UP Medium Deep Tube Well Portal 2026-27: मध्यम गहराई नलकूप योजना ऑनलाइन आवेदन

उत्तर प्रदेश मध्यम गहराई नलकूप फ्री बोरिंग योजना पोर्टल का उपयोग करते लैपटॉप स्क्रीन पर किसान और लहलहाते खेत

उत्तर प्रदेश मध्यम गहराई नलकूप योजना पोर्टल 2026-27: एक विस्तृत डिजिटल मार्गदर्शिका

उत्तर प्रदेश मध्यम गहराई नलकूप फ्री बोरिंग योजना पोर्टल 2026-27 (UP Medium Deep Tube Well Free Boring Scheme Portal) राज्य के लघु सिंचाई विभाग (Minor Irrigation Department) द्वारा संचालित एक अत्याधुनिक डिजिटल मंच है। इस पोर्टल का प्राथमिक विजन उत्तर प्रदेश के उन दूरदराज और पथरीले क्षेत्रों के लघु व सीमांत किसानों को पारदर्शी डिजिटल माध्यम से जोड़ना है, जहाँ भूजल स्तर (Ground Water Level) अत्यधिक नीचे चले जाने के कारण उथली या सामान्य बोरिंग पूरी तरह असफल हो जाती है।

चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार ने इस डिजिटल पोर्टल को अत्यधिक उन्नत और मोबाइल-फ्रेंडली बनाया है। अब किसान या कृषक समूह घर बैठे ही ₹1.30 लाख तक की भारी नलकूप सब्सिडी और मुफ्त पाइपलाइन सहायता के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पूरी क्लेम और चयन प्रणाली को मानव-हस्तक्षेप से मुक्त (पारदर्शी) कर दिया गया है। इस विस्तृत लेख में हम इस ऑनलाइन पोर्टल की कार्यप्रणाली, ई-सत्यापन, आवश्यक डिजिटल दस्तावेजों और आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे।


🎯 डिजिटल पोर्टल का मुख्य उद्देश्य और विजन 2026-27

पहले लघु सिंचाई विभाग की योजनाएं पूरी तरह से कागजी फाइलों पर निर्भर थीं, जिसके कारण दूरदराज के गांवों के किसानों को विकास खंड कार्यालय (ब्लॉक) और जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे। इसमें समय और धन की काफी बर्बादी होती थी।

इस समस्या के तकनीकी समाधान के रूप में सरकार ने केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया है, जिसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:

  • बिचौलियों और भ्रष्टाचार का अंत: ऑनलाइन पंजीकरण से लेकर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल है, जिससे अवैध कमीशन की गुंजाइश खत्म हो गई है।
  • समय-बद्ध ट्रैकिंग (Application Tracking): किसान अपने मोबाइल या नजदीकी जनसेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से यह देख सकते हैं कि उनकी फाइल वर्तमान में किस स्तर (जैसे- तकनीकी जांच, भूगर्भीय सर्वेक्षण, प्रशासनिक स्वीकृति) पर लंबित है।
  • सामूहिक कृषि डेटाबेस: पोर्टल विशेष रूप से 10 से 15 किसानों के समूहों (Clusters) का डिजिटल डेटाबेस तैयार करता है, जिससे 5 हेक्टेयर के न्यूनतम कमांड एरिया की शर्त की ऑनलाइन जांच आसान हो जाती है।

💰 पोर्टल के माध्यम से मिलने वाले वित्तीय लाभ

जब आप इस डिजिटल पोर्टल के जरिए आवेदन करते हैं, तो आपकी पात्रता के आधार पर विभाग द्वारा निम्नलिखित वित्तीय लाभों को मंजूरी दी जाती है:

  1. बोरिंग निर्माण अनुदान: सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के कृषक समूहों को नलकूप निर्माण पर अधिकतम ₹75,000 से ₹1,00,000 तक का अनुदान। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के कृषक समूहों के लिए यह सीमा अधिकतम ₹1,30,000 निर्धारित है।
  2. जल वितरण प्रणाली (HDPE Pipe) सहायता: नलकूप से खेतों तक पानी ले जाने के लिए उच्च घनत्व वाले पॉलीथीन (HDPE) पाइप की खरीद हेतु ₹10,000 तक की अतिरिक्त राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।
  3. पंपसेट सबमर्सिबल मशीन अनुदान: सफल बोरिंग के बाद पानी खींचने के लिए सबमर्सिबल पंपसेट पर अलग से ₹15,000 तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है।

📄 पोर्टल पर अपलोड किए जाने वाले आवश्यक डिजिटल दस्तावेज

ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करते समय त्रुटियों (Rejections) से बचने के लिए कृषक समूह के मुख्य आवेदक को निम्नलिखित दस्तावेजों को स्कैन (PDF या JPEG फॉर्मेट, साइज 100KB से 500KB) करके तैयार रखना चाहिए:

  • समूह प्रमुख और सभी भागीदार किसानों के आधार कार्ड
  • उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र (मूल निवासी होने का साक्ष्य)
  • डिजिटल खतौनी (भूलेख नकल): राजस्व विभाग के आधिकारिक पोर्टल से डाउनलोड की गई नवीनतम खतौनी की प्रति, जिसमें गाटा संख्या और जमीन का रकबा स्पष्ट हो।
  • लेखपाल द्वारा प्रमाणित शजरा नक्शा: खेत की भौगोलिक स्थिति और 5 हेक्टेयर के सामूहिक कमांड एरिया को दर्शाने वाला आधिकारिक नक्शा।
  • डिजिटल जाति प्रमाण पत्र: आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) के किसानों के लिए तहसीलदार द्वारा ऑनलाइन जारी सर्टिफिकेट।
  • संयुक्त या मुख्य आवेदक का बैंक पासबुक: खाता राष्ट्रीयकृत या ग्रामीण बैंक में होना चाहिए जो आधार से लिंक और NPCI के सर्वर पर डीबीटी के लिए सक्रिय हो।
  • सामूहिक शपथ पत्र (Affidavit): सभी सदस्य किसानों द्वारा हस्ताक्षरित ₹10 का नोटरी शपथ पत्र कि वे नलकूप का उपयोग सामूहिक रूप से करेंगे।

📝 पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की चरण-दर-चरण प्रक्रिया

वित्तीय वर्ष 2026-27 के सत्र में आवेदन करने के लिए कृषक समूह नीचे दी गई स्टेप-बाय-स्टेप डिजिटल प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं:

चरण 1: आधिकारिक वेब पोर्टल पर विजिट करें

सबसे पहले उत्तर प्रदेश लघु सिंचाई विभाग के आधिकारिक पोर्टल (या राज्य के ई-डिस्ट्रिक्ट यूपी पोर्टल) पर जाएं।

चरण 2: नया कृषक पंजीकरण (New Job Seeker / Farmer Account)

होमपेज पर दिए गए “मुख्यमंत्री मध्यम गहराई नलकूप योजना 2026-27” के विकल्प पर क्लिक करें और “नया पंजीकरण” चुनें। यहाँ मुख्य आवेदक का नाम, आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करके ओटीपी (OTP) के माध्यम से अपना यूजर आईडी और पासवर्ड जेनरेट करें।

चरण 3: प्रोफाइल और समूह का विवरण भरें

अपने अकाउंट में लॉगिन करें। स्क्रीन पर मैरिज या माइनर इरीगेशन का विस्तृत फॉर्म खुलेगा। इसमें मुख्य आवेदक की व्यक्तिगत जानकारी भरने के बाद “कृषक समूह जोड़ें” (Add Group Members) विकल्प पर जाएं। यहाँ समूह में शामिल अन्य सभी 10 से 15 किसानों के नाम, उनके आधार और उनकी संबंधित भूमि का रकबा (हेक्टेयर में) दर्ज करें।

चरण 4: डिजिटल दस्तावेज अपलोड करें

“Upload Documents” सेक्शन में जाएं और तैयार रखे गए दस्तावेजों (आधार कार्ड कंबाइंड फाइल, डिजिटल खतौनी, प्रमाणित नक्शा, जाति व आय प्रमाण पत्र) को निर्धारित साइज में अपलोड करें।

चरण 5: फॉर्म की समीक्षा और फाइनल सबमिशन

“Preview” बटन पर क्लिक करके भरे गए सभी विवरणों और गाटा संख्या की भली-भांति जांच कर लें। कोई भी त्रुटि न होने पर “Final Submit” बटन पर क्लिक करें। सबमिट होते ही स्क्रीन पर एक एप्लिकेशन आईडी (Application Number) दिखाई देगी। इस रसीद का प्रिंटआउट निकालकर भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रख लें।


⚙️ ऑनलाइन आवेदन के बाद की सत्यापन प्रक्रिया (Verification Workflow)

पोर्टल पर आवेदन सबमिट होने के बाद पूरी चयन प्रक्रिया निम्नलिखित तकनीकी चरणों से गुजरती है:

  1. ई-सत्यापन (Online Document Verification): जिला लघु सिंचाई कार्यालय के नोडल अधिकारी आपके द्वारा अपलोड किए गए डिजिटल दस्तावेजों और खतौनी का ऑनलाइन मिलान राजस्व विभाग के डेटाबेस से करते हैं।
  2. भूगर्भीय एवं स्थलीय सर्वेक्षण: दस्तावेज़ सही पाए जाने पर विभाग के बोरिंग तकनीशियन (Boring Technician) और हाइड्रोलाजिस्ट की टीम आपके खेत का दौरा करती है। वे आधुनिक उपकरणों से यह सुनिश्चित करते हैं कि स्थल ‘डार्क ज़ोन’ के अंतर्गत तो नहीं आता और वहां 40 से 60 मीटर नीचे पानी का पर्याप्त स्रोत (Aquifer) उपलब्ध है या नहीं।
  3. प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी: तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड होते ही जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति दावे को ऑनलाइन हरी झंडी देती है। इसके बाद हैवी रिग मशीनों द्वारा नलकूप का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाता है।

🌟 निष्कर्ष (Conclusion)

उत्तर प्रदेश मध्यम गहराई नलकूप फ्री बोरिंग योजना पोर्टल 2026-27 राज्य के कृषि क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इस ऑनलाइन व्यवस्था ने सरकारी दफ्तरों की लालफीताशाही और फाइलों के अटके रहने के पुराने ढर्रे को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। कृषक समूहों को ₹1.30 लाख तक की बड़ी नलकूप सब्सिडी और मुफ्त पाइपलाइन की मंजूरी सीधे उनके मोबाइल पर एसएमएस अलर्ट के जरिए मिल जाती है।

सभी प्रगतिशील किसानों और लघु काश्तकारों को यह सलाह दी जाती है कि वे अपने गांवों में समूह बनाकर चालू सत्र के अंतर्गत जल्द से जल्द इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें, ताकि मानसून पर निर्भरता कम करके वे अपनी फसलों के लिए एक स्थायी और मुफ्त सिंचाई साधन स्थापित कर सकें।


💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या डीजीशक्ति या सेवायोजन पोर्टल की तरह इस योजना का लाभ भी स्वतः मिल जाता है?

नहीं। इस योजना का लाभ उठाने के लिए कृषक समूह को लघु सिंचाई विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर स्वयं या जनसेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से सभी डिजिटल दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन दर्ज करना अनिवार्य होता है।

Q2. पोर्टल पर आवेदन सबमिट करने के बाद क्या मूल दस्तावेजों (Original Documents) की आवश्यकता होती है?

हाँ। जब आपके आवेदन का ऑनलाइन प्रारंभिक सत्यापन सफल हो जाता है, तो भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के समय विभाग के बोरिंग तकनीशियन या लेखपाल आपके खेत पर मूल खतौनी, आधार कार्ड और पहचान पत्र का मिलान करने आते हैं।

Q3. यदि पोर्टल पर आवेदन करते समय कोई दस्तावेज गलत अपलोड हो जाए तो क्या करें?

यदि आपने फॉर्म फाइनल सबमिट नहीं किया है, तो आप “Edit Application” में जाकर सुधार कर सकते हैं। लेकिन यदि फॉर्म फाइनल सबमिट हो चुका है, तो आपको अपने जिले के जिला लघु सिंचाई अधिकारी कार्यालय में जाकर लिखित अनुरोध करना होगा ताकि वे पोर्टल से आपके फॉर्म को सुधार (Correction) के लिए वापस री-ओपन कर सकें।

Q4. क्या इस पोर्टल पर आवेदन करने के लिए बैंक खाते की ई-केवाईसी (e-KYC) होना आवश्यक है?

हाँ, अत्यंत आवश्यक है। सरकार द्वारा स्वीकृत की जाने वाली पाइपलाइन और पंपसेट की सब्सिडी राशि केवल उसी बैंक खाते में आएगी जो आधार कार्ड से लिंक हो और राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के सर्वर पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के लिए पूरी तरह सक्रिय हो।


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