UP Khet Talab Yojana 2026-27: ऑनलाइन आवेदन व पोर्टल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया!

उत्तर प्रदेश खेत तालाब योजना के तहत खेत में बने पक्के तालाब और आधुनिक सिंचाई प्रणाली को देखता हुआ खुशहाल किसान।

Table of Contents

उत्तर प्रदेश खेत तालाब योजना: किसानों की आत्मनिर्भरता, सिंचाई सुरक्षा और जल संरक्षण का महाअभियान

उत्तर प्रदेश एक गौरवशाली कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ की लगभग 65 से 70 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर खेती और उससे जुड़े व्यवसायों पर टिकी हुई है। हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन (Climate Change), अनियमित मानसून, मानसूनी हवाओं की अनिश्चितता और भूजल (Groundwater) के अत्यधिक दोहन के कारण राज्य के किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए अभूतपूर्व संकट का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से बुंदेलखंड संभाग (जैसे बांदा, महोबा, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर) और विंध्य क्षेत्र के पथरीले व सूखाग्रस्त इलाकों में पानी की कमी कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में सबसे बड़ी रुकावट बन चुकी है।

इस गंभीर और व्यापक समस्या के स्थायी, व्यावहारिक तथा पर्यावरण-अनुकूल समाधान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश खेत तालाब योजना का संचालन पूरी सक्रियता से किया जा रहा है。 ‘खेत का पानी खेत में और गाँव का पानी गाँव में’ के दूरदर्शी मूलमंत्र पर आधारित यह योजना किसानों को उनकी निजी कृषि भूमि पर वैज्ञानिक ढंग से तालाब निर्माण करने के लिए भारी वित्तीय सहायता (सब्सिडी) प्रदान करती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य वर्षा के व्यर्थ बह जाने वाले जल को संचित करना, संकट के समय फसलों को जीवनदान देना और गिरते भूजल स्तर को पुनर्जीवित करना है।

इस विस्तृत और व्यापक लेख में हम उत्तर प्रदेश खेत तालाब योजना का एक-एक बिंदुवार और संपूर्ण विश्लेषण करेंगे, ताकि राज्य का कोई भी किसान भाई जानकारी के अभाव में इस अद्भुत योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।


1. खेत तालाब योजना क्या है और इसकी पृष्ठभूमि?

उत्तर प्रदेश खेत तालाब योजना राज्य सरकार के कृषि विभाग की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी एवं कल्याणकारी योजना है। ग्रामीण अंचलों में अक्सर देखा जाता है कि मानसून के दौरान होने वाली मूसलाधार बारिश का अधिकांश पानी खेतों से बहकर नालों और नदियों के माध्यम से व्यर्थ चला जाता है। कई बार यह पानी मिट्टी की उपजाऊ ऊपरी परत (Soil Erosion) को भी अपने साथ बहा ले जाता है।

इस बर्बादी को रोकने के लिए सरकार ने खेतों में ही तालाब (Farm Ponds) बनाने की तकनीक को बढ़ावा दिया है। जब कोई किसान इस योजना के तहत अपने खेत में तालाब खोदता है, तो भारी बारिश का पानी उस गड्ढे में जमा हो जाता है। सरकार इस पूरी प्रक्रिया में आने वाली भारी-भरकम निर्माण लागत का 50 प्रतिशत तक का वित्तीय अनुदान (सब्सिडी) सीधे किसान के बैंक खाते में डिजिटल माध्यम (Direct Benefit Transfer – DBT) से भेजती है। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता और वे बेहद कम लागत में अपने खेत में एक स्थायी जल स्रोत तैयार कर लेते हैं。


2. योजना के दूरगामी एवं बहुआयामी उद्देश्य

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना का खाका केवल तात्कालिक सिंचाई राहत के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण और पर्यावरणीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए तैयार किया है:

  • वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): प्रकृति द्वारा मुफ्त में दिए जाने वाले शुद्ध वर्षा जल का अधिकतम संचयन करना और उसे कृषि उपयोग में लाना।
  • भूजल स्तर (Water Table) को ऊपर उठाना: तालाबों में महीनों तक पानी जमा रहने के कारण पानी धीरे-धीरे रिसकर (Percolation) जमीन के अंदर जाता है। इससे आसपास के कुओं, ट्यूबवेलों और नलकूपों का जलस्तर स्वतः बढ़ जाता है।
  • अकाल और सूखे से सुरक्षा: मानसून की विफलता या अत्यधिक गर्मी के दिनों में जब नहरें सूख जाती हैं और बिजली न मिलने से नलकूप ठप हो जाते हैं, तब तालाब का पानी फसलों के लिए जीवन रक्षक (Critical Irrigation) का काम करता है।
  • किसानों की आय को बहुआयामी बनाना: पारंपरिक रूप से किसान सिर्फ फसलों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन इस योजना के तहत बने तालाब में वे मछली पालन (Aquaculture), बत्तख पालन और मेढ़ों पर उन्नत बागवानी करके अपनी मासिक आय को दोगुना या तिगुना कर सकते हैं।
  • पारंपरिक ईंधन और बिजली की बचत: नलकूपों से सैकड़ों फीट नीचे से पानी खींचने में भारी मात्रा में बिजली या डीजल का उपभोग होता है। इसके विपरीत, सतह पर मौजूद तालाब से पानी निकालना बेहद सस्ता और कम ऊर्जा खपत वाला होता है।

3. खेत तालाब योजना के अंतर्गत तालाबों के प्रकार और देय सब्सिडी

किसानों की जोत के आकार (जमीन की उपलब्धता) और उनकी आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है। कृषि विभाग द्वारा इन दोनों प्रकार के तालाबों की एक मानक निर्माण लागत (Standard Cost) तय की गई है, जिस पर 50% अनुदान दिया जाता है:

क. छोटा तालाब (Small Pond)

यह तालाब उन लघु और सीमांत किसानों के लिए अत्यंत उपयुक्त है जिनके पास कम भूमि है और वे अपने सीमित खेत का एक छोटा हिस्सा ही तालाब के लिए दे सकते हैं।

  • मानक आकार (Dimensions): 22 मीटर लंबाई × 20 मीटर चौड़ाई × 3 मीटर गहराई।
  • कुल अनुमानित मानक लागत: ₹1,05,000 (एक लाख पांच हजार रुपये)।
  • सरकारी अनुदान (50% Subsidy): चयनित किसान को सरकार की तरफ से ₹52,500 की नकद सब्सिडी दी जाती है। शेष आधी राशि किसान को स्वयं श्रम (Manual Labor) या अपने संसाधनों से लगानी होती है।

ख. बड़ा तालाब (Large Pond)

यह तालाब मध्यम और बड़े आकार की जोत वाले किसानों या उन प्रगतिशील किसानों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो बड़े पैमाने पर खेती के साथ-साथ व्यावसायिक मत्स्य पालन करना चाहते हैं।

  • मानक आकार (Dimensions): 35 मीटर लंबाई × 30 मीटर चौड़ाई × 3 मीटर गहराई।
  • कुल अनुमानित मानक लागत: ₹2,28,400 (दो लाख अट्ठाइस हजार चार सौ रुपये)।
  • सरकारी अनुदान (50% Subsidy): इस श्रेणी में सरकार की ओर से किसान को अधिकतम ₹1,14,200 का भारी अनुदान सीधे उसके बैंक खाते में दिया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: यह सब्सिडी की राशि एकमुश्त (एक बार में) नहीं दी जाती, बल्कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए काम की प्रगति के आधार पर तीन अलग-अलग किश्तों में जारी की जाती है। प्रत्येक चरण में विभाग के अधिकारियों द्वारा तालाब की ‘जियो-टैगिंग’ (Geo-tagging) की जाती है।


4. योजना के शानदार व्यावहारिक लाभ (Benefits)

خेत तालाब योजना ग्रामीण परिवेश में एक मूक क्रांति की तरह काम कर रही है। इसके प्रमुख लाभों को हम नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझ सकते हैं:

लाभ का आयामलाभ का विस्तृत विवरण
फसलों की सुरक्षाधान, गेहूं, और सब्जियों जैसी फसलों को सही समय पर पानी न मिलने से होने वाले नुकसान से बचाता है।
लागत में भारी कमीडीजल पंपों के लगातार चलने वाले खर्चों और महंगे बिजली बिलों से किसानों को बड़ी राहत मिलती है।
मिश्रित और एकीकृत खेतीएक ही स्थान पर फसल उत्पादन, मत्स्य पालन (Fisheries) और पशुपालन का एक एकीकृत मॉडल (Integrated Farming) तैयार होता है।
मेढ़ों का कुशल उपयोगतालाब की खुदाई से निकली उपजाऊ मिट्टी से जो ऊंची और मजबूत मेढ़ (Boundary) बनती है, उस पर अरहर, सहजन, पपीता या केला उगाकर अतिरिक्त लाभ कमाया जा सकता है।
पशु-पक्षियों के लिए सहारागर्मियों के मौसम में जब ग्रामीण क्षेत्रों के प्राकृतिक पोखरे सूख जाते हैं, तब ये खेत-तालाब आवारा पशुओं, गायों और स्थानीय पक्षियों के लिए पीने के पानी का मुख्य स्रोत बनते हैं।

5. पात्रता मानदंड (Who Can Apply?)

इस योजना का लाभ केवल वास्तविक और जरूरतमंद किसानों तक ही पहुंचे, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ पारदर्शी पात्रता शर्तें निर्धारित की हैं:

  1. राज्य की नागरिकता: आवेदक किसान का उत्तर प्रदेश का मूल व स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
  2. जमीन का स्वामित्व: किसान के पास अपने नाम पर खेती योग्य वैध भूमि होनी चाहिए, जिसका विवरण राजस्व रिकॉर्ड (खतौनी) में दर्ज हो। भूमि पूरी तरह से विवादमुक्त होनी चाहिए।
  3. श्रेणीगत प्राथमिकता: योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अल्पसंख्यक, महिला किसानों और छोटे/सीमांत किसानों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, सामान्य श्रेणी के किसान भी इसके लिए पूरी तरह पात्र हैं।
  4. कृषि विभाग में पंजीकरण: आवेदक किसान का उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के पोर्टल (पारदर्शी किसान सेवा योजना पोर्टल) पर पहले से पंजीकृत होना अनिवार्य है और उसके पास एक वैध किसान आईडी (Farmer ID) होनी चाहिए।
  5. पुनरावृत्ति पर रोक: योजना का लाभ जीवन में एक बार ही लिया जा सकता है। यदि किसी किसान ने पहले केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य योजना (जैसे मनरेगा या भूमि संरक्षण विभाग) के तहत तालाब के लिए अनुदान लिया है, तो वह पात्र नहीं होगा।

6. आवश्यक दस्तावेजों की सूची (Documents Checklist)

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए किसानों को निम्नलिखित दस्तावेजों की डिजिटल या स्कैन कॉपी तैयार रखनी चाहिए:

  • आधार कार्ड: आवेदक की पहचान और निवास के सत्यापन के लिए।
  • नवीनतम खतौनी/जमीन के कागजात: भूलेख विभाग द्वारा जारी प्रमाणित भूमि रिकॉर्ड, जिसमें गाटा संख्या और रकबा (जमीन का आकार) स्पष्ट रूप से लिखा हो।
  • बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की प्रति: जिसमें बैंक का नाम, खाता संख्या, और आईएफएससी (IFSC) कोड साफ दिखाई दे। ध्यान रहे कि बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए।
  • पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो: आवेदक किसान का हालिया फोटोग्राफ।
  • सक्रिय मोबाइल नंबर: जो किसान के आधार और बैंक खाते से जुड़ा हो, ताकि ओटीपी (OTP) और योजना की स्थिति का एसएमएस (SMS) प्राप्त हो सके।
  • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो): आरक्षित श्रेणियों (SC/ST) के किसानों के लिए प्राथमिकता और अतिरिक्त लाभ का दावा करने हेतु।

7. ऑनलाइन आवेदन करने की संपूर्ण चरणबद्ध प्रक्रिया (Step-by-Step Guide)

उत्तर प्रदेश सरकार ने बिचौलियों, दलालों और दफ्तरों के चक्कर काटने की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करते हुए इस योजना की आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन (Online) कर दिया है। किसान भाई स्वयं, किसी साइबर कैफे या अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC – Common Service Centre) पर जाकर नीचे दिए गए चरणों का पालन कर आवेदन कर सकते हैं:

चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट पर प्रवेश

सबसे पहले इंटरनेट ब्राउज़र में उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट upagriculture.com (पारदर्शी किसान सेवा योजना) को खोलें।

चरण 2: अनुदान लिंक का चयन

वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ (Home Page) पर आपको कई विकल्प दिखाई देंगे। वहाँ आपको “यंत्र/तालाब पर अनुदान हेतु बुकिंग करें” या “खेत तालाब योजना हेतु ऑनलाइन टोकन” वाले लिंक पर क्लिक करना होगा।

चरण 3: किसान पंजीकरण संख्या दर्ज करना

नए पेज पर आपको अपनी 13 या 15 अंकों की किसान पंजीकरण संख्या (Farmer Registration Number) दर्ज करनी होगी। संख्या डालकर जैसे ही आप ‘खोजें’ पर क्लिक करेंगे, किसान का पूरा नाम, पिता का नाम, जिला और ब्लॉक का विवरण स्क्रीन पर स्वतः प्रदर्शित हो जाएगा।

चरण 4: तालाब के प्रकार का चुनाव

विवरण सत्यापित करने के बाद, आपको विकल्प चुनना होगा कि आप अपने खेत में “छोटा तालाब (22×20×3 मीटर)” बनाना चाहते हैं या “बड़ा तालाब (35×30×3 मीटर)”। अपनी जमीन की उपलब्धता के अनुसार सही विकल्प पर टिक करें।

चरण 5: मोबाइल नंबर सत्यापन और ओटीपी

अपना चालू मोबाइल नंबर दर्ज करें। आपके मोबाइल पर एक वन-टाइम पासवर्ड (OTP) आएगा। उसे निर्धारित बॉक्स में भरकर वेरिफाई करें।

चरण 6: टोकन जनरेट करना और चालान डाउनलोड करना

सफलतापूर्वक सत्यापन के बाद, पोर्टल द्वारा एक ऑनलाइन टोकन जनरेट किया जाएगा। इसके साथ ही एक बैंक चालान (Challan) भी स्क्रीन पर आएगा। योजना की गंभीरता बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा एक निश्चित जमानत राशि (जैसे छोटे तालाब के लिए ₹1000 और बड़े तालाब के लिए ₹2000 या शासनादेश के अनुसार निर्धारित राशि) बैंक में जमा करानी होती है। इस चालान का प्रिंटआउट ले लें।

चरण 7: बैंक में जमानत राशि जमा करना

डाउनलोड किए गए चालान को लेकर किसान को अपने जिले के निर्धारित सरकारी बैंक (जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया या पंजाब नेशनल बैंक) की शाखा में जाकर वह टोकन मनी/जमानत राशि नकद जमा करनी होगी। राशि जमा होने के बाद बैंक चालान की एक प्रति आपको वापस देगा।

चरण 8: चालान विवरण पोर्टल पर अपलोड करना

बैंक में पैसा जमा करने के बाद, पुनः कृषि विभाग के पोर्टल पर जाकर अपने लॉगिन के माध्यम से चालान नंबर, जमा करने की तिथि और बैंक शाखा का विवरण दर्ज करके आवेदन को ‘फाइनल सबमिट’ (Final Submit) कर दें। आपका आवेदन पूरा हो जाएगा और आपको एक रसीद नंबर मिल जाएगा।


8. चयन प्रक्रिया, जियो-टैगिंग और सब्सिडी का पारदर्शी वितरण

आवेदन जमा हो जाने के बाद कृषि विभाग एक बेहद पारदर्शी और तकनीकी-आधारित प्रक्रिया के तहत काम करता है:

  1. पहले आओ, पहले पाओ की नीति: चूंकि प्रत्येक जिले और ब्लॉक के लिए बजट के अनुसार तालाबों का एक निश्चित लक्ष्य (Target) तय होता है, इसलिए जो किसान पहले अपनी जमानत राशि जमा कर चालान अपलोड करते हैं, उनका चयन पहले किया जाता है। लक्ष्य से अधिक आवेदन होने पर पारदर्शी कंप्यूटर लॉटरी प्रणाली अपनाई जाती है।
  2. भौतिक सत्यापन (Physical Verification): चयन सूची में नाम आने के बाद संबंधित ब्लॉक के तकनीकी सहायक (Technical Assistant) या भूमि संरक्षण अधिकारी किसान के खेत पर जाते हैं। वे देखते हैं कि चुनी गई जमीन पर पहले से कोई तालाब तो नहीं है और क्या वहाँ पानी का ठहराव संभव है।
  3. जियो-टैगिंग की अनिवार्यता: भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार ने मोबाइल ऐप आधारित जियो-टैगिंग (Geo-tagging) को अनिवार्य बनाया है:
    • खुदाई से पहले खाली खेत की तस्वीर उपग्रह (GPS Coordinates) के साथ ली जाती है।
    • खुदाई के मध्य चरण में जब आधा काम हो जाता है, तब दूसरी तस्वीर ली जाती है और किश्त जारी होती है।
    • काम पूरा होने पर अंतिम तस्वीर ली जाती है, जिसके बाद पूरी सब्सिडी का क्लोजर होता है।

9. तालाब निर्माण के समय रखी जाने वाली सावधानियां और तकनीकी टिप्स

खेत में तालाब बनाना सिर्फ एक गड्ढा खोदना नहीं है, बल्कि यह जल इंजीनियरिंग का एक छोटा सा हिस्सा है। तालाब की सफलता के लिए किसानों को निम्नलिखित तकनीकी बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • प्राकृतिक ढाल का उपयोग: तालाब हमेशा खेत के उस कोने या हिस्से में बनाना चाहिए जहाँ पूरे खेत या आसपास के क्षेत्रों का पानी प्राकृतिक रूप से बहकर आता हो। इससे तालाब को भरने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ेगा।
  • इनलेट और आउटलेट (Inlet & Outlet) की व्यवस्था: तालाब में पानी आने के लिए एक पक्का रास्ता (Inlet) होना चाहिए ताकि बहता पानी मिट्टी को काटकर तालाब को न भरे। इसी तरह, अत्यधिक बारिश में जब तालाब लबालब भर जाए, तो अतिरिक्त पानी के सुरक्षित निकास के लिए एक आउटलेट (निकासी द्वार) होना चाहिए, अन्यथा तालाब की दीवार टूट सकती है।
  • सिल्ट चैंबर (Silt Chamber) का निर्माण: इनलेट के ठीक पहले एक छोटा सा गड्ढा (सिल्ट ट्रैप) बनाना चाहिए। इससे बारिश के पानी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी और कचरा उसी छोटे गड्ढे में रुक जाएगा और केवल साफ पानी ही मुख्य तालाब में जाएगा। इससे तालाब की उम्र बढ़ती है।
  • मिट्टी का परीक्षण और लाइनिंग: यदि आपके खेत की मिट्टी रेतीली या भुरभुरी है, तो पानी बहुत तेजी से नीचे सोख लिया जाएगा और तालाब खाली हो जाएगा। ऐसी स्थिति में कृषि विभाग के विशेषज्ञों की सलाह पर तालाब के तल में बेंटोनाइट क्ले (Bentonite Clay) की परत लगानी चाहिए या एचडीपीई पॉन्ड लाइनर प्लास्टिक शीट (HDPE Pond Liner) बिछानी चाहिए।

10. उपसंहार: ग्रामीण समृद्धि का एक नया सवेरा

उत्तर प्रदेश सरकार की खेत तालाब योजना केवल गड्ढे खोदने या पानी इकट्ठा करने की एक सरकारी योजना मात्र नहीं है, बल्कि यह राज्य के अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से सशक्त, तकनीकी रूप से समृद्ध और सिंचाई के मामले में पूरी तरह से ‘आत्मनिर्भर’ बनाने का एक भगीरथ प्रयास है। बदलते पर्यावरण के इस दौर में, जहाँ नलकूपों का दम फूल रहा है और नदियां असमय सूख रही हैं, वहाँ यह खेत-तालाब किसानों के लिए एक निजी ‘पानी के बैंक’ की तरह काम करता है।

इस योजना के माध्यम से किसान न केवल अपनी मुख्य फसलों को सूखे की मार से बचा रहे हैं, बल्कि मत्स्य पालन और मेढ़ों पर सब्जी उत्पादन जैसे नए रास्ते अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को भी एक नई ऊंचाई दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सभी प्रगतिशील, लघु और सीमांत किसानों को आगे आकर इस योजना का हिस्सा बनना चाहिए और जल संरक्षण के इस पावन राष्ट्रीय अभियान में अपना बहुमूल्य योगदान देना चाहिए। ‘जल सुरक्षित होगा, तभी हमारा कल और हमारी खेती समृद्ध होगी।’


उत्तर प्रदेश खेत तालाब योजना 2026 से जुड़े सबसे आम प्रश्नों के सटीक और व्यावहारिक(FAQs):

Q1. क्या पट्टे (Lease) या बटाई की जमीन पर तालाब निर्माण के लिए सरकारी सब्सिडी मिल सकती है?

उत्तर:नहीं, इस योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिल सकता है जिनके नाम पर खेती योग्य वैध भूमि (खतौनी/जमीन के दस्तावेज) दर्ज है। पट्टे, किराए, रेहन या किसी भी प्रकार की विवादित भूमि पर तालाब बनाने के लिए सरकारी अनुदान स्वीकृत नहीं किया जाता है। आवेदन के समय भूमि का मालिकाना हक प्रमाणित करना अनिवार्य है।

Q2. योजना के तहत मिलने वाली 50% सब्सिडी की राशि कब और कैसे जारी की जाती है?

उत्तर: भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार पूरी सब्सिडी एक साथ नहीं देती। यह राशि सीधे किसान के आधार-लिंक बैंक खाते (DBT) में तीन अलग-अलग चरणों (किश्तों) में ट्रांसफर की जाती है:

  • पहली किश्त (शुरुआती अनुदान): आवेदन स्वीकृत होने और खेत पर तालाब का ले-आउट (नक्शा) तैयार कर खुदाई शुरू होने के बाद।
  • दूसरी किश्त (मध्यम अनुदान): जब तालाब की आधी खुदाई (लगभग 1.5 मीटर गहराई) पूरी हो जाती है और कृषि विभाग के अधिकारी आकर उसकी जियो-टैगिंग (Geo-tagging) कर लेते हैं।
  • तीसरी व अंतिम किश्त (पूर्ण अनुदान): तालाब की पूरी खुदाई मानक के अनुसार (3 मीटर गहराई) समाप्त होने, मेढ़ दुरुस्त होने और अंतिम भौतिक सत्यापन (Physical Verification) सफल होने पर।

Q3. क्या एक से अधिक छोटे किसान मिलकर इस योजना का लाभ संयुक्त रूप से ले सकते हैं?

उत्तर:हाँ, लघु और सीमांत किसानों की सहूलियत के लिए सरकार ने यह व्यवस्था दी है। यदि किसी अकेले किसान के पास तालाब निर्माण के लिए पर्याप्त बड़ी जोत नहीं है, तो दो या तीन पड़ोसी किसान आपस में मिलकर सांझा तालाब (Community Pond) के लिए संयुक्त आवेदन दे सकते हैं। इसके लिए सभी हिस्सेदार किसानों की आपसी लिखित सहमति और उनकी जमीनों का संयुक्त गाटा संख्या विवरण पोर्टल पर दर्ज करना होता है।

Q4. ऑनलाइन आवेदन करने के बाद चयन की प्रक्रिया क्या होती है और कितना समय लगता है?

उत्तर: इस योजना में चयन पूरी तरह से ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (First Come, First Served) के सिद्धांत पर आधारित होता है। हर वित्तीय वर्ष में प्रत्येक जिले और ब्लॉक के लिए एक निश्चित बजट/लक्ष्य तय किया जाता है। जैसे ही आप पोर्टल पर जाकर टोकन जनरेट करते हैं, आपका नाम वरीयता सूची में आ जाता है। यदि आपके जिले का लक्ष्य पूरा हो जाता है, तो आवेदन वेटिंग लिस्ट में चला जाता है। आमतौर पर आवेदन करने के 15 से 30 दिनों के भीतर स्थानीय कृषि रक्षा इकाई द्वारा भूमि सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।

Q5. क्या तालाब की खुदाई के लिए सरकार की तरफ से कोई मशीन (JCB) या मजदूर भेजे जाते हैं?

उत्तर:नहीं, कृषि विभाग अपनी तरफ से कोई मशीन या लेबर उपलब्ध नहीं कराता है। तालाब की खुदाई का पूरा प्रबंधन (चाहे आप श्रमिकों से कराएं या जेसीबी मशीन किराए पर लें) किसान को स्वयं करना होता है। सरकार केवल तय किए गए मानकों के आधार पर कुल प्राक्कलित लागत (Estimated Cost) का 50% नकद अनुदान बैंक खाते में देती है। किसान चाहें तो इस काम को मनरेगा (MGNREGA) योजना के साथ लिंक कराकर मजदूरी की लागत में अतिरिक्त राहत पा सकते हैं।

Q6. तालाब की मेढ़ (Boundary) का उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है?

उत्तर: तालाब की खुदाई से जो उपजाऊ मिट्टी निकलती है, उससे तालाब के चारों तरफ 2 से 3 मीटर चौड़ी और मजबूत मेढ़ बनाई जाती है। इस मेढ़ को खाली छोड़ने के बजाय किसान इस पर एकीकृत कृषि (Integrated Farming) कर सकते हैं:

  • आप इस पर कम फैलाव वाले फलदार पौधे जैसे पपीता, केला, या नींबू लगा सकते हैं।
  • मौसमी सब्जियाँ जैसे लौकी, तरोई, टमाटर, मिर्च, और धनिया उगाकर रोज की अतिरिक्त कमाई की जा सकती है।
  • सावधानी: मेढ़ पर बरगद, पीपल, या यूकेलिप्टस जैसे बड़े और गहरी जड़ों वाले पेड़ कभी न लगाएं, क्योंकि इनकी जड़ें तालाब के बांध को कमजोर कर देती हैं जिससे पानी लीक होने का खतरा रहता है।

Q7. क्या इस योजना के तहत बने तालाब में मछली पालन करने पर अलग से सरकारी मदद मिलती है?

उत्तर:हाँ, यह इस योजना का सबसे बड़ा आर्थिक लाभ है। खेत तालाब योजना के तहत तालाब का निर्माण पूर्ण होने के बाद, आप मत्स्य पालन विभाग (Fisheries Department) की योजनाओं के लिए पात्र हो जाते हैं। मछली के बच्चे (जीरा), उत्तम चारा और जाल खरीदने के लिए मत्स्य विभाग द्वारा अलग से 40% से 60% तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे आपकी कमाई दोगुनी हो सकती है।


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