UP Sanskrit Scholarship Scheme: यूपी में संस्कृत पढ़ने वाले सभी छात्रों को मिलेगी छात्रवृत्ति, जानें नियम

• उत्तर प्रदेश संस्कृत छात्रवृत्ति योजना के तहत गुरुकुल के छात्रों को डिजिटल रूप से सहायता प्राप्त करते हुए दर्शाती तस्वीर (UP Sanskrit Scholarship Scheme student empowerment illustration)

उत्तर प्रदेश संस्कृत छात्रवृत्ति योजना राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देववाणी संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, राज्य के गरीब, आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी छात्रों को संस्कृत शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है ताकि वे बिना किसी आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। वर्ष 2024-2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस योजना में व्यापक सुधार करते हुए प्रदेश के सभी पात्र संस्कृत छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा की गई, जो राज्य में पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

नीचे इस योजना का विस्तृत विश्लेषण, इसके उद्देश्य, लाभ, पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेज और इसके दूरगामी सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव को रेखांकित करता हुआ एक संपूर्ण लेख दिया गया है।


उत्तर प्रदेश संस्कृत छात्रवृत्ति योजना: देववाणी के संरक्षण और छात्र सशक्तिकरण का नया मार्ग

प्रस्तावना

संस्कृत न केवल एक भाषा है, बल्कि यह भारत की गौरवशाली संस्कृति, सभ्यता, ज्ञान-विज्ञान और दर्शन की आत्मा है। हमारे प्राचीन ग्रंथ, वेद, उपनिषद, पुराण और वैज्ञानिक सिद्धांत मूल रूप से संस्कृत में ही रचे गए हैं। हालांकि, आधुनिक काल में अंग्रेजी और अन्य व्यावसायिक भाषाओं के बढ़ते प्रभाव तथा रोजगार के सीमित अवसरों के कारण संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई थी। एक और बड़ी समस्या यह भी थी कि संस्कृत विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र आर्थिक रूप से कमजोर या ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं, जिन्हें उच्च शिक्षा जारी रखने में वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस गंभीर चुनौती को समझा और राज्य में संस्कृत शिक्षा को पुनर्जीवित करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश संस्कृत छात्रवृत्ति योजना’ (UP Sanskrit Scholarship Scheme) को एक नए और व्यापक रूप में लागू किया है। इस योजना के माध्यम से सरकार ने संस्कृत पढ़ रहे विद्यार्थियों के वित्तीय बोझ को कम करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का एक सफल प्रयास किया है।


उत्तर प्रदेश संस्कृत छात्रवृत्ति योजना क्या है?

उत्तर प्रदेश संस्कृत छात्रवृत्ति योजना राज्य के माध्यमिक शिक्षा विभाग और उत्तर प्रदेश संस्कृत शिक्षा परिषद के माध्यम से संचालित एक राज्य स्तरीय छात्रवृत्ति कार्यक्रम है। इस योजना के तहत राज्य के मान्यता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों, महाविद्यालयों और गुरु कुलों में कक्षा 6 से लेकर स्नातकोत्तर (Post Graduate) व अनुसंधान (Research) स्तर तक की पढ़ाई कर रहे पात्र विद्यार्थियों को हर महीने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पहले यह छात्रवृत्ति केवल सीमित संख्या में मेधावी छात्रों को ही मिलती थी, लेकिन सरकार के नए नीतिगत सुधारों के बाद अब प्रदेश के सभी पात्र और जरूरतमंद संस्कृत छात्रों को इस योजना के दायरे में लाया गया है। इसके तहत प्रथमा, मध्यमा, शास्त्री और आचार्य जैसी पारंपरिक संस्कृत कक्षाओं के विद्यार्थियों को मासिक व वार्षिक आधार पर छात्रवृत्ति दी जा रही है।


योजना के मुख्य उद्देश्य

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना को बहुत ही दूरगामी और सांस्कृतिक विज़न के साथ लागू किया है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. संस्कृत भाषा का पुनरुत्थान: युवा पीढ़ी में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि पैदा करना और इस प्राचीन भाषा को जीवंत बनाए रखना।
  2. आर्थिक बाधाओं को दूर करना: निर्धन और वंचित परिवारों के बच्चों को आर्थिक तंगी के कारण संस्कृत शिक्षा छोड़ने से रोकना।
  3. संस्कृत विद्यालयों का सुदृढ़ीकरण: पारंपरिक गुरुकुलों और संस्कृत शिक्षण संस्थानों में छात्रों के नामांकन (Enrollment) को बढ़ाना।
  4. आधुनिक और पारंपरिक शिक्षा का समन्वय: छात्रों को संस्कृत के साथ-साथ कंप्यूटर, गणित और विज्ञान जैसे आधुनिक विषयों को पढ़ने के लिए प्रेरित करना, ताकि वे भविष्य के रोजगार बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।
  5. छात्रों का आत्मसम्मान बढ़ाना: संस्कृत के विद्यार्थियों को अन्य सामान्य या तकनीकी शिक्षा के छात्रों की तरह ही समान अवसर और सम्मान दिलाना।

छात्रवृत्ति की दरें (कक्षावार विवरण)

सरकार ने विभिन्न स्तरों पर शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए छात्रवृत्ति की राशि को श्रेणीबद्ध किया है। वर्तमान संशोधित दरों के अनुसार छात्रवृत्ति का विवरण इस प्रकार है:

  • प्रथमा स्तर (कक्षा 6 से 8 तक): इस स्तर के नन्हे विद्यार्थियों को संस्कृत की बुनियादी शिक्षा से जोड़े रखने के लिए मासिक आधार पर वित्तीय सहायता दी जाती है।
  • पूर्व मध्यमा स्तर (कक्षा 9 और 10): माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए प्रति माह एक निश्चित राशि प्रदान की जाती है ताकि वे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी बिना किसी वित्तीय तनाव के कर सकें।
  • उत्तर मध्यमा स्तर (कक्षा 11 और 12): इंटरमीडिएट के समकक्ष संस्कृत शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को उच्चतर माध्यमिक स्तर पर सहायता दी जाती है।
  • शास्त्री स्तर (स्नातक / Graduation): संस्कृत में डिग्री या ग्रेजुएशन कर रहे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की राशि और बढ़ा दी जाती है ताकि वे स्नातक स्तर की पुस्तकों और हॉस्टल के खर्चों को वहन कर सकें।
  • आचार्य स्तर (स्नातकोत्तर / Post Graduate): संस्कृत साहित्य, व्याकरण या दर्शन में मास्टर डिग्री कर रहे उच्च स्तर के छात्रों को अधिक वित्तीय सहायता दी जाती है।
  • अनुसंधान स्तर (Ph.D. / Research): संस्कृत में शोध कर रहे मेधावी विद्वानों को उच्च अनुसंधान कार्यों के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है।

(नोट: छात्रवृत्ति की यह राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों में आधार-सीडेड डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है ताकि बीच में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की कोई संभावना न रहे।)


पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)

इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक छात्रों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित कुछ अनिवार्य शर्तों को पूरा करना होता है:

  1. मूल निवास: आवेदक छात्र अनिवार्य रूप से उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  2. शैक्षणिक संस्थान: छात्र उत्तर प्रदेश संस्कृत शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी संस्कृत विद्यालय, महाविद्यालय या सरकार द्वारा सहायता प्राप्त गुरुकुल का नियमित (Regular) छात्र होना चाहिए।
  3. न्यूनतम उपस्थिति: छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए छात्र की विद्यालय में कम से कम 75% उपस्थिति अनिवार्य है।
  4. आय सीमा: आवेदक के परिवार की वार्षिक आय सरकार द्वारा निर्धारित गरीबी रेखा या विशिष्ट आय सीमा के भीतर होनी चाहिए (सामान्यतः यह सीमा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग सरकारी नियमों के अनुसार तय होती है)।
  5. शैक्षणिक रिकॉर्ड: छात्र को अपनी पिछली कक्षा अच्छे अंकों या बिना किसी अनुत्तीर्ण (Fail) रिकॉर्ड के उत्तीर्ण करनी आवश्यक है।

आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)

ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करते समय छात्रों को निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  • आधार कार्ड: छात्र की पहचान और बैंक खाते के सत्यापन के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज।
  • उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र: यह साबित करने के लिए कि छात्र यूपी का मूल निवासी है।
  • पारिवारिक आय प्रमाण पत्र: सक्षम अधिकारी (तहसीलदार) द्वारा जारी नवीनतम आय प्रमाण पत्र।
  • पिछली कक्षा की मार्कशीट: शैक्षणिक योग्यता और उत्तीर्ण होने का प्रमाण।
  • वर्तमान संस्था का प्रवेश प्रमाण पत्र / रसीद: यह प्रमाणित करने के लिए कि छात्र वर्तमान में उस संस्कृत विद्यालय में अध्ययनरत है।
  • बैंक खाता पासबुक: छात्र का अपना बैंक खाता होना चाहिए जो आधार कार्ड से लिंक हो।
  • पासपोर्ट साइज फोटो: आवेदन फॉर्म पर लगाने के लिए।

आवेदन की प्रक्रिया (Application Process)

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और डिजिटल बना दिया है। छात्रवृत्ति के लिए आवेदन मुख्य रूप से दो माध्यमों से किया जा सकता है:

1. ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से (Online Mode)

  • छात्र उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक छात्रवृत्ति पोर्टल (Scholarship Portal) पर जाते हैं।
  • वहाँ ‘संस्कृत छात्रवृत्ति’ के विशिष्ट लिंक पर क्लिक करके अपना नया पंजीकरण (Registration) करते हैं।
  • पंजीकरण के बाद, मांगी गई सभी व्यक्तिगत, शैक्षणिक और बैंक संबंधी जानकारियों को ध्यानपूर्वक भरते हैं।
  • आवश्यक दस्तावेजों (फोटो, सिग्नेचर, आय प्रमाण पत्र, मार्कशीट) की स्कैन कॉपी अपलोड करते हैं।
  • फॉर्म को फाइनल सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट निकालकर अपने विद्यालय में जमा करते हैं।

2. संस्थागत स्तर पर (Institutional Mode)

  • कई पारंपरिक गुरुकुलों और ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ इंटरनेट की पहुंच सीमित है, वहाँ विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने सभी पात्र छात्रों का डेटा एकत्र करें।
  • विद्यालय प्रशासन स्वयं इन फॉर्मों को सत्यापित करता है और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) या जिला पिछड़ा वर्ग/समाज कल्याण अधिकारी के माध्यम से शिक्षा विभाग को फॉरवर्ड करता है।

योजना के प्रमुख लाभ और विशेषताएं

उत्तर प्रदेश संस्कृत छात्रवृत्ति योजना केवल एक वित्तीय सहायता मात्र नहीं है, बल्कि इसके कई व्यापक सामाजिक और शैक्षणिक लाभ हैं:

विशेषता / लाभविवरण
शत-प्रतिशत डीबीटी (DBT)छात्रवृत्ति की राशि बिना किसी मध्यस्थ (Middleman) के सीधे छात्र के बैंक खाते में जाती है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
सभी पात्र छात्रों को लाभनए संशोधनों के बाद, बजट की उपलब्धता के आधार पर अधिक से अधिक छात्रों को इस दायरे में शामिल किया गया है, न कि केवल शीर्ष रैंकर्स को।
गुरुकुल पद्धति को प्रोत्साहनपारंपरिक आवासीय गुरुकुलों में पढ़ रहे छात्रों के रहने और खाने के खर्च में यह योजना बड़ी मददगार साबित हो रही है।
छात्राओं को विशेष प्रोत्साहनसंस्कृत पढ़ने वाली छात्राओं को इस योजना के तहत विशेष प्राथमिकता दी जाती है ताकि महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिले।

सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभाव

इस दूरगामी योजना का उत्तर प्रदेश के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है:

क) देववाणी संस्कृत का वैश्विक पुनरुत्थान

उत्तर प्रदेश भारत की सांस्कृतिक राजधानी रहा है, जहाँ काशी (वाराणसी), अयोध्या, प्रयागराज और मथुरा जैसे महान संस्कृत केंद्र हैं। जब इन क्षेत्रों के युवाओं को संस्कृत पढ़ने के लिए सरकारी प्रोत्साहन मिलता है, तो वे वेदों और उपनिषदों के शोध को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का काम करते हैं। इससे वैश्विक स्तर पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) और सांस्कृतिक विरासत मजबूत होती है।

ख) रोजगार के नए अवसरों का सृजन

आधुनिक समय में संस्कृत केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) के लिए संस्कृत को सबसे उपयुक्त भाषा माना जा रहा है। इसके अलावा, योग, आयुर्वेद, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के वैश्विक प्रसार के कारण संस्कृत विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ी है। यह छात्रवृत्ति गरीब छात्रों को इन क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनने में मदद करती है।

ग) समानता और सामाजिक समावेशन

इस योजना का लाभ समाज के हर वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मिलता है। इससे समाज में यह संदेश जाता है कि संस्कृत किसी विशेष वर्ग की भाषा नहीं है, बल्कि यह हर उस भारतीय की भाषा है जो अपनी जड़ों से जुड़ना चाहता है। यह सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का एक बेहतरीन माध्यम है।


चुनौतियाँ और सुधार के सुझाव

योजना के सफल क्रियान्वयन के बावजूद, कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है:

  1. डिजिटल साक्षरता की कमी: पारंपरिक गुरुकुलों में पढ़ने वाले कई छात्र या उनके माता-पिता ऑनलाइन आवेदन करने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसके समाधान के लिए हर जिले में ‘संस्कृत छात्रवृत्ति सहायता डेस्क’ की स्थापना की जानी चाहिए।
  2. समीक्षा और समय पर भुगतान: कई बार प्रशासनिक औपचारिकता के कारण छात्रवृत्ति की राशि सत्र के अंत में मिलती है। यदि यह राशि तिमाही या छमाही आधार पर मिले, तो छात्र अपनी दैनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं (जैसे किताबें खरीदना, फीस देना) को समय पर पूरा कर सकेंगे।
  3. जागरूकता अभियान: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित छोटे संस्कृत विद्यालयों तक इस योजना की जानकारी पूरी तरह नहीं पहुंच पाती। इसके लिए शिक्षा विभाग को विशेष शिविर लगाने चाहिए।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश संस्कृत छात्रवृत्ति योजना राज्य के शैक्षणिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम है। यह योजना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कोई भी समाज आधुनिकता की दौड़ में अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा को छोड़े बिना आगे बढ़ सकता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संस्कृत भाषा और इसके विद्यार्थियों को जो सम्मान और वित्तीय सुरक्षा प्रदान की गई है, वह आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को संस्कृत शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। यह योजना न केवल गरीब मेधावी छात्रों के सपनों को पंख दे रही है, बल्कि भारत की महान ज्ञान परंपरा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ के संदेश को भी अक्षुण्ण बनाए रखने का महती कार्य कर रही है।

उत्तर प्रदेश संस्कृत छात्रवृत्ति योजना से जुड़े कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. उत्तर प्रदेश संस्कृत छात्रवृत्ति योजना क्या है?

Ans. यह उत्तर प्रदेश सरकार के माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित एक विशेष वित्तीय सहायता कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य राज्य के पारंपरिक संस्कृत विद्यालयों, महाविद्यालयों और गुरुकुलों में पढ़ रहे आर्थिक रूप से कमजोर व मेधावी छात्रों को मासिक छात्रवृत्ति प्रदान करना है, ताकि वे देववाणी संस्कृत की शिक्षा सुचारू रूप से जारी रख सकें।

Q2. इस योजना के तहत किस कक्षा के छात्र पात्र हैं?

Ans. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किए गए ऐतिहासिक संशोधनों के बाद, अब यह योजना कक्षा 6 से लेकर उच्च शिक्षा और अनुसंधान स्तर तक के विद्यार्थियों के लिए लागू है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • प्रथमा (कक्षा 6, 7 और 8)
  • पूर्व मध्यमा (कक्षा 9 और 10)
  • उत्तर मध्यमा (कक्षा 11 और 12)
  • शास्त्री (स्नातक / Graduation)
  • आचार्य (स्नातकोत्तर / Post Graduation)
  • अनुसंधान (Ph.D. / Research Scholar)

Q3. क्या यह छात्रवृत्ति सभी संस्कृत छात्रों को मिलती है या केवल कुछ चुनिंदा छात्रों को?

Ans. पहले यह योजना केवल सीमित संख्या में या केवल मेरिट सूची में आने वाले मेधावी छात्रों के लिए थी। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई नई नीति के तहत, पात्रता की शर्तें पूरी करने वाले सभी जरूरतमंद संस्कृत विद्यार्थियों के लिए इस योजना का दायरा खोल दिया गया है ताकि कोई भी बच्चा पैसे की कमी से संस्कृत पढ़ने से न छूटे।

Q4. छात्रवृत्ति की राशि छात्रों तक कैसे पहुंचती है?

Ans. पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त करने के लिए छात्रवृत्ति की धनराशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थी छात्र के आधार-सीडेड बैंक खाते में डिजिटल रूप से ट्रांसफर की जाती है।

Q5. इस योजना का लाभ लेने के लिए न्यूनतम उपस्थिति कितनी होनी चाहिए?

Ans. शैक्षणिक अनुशासन बनाए रखने के लिए सरकार ने नियम तय किया है कि छात्रवृत्ति के पात्र केवल वही छात्र होंगे, जिनकी संबंधित संस्कृत शिक्षण संस्थान या गुरुकुल में न्यूनतम 75% उपस्थिति (Attendance) दर्ज होगी।

Q6. आवेदन करने के लिए कौन-कौन से मुख्य दस्तावेज अनिवार्य हैं?

Ans. ऑनलाइन या संस्थान स्तर पर आवेदन करने के लिए छात्रों के पास निम्नलिखित दस्तावेज होने चाहिए:

  • छात्र का आधार कार्ड
  • उत्तर प्रदेश का स्थायी निवास प्रमाण पत्र
  • तहसीलदार द्वारा जारी नवीनतम पारिवारिक आय प्रमाण पत्र
  • पिछली कक्षा की प्रमाणित मार्कशीट (पासिंग सर्टिफिकेट)
  • वर्तमान संस्कृत विद्यालय की प्रवेश रसीद या आईडी कार्ड
  • छात्र का बैंक खाता पासबुक (जो आधार से लिंक हो)
  • पासपोर्ट साइज फोटो

Q7. क्या अन्य राज्यों के छात्र जो यूपी में संस्कृत पढ़ रहे हैं, वे आवेदन कर सकते हैं?

Ans.नहीं। इस योजना का लाभ लेने के लिए छात्र का अनिवार्य रूप से उत्तर प्रदेश का मूल निवासी (स्थायी निवासी) होना आवश्यक है। अन्य राज्यों के छात्र इसके लिए पात्र नहीं माने जाते हैं।

Q8. इस योजना के लिए आवेदन कैसे किया जा सकता है?

Ans. इसके लिए दो तरीके उपलब्ध हैं:

  1. ऑनलाइन: छात्र उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक छात्रवृत्ति पोर्टल पर जाकर सीधे ‘संस्कृत छात्रवृत्ति’ के तहत अपना पंजीकरण और फॉर्म सबमिट कर सकते हैं।
  2. विद्यालय स्तर पर: दूर-दराज या गुरुकुल के छात्र अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य या प्रबंधन के माध्यम से भी अपने दस्तावेजों को सत्यापित करवाकर सामूहिक रूप से आवेदन करवा सकते हैं।

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