष्ठित प्रशिक्षण केंद्रों में विषय विशेषज्ञों द्वारा दिया जाता है। इसमें कारीगरों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, डिजाइनिंग, पैकेजिंग और वित्तीय प्रबंधन की बुनियादी बातें सिखाई जाती हैं ताकि वे अपने उत्पादों को आधुनिक बाजार के अनुरूप बना सकें।
2. दैनिक मानदेय / स्टाइपेंड (Daily Allowance)
गरीब कारीगरों की दैनिक मजदूरी का नुकसान न हो, इसलिए प्रशिक्षण अवधि के दौरान सरकार द्वारा प्रतिदिन के हिसाब से निर्धारित मानदेय/स्टाइपेंड (वित्तीय भत्ता) दिया जाता है। यह राशि सीधे प्रशिक्षण की समाप्ति पर लाभार्थी के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से ट्रांसफर की जाती है।
3. उन्नत और आधुनिक मुफ्त टूलकिट (Free Advanced Toolkit Distribution)
प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने और परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, सरकार द्वारा प्रत्येक कारीगर को उनके व्यवसाय से संबंधित आधुनिक टूलकिट का पूरा सेट पूरी तरह मुफ्त प्रदान किया जाता है। उदाहरण के लिए, दर्जियों को आधुनिक सिलाई मशीन, बढ़इयों को पावर टूल्स, और राजमिस्त्री को आधुनिक निर्माण उपकरण दिए जाते हैं। बाजार में इन टूलकिट्स की कीमत ₹10,000 से ₹20,000 तक होती है।
4. बिना गारंटी बैंक ऋण सहायता (Mudra & Margin Money Loan)
टूलकिट मिलने के बाद यदि कोई कारीगर अपनी दुकान या छोटा उद्योग स्थापित करना चाहता है, तो उसे योजना के तहत ₹10,000 से लेकर ₹10 लाख तक का बिना गारंटी लोन बैंकों के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाता है। उत्तर प्रदेश सरकार इस ऋण पर लगने वाले ब्याज और मार्जिन मनी पर भारी सब्सिडी (अनुदान) भी प्रदान करती है, जिससे ऋण चुकाने का बोझ बेहद कम हो जाता है।
योजना के लिए पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)
इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदकों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित निम्नलिखित पात्रता शर्तों को अनिवार्य रूप से पूरा करना होता है:
- मूल निवास: आवेदक अनिवार्य रूप से उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- आयु सीमा: आवेदन करने वाले हस्तशिल्पी या कारीगर की आयु न्यूनतम 18 वर्ष होनी चाहिए। अधिकतम आयु की कोई वैधानिक सीमा नहीं है, बशर्ते व्यक्ति कार्य करने में शारीरिक रूप से सक्षम हो।
- पारंपरिक व्यवसाय से जुड़ाव: आवेदक ऊपर उल्लिखित 18 पारंपरिक व्यवसायों में से किसी एक में वास्तविक रूप से कार्यरत होना चाहिए। इसके लिए किसी जाति विशेष का होना अनिवार्य नहीं है, बल्कि व्यवसाय की सत्यता महत्वपूर्ण है।
- परिवार में लाभ की सीमा: योजना के नियमानुसार, परिवार के केवल एक ही सदस्य को इस योजना के तहत प्रशिक्षण और टूलकिट का लाभ दिया जा सकता है (परिवार का अर्थ पति, पत्नी और आश्रित बच्चों से है)।
- पूर्व लाभ की स्थिति: आवेदक ने पिछले 3 से 5 वर्षों के भीतर केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य समान योजना (जैसे प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना या ओडीओपी प्रशिक्षण योजना) के तहत टूलकिट या वित्तीय अनुदान का लाभ न लिया हो।
- सरकारी सेवा में न होना: आवेदक या उसके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी या किसी बड़े संगठित लाभ के पद पर कार्यरत नहीं होना चाहिए।
आवश्यक दस्तावेज (Required Documents List)
ऑनलाइन आवेदन करते समय और भौतिक सत्यापन के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की स्पष्ट डिजिटल प्रतियों की आवश्यकता होती है:
- पहचान पत्र: आवेदक का आधार कार्ड (अनिवार्य)।
- निवास का प्रमाण: उत्तर प्रदेश का वैध निवास प्रमाण पत्र, वोटर आईडी, या बिजली का बिल।
- बैंक विवरण: आवेदक के नाम पर संचालित सक्रिय बैंक खाते की पासबुक के प्रथम पृष्ठ की प्रति या कैंसिल्ड चेक (जिसमें खाता संख्या और आईएफएससी कोड स्पष्ट हो) क्योंकि स्टाइपेंड और लोन इसी खाते में आते हैं।
- पारंपरिक कारीगरी का प्रमाण (Traditional Trade Certificate): ग्राम प्रधान, वार्ड पार्षद या स्थानीय अध्यक्ष द्वारा जारी किया गया यह प्रमाण पत्र कि आवेदक वास्तविक रूप से संबंधित पारंपरिक व्यवसाय (जैसे दर्जी, बढ़ई आदि) का संचालन करता है।
- शपथ पत्र (Affidavit): एक निर्धारित प्रारूप में स्व-घोषणा पत्र जिसमें यह स्पष्ट लिखा हो कि परिवार के किसी अन्य सदस्य ने इस योजना का लाभ नहीं लिया है और दी गई सभी जानकारियां सत्य हैं।
- अन्य: हाल ही में खींचा गया पासपोर्ट साइज फोटो और सक्रिय मोबाइल नंबर।
आवेदन की पूरी प्रक्रिया (Step-by-Step Online Application Process)
उत्तर प्रदेश सरकार ने बिचौलियों और भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त करने के लिए योजना की आवेदन प्रक्रिया को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग के समर्पित उद्योग साथी पोर्टल पर ऑनलाइन कर दिया है।
ऑनलाइन आवेदन करने के चरण:
- आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय उत्तर प्रदेश के आधिकारिक पोर्टल diupmsme.upsdc.gov.in पर जाएं।
- नवीन उपयोगकर्ता पंजीकरण: होमपेज पर “लॉगिन” टैब के अंतर्गत “विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना” का चयन करें और ‘नवीन उपयोगकर्ता पंजीकरण’ (New User Registration) पर क्लिक करें।
- पंजीकरण विवरण दर्ज करें: अपना नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ईमेल और जिला चुनकर सबमिट करें। आपके मोबाइल पर एक यूजर आईडी और पासवर्ड प्राप्त होगा।
- लॉगिन और फॉर्म भरना: प्राप्त क्रेडेंशियल्स के साथ लॉगिन करें। इसके बाद मुख्य आवेदन फॉर्म खुलकर आएगा। इसमें अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता, बैंक खाता संख्या और अपने विशिष्ट पारंपरिक ट्रेड (जैसे बढ़ई, दर्जी आदि) का चुनाव सावधानीपूर्वक करें।
- दस्तावेज अपलोड करें: मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेजों (आधार, बैंक पासबुक, प्रधान का प्रमाण पत्र, फोटो और हस्ताक्षर) को स्पष्ट रूप से स्कैन करके निर्दिष्ट साइज (प्रायः 200KB से कम) में अपलोड करें।
- समीक्षा और फाइनल सबमिट: जानकारी को अच्छी तरह जांचने के बाद ‘फाइनल सबमिट’ बटन पर क्लिक करें। आवेदन सफल होने पर एक आवेदन संख्या (Application/Reference Number) जनरेट होगी, जिसे भविष्य के लिए प्रिंट करके सुरक्षित रख लें।
भौतिक सत्यापन और चयन प्रक्रिया (Selection & Verification)
- ऑनलाइन आवेदन सबमिट होने के बाद आपका फॉर्म जिला स्तर पर तैनात जिला उद्योग केंद्र (DIC – District Industries Centre) के उपायुक्त (District Industries Officer) के पास जाता है।
- जिला स्तरीय चयन समिति द्वारा आवेदनों की स्क्रूटनी की जाती है और वास्तविक कारीगरों का साक्षात्कार (Interview) या भौतिक सत्यापन के माध्यम से चयन किया जाता है।
- चयनित अभ्यर्थियों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस (SMS) के माध्यम से प्रशिक्षण बैच, तिथि और स्थान की जानकारी भेज दी जाती है।
योजना का आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव
उत्तर प्रदेश विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना ने राज्य के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वरोजगार (Self-employment) की एक नई लहर पैदा की है:
- स्थानीय स्तर पर ‘लोकल फॉर वोकल’ को बल: आधुनिक टूलकिट और प्रशिक्षण मिलने से छोटे कस्बों के कारीगरों के उत्पादों की फिनिशिंग और गुणवत्ता में भारी सुधार हुआ है, जिससे वे बड़े ब्रांड्स के उत्पादों का मुकाबला कर पा रहे हैं।
- पलायन पर रोक: ग्रामीण युवाओं को अपने ही गांव या ब्लॉक स्तर पर सिलाई, बढ़ईगिरी या सैलून का व्यवसाय शुरू करने के लिए बिना गारंटी का लोन मिल रहा है, जिससे उनका बड़े शहरों की ओर होने वाला पलायन काफी हद तक कम हुआ है।
- महिला सशक्तिकरण: दर्जी, टोकरी बुनकर और झाड़ू निर्माण जैसे ट्रेडों में ग्रामीण महिलाओं की भारी भागीदारी देखी गई है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर पा रही हैं।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना वास्तव में राज्य के उन मेहनतकश और हुनरमंद कारीगरों के भाग्य को बदलने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है, जो आधुनिकता की दौड़ में पीछे छूट रहे थे। बिना किसी फीस के विश्वस्तरीय प्रशिक्षण देना, दैनिक मानदेय प्रदान करना और काम शुरू करने के लिए ब्रांड न्यू अत्याधुनिक टूलकिट मुफ्त में बांटना राज्य सरकार की एक सराहनीय और जमीनी पहल है। यदि आप भी उत्तर प्रदेश के एक पारंपरिक हस्तशिल्पी, कारीगर या छोटे दुकानदार हैं और अपने हुनर को एक बड़े व्यवसाय में बदलना चाहते हैं, तो आपको बिना किसी देरी के MSME विभाग के पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन अवश्य करना चाहिए।
उत्तर प्रदेश विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना (UP Vishwakarma Shram Samman Yojana) से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):
1. पात्रता और ट्रेड संबंधी प्रश्न (Eligibility & Trades FAQs)
- यह योजना मुख्य रूप से किस विभाग द्वारा चलाई जाती है?
यह योजना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा संचालित की जाती है. - इस योजना के तहत कुल कितने और कौन-से पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है?
योजना के अंतर्गत समाज के कुल 18 पारंपरिक ट्रेड (व्यवसायों) को शामिल किया गया है, जिनमें बढ़ई, दर्जी, मोची, नाई, सुनार, लोहार, कुम्हार, राजमिस्त्री, हलवाई, धोबी, टोकरी बुनकर, मूर्तिकार, झाड़ू निर्माता, चटाई बुनकर, ताला बनाने वाले, मालाकार, नाव निर्माता और अस्त्रकार शामिल हैं। - क्या इस योजना का लाभ पाने के लिए किसी विशेष जाति का होना अनिवार्य है?
नहीं। इस योजना का लाभ उठाने के लिए जाति का कोई बंधन नहीं है। यदि आप उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं और इन 18 पारंपरिक व्यवसायों में से किसी भी कार्य को वास्तविक रूप से करते हैं, तो आप इसके पात्र हैं। - योजना के लिए न्यूनतम आयु सीमा क्या निर्धारित की गई है?
आवेदन करने के लिए आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। अधिकतम आयु की कोई वैधानिक सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
2. प्रशिक्षण, टूलकिट और मानदेय (Training & Toolkit FAQs)
- योजना के तहत कितने दिनों का प्रशिक्षण (Training) दिया जाता है?
चयनित कारीगरों को उनके संबंधित व्यवसाय या ट्रेड में 6 दिवसीय निःशुल्क उन्नत एवं व्यावहारिक कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। - क्या प्रशिक्षण के दौरान रहने या खाने के पैसे मिलते हैं?
हाँ। प्रशिक्षण अवधि के दौरान कारीगरों का दैनिक मजदूरी का नुकसान न हो, इसलिए सरकार द्वारा प्रति कार्यदिवस के हिसाब से निर्धारित दैनिक मानदेय/स्टाइपेंड (भत्ता) दिया जाता है, जो सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होता है। - मुफ्त टूलकिट वितरण (Free Toolkit) कब और कैसे मिलता है?
जब लाभार्थी सफलतापुर्वक अपनी 6 दिनों की ट्रेनिंग और मूल्यांकन पूरा कर लेता है, तो सरकार द्वारा उसे उसके व्यवसाय से जुड़ी अत्याधुनिक और ब्रांड न्यू टूलकिट का पूरा सेट 100% मुफ्त प्रदान किया जाता है ताकि वह अपना काम शुरू कर सके।
3. आवेदन, बैंक ऋण और चयन प्रक्रिया (Application & Loan FAQs)
- योजना के तहत अपना नया व्यवसाय शुरू करने के लिए कितना लोन मिल सकता है?
ट्रेनिंग और टूलकिट मिलने के बाद यदि कोई कारीगर अपनी दुकान या छोटा उद्योग स्थापित करना चाहता है, तो उसे बैंकों के माध्यम से ₹10,00,000 (दस लाख रुपये) तक का बिना गारंटी लोन (मुद्रा एवं मार्जिन मनी लोन) प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाता है. - योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किस आधिकारिक वेबसाइट पर करना होता है?
पात्र लाभार्थी उत्तर प्रदेश MSME विभाग के आधिकारिक समर्पित उद्योग साथी पोर्टल diupmsme.upsdc.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। - क्या एक परिवार से एक से अधिक लोग इस योजना का लाभ ले सकते हैं?
नहीं। योजना के नियमानुसार, परिवार के केवल एक ही सदस्य को इस योजना के तहत मुफ्त प्रशिक्षण और टूलकिट का लाभ दिया जा सकता है (परिवार का अर्थ पति, पत्नी और आश्रित बच्चों से है)।
4. आवश्यक दस्तावेज (Documents FAQs)
- आवेदन फॉर्म के साथ कौन-से मुख्य कागजात अपलोड करने होते हैं?
मुख्य दस्तावेजों में आवेदक का आधार कार्ड, उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की प्रति (IFSC कोड सहित), पासपोर्ट साइज फोटो, और ग्राम प्रधान, वार्ड पार्षद या स्थानीय अध्यक्ष द्वारा जारी किया गया पारंपरिक कारीगरी का व्यवसाय प्रमाण पत्र (Traditional Trade Certificate) अनिवार्य रूप से शामिल हैं।
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