रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना 2026: पूरी जानकारी
उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना: नारी सुरक्षा, न्याय और पुनर्वास का एक संपूर्ण खाका
उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण, उनकी सुरक्षा और गरिमा को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार द्वारा कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। इन्हीं में से एक सबसे संवेदनशील और कल्याणकारी पहल है—उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना।
इस योजना की शुरुआत मूल रूप से साल 2015 में उत्तर प्रदेश सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य जघन्य अपराधों (जैसे एसिड अटैक, बलात्कार, पॉक्सो के तहत आने वाले गंभीर मामले) से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को बिना किसी प्रशासनिक देरी के तत्काल आर्थिक सहायता, उच्च स्तरीय चिकित्सा उपचार और सामाजिक-कानूनी पुनर्वास प्रदान करना है। समाज में इस वर्ग को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह कोष एक मजबूत रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहा है।
नीचे इस महत्वाकांक्षी योजना का एक अत्यंत विस्तृत, व्यापक और विश्लेषणात्मक विवरण प्रस्तुत किया गया है, जो इसके सभी कानूनी, वित्तीय और व्यावहारिक पहलुओं को उजागर करता है।
Table of Contents
1. योजना का परिचय एवं पृष्ठभूमि (Scheme Overview)
उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला विशिष्ट कोष है, जिसे अपराध पीड़ितों की त्वरित सहायता के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। कानून व्यवस्था और अदालती प्रक्रियाओं में कई बार अंतिम मुआवजा मिलने में लंबा समय लग जाता है, जिससे पीड़ित को इलाज और तात्कालिक संकट से निपटने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी अंतर (Gap) को पाटने के लिए इस सम्मान कोष का गठन किया गया था।
| मुख्य पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| योजना का पूरा नाम | उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना |
| नोडल विभाग | महिला एवं बाल विकास विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार |
| लॉन्च का वर्ष | 2015 (समय-समय पर नियमावली 2021 आदि के तहत संशोधित) |
| मूल लक्ष्य समूह | जघन्य अपराधों और लैंगिक हिंसा से पीड़ित महिलाएँ एवं बालिकाएँ |
| वित्तीय सहायता की सीमा | ₹1,00,000 से लेकर अधिकतम ₹10,00,000 तक (अपराध की प्रकृति आधारित) |
| मुख्य संचालन अधिकारी | जिला स्तर पर जिलाधिकारी (DM) और जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) |
| भुगतान का माध्यम | डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT / PFMS पोर्टल के माध्यम से) |
2. योजना के दूरगामी उद्देश्य (Key Objectives)
इस योजना का ढांचा केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पीड़ित के व्यापक पुनर्वास की अवधारणा पर आधारित है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- शारीरिक एवं मानसिक आघात से मुक्ति (Trauma Care): किसी भी प्रकार की हिंसा या जघन्य अपराध से पीड़ित महिला या बच्ची गहरे मानसिक और शारीरिक आघात से गुजरती है। योजना का पहला उद्देश्य उसे तुरंत सर्वोत्तम चिकित्सा देखभाल देना है ताकि उसकी जान बचाई जा सके।
- त्वरित अंतरिम वित्तीय राहत (Immediate Interim Relief): अदालतों से दोषसिद्धि (Conviction) और अंतिम मुआवजे में वर्षों लग सकते हैं। यह कोष एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद जिला स्तरीय समिति की संस्तुति पर अंतरिम राहत राशि सीधे बैंक खाते में भेजता है।
- आश्रित बच्चों की शिक्षा और भरण-पोषण: यदि पीड़ित महिला परिवार की मुख्य कमाने वाली है या उसके छोटे बच्चे हैं, तो बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए भी इस कोष से विशेष वित्तीय सहायता और छात्रवृत्ति का प्रावधान किया गया है।
- कौशल विकास और सामाजिक पुनर्वास: हिंसा से प्रभावित महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए उन्हें विभिन्न कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों (Skill Development) से जोड़ा जाता है ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
- निःशुल्क विधिक सहायता (Legal Aid): पीड़ित को बिना किसी खर्च के न्याय मिल सके, इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से मुफ्त वकीलों और कानूनी परामर्श की व्यवस्था की जाती है।
3. अपराधों का वर्गीकरण एवं वित्तीय सहायता मैट्रिक्स (Financial Compensation Matrix)
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत वित्तीय सहायता को अपराध की गंभीरता और पीड़ित को हुई शारीरिक/मानसिक क्षति के आधार पर वर्गीकृत किया है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत आने वाले जघन्य मामलों में सहायता का विवरण इस प्रकार है:
| अपराध या हिंसा की श्रेणी | मिलने वाली न्यूनतम सहायता राशि | मिलने वाली अधिकतम सहायता राशि | विशेष प्रावधान / अतिरिक्त लाभ |
|---|---|---|---|
| तेजाब हमला (Acid Attack) – चेहरे का पूरी तरह विकृत होना या गंभीर चोट | ₹5,00,000 | ₹10,00,000 | प्लास्टिक सर्जरी और पुनर्निर्माण चिकित्सा का पूरा खर्च सरकारी पैनल द्वारा वहन किया जाएगा। |
| बलात्कार / सामूहिक बलात्कार (Rape / Gang Rape) | ₹3,00,000 | ₹7,00,000 | यदि पीड़ित नाबालिग है, तो पॉक्सो एक्ट के नियमों के तहत त्वरित भुगतान। |
| यौन उत्पीड़न जिसके कारण गंभीर शारीरिक अपंगता आई हो | ₹2,00,000 | ₹5,00,000 | कृत्रिम अंग (Prosthetics) या व्हीलचेयर जैसी आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त सहायता। |
| घरेलू हिंसा या दहेज उत्पीड़न के कारण मृत्यु होने पर (आश्रितों के लिए) | ₹2,00,000 | ₹5,00,000 | मृतका के नाबालिग बच्चों की शिक्षा के लिए कक्षा 12वीं तक मासिक वजीफा। |
| अवैध मानव तस्करी (Human Trafficking) और वेश्यावृत्ति से छुड़ाई गई लड़कियां | ₹1,00,000 | ₹2,00,000 | राजकीय आश्रय गृहों में मुफ्त आवास, भोजन और सिलाई-कढ़ाई जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण। |
| पॉक्सो एक्ट (POCSO) के तहत आने वाले अन्य जघन्य बाल अपराध | ₹1,00,000 | ₹3,00,000 | बाल कल्याण समिति (CWC) की देखरेख में विशेष मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग। |
नोट: चिकित्सा आपातकाल या ऐसे मामले जहां पीड़ित को आईसीयू (ICU) या किसी बड़े निजी/सरकारी स्पेशलिटी अस्पताल में रेफर किया गया हो, वहां जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति वास्तविक बिलों के आधार पर तत्काल अतिरिक्त फंड भी जारी कर सकती है।
4. विस्तृत पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria in Detail)
इस योजना का लाभ सही और वास्तविक पीड़ितों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे, इसके लिए राज्य सरकार ने कड़े और स्पष्ट पात्रता नियम तय किए हैं:
- राज्य की नागरिकता: पीड़ित महिला, बालिका या उसके माता-पिता/कानूनी अभिभावक उत्तर प्रदेश के मूल निवासी (Domicile Holder) होने चाहिए।
- कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत (Mandatory FIR): घटना के घटित होने के बाद संबंधित क्षेत्र के पुलिस थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज होना अनिवार्य है। बिना एफआईआर या मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज शिकायत (Complaint) के इस कोष से राशि जारी नहीं की जा सकती।
- आय सीमा का नियम: सामान्य मामलों में पीड़ित के परिवार की वार्षिक आय पर कुछ प्रतिबंध हो सकते हैं, लेकिन एसिड अटैक और सामूहिक बलात्कार जैसे अत्यंत जघन्य मामलों में सरकार ने आय सीमा के बंधन को पूरी तरह समाप्त कर दिया है ताकि अमीर-गरीब का भेद किए बिना तुरंत जीवन रक्षा की जा सके।
- आयु सीमा का कोई बंधन नहीं: यह योजना नवजात बालिका से लेकर किसी भी उम्र की महिला के लिए खुली है। उम्र के आधार पर किसी को भी लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
- समय सीमा के भीतर आवेदन: घटना घटने या एफआईआर दर्ज होने के यथाशीघ्र (आमतौर पर निर्धारित नियमावली के भीतर) जिला प्रोबेशन कार्यालय में आवेदन जमा करना आवश्यक होता है।
5. आवश्यक दस्तावेजों की विस्तृत सूची (Required Documents Checklist)
ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करते समय निम्नलिखित दस्तावेजों की स्पष्ट और प्रमाणित प्रतियों को संलग्न करना अनिवार्य है:
- प्राथमिकी की प्रति (Certified Copy of FIR): संबंधित पुलिस स्टेशन के प्रभारी द्वारा हस्ताक्षरित एफआईआर की कॉपी।
- मेडिकल-लीगल केस रिपोर्ट (MLC Summary): सरकारी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) या अधिकृत डॉक्टर द्वारा तैयार की गई मेडिकल रिपोर्ट, जो चोट या अपराध की गंभीरता को प्रमाणित करती हो।
- पहचान और निवास का प्रमाण: पीड़ित या उसके अभिभावक का आधार कार्ड, राशन कार्ड, मूल निवास प्रमाण पत्र या मतदाता पहचान पत्र।
- बैंक खाता विवरण (Bank Account Details): पीड़ित महिला (या नाबालिग के मामले में माता-पिता के साथ संयुक्त खाता) की बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की फोटोकॉपी या एक स्पष्ट कैंसिल्ड चेक (Cancelled Cheek), जिसमें IFSC कोड और खाता संख्या साफ पढ़ी जा सके।
- आयु का प्रमाण (Age Proof): विशेषकर पॉक्सो मामलों में जन्म प्रमाण पत्र, हाईस्कूल की अंकतालिका या डॉक्टर द्वारा प्रमाणित आयु प्रमाण पत्र।
- पासपोर्ट साइज फोटो: पीड़ित की तीन हालिया पासपोर्ट आकार की तस्वीरें।
6. आवेदन करने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया (Step-by-Step Application Process)
उत्तर प्रदेश सरकार ने तकनीकी पारदर्शिता को बढ़ावा देते हुए इस योजना की आवेदन प्रणाली को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में सुलभ बनाया है।
क) ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया (Online Method)
- सबसे पहले उत्तर प्रदेश महिला कल्याण विभाग के आधिकारिक पोर्टल mksy.up.gov.in या संबंधित एकीकृत कल्याण पोर्टल पर जाएं।
- होमपेज पर उपलब्ध “रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष – ऑनलाइन आवेदन” लिंक पर क्लिक करें।
- आपके सामने एक विस्तृत पंजीकरण फॉर्म खुलेगा। इसमें पीड़ित का नाम, पिता/पति का नाम, स्थायी पता, मोबाइल नंबर आदि सावधानीपूर्वक भरें।
- अगले चरण में घटना का विवरण, एफआईआर संख्या, धाराएं और पुलिस स्टेशन का नाम दर्ज करें।
- इसके बाद, ‘दस्तावेज़ अपलोड’ सेक्शन में जाकर एफआईआर की पीडीएफ, मेडिकल रिपोर्ट और बैंक पासबुक की स्कैन कॉपी अपलोड करें।
- फॉर्म को सबमिट करने से पहले पूरी तरह रीचेक करें और ‘Final Submit’ पर क्लिक करें। इसके बाद आपको एक एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर (Application Reference Number) प्राप्त होगा, जिससे आप अपने आवेदन को ट्रैक कर सकते हैं।
ख) ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया (Offline Method)
- यदि आप इंटरनेट का उपयोग करने में असमर्थ हैं, तो आप अपने जिले के विकास भवन स्थित जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) कार्यालय में जा सकते हैं।
- वहां से रानी लक्ष्मीबाई सम्मान कोष का निशुल्क भौतिक आवेदन फॉर्म प्राप्त करें।
- फॉर्म को पूरी तरह भरकर उसके साथ ऊपर बताए गए सभी आवश्यक दस्तावेजों की स्व-प्रमाणित (Self-Attested) प्रतियां संलग्न करें।
- भरे हुए फॉर्म को जिला प्रोबेशन अधिकारी या जिला मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालय के काउंटर पर जमा करें और वहां से पावती रसीद (Acknowledgement Receipt) अवश्य लें।
7. प्रशासनिक ढांचा, चयन प्रक्रिया और कोष की निगरानी (Governance & Implementation)
योजना का क्रियान्वयन तीन-स्तरीय प्रशासनिक ढांचे के तहत किया जाता है, जिससे लालफीताशाही की गुंजाइश खत्म होती है और पारदर्शिता बनी रहती है।
जिला स्तरीय संचालन समिति (District Level Committee)
प्रत्येक जिले में इस योजना के तहत आवेदनों की जांच और स्वीकृति के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति होती है:
- अध्यक्ष: जिले के जिलाधिकारी (DM)
- सदस्य सचिव: जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO)
- अन्य सदस्य: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले दो गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधि।
यह समिति हर महीने बैठक करती है (या आपात स्थिति में तत्काल बैठक बुलाकर) प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी करती है। समिति द्वारा स्वीकृत मामलों की फाइल तुरंत लखनऊ मुख्यालय को वित्तीय आवंटन के लिए भेजी जाती है।
राज्य स्तरीय निगरानी समिति (State Level Cell)
लखनऊ में स्थित महिला एवं बाल विकास निदेशालय स्तर पर एक केंद्रीय सेल इस पूरे कोष की निगरानी करता है। ₹10 लाख से अधिक के विशेष मामलों या असाधारण चिकित्सा खर्चों की मंजूरी इसी समिति के माध्यम से दी जाती है।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का उपयोग
भ्रष्टाचार और बिचौलियों को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना को पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) से जोड़ा है। स्वीकृत राहत राशि किसी भी अधिकारी या विभाग के पास न जाकर सीधे पीड़ित के प्रमाणित बैंक खाते में वन-क्लिक के माध्यम से ट्रांसफर की जाती है।
8. योजना की चुनौतियाँ और सुधार के उपाय (Challenges & Way Forward)
योजना अपने आप में बेहद अनूठी और कल्याणकारी है, लेकिन इसके पूर्ण क्रियान्वयन में कुछ जमीनी चुनौतियाँ भी देखने को मिलती हैं:
- जागरूकता की कमी: ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को अक्सर इस बात की जानकारी नहीं होती कि एफआईआर दर्ज होने के बाद वे सरकार से ऐसी आर्थिक मदद भी पा सकती हैं। इसके लिए थानों में इस योजना के होर्डिंग्स लगाए जाने अनिवार्य होने चाहिए।
- दस्तावेजीकरण में देरी: कई बार पुलिस द्वारा चार्जशीट या मेडिकल रिपोर्ट समय पर न देने के कारण आवेदनों के निस्तारण में देरी हो जाती है। इसके लिए सरकार को एक ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ बनाना चाहिए जहां पुलिस और अस्पताल सीधे पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड कर सकें।
- सामाजिक कलंक (Social Stigma): लोकलाज के डर से कई परिवार एफआईआर दर्ज नहीं कराते, जिससे पीड़ित लड़कियां इस कोष के लाभ से वंचित रह जाती हैं। इसके लिए थानों में ‘महिला हेल्प डेस्क’ और वन स्टॉप सेंटरों (सखी केंद्रों) को इस योजना से मजबूती से जोड़ा जा रहा है।
9. निष्कर्ष (Conclusion)
उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना केवल एक सरकारी वित्तीय योजना नहीं है, बल्कि यह संकट की घड़ी में राज्य सरकार द्वारा पीड़ित महिलाओं को दिया जाने वाला एक सुरक्षा कवच और सम्मान का भरोसा है। यह योजना पीड़ितों को यह अहसास कराती है कि न्याय की लड़ाई में वे अकेली नहीं हैं, बल्कि पूरी राज्य व्यवस्था उनके साथ खड़ी है।
आर्थिक संबल प्रदान करके, मुफ्त इलाज सुनिश्चित करके और कानूनी लड़ाई में मदद देकर इस कोष ने उत्तर प्रदेश की हज़ारों बेटियों और महिलाओं को दोबारा सिर उठाकर जीने का हौसला दिया है। इस योजना का निरंतर सुदृढ़ीकरण और सरलीकरण राज्य में ‘नारी सुरक्षा, नारी सम्मान और नारी स्वावलंबन’ के संकल्प को पूरी तरह चरितार्थ करता है।
10. संपर्क सूत्र और आपातकालीन हेल्पलाइन (Helpline Numbers)
यदि आपको इस योजना के तहत आवेदन करने में कोई कठिनाई आ रही है या आपको किसी आपातकालीन सहायता की आवश्यकता है, तो आप निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
- उत्तर प्रदेश महिला हेल्पलाइन: 1090 (वूमेन पावर लाइन) या 181
- राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर: 112
- चाइल्ड हेल्पलाइन (बच्चों के लिए): 1098
- नोडल ईमेल आईडी: upmahilasammankosh@gmail.com
- कार्यालय का पता: जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय (आपके जिले का विकास भवन), उत्तर प्रदेश।
उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना से जुड़े कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) दिए गए हैं, जो आपके इस विषय से जुड़े हर संशय को दूर करेंगे:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1. रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना क्या है? | यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित एक विशेष कोष है, जिसके तहत जघन्य लैंगिक हिंसा, बलात्कार और एसिड अटैक जैसी गंभीर घटनाओं से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को त्वरित आर्थिक, चिकित्सीय और कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। |
| 2. इस योजना के तहत कितनी वित्तीय सहायता मिलती है? | अपराध और क्षति की गंभीरता के आधार पर पीड़ित को ₹1,00000 से लेकर ₹10,00000 तक की एकमुश्त आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। |
| 3. क्या इस योजना का लाभ उठाने के लिए कोई आय सीमा (Income Limit) है? | सामान्य मामलों में पात्रता के नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन तेजाब हमले (Acid Attack) और सामूहिक बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के पीड़ितों के लिए सरकार ने आय सीमा के बंधन को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। |
| 4. क्या योजना का लाभ पाने के लिए एफआईआर (FIR) होना जरूरी है? | हाँ, संबंधित पुलिस स्टेशन में घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज होना अनिवार्य है। बिना एफआईआर की सत्यापित प्रति के आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता। |
| 5. इस योजना के लिए कौन-कौन से मुख्य दस्तावेज चाहिए? | मुख्य रूप से: 1. एफआईआर (FIR) की कॉपी, 2. मेडिकल रिपोर्ट (MLC), 3. उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र, 4. आधार कार्ड, 5. पीड़ित का बैंक खाता विवरण (पासबुक या कैंसिल्ड चेक), और 6. पासपोर्ट साइज फोटो। |
| 6. यदि पीड़ित नाबालिग है, तो बैंक खाते का विवरण कैसे दिया जाएगा? | यदि पीड़ित बालिका नाबालिग (पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत) है, तो उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक के साथ खोला गया संयुक्त बैंक खाता (Joint Bank Account) या अभिभावक का प्रमाणित खाता विवरण मान्य होता है। |
| 7. योजना के तहत आवेदन कहाँ और कैसे करना होता है? | आप महिला कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट mksy.up.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, अपने जिले के विकास भवन स्थित जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) कार्यालय में ऑफलाइन फॉर्म भी जमा कर सकते हैं। |
| 8. आवेदन जमा होने के बाद राशि मिलने में कितना समय लगता है? | जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय संचालन समिति द्वारा आवेदन और मेडिकल रिपोर्ट के सत्यापन के बाद यथाशीघ्र (डीबीटी के माध्यम से) राशि सीधे लाभार्थी के खाते में भेज दी जाती है। |
| 9. क्या आर्थिक मदद के अलावा इलाज का खर्च भी सरकार उठाती है? | हाँ, विशेषकर एसिड अटैक के मामलों में यदि किसी बड़े या निजी स्पेशलिटी अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी या पुनर्निर्माण चिकित्सा (Reconstructive Surgery) की आवश्यकता होती है, तो समिति की संस्तुति पर अस्पताल का वास्तविक खर्च भी इस कोष या सरकारी पैनल द्वारा वहन किया जाता है। |
| 10. किसी भी प्रकार की पूछताछ या शिकायत के लिए कहाँ संपर्क करें? | आप उत्तर प्रदेश सरकार की महिला हेल्पलाइन 181 या 1090 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा अपने जिले के जिला प्रोबेशन कार्यालय (DPO) में जाकर सीधे स्थिति की जानकारी ले सकते हैं। |
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