UP Shravan Kumar Shramik Parivar Tirth Yatra Yojana 2026: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और पात्रता नियम

• उत्तर प्रदेश श्रवण कुमार श्रमिक परिवार धार्मिक तीर्थ यात्रा योजना का आधिकारिक सूचना बैनर, जिसमें मुफ्त यात्रा, ₹12,000 भत्ता और धार्मिक स्थलों का विवरण दिया गया है।

यूपी श्रवण कुमार श्रमिक परिवार धार्मिक तीर्थ यात्रा योजना: एक संपूर्ण एवं विस्तृत मार्गदर्शिका

उत्तर प्रदेश श्रवण कुमार श्रमिक परिवार धार्मिक तीर्थ यात्रा योजना राज्य के श्रम विभाग (Labor Department) और उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य संन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (BOCW) द्वारा संचालित एक अत्यंत अनूठी और भावनात्मक रूप से जुड़ी लोक-कल्याणकारी योजना है। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के उन लाखों गरीब और असहाय निर्माण श्रमिकों (Construction Workers) के जीवन में धार्मिक और सांस्कृतिक खुशियाँ लाना है, जो अपनी आर्थिक तंगहाली के कारण जीवनभर कभी किसी पवित्र तीर्थ स्थल के दर्शन नहीं कर पाते हैं।

भारतीय संस्कृति में माता-पिता और बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा कराना संतान का परम कर्तव्य माना गया है, जिसका सबसे बड़ा प्रतीक पौराणिक कथाओं के पात्र ‘श्रवण कुमार’ हैं। इसी पावन भावना को आत्मसात करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना का नामकरण किया है। सरकार खुद इस योजना के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए ‘श्रवण कुमार’ की भूमिका निभाती है और उन्हें देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों की यात्रा पूर्णतः निःशुल्क कराती है।

इस विस्तृत लेख में हम इस अनूठी योजना के सभी पहलुओं जैसे इसके उद्देश्य, पात्रता मानदंड, वित्तीय लाभ, यात्रा के मुख्य स्थल, आवश्यक दस्तावेज और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा करेंगे।


1. योजना की पृष्ठभूमि और मुख्य उद्देश्य

उत्तर प्रदेश के निर्माण कार्यों (जैसे मकान बनाना, सड़क निर्माण, पेंटिंग, प्लंबिंग आदि) में लगे श्रमिक समाज का वह वर्ग हैं जो दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत करके दूसरों के लिए आशियाना तैयार करते हैं। लेकिन उनकी खुद की आय इतनी सीमित होती है कि वे केवल अपने परिवार का पेट पालने और बुनियादी जरूरतें पूरी करने में ही सिमट कर रह जाते हैं। ऐसे में अपने जीवनकाल में किसी बड़े धार्मिक स्थल की यात्रा करना या अपने वृद्ध माता-पिता की इस इच्छा को पूरा करना उनके लिए एक दूर का सपना बनकर रह जाता है।

इसी सामाजिक और आर्थिक अंतर को पाटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस तीर्थ यात्रा योजना की शुरुआत की है। योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • श्रमिकों का सामाजिक समावेशन: समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े कामगारों को यह अहसास कराना कि वे भी देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का हिस्सा हैं।
  • आर्थिक बोझ से मुक्ति: श्रमिकों और उनके बुजुर्ग माता-पिता को बिना किसी व्यक्तिगत खर्च के सुरक्षित और सम्मानजनक तीर्थ यात्रा का अवसर देना।
  • मानसिक शांति और विश्राम: निरंतर कठिन शारीरिक श्रम करने वाले कामगारों को कुछ समय के लिए तनावमुक्त वातावरण और आध्यात्मिक शांति प्रदान करना।
  • श्रवण कुमार की भावना को धरातल पर उतारना: वृद्ध माता-पिता और आश्रितों के प्रति सामाजिक दायित्व को सरकारी सहयोग से पूरा करना।

2. योजना की मुख्य विशेषताएं और मिलने वाले लाभ

यह योजना केवल नाम मात्र की वित्तीय सहायता नहीं देती, बल्कि श्रमिक और उसके परिवार को एक वीआईपी (VIP) तीर्थ यात्री की तरह सभी सुविधाएं प्रदान करती है। इसकी प्रमुख विशेषताएं और लाभ नीचे दिए गए हैं:

  1. पूर्णतः निःशुल्क यात्रा (100% Free Travel): योजना के तहत चयनित श्रमिकों से यात्रा, रहने, खाने या दर्शन करने का ₹1 भी नहीं लिया जाता। पूरा खर्च उत्तर प्रदेश सरकार और श्रम कल्याण बोर्ड उठाता है।
  2. परिवार को साथ ले जाने की अनुमति: श्रमिक अकेला नहीं जाता; वह अपने साथ अपनी पत्नी/पति और अपने वृद्ध माता-पिता को भी इस यात्रा पर ले जा सकता है।
  3. वित्तीय सहायता (वित्तीय भत्ता): यात्रा के दौरान होने वाले फुटकर खर्चों, पूजा-सामग्री या छोटे-मोटे व्यक्तिगत भुगतानों के लिए सरकार श्रमिक के बैंक खाते में ₹12,000 तक की वित्तीय सहायता (पॉकेट मनी/भत्ता) सीधे ट्रांसफर करती है।
  4. सुरक्षित परिवहन और आवास: तीर्थ यात्रियों को ले जाने के लिए विशेष बसों (AC/Non-AC) या ट्रेनों की व्यवस्था की जाती है। साथ ही गंतव्य स्थल पर उनके ठहरने के लिए होटल या अच्छे धर्मशालाओं और शुद्ध शाकाहारी भोजन का प्रबंध सरकार द्वारा अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है।
  5. सुरक्षा और चिकित्सा दल: यात्रा के दौरान श्रमिकों के जत्थे के साथ सुरक्षाकर्मी और एक मेडिकल टीम (डॉक्टर और दवाइयां) हमेशा साथ रहती है, ताकि किसी बुजुर्ग या श्रमिक की तबीयत बिगड़ने पर तत्काल इलाज मिल सके।

3. यात्रा के लिए प्रमुख धार्मिक और दर्शनीय स्थल

इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत के और विशेष रूप से राज्य के कई अत्यंत महत्वपूर्ण और आस्था के केंद्रों को शामिल किया है। श्रमिक आवेदन करते समय अपनी पसंद के यात्रा रूट का चयन कर सकते हैं। प्रमुख स्थलों की सूची इस प्रकार है:

  • अयोध्या धाम: श्री राम जन्मभूमि मंदिर, हनुमान गढ़ी और सरयू नदी दर्शन।
  • वाराणसी (काशी): बाबा विश्वनाथ मंदिर, काल भैरव मंदिर और गंगा आरती।
  • प्रयागराज: त्रिवेणी संगम, लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर और आनंद भवन।
  • मथुरा-वृंदावन: बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, कृष्ण जन्मभूमि और गोवर्धन परिक्रमा।
  • हरिद्वार और ऋषिकेश: हर की पौड़ी, मनसा देवी मंदिर, लक्ष्मण झूला और त्रिवेणी घाट।
  • चित्रकूट: रामघाट, कामदगिरि परिक्रमा और जानकी कुंड।
  • नैमिशारण्य (सीतापुर): चक्रतीर्थ और प्राचीन पौराणिक मंदिर।

सरकार समय-समय पर श्रमिकों की मांग और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इस सूची में नए रूट और राज्य के बाहर के कुछ प्रसिद्ध मंदिरों को भी जोड़ती रहती है।


4. योजना के लिए पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)

यह लाभ केवल वास्तविक और जरूरतमंद कामगारों तक ही पहुंचे, इसके लिए उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य संन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UPBOCW) ने स्पष्ट पात्रता शर्तें निर्धारित की हैं:

  • उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी: आवेदक श्रमिक का उत्तर प्रदेश का मूल और स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
  • BOCW बोर्ड में पंजीकरण: सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि श्रमिक उत्तर प्रदेश श्रम विभाग या BOCW बोर्ड के तहत एक पंजीकृत निर्माण श्रमिक (Registered Construction Worker) होना चाहिए। उसका लेबर कार्ड (श्रमिक कार्ड) सक्रिय (Active) होना चाहिए।
  • पंजीकरण की अवधि: श्रमिक का बोर्ड में पंजीकरण कम से कम 1 वर्ष (12 महीने) पुराना होना चाहिए और उसका अंशदान (Contribution/नवीनीकरण शुल्क) समय पर जमा होना चाहिए।
  • आयु सीमा: मुख्य आवेदक श्रमिक की आयु 18 वर्ष से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए। उसके साथ जाने वाले माता-पिता की आयु वृद्ध श्रेणी (Senior Citizen) में हो सकती है।
  • एक बार का लाभ: इस योजना का लाभ एक श्रमिक को उसके पूरे जीवनकाल में केवल एक बार ही दिया जाता है, ताकि राज्य के अन्य पंजीकृत श्रमिकों को भी आगे मौका मिल सके।

5. आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)

ऑनलाइन आवेदन करते समय किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या या रिजेक्शन से बचने के लिए श्रमिकों के पास निम्नलिखित दस्तावेजों की स्पष्ट स्कैन कॉपी होनी चाहिए:

  1. पंजीकृत श्रमिक कार्ड (लेबर कार्ड): जिसमें श्रमिक का 14 अंकों का पंजीकरण नंबर साफ दिख रहा हो।
  2. आधार कार्ड: श्रमिक का और उसके साथ यात्रा पर जाने वाले सभी पारिवारिक सदस्यों (पत्नी, माता-पिता) का आधार कार्ड।
  3. बैंक पासबुक की प्रति: श्रमिक का बैंक खाता किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में होना चाहिए और वह आधार से लिंक (Aadhaar Seeded) होना चाहिए, क्योंकि ₹12,000 का भत्ता इसी खाते में आएगा।
  4. निवास प्रमाण पत्र: उत्तर प्रदेश का मूल निवास पत्र (या बिजली बिल/राशन कार्ड)।
  5. आयु का प्रमाण: सभी यात्रियों की आयु सत्यापित करने के लिए दस्तावेज।
  6. पारिवारिक संबंध का प्रमाण: राशन कार्ड या परिवार रजिस्टर की नकल (यह साबित करने के लिए कि साथ जाने वाले लोग श्रमिक के माता-पिता या जीवनसाथी हैं)।
  7. पासपोर्ट साइज फोटो: सभी जाने वाले सदस्यों की नवीनतम तस्वीरें।
  8. स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (Fitness Certificate): एक सरकारी डॉक्टर (CHC/PHC) द्वारा जारी फिटनेस सर्टिफिकेट, जो यह प्रमाणित करे कि श्रमिक और उसके वृद्ध माता-पिता लंबी यात्रा करने के लिए शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं।

6. ऑनलाइन आवेदन करने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया (Online Application Process)

उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों की सुविधा के लिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। श्रमिक स्वयं, किसी इंटरनेट कैफे या अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC / जन सुविधा केंद्र) पर जाकर नीचे दिए गए चरणों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं:

चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट पर प्रवेश

सबसे पहले उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य संन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं (यूआरएल: upbocw.in)।

चरण 2: श्रमिक लॉगिन/योजना चयन

  • होमपेज पर मुख्य मेनू में “योजनाएं” (Schemes) का विकल्प दिखाई देगा। उस पर क्लिक करें।
  • इसके बाद “योजनाओं के लिए आवेदन करें” (Apply for Schemes) पर क्लिक करें।
  • अब आपको अपना 14 अंकों का श्रमिक पंजीकरण संख्या (Registration Number) और अपना पंजीकृत मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा।

चरण 3: ओटीपी सत्यापन

आपके मोबाइल नंबर पर एक वन-टाइम पासवर्ड (OTP) आएगा। उसे निर्धारित बॉक्स में दर्ज कर ‘सत्यापित करें’ पर क्लिक करें। इसके बाद आपकी श्रमिक प्रोफाइल स्क्रीन पर खुल जाएगी।

चरण 4: योजना का चयन और विवरण भरना

  • उपलब्ध योजनाओं की सूची में से “उत्तर प्रदेश श्रवण कुमार श्रमिक परिवार धार्मिक तीर्थ यात्रा योजना” का चयन करें।
  • अब आवेदन फॉर्म में पूछे गए विवरण भरें, जैसे: आप अपने साथ किस-किस को ले जाना चाहते हैं (पत्नी/माता/पिता), उनका आधार नंबर और नाम।
  • इसके बाद अपनी पसंद के तीर्थ यात्रा मार्ग (Route/Destination) का चयन करें।

चरण 5: दस्तावेज अपलोड करना

मांगे गए सभी दस्तावेजों (आधार, बैंक पासबुक, लेबर कार्ड, फोटो और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट) को स्कैन करके जेपीईजी (JPEG) या पीडीएफ (PDF) फॉर्मेट में अपलोड करें। सुनिश्चित करें कि फाइल का साइज तय सीमा के भीतर हो ताकि अपलोडिंग में एरर न आए।

चरण 6: फाइनल सबमिशन और रसीद

  • फॉर्म को पूरी तरह जांचने के बाद “Submit” बटन पर क्लिक करें।
  • सफलतापूर्वक सबमिट होने के बाद स्क्रीन पर एक आवेदन संख्या (Application Reference Number) जनरेट होगी। इस रसीद का प्रिंटआउट निकाल लें। भविष्य में स्टेटस चेक करने के लिए यह संख्या बेहद जरूरी है।

7. चयन की प्रक्रिया और यात्रा का आयोजन

आवेदन जमा होने के बाद इसकी एक प्रशासनिक जांच प्रक्रिया होती है:

  1. सत्यापन (Verification): स्थानीय श्रम प्रवर्तन अधिकारी (Labor Enforcement Officer – LEO) आपके दस्तावेजों और श्रमिक कार्ड की सक्रियता की जांच करते हैं।
  2. जत्थे (Batch) का निर्माण: जिलेवार प्राप्त आवेदनों के आधार पर विभाग तीर्थ यात्रियों का एक जत्था तैयार करता है। एक निश्चित संख्या (जैसे 50 या 100 यात्री) पूरी होने पर यात्रा की तारीख की घोषणा की जाती है।
  3. सूचना का प्रेषण: चयनित श्रमिकों को यात्रा की तारीख, समय और रवानगी के स्थान (बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन) की जानकारी उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस (SMS) या फोन कॉल के माध्यम से कम से कम 10 से 15 दिन पहले दे दी जाती है।
  4. भत्ते का भुगतान: यात्रा शुरू होने से ठीक पहले या यात्रा के दौरान ही ₹12,000 की सहायता राशि सीधे श्रमिक के बैंक खाते में भेज दी जाती है।

8. महत्वपूर्ण सावधानियां और नियम

श्रमिकों को इस योजना का लाभ लेते समय कुछ बातों का कड़ाई से पालन करना चाहिए:

  • स्वास्थ्य को प्राथमिकता: चूंकि इस यात्रा में वृद्ध माता-पिता भी शामिल होते हैं, इसलिए चिकित्सा प्रमाण पत्र में किसी भी तरह की गलत जानकारी न दें। यदि कोई सदस्य गंभीर रूप से बीमार है, तो लंबी यात्रा से बचें।
  • दस्तावेजों की मूल प्रति: यात्रा पर जाते समय अपने साथ सभी सदस्यों के मूल आधार कार्ड (Original Aadhaar Card) और श्रमिक कार्ड की प्रति अवश्य रखें, क्योंकि होटलों या ट्रेनों में चेकिंग के समय इसकी आवश्यकता होती है।
  • अनुशासन का पालन: यह एक सरकारी और धार्मिक यात्रा होती है, इसलिए यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन पूर्णतः प्रतिबंधित होता है। दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर श्रमिक को यात्रा से बीच में ही हटाया जा सकता है और उसका लेबर कार्ड भी सस्पेंड हो सकता है।

9. योजना का सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश सरकार की यह योजना महज एक पर्यटन कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसके गहरे सामाजिक मायने हैं:

  • बुजुर्गों को सम्मान: ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब वृद्ध माता-पिता के लिए यह योजना किसी चमत्कार से कम नहीं है। जो संतान पैसों की कमी के कारण ग्लानि महसूस करती थी, वह आज सरकार की मदद से गर्व के साथ अपने माता-पिता को तीर्थ करा पा रही है।
  • श्रम का गौरव (Dignity of Labor): यह योजना यह संदेश देती है कि राज्य सरकार श्रमिकों के केवल काम को ही नहीं, बल्कि उनकी आस्था, उनकी भावनाओं और उनकी पारिवारिक खुशियों को भी पूरा सम्मान देती है।
  • सांस्कृतिक एकता: विभिन्न जिलों के श्रमिक जब एक साथ मिलकर तीर्थ स्थलों पर जाते हैं, तो उनमें आपसी भाईचारा, सामाजिक समरसता और देश की सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान बढ़ता है।

10. निष्कर्ष

यूपी श्रवण कुमार श्रमिक परिवार धार्मिक तीर्थ यात्रा योजना उत्तर प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता और जनकल्याणकारी सोच का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह योजना समाज के उस वर्ग के चेहरों पर मुस्कान लाती है जो देश की प्रगति की नींव रखता है। ₹12,000 के भत्ते और पूरी तरह मुफ्त वीआईपी यात्रा सुविधाओं के साथ, यह योजना वास्तव में श्रमिकों के लिए एक महान वरदान सिद्ध हुई है।

यदि आप एक पंजीकृत निर्माण श्रमिक हैं और आपने अभी तक इस योजना का लाभ नहीं लिया है, तो आपको बिना किसी देरी के यूपीबीओसीडब्ल्यू (UPBOCW) के पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन दर्ज करना चाहिए और अपने परिवार के साथ देश के पावन तीर्थों के दर्शन का पुण्य लाभ उठाना चाहिए।


यूपी श्रवण कुमार श्रमिक परिवार धार्मिक तीर्थ यात्रा योजना से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

1. यूपी श्रवण कुमार श्रमिक परिवार धार्मिक तीर्थ यात्रा योजना क्या है?

यह उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम विभाग और भवन एवं अन्य संन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (BOCW) द्वारा चलाई जाने वाली एक विशेष योजना है। इसके तहत राज्य के पंजीकृत गरीब निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों को देश व प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों की 100% निःशुल्क (फ्री) तीर्थ यात्रा कराई जाती है।

2. इस योजना के तहत सरकार की तरफ से क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं?

योजना के अंतर्गत चयनित तीर्थ यात्रियों को निम्नलिखित सुविधाएं पूरी तरह मुफ्त मिलती हैं:

  • निःशुल्क परिवहन: एसी/नॉन-एसी बसों या ट्रेनों के जरिए सुरक्षित यात्रा।
  • रहने और खाने की व्यवस्था: अच्छे होटलों या धर्मशालाओं में रुकने और शुद्ध शाकाहारी भोजन का प्रबंध।
  • वित्तीय भत्ता: यात्रा के दौरान व्यक्तिगत और फुटकर खर्चों के लिए श्रमिक के बैंक खाते में ₹12,000 की नकद सहायता राशि भेजी जाती है।
  • सुरक्षा एवं चिकित्सा: यात्रा दल के साथ हमेशा सुरक्षाकर्मी और डॉक्टरों की एक मेडिकल टीम तैनात रहती है।

3. श्रमिक अपने साथ परिवार के किन-किन सदस्यों को ले जा सकता है?

एक मुख्य आवेदक श्रमिक अपने साथ निम्नलिखित पारिवारिक सदस्यों को यात्रा पर ले जाने का हकदार है:

  • अपनी पत्नी या पति (जीवनसाथी)।
  • अपने वृद्ध माता-पिता (सास-ससुर इस योजना के अंतर्गत मान्य नहीं होते, केवल श्रमिक के अपने माता-पिता ही पात्र हैं)।

4. इस योजना का लाभ उठाने के लिए मुख्य पात्रता शर्तें क्या हैं?

इस योजना का लाभ लेने के लिए श्रमिक को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:

  • आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • श्रमिक का उत्तर प्रदेश लेबर विभाग (BOCW Board) में पंजीकरण कम से कम 1 वर्ष पुराना होना चाहिए और उसका श्रमिक कार्ड एक्टिव होना चाहिए।
  • मुख्य आवेदक श्रमिक की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • श्रमिक को अपने पूरे जीवनकाल में इस योजना का लाभ केवल एक बार ही मिल सकता है।

5. क्या यात्रा पर जाने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है?

हाँ, बिल्कुल। चूंकि इस यात्रा में लंबी दूरी तय करनी होती है और बुजुर्ग माता-पिता भी शामिल होते हैं, इसलिए आवेदन के समय किसी सरकारी अस्पताल (CHC/PHC) के डॉक्टर द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (Medical Fitness Certificate) अपलोड करना अनिवार्य है। यह प्रमाणित करता है कि सभी यात्री यात्रा के लिए शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं।

6. इस योजना के तहत किन-किन प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जाते हैं?

श्रमिक आवेदन करते समय सरकार द्वारा तय किए गए रूट्स में से अपनी पसंद का चयन कर सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से अयोध्या धाम, वाराणसी (काशी विश्वनाथ), प्रयागराज संगम, मथुरा-वृंदावन, हरिद्वार-ऋषिकेश, चित्रकूट और नैमिशारण्य जैसे पावन तीर्थ स्थल शामिल हैं।

7. आवेदन करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?

ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आपके पास ये दस्तावेज होने चाहिए:

  • सक्रिय श्रमिक कार्ड (लेबर कार्ड) का नंबर।
  • श्रमिक और साथ जाने वाले सभी सदस्यों के आधार कार्ड।
  • श्रमिक की बैंक पासबुक की कॉपी (खाता आधार से लिंक होना जरूरी है)।
  • उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र।
  • सभी सदस्यों के पासपोर्ट साइज फोटो और डॉक्टर द्वारा जारी फिटनेस सर्टिफिकेट।

8. इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे और कहाँ करें?

श्रमिक स्वयं या अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC / जन सुविधा केंद्र) पर जाकर आवेदन कर सकते हैं:

  1. उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य संन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट

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