UP Pragatisheel Pashupalak Protsahan Yojana 2026: प्राइज मनी, पात्रता और स्वदेशी गायों से कमाई बढ़ाने का पूरा नियम

उत्तर प्रदेश के एक भव्य सरकारी समारोह के मंच पर मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के तहत ₹1.5 लाख का चेक और पुरस्कार प्राप्त करता एक गर्वित भारतीय डेयरी किसान।

उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना’ के तहत स्वदेशी नस्ल की गायों से रिकॉर्ड दूध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को ₹10,000 से लेकर ₹1.5 लाख तक के नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाता है। उत्तर प्रदेश के दुग्ध विकास विभाग द्वारा संचालित यह योजना राज्य में उच्च दुग्ध क्षमता वाली स्वदेशी गायों (जैसे साहिवाल, गिर, थारपारकर, हरियाणा और गंगातीरी) के पालन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है [UP CM Swadeshi Gau Samvardhan Yojana – Boost for Dairy Farming]. इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में नस्ल सुधार, पशुओं की उत्पादकता में वृद्धि और प्रगतिशील डेयरी किसानों को रोल मॉडल के रूप में स्थापित करना है, जिससे उत्तर प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र का कायाकल्प हो रहा है।

यदि आप भी उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, डेयरी व्यवसाय से जुड़े हैं, और आपकी स्वदेशी गायें प्रतिदिन रिकॉर्ड मात्रा में दूध देती हैं, तो इस योजना के तहत मिलने वाले नकद पुरस्कारों, पात्रता श्रेणियों और आवेदन की पूरी प्रक्रिया को समझना आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।


1. योजना की पृष्ठभूमि और इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी?

उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक पशुधन आबादी और दुग्ध उत्पादन वाले राज्यों में अग्रणी स्थान रखता है। इसके बावजूद, राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे मवेशी हैं जिनकी दैनिक दुग्ध उत्पादकता बहुत कम है। दूसरी ओर, भारत की मूल स्वदेशी नस्लें जैसे साहिवाल, गिर, थारपारकर, हरियाणा और गंगातीरी अपनी उच्च रोग प्रतिरोधक क्षमता और उत्कृष्ट दुग्ध क्षमता के लिए जानी जाती हैं।

अक्सर यह देखा गया है कि जो पशुपालक अपने कड़े परिश्रम, संतुलित पोषण और उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से इन गायों से भारी मात्रा में दूध प्राप्त करते हैं, उन्हें उचित मंच या आर्थिक प्रोत्साहन नहीं मिल पाता था। इसी कमी को दूर करने और उन्नत पशुपालकों की मेहनत को एक राज्य स्तरीय पहचान देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना की शुरुआत की गई है। सरकार का मानना है कि सफल पशुपालकों को पुरस्कृत करने से अन्य सीमांत और छोटे किसान भी उन्नत स्वदेशी नस्लें पालने और अपनी गायों के रखरखाव को बेहतर करने के लिए प्रेरित होंगे।


2. योजना के मुख्य उद्देश्य

इस महत्वाकांक्षी प्रोत्साहन कार्यक्रम के पीछे राज्य सरकार के निम्नलिखित दीर्घकालिक और रणनीतिक उद्देश्य हैं:

  • स्वदेशी नस्ल सुधार को बढ़ावा: पशुपालकों को उच्च गुणवत्ता वाले जर्मप्लाज्म और उन्नत स्वदेशी सांडों/सीमेन का उपयोग करने के लिए प्रेरित करना ताकि आने वाली पीढ़ियों में दूध उत्पादन बढ़े।
  • प्रति पशु उत्पादकता में वृद्धि: वैज्ञानिक पशु पोषण, साइलेज (हरा चारा संरक्षण) और उन्नत डेयरी प्रबंधन को बढ़ावा देना ताकि गायों से अधिकतम दूध प्राप्त किया जा सके।
  • स्वदेशी नस्लों का गौरव बहाल करना: विदेशी नस्लों (जैसे जर्सी या एचएफ) पर निर्भरता कम करके भारतीय नस्लों के दूध (A2 Milk) के व्यावसायिक मूल्य को स्थापित करना।
  • स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना: जिला और राज्य स्तर पर डेयरी किसानों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करना, जिससे कुल दुग्ध उत्पादन में भारी वृद्धि हो सके।

3. पुरस्कारों की श्रेणियां और नकद राशि (Prize Structure)

इस योजना के तहत पुरस्कारों का निर्धारण पूरी तरह से पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है। गाय की नस्ल और उसके द्वारा प्रतिदिन दिए जाने वाले दूध की मात्रा (लीटर में) के आधार पर पुरस्कारों को श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

क) साहिवाल, गिर और थारपारकर नस्ल के लिए:

  • प्रथम श्रेणी (रिकॉर्ड उत्पादन): यदि गाय प्रतिदिन 15 लीटर से अधिक दूध देती है, तो पशुपालक को ₹1,50,000 (डेढ़ लाख रुपये) नगद और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।
  • द्वितीय श्रेणी: यदि गाय प्रतिदिन 12 से 15 लीटर के बीच दूध देती है, तो ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का पुरस्कार दिया जाता है।
  • तृतीय श्रेणी: यदि गाय प्रतिदिन 9 से 12 लीटर तक दूध देती है, तो ₹50,000 (पचास हजार रुपये) की राशि प्रदान की जाती है।

ख) हरियाणा नस्ल के लिए:

  • प्रथम श्रेणी: प्रतिदिन 10 लीटर से अधिक दूध उत्पादन पर ₹1,50,000 का पुरस्कार।
  • द्वितीय श्रेणी: प्रतिदिन 8 से 10 लीटर तक दूध देने पर ₹1,00,000 का पुरस्कार।
  • तृतीय श्रेणी: प्रतिदिन 6 से 8 लीटर तक दूध उत्पादन पर ₹50,000 का पुरस्कार।

ग) गंगातीरी नस्ल (उत्तर प्रदेश की स्थानीय मूल नस्ल) के लिए:

  • प्रथम श्रेणी: प्रतिदिन 8 लीटर से अधिक दूध उत्पादन पर ₹1,50,000 का नकद पुरस्कार।
  • द्वितीय श्रेणी: प्रतिदिन 6 से 8 लीटर तक दूध देने पर ₹1,00,000 का पुरस्कार।
  • तृतीय श्रेणी: प्रतिदिन 4 से 6 लीटर तक दूध उत्पादन पर ₹50,000 का पुरस्कार।

(नोट: कुछ मामलों में जिला स्तर पर सांत्वना पुरस्कार के रूप में ₹10,000 से ₹21,000 तक की प्रोत्साहन राशि और बाल्टी/मिल्किंग मशीन जैसे उपकरण भी दिए जाते हैं ताकि अधिकतम किसानों का मनोबल बढ़ाया जा सके।)


4. पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)

योजना के तहत पुरस्कार के लिए दावा करने वाले पशुपालकों को निम्नलिखित अनिवार्य शर्तों को पूरा करना होगा:

  • मूल निवासी: आवेदक का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
  • पशु की नस्ल: पुरस्कार का दावा केवल शुद्ध भारतीय स्वदेशी नस्ल की गायों (साहिवाल, गिर, थारपारकर, हरियाणा, गंगातीरी) पर ही स्वीकार्य है। क्रॉसब्रीड या विदेशी गायों पर यह योजना लागू नहीं होती।
  • दुग्ध सहकारी समिति से जुड़ाव: पशुपालक का स्थानीय दुग्ध सहकारी समिति (जैसे पराग डेयरी या नंद बाबा मिशन से संबद्ध समितियां) का पंजीकृत सदस्य होना या उसके माध्यम से दूध की आपूर्ति करना एक अतिरिक्त लाभ और प्राथमिकता का कारण बनता है।
  • अधिकतम सीमा: एक पशुपालक एक वित्तीय वर्ष में अपनी अधिकतम दो अलग-अलग गायों के लिए पुरस्कार का दावा कर सकता है।

5. आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Required Documents List)

पुरस्कार के लिए आवेदन जमा करते समय निम्नलिखित दस्तावेजों की स्व-प्रमाणित प्रतियों की आवश्यकता होती है:

  1. आधार कार्ड (पहचान पत्र के रूप में)।
  2. निवास प्रमाण पत्र / वोटर आईडी (उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होने का साक्ष्य)।
  3. बैंक पासबुक की प्रति: पुरस्कार की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर (DBT) की जाती है, इसलिए खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है।
  4. पशु का इनाफ (INAF) टैग नंबर: गाय के कान में लगा आधिकारिक सरकारी प्लास्टिक ईयर-टैग नंबर।
  5. दुग्ध समिति का प्रमाण पत्र: यदि आप किसी सहकारी समिति को दूध देते हैं, तो पिछले कुछ महीनों के दूध कूपन या पासबुक की प्रति।
  6. पशुपालक और संबंधित गाय की एक साथ ली गई रंगीन तस्वीर।

6. दुग्ध मापन और चयन की वैज्ञानिक प्रक्रिया (Milk Recording & Selection Process)

योजना के तहत धोखाधड़ी को रोकने और पूरी तरह से निष्पक्ष परिणाम सुनिश्चित करने के लिए दुग्ध मापन (Milk Recording) की एक बेहद सख्त और वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है:

  1. प्रारंभिक आवेदन: जब किसी किसान को लगता है कि उसकी स्वदेशी गाय पात्रता मानकों के अनुरूप अत्यधिक दूध दे रही है, तो वह विकास खंड (Block) के पशु चिकित्सा अधिकारी या जिला दुग्ध शाला विकास अधिकारी के पास प्रारंभिक आवेदन जमा करता है।
  2. मापन टीम का गठन: मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) के निर्देशन में एक तीन सदस्यीय समिति (जिसमें एक पशु चिकित्सा अधिकारी, दुग्ध समिति का प्रतिनिधि और एक स्वतंत्र निरीक्षक शामिल होता है) का गठन किया जाता है।
  3. मौके पर दुग्ध मापन: यह टीम पशुपालक के घर या डेयरी फार्म पर लगातार 2 से 3 दिनों तक (सुबह और शाम दोनों समय) अपनी आंखों के सामने गाय का दूध निकलवाती है और उसका सटीक वजन/माप लीटर में दर्ज करती है। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाती है।
  4. रिपोर्ट और डेटा अपलोडिंग: मापन के आंकड़ों, वीडियोग्राफी और पशु के टैग नंबर के साथ एक विस्तृत संयुक्त रिपोर्ट तैयार कर जिला स्तरीय नंद बाबा दुग्ध मिशन समिति को भेजी जाती है।
  5. पुरस्कार वितरण: जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद राज्य स्तरीय समारोह या जिला स्तरीय किसान दिवस के अवसर पर विजेता पशुपालकों को मंच पर सम्मानित किया जाता है और राशि सीधे उनके खाते में भेज दी जाती है।

7. योजना का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव (Impact Analysis)

मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण आर्थिक परिदृश्य में कई बड़े बदलाव किए हैं:

  • पशुओं की बाजार कीमत में वृद्धि: पुरस्कार जीतने वाली गायों और उनके बछड़ों/बछड़ियों की मांग और बाजार मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। इससे उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले पशुओं का एक बाजार तैयार हो रहा है।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रसार: पुरस्कार राशि जीतने की चाहत में ग्रामीण किसान अब पशु पोषण पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। वे केवल सूखा भूसा खिलाने के बजाय संतुलित पशुआहार (Compounded Cattle Feed), बाईपास प्रोटीन और मिनरल मिक्सचर का उपयोग करने लगे हैं।
  • युवाओं का डेयरी सेक्टर में आकर्षण: बड़ी प्रोत्साहन राशि मिलने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षित युवा अब पारंपरिक नौकरियों के पीछे भागने के बजाय आधुनिक और हाइब्रिड स्वदेशी डेयरी फार्मिंग को एक मुनाफे वाले बिजनेस मॉडल के रूप में देख रहे हैं।

निष्कर्ष और आगे की राह

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना राज्य के मेहनती और जागरूक डेयरी किसानों के पसीने और उनकी वैज्ञानिक सोच को सलाम करने का एक ऐतिहासिक कदम है। यह योजना सिद्ध करती है कि यदि पशुधन को सही देखभाल, उन्नत नस्ल सुधार और पोषण दिया जाए, तो हमारी अपनी स्वदेशी गायें भी विदेशी नस्लों के बराबर या उनसे भी अधिक उत्पादन दे सकती हैं।

यदि आपके पास भी साहिवाल, गिर या थारपारकर जैसी नस्ल की कोई बेहतरीन गाय है, तो उसकी क्षमता को केवल घरेलू उपयोग तक सीमित न रखें। आज ही अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या दुग्ध विकास विभाग के कार्यालय में जाकर इस योजना के तहत अपना पंजीकरण कराएं। आपकी एक गाय का रिकॉर्ड दूध उत्पादन न केवल आपको लखपति बना सकता है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को देश का सबसे समृद्ध और आत्मनिर्भर दुग्ध उत्पादक राज्य बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs): यूपी मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना

प्रश्न 1: मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना क्या है?
उत्तर: यह उत्तर प्रदेश सरकार के दुग्ध विकास विभाग द्वारा संचालित एक विशेष पुरस्कार योजना है। इसके तहत राज्य में स्वदेशी नस्ल की गायों से सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाले प्रगतिशील पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए ₹50,000 से लेकर ₹1.5 लाख तक के नकद पुरस्कार और सम्मान पत्र दिए जाते हैं।

प्रश्न 2: इस योजना के तहत किन-किन नस्लों की गायों को शामिल किया गया है?
उत्तर: योजना के तहत मुख्य रूप से पांच भारतीय स्वदेशी नस्लों को शामिल किया गया है: साहिवाल, गिर, थारपारकर, हरियाणा और गंगातीरी। विदेशी या क्रॉसब्रीड गायें इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

प्रश्न 3: अधिकतम पुरस्कार राशि (₹1.5 लाख) पाने के लिए गाय को प्रतिदिन कितना दूध देना होगा?
उत्तर: साहिवाल, गिर और थारपारकर नस्ल की गायों के मामले में यदि गाय प्रतिदिन 15 लीटर से अधिक दूध देती है, तो उसे प्रथम श्रेणी के तहत ₹1,50,000 का नकद पुरस्कार मिलता है। हरियाणा नस्ल के लिए यह सीमा 10 लीटर और गंगातीरी के लिए 8 लीटर से अधिक निर्धारित है।

प्रश्न 4: गाय के दूध का मापन कौन और कैसे करता है?
उत्तर: आवेदन के बाद पशुपालन और दुग्ध विभाग के अधिकारियों की एक तीन सदस्यीय आधिकारिक टीम पशुपालक के घर जाकर लगातार 2 से 3 दिनों तक सुबह-शाम अपनी देखरेख में दूध का लाइव मापन (वीडियोग्राफी के साथ) करती है। उसी रिपोर्ट के आधार पर विजेता तय होते हैं।

प्रश्न 5: क्या एक किसान एक से अधिक गायों के लिए पुरस्कार का दावा कर सकता है?
उत्तर: हाँ, एक प्रगतिशील पशुपालक एक वित्तीय वर्ष के भीतर अपनी अधिकतम दो अलग-अलग स्वदेशी गायों के उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन के लिए इस योजना के तहत पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि का दावा कर सकता है।

प्रश्न 6: पुरस्कार के लिए आवेदन कहाँ और कैसे करना होता है?
उत्तर: इच्छुक पशुपालक अपने विकास खंड (Block) के राजकीय पशु चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधिकारी या जिले के दुग्ध शाला विकास अधिकारी / पराग डेयरी कार्यालय में जाकर संपर्क कर सकते हैं और आधिकारिक फॉर्म भरकर अपनी गाय के दुग्ध मापन के लिए आवेदन जमा कर सकते हैं।


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