UP Mukhyamantri Durghatna Bima Yojana 2026: ऑनलाइन आवेदन व पात्रता
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना राज्य के असंगठित क्षेत्र के कामगारों, किसानों और छोटे व्यापारियों को अप्रत्याशित दुर्घटनाओं की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और कल्याणकारी सामाजिक सुरक्षा पहल है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसी दुर्घटना के कारण श्रमिक या कमाने वाले व्यक्ति की असामयिक मृत्यु अथवा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में पीड़ित परिवार को संबल देना है, ताकि वे वित्तीय संकट में डूबने से बच सकें। योजना के अंतर्गत श्रेणी और पात्रता के आधार पर ₹2 लाख से लेकर अधिकतम ₹10 लाख तक की आर्थिक सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से प्रदान की जाती है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न लक्षित समूहों के लिए इस योजना को तीन प्रमुख रूपों में क्रियान्वित किया जा रहा है, जिनमें असंगठित कामगारों के लिए मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना, कृषकों के लिए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना तथा पंजीकृत व्यापारियों के लिए मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना शामिल हैं।
Table of Contents
योजना की विस्तृत रूपरेखा एवं प्रमुख श्रेणियाँ
उत्तर प्रदेश सरकार ने समाज के विभिन्न आर्थिक वर्गों को ध्यान में रखकर इस योजना का दायरा तैयार किया है:
| योजना का नाम | लक्षित लाभार्थी समूह | अधिकतम वित्तीय सहायता | नोडल विभाग / संचालित बोर्ड |
|---|---|---|---|
| मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना (असंगठित क्षेत्र) | धोबी, मोची, रिक्शा चालक, दिहाड़ी मजदूर, घरेलू कामगार आदि। | ₹2,00,000 | उत्तर प्रदेश असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड |
| मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना | खातेदार/सह-खातेदार किसान, भूमिहीन किसान और बटाईदार। | ₹5,00,000 | राजस्व परिषद्, उत्तर प्रदेश |
| मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना | राज्य कर विभाग (GST) के अंतर्गत पंजीकृत छोटे एवं मध्यम व्यापारी। | ₹10,00,000 | राज्य कर विभाग, उत्तर प्रदेश |
1. असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना
प्रदेश में लगभग 4.5 करोड़ से अधिक असंगठित क्षेत्र के श्रमिक कार्यरत हैं। निर्माण कार्यों, रेहड़ी-पटरी, कृषि मजदूरी और अन्य जोखिम भरे अनौपचारिक कार्यों में लगे इन श्रमिकों के लिए काम के दौरान दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है।
पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)
- आवेदक अनिवार्य रूप से उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- श्रमिक की आयु 18 वर्ष से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- कामगार का उत्तर प्रदेश असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के पोर्टल या ई-श्रम (e-SHRAM) पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण होना आवश्यक है।
- केवल दुर्घटनावश हुई मृत्यु या शारीरिक क्षति ही इस योजना के दायरे में आती है; प्राकृतिक मृत्यु पर यह लाभ देय नहीं होता।
देय लाभ एवं सहायता राशि (Benefits Breakdown)
- दुर्घटनावश मृत्यु होने पर: यदि किसी पंजीकृत कामगार की सड़क दुर्घटना, बिजली का झटका लगने, ऊंचाई से गिरने या काम के दौरान किसी अन्य आकस्मिक दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, तो उसके आश्रित/कानूनी वारिस को ₹2,00,000 की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाती है।
- पूर्ण स्थायी दिव्यांगता (Total Permanent Disability): दुर्घटना में दोनों आंखें, दोनों हाथ या दोनों पैर खो जाने जैसी पूर्ण अक्षमता की स्थिति में श्रमिक को स्वयं ₹2,00,000 का वित्तीय कवर मिलता है।
- आंशिक दिव्यांगता (Partial Disability): एक अंग की पूर्ण क्षति होने की स्थिति में चिकित्सा प्रमाण-पत्र के आधार पर ₹1,00,000 तक की आनुपातिक सहायता राशि स्वीकृत की जाती है।
- अतिरिक्त लाभ: इसके साथ ही, पंजीकृत श्रमिकों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत ₹5 लाख तक के मुफ्त कैशलेस इलाज की सुविधा भी दी जाती है।
2. मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषि गतिविधियों में शामिल किसानों और खेत-मजदूरों को सामाजिक न्याय प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल जमीन के मालिक किसान ही नहीं, बल्कि दूसरों के खेतों में काम करने वाले बटाईदार और भूमिहीन मजदूर भी कवर होते हैं।
पात्रता एवं शर्तें
- आयु सीमा: किसान या संबंधित लाभार्थी की आयु 18 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- दायरा: राजस्व अभिलेखों (खतौनी) में दर्ज खातेदार/सह-खातेदार के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्य, भूमिहीन कृषि मजदूर और वास्तविक रूप से खेती करने वाले बटाईदार इसके पात्र हैं।
- प्रीमियम: यह पूरी तरह से निशुल्क योजना है, जिसका शत-प्रतिशत खर्च राज्य सरकार वहन करती है।
दुर्घटना सहायता राशि की दरें
- मृत्यु या दोनों अंगों की पूर्ण क्षति: ₹5,00,000
- 50% से 100% तक की दिव्यांगता (उदा. एक हाथ और एक पैर की क्षति): ₹2,50,000
- 25% से 50% तक की शारीरिक दिव्यांगता: ₹1,25,000
3. मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना
छोटे खुदरा विक्रेताओं और कारोबारियों को अचानक लगने वाले वित्तीय झटकों से बचाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग द्वारा मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना का संचालन किया जा रहा है।
पात्रता एवं मुख्य विशेषताएं
- व्यापारी का उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग के अंतर्गत वाणिज्य कर या GST (वस्तु एवं सेवा कर) पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य है।
- दुर्घटना में मृत्यु या किसी हिंसक घटना (जैसे डकैती या लूट के दौरान हत्या) की स्थिति में भी यह योजना प्रभावी होती है।
- अधिकतम वित्तीय सहायता: आकस्मिक मृत्यु या पूर्ण स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में कानूनी वारिस या पीड़ित व्यापारी को ₹10,00,000 की सहायता राशि दी जाती है। आंशिक दिव्यांगता पर अपंगता के प्रतिशत के आधार पर आनुपातिक भुगतान किया जाता है।
आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)
दावा (Claim) प्रक्रिया को सुगम बनाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
- पहचान और निवास का प्रमाण: आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आईडी और उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र।
- दुर्घटना से संबंधित साक्ष्य:
- पुलिस द्वारा दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) या सामान्य डायरी (GD) की प्रति।
- मृत्यु की दशा में पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Postmortem Report) या पंचनामा।
- सरकारी प्राधिकारी द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)。
- दिव्यांगता की स्थिति में: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) या सक्षम मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र, जिसमें अपंगता का प्रतिशत स्पष्ट रूप से अंकित हो।
- पात्रता का प्रमाण: ई-श्रम कार्ड, खतौनी/बटाईदार साक्ष्य (किसानों के लिए), या GST पंजीकरण प्रमाण पत्र (व्यापारियों के लिए)।
- वित्तीय विवरण: लाभार्थी/उत्तराधिकारी के बैंक खाते की पासबुक की प्रति या कैंसिल्ड चेक और कानूनी वारिस होने का प्रमाण पत्र।
आवेदन एवं दावा प्रक्रिया (Step-by-Step Claim Process)
सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण कर दिया है। किसान और व्यापारी घर बैठे सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
ऑनलाइन आवेदन की विधि:
- संबंधित आधिकारिक पोर्टल पर जाएं:
- असंगठित श्रमिकों के लिए: उप्र असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड पोर्टल।
- किसानों के लिए: उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद् पोर्टल।
- व्यापारियों के लिए: राज्य कर विभाग का व्यास केंद्रीय पोर्टल।
- पंजीकरण व लॉगिन: अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी (OTP) प्राप्त कर लॉगिन करें।
- विवरण दर्ज करें: ‘दुर्घटना दावा आवेदन’ विकल्प चुनकर दुर्घटना की तिथि, समय, स्थान, प्रभावित व्यक्ति का विवरण और बैंक खाते की जानकारी सावधानीपूर्वक भरें।
- दस्तावेज अपलोड करें: मांगे गए सभी अनिवार्य दस्तावेजों (FIR, मृत्यु/दिव्यांगता प्रमाण पत्र आदि) को स्पष्ट रूप से स्कैन करके अपलोड करें।
- समीक्षा और सबमिट: जानकारी जांचने के बाद फॉर्म सबमिट करें और प्राप्त संदर्भ संख्या (Application/Reference Number) को भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।
समय सीमा (Crucial Timeline)
- असंगठित श्रमिक: दुर्घटना घटने के 30 दिनों के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है।
- कृषक कल्याण योजना: दुर्घटना के 45 दिनों के भीतर तहसील स्तर पर आवेदन जमा या ऑनलाइन करना होता है (विशेष परिस्थितियों में जिलाधिकारी द्वारा इसे अधिकतम 75 दिनों तक विस्तारित किया जा सकता है)।
- व्यापारी योजना: दुर्घटना की तिथि से अधिकतम 6 महीने के भीतर दावा प्रस्तुत करना होता है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना राज्य के कार्यबल और रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले किसानों व छोटे व्यवसायियों के लिए एक सुदृढ़ सुरक्षा कवच है। बिना किसी वित्तीय प्रीमियम के इतनी बड़ी राशि का कवर देना यह सुनिश्चित करता है कि संकट के समय गरीब से गरीब व्यक्ति को भी त्वरित और बिना किसी बिचौलिए के सीधी मदद मिल सके। प्रक्रियाओं के ऑनलाइन हो जाने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है और स्वीकृत धनराशि सीधे पीड़ित के बैंक खाते में पहुंच रही है। पात्र नागरिकों को इस योजना में अपना पंजीकरण अवश्य कराना चाहिए ताकि वे और उनका परिवार सुरक्षित कल की ओर कदम बढ़ा सकें।
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. सामान्य प्रश्न (General FAQs)
- यह योजना क्या है और इसे कौन संचालित करता है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही एक कल्याणकारी योजना है, जो राज्य के असंगठित श्रमिकों, किसानों और पंजीकृत व्यापारियों को दुर्घटनावश मृत्यु या दिव्यांगता होने पर वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसे अलग-अलग विभागों (जैसे श्रम विभाग, राजस्व विभाग और राज्य कर विभाग) द्वारा संचालित किया जाता है। - क्या योजना का लाभ लेने के लिए कोई प्रीमियम देना पड़ता है?
नहीं। यह पूरी तरह से नि:शुल्क (Free) योजना है। इसका शत-प्रतिशत प्रीमियम और खर्च उत्तर प्रदेश सरकार वहन करती है। - किस प्रकार की घटनाओं को ‘दुर्घटना’ माना जाता है?
सड़क या रेल दुर्घटना, बिजली का झटका लगना, ऊंचाई से गिरना, डूबना, आग से जलना, सांप का काटना, कृषि उपकरणों से चोट लगना, या किसी हिंसक घटना (जैसे डकैती या लूट के दौरान हत्या) में हुई शारीरिक क्षति या मृत्यु को योजना के तहत कवर किया जाता है।
2. पात्रता और पंजीकरण (Eligibility & Registration)
- इस योजना के लिए कौन पात्र है?
उत्तर प्रदेश के स्थायी निवासी जिनकी आयु 18 से 60 वर्ष (किसानों के लिए अधिकतम 70 वर्ष) के बीच है। लाभार्थी का ई-श्रम पोर्टल, उप्र असंगठित कर्मकार बोर्ड, खतौनी (राजस्व रिकॉर्ड), या जीएसटी पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य है। - क्या भूमिहीन मजदूर या बटाईदार किसान भी इसके पात्र हैं?
हाँ। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत जमीन के मालिक (खातेदार) के साथ-साथ भूमिहीन कृषि मजदूर और वास्तविक रूप से खेती करने वाले बटाईदार भी पूरी तरह पात्र हैं। - क्या प्राकृतिक मृत्यु (Natural Death) होने पर भी क्लेम मिलेगा?
नहीं। यह केवल एक दुर्घटना बीमा योजना है। प्राकृतिक मृत्यु या बीमारी के कारण हुई मृत्यु पर इस योजना के तहत कोई लाभ देय नहीं होता है।
3. वित्तीय सहायता और क्लेम प्रक्रिया (Financial Benefits & Claims)
- योजना के तहत अधिकतम कितनी राशि मिलती है?
सहायता राशि लाभार्थी की श्रेणी पर निर्भर करती है:- असंगठित श्रमिक: अधिकतम ₹2,00,000
- किसान: अधिकतम ₹5,00,000
- पंजीकृत व्यापारी: अधिकतम ₹10,00,000
- दुर्घटना के कितने दिनों के भीतर क्केम (Claim) करना जरूरी है?
- असंगठित श्रमिक: दुर्घटना के 30 दिनों के भीतर।
- किसान: दुर्घटना के 45 दिनों के भीतर (विशेष परिस्थितियों में डीएम द्वारा 75 दिनों तक की छूट)।
- व्यापारी: दुर्घटना के 6 महीने के भीतर।
- क्लेम का पैसा किसे मिलता है और कैसे आता है?
यदि दुर्घटना में श्रमिक या किसान की मृत्यु हो जाती है, तो सहायता राशि उनके नामांकित व्यक्ति (Nominee) या कानूनी वारिस को दी जाती है। दिव्यांगता की स्थिति में राशि स्वयं लाभार्थी को मिलती है। सभी भुगतान सीधे बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से भेजे जाते हैं।
4. आवश्यक दस्तावेज (Documents Required)
- क्लेम फॉर्म के साथ कौन से दस्तावेज अपलोड या जमा करने होते हैं?
मुख्य दस्तावेजों में आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की प्रति, पुलिस द्वारा दर्ज FIR या जीडी की कॉपी, मृत्यु की स्थिति में पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मृत्यु प्रमाण पत्र, और दिव्यांगता की स्थिति में सीएमओ (CMO) द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र शामिल हैं।
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