UP Vishwakarma Shram Samman Yojana 2026: यूपी विश्वकर्मा योजना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फॉर्म, 18 पारंपरिक ट्रेड्स की सूची
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, उत्तर प्रदेश 2026: ऑनलाइन आवेदन, पात्रता, फ्री टूलकिट और लोन योजना की पूरी जानकारी
उत्तर प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों, हस्तशिल्पियों और छोटे उद्योगों से जुड़े श्रमिकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, उनके हुनर को आधुनिक रूप देने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना (Vishwakarma Shram Samman Yojana – VSSY) एक अत्यंत क्रांतिकारी और कल्याणकारी योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों और शहरों के उन पारंपरिक कारीगरों (जैसे- बढ़ई, लोहार, सुनार, दर्जी, मोची, कुम्हार आदि) को मुफ्त व्यावसायिक प्रशिक्षण (Free Training), आधुनिक उन्नत टूलकिट (Free Toolkit) और अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए ₹10 लाख तक का कम ब्याज पर लोन प्रदान करना है, जो आर्थिक तंगी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग तथा निर्यात प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा संचालित इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026 में भी बड़े पैमाने पर नए बैचों के लिए पंजीकरण और टूलकिट वितरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यदि आप भी उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, किसी पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े हैं और अपने काम को आधुनिक तकनीक के सहारे बड़ा बनाना चाहते हैं, तो यह विस्तृत लेख आपके सपनों को सच करने का जरिया बन सकता है।
इस लेख में हम आपको विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना उत्तर प्रदेश से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जैसे कि पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेज, कवर होने वाले 6 प्रमुख पारंपरिक ट्रेड्स, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, फ्री टूलकिट योजना का लाभ और महत्वपूर्ण नियमों के बारे में विस्तार से बताएंगे ताकि आप बिना किसी परेशानी के सरकारी सहायता प्राप्त कर सकें।
Table of Contents
1. विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना: एक नज़र में (Overview)
| विवरण (Particulars) | महत्वपूर्ण जानकारी (Details) |
|---|---|
| योजना का नाम | विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना (VSSY) |
| राज्य का नाम | उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) |
| संचालित विभाग | सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग, उत्तर प्रदेश |
| नोडल एजेंसी | जिला उद्योग केंद्र (District Industries Centre – DIC) |
| मुख्य लाभ | 6 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण, फ्री आधुनिक टूलकिट और ऋण सहायता |
| अधिकतम लोन राशि | ₹10,000,00 (₹10 लाख रुपये तक) |
| लाभार्थी श्रेणी | यूपी के पारंपरिक कारीगर (बढ़ई, लोहार, दर्जी, नाई, टोकरी बुनकर आदि) |
| आवेदन का तरीका | ऑनलाइन (DIUPmsme पोर्टल के माध्यम से) |
| आधिकारिक वेबसाइट | DIUP MSME Official Website |
2. योजना की शुरुआत और मुख्य उद्देश्य (Vision and Objective)
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में सदियों से कई ऐसे पारंपरिक कारीगर रहते हैं जो हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते हैं। लेकिन आधुनिक मशीनों के इस दौर में, बिना उन्नत औजारों और सही ट्रेनिंग के, इन कारीगरों के उत्पाद बाजार में बड़े ब्रांड्स से मुकाबला नहीं कर पाते। इसी समस्या को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ की शुरुआत की गई है।
इस योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- पारंपरिक कला का संरक्षण: पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे पारंपरिक व्यवसायों और हस्तशिल्प कलाओं को जीवित रखना और उन्हें लुप्त होने से बचाना।
- हुनर का आधुनिकीकरण: कारीगरों को नवीनतम तकनीकों और मशीनों का 6 दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण (Skill Development Training) देकर उनके कार्य कौशल को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना।
- उत्पादकता और आय में वृद्धि: मुफ्त आधुनिक टूलकिट (Free Advanced Tools) प्रदान करना ताकि कारीगर कम समय में ज्यादा और बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद बना सकें, जिससे उनकी मासिक आय में वृद्धि हो।
- वित्तीय समावेशन (Financial Assistance): पारंपरिक श्रमिकों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए बैंकों के माध्यम से बेहद कम ब्याज दरों पर व्यवसाय शुरू करने हेतु आसान लोन उपलब्ध कराना।
3. योजना के अंतर्गत कवर होने वाले प्रमुख पारंपरिक ट्रेड्स (Eligible Trades)
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत समाज के निम्नलिखित 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों और श्रमिकों को सीधे तौर पर लाभान्वित किया जाता है:
- दर्जी (Tailor): सिलाई के आधुनिक तरीके और फैशन डिजाइनिंग की बुनियादी ट्रेनिंग तथा मुफ्त एडवांस सिलाई मशीन (Sewing Machine)।
- बढ़ई (Carpenter): लकड़ी के आधुनिक और फैंसी फर्नीचर बनाने के टूल्स की किट।
- लोहार (Blacksmith): लोहे के कृषि उपकरण और ग्रिल-गेट्स बनाने की आधुनिक तकनीक।
- सुनार (Goldsmith): आभूषण निर्माण के आधुनिक और सूक्ष्म औजार।
- कुम्हार (Potter): मिट्टी के बर्तन और फैंसी दीये/खिलौने बनाने के लिए आधुनिक इलेक्ट्रिक चाक (Electronic Chalk)।
- मोची / चर्मकार (Cobbler): चमड़े के जूते-चप्पल और बेल्ट बनाने की उन्नत टूलकिट।
- नाई (Barber): आधुनिक सैलून/ब्यूटी पार्लर से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण और कैंची/ट्रिमर सेट।
- राजमिस्त्री (Mason): भवन निर्माण के आधुनिक औजार।
- टोकरी बुनकर (Basket Maker): बांस और बेंत से आकर्षक हस्तशिल्प वस्तुएं और टोकरियां बनाने के उपकरण।
- अन्य पारंपरिक कारीगर: जैसे मालाकार (Florist), धोबी (Washerman), मूर्तिकार (Sculptor), हलवाई (Confectioner), ताला बनाने वाले (Locksmith), और जाल बुनने वाले (Fishing Net Maker)।
4. योजना के मुख्य लाभ और विशेषताएं (Key Benefits & Features)
इस योजना के अंतर्गत चयनित लाभार्थियों को निम्नलिखित तीन चरणों में पूर्ण लाभ प्रदान किया जाता है:
- निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण: जिला उद्योग केंद्र (DIC) द्वारा निर्धारित संस्थानों में विशेषज्ञों के माध्यम से 6 दिनों का पूर्णकालिक आवासीय/गैर-आवासीय प्रशिक्षण दिया जाता है। इस ट्रेनिंग के दौरान अनुभवी प्रशिक्षक आधुनिक मशीनों को चलाने और बाजार की मांग के अनुसार डिजाइन बनाने का तरीका सिखाते हैं।
- मानदेय (Stipend): प्रशिक्षण के दौरान कारीगरों का दैनिक रोजगार प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार द्वारा ट्रेनिंग के प्रत्येक दिन के लिए एक निश्चित वित्तीय मानदेय (Stipend) सीधे उनके बैंक खाते में भेजा जाता है।
- मुफ्त आधुनिक टूलकिट का वितरण: ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद, समापन समारोह में प्रत्येक कारीगर को उनके ट्रेड से संबंधित ₹10,000 से ₹15,000 मूल्य की ब्रांडेड और आधुनिक टूलकिट (Free Toolkit Bundle) पूरी तरह मुफ्त प्रदान की जाती है।
- बिना गारंटी लोन और मार्जिन मनी (सब्सिडी): यदि कोई प्रशिक्षित कारीगर अपनी खुद की बड़ी दुकान या लघु उद्योग इकाई स्थापित करना चाहता है, तो उसे प्रधानमंत्री मुद्रा योजना या मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के समन्वय से ₹10,000 से ₹10 लाख तक का ऋण बैंकों के माध्यम से प्राथमिकता पर दिलाया जाता है, जिस पर नियमानुसार सब्सिडी (Margin Money) भी देय होती है।
5. पात्रता मापदंड (Eligibility Criteria)
इस कल्याणकारी योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित निम्नलिखित बुनियादी शर्तों को पूरा करना आवश्यक है:
- उत्तर प्रदेश का मूल निवासी: आवेदक का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी (Domicile of UP) होना अनिवार्य है।
- आयु सीमा (Age Limit): आवेदन करने की तिथि को उम्मीदवार की आयु न्यूनतम 18 वर्ष होनी चाहिए। अधिकतम आयु की कोई निश्चित सीमा नहीं है, बशर्ते कारीगर शारीरिक रूप से कार्य करने में सक्षम हो।
- पारंपरिक व्यवसाय से जुड़ाव: आवेदक का वास्तव में उस पारंपरिक ट्रेड (दर्जी, बढ़ई आदि) से जुड़ा होना आवश्यक है जिसके लिए वह आवेदन कर रहा है। इसके लिए ग्राम प्रधान या वार्ड पार्षद द्वारा जारी कार्य प्रमाण पत्र मान्य होता है।
- शैक्षणिक योग्यता की कोई बाध्यता नहीं: योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता (No Educational Qualification Required) की आवश्यकता नहीं है। अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे पारंपरिक कारीगर भी इसके लिए पूरी तरह पात्र हैं।
- एक परिवार से एक ही लाभ: सरकारी नियमों के अनुसार, इस योजना का लाभ परिवार के केवल एक ही सदस्य को प्रदान किया जा सकता है।
- अन्य योजनाओं का लाभार्थी न होना: आवेदक ने पिछले 2 वर्षों में केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य समान टूलकिट या प्रशिक्षण योजना का लाभ न लिया हो।
6. आवश्यक दस्तावेजों की सूची (Required Documents List)
ऑनलाइन आवेदन पत्र भरते समय आपके पास नीचे दिए गए सभी महत्वपूर्ण और वैध दस्तावेजों की स्कैन कॉपी होना अत्यंत आवश्यक है:
- पासपोर्ट साइज फोटो और डिजिटल हस्ताक्षर: ऑनलाइन फॉर्म में अपलोड करने के लिए।
- आधार कार्ड: मुख्य पहचान और पते के प्रमाण के रूप में (बैंक खाते और मोबाइल नंबर से लिंक होना अनिवार्य)।
- निवास प्रमाण पत्र: उत्तर प्रदेश का मूल निवास प्रमाण पत्र (यदि उपलब्ध न हो तो वोटर आईडी या बिजली बिल भी मान्य)।
- पारंपरिक कारीगर होने का प्रमाण पत्र: ग्राम प्रधान, वार्ड सदस्य या अध्यक्ष नगर पालिका द्वारा हस्ताक्षरित एवं प्रमाणित पत्र कि आवेदक पारंपरिक रूप से संबंधित व्यवसाय का संचालन करता है।
- बैंक खाता पासबुक की प्रति: मानदेय और ऋण प्रक्रियाओं के लिए कन्या/कारीगर के बैंक खाते का विवरण (IFSC कोड सहित स्पष्ट प्रति)।
- जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो): अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) के आवेदकों के लिए (सामान्य वर्ग के लिए आवश्यक नहीं, क्योंकि योजना सभी वर्गों के पारंपरिक कारीगरों के लिए खुली है)।
- आयु का प्रमाण: आधार कार्ड या पैन कार्ड जिसमें जन्मतिथि स्पष्ट रूप से अंकित हो।
7. ऑनलाइन आवेदन करने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया (Step-by-Step Online Application)
उत्तर प्रदेश सरकार के उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय ने पूरी आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे ऑनलाइन कर दिया है। कारीगर स्वयं या नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से नीचे दिए गए स्टेप्स का पालन करके आवेदन कर सकते हैं:
- आधिकारिक पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय, उत्तर प्रदेश के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल diupmsme.upsdc.gov.in पर जाएं।
- लॉगिन/रजिस्ट्रेशन सेक्शन: होमपेज पर दिए गए “विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना” वाले लिंक पर क्लिक करें और फिर “नवीन उपयोगकर्ता पंजीकरण” (New User Registration) का चयन करें।
- प्रारंभिक पंजीकरण भरें: आपके सामने एक प्रारंभिक पंजीकरण फॉर्म खुलेगा। इसमें योजना का नाम (विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना), अपना नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और अपने जिले का चयन करें।
- क्रेडेंशियल्स प्राप्त करें: फॉर्म सबमिट करने पर आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक OTP, User ID (एप्लिकेशन नंबर) और Password प्राप्त होगा।
- पोर्टल पर लॉगिन करें: प्राप्त यूजर आईडी और पासवर्ड की मदद से “पंजीकृत उपयोगकर्ता लॉगिन” वाले भाग में जाकर दोबारा लॉगिन करें। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पहली बार में पासवर्ड बदलने की सलाह दी जाती है।
- मुख्य आवेदन पत्र भरें (Application Form): अब आपके सामने विस्तृत फॉर्म खुलेगा। इसमें अपनी व्यक्तिगत जानकारी, अपनी श्रेणी (जाति), और उस विशिष्ट पारंपरिक ट्रेड (जैसे दर्जी या बढ़ई) का चयन करें जिसके लिए आप ट्रेनिंग और टूलकिट चाहते हैं।
- बैंक विवरण भरें: अपने सक्रिय बैंक खाते का विवरण (खाता संख्या, बैंक का नाम, शाखा का नाम और IFSC कोड) बिल्कुल सही-सही भरें, क्योंकि ट्रेनिंग का मानदेय सीधे इसी खाते में भेजा जाएगा।
- दस्तावेज़ अपलोड करें: ऊपर बताए गए सभी आवश्यक दस्तावेजों (जैसे फोटो, हस्ताक्षर, आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और ग्राम प्रधान द्वारा जारी पारंपरिक कारीगर का प्रमाण पत्र) की स्कैन कॉपी (JPEG फॉर्मेट में निर्धारित साइज के अनुसार) अपलोड करें।
- प्रिव्यू और फाइनल सबमिट: फॉर्म को फाइनल सबमिट करने से पहले “Preview” बटन पर क्लिक करके एक-एक जानकारी को ध्यान से जांच लें ताकि नाम या आधार नंबर में कोई गलती न हो। सब कुछ सही होने पर “Final Submit” पर क्लिक करें।
- प्रिंटआउट सुरक्षित रखें: फॉर्म सफलतापूर्वक सबमिट होने के बाद उत्पन्न हुए आवेदन पत्र (Application Form) का प्रिंटआउट निकाल लें। भविष्य के संदर्भ और जिला उद्योग केंद्र (DIC) में भौतिक सत्यापन के समय इस प्रिंटआउट का सुरक्षित रहना आवश्यक है।
8. चयन प्रक्रिया और टूलकिट वितरण (Selection Process)
आवेदन ऑनलाइन सबमिट होने के बाद लाभार्थियों का चयन निम्नलिखित पारदर्शी चरणों में पूरा होता है:
- दस्तावेजों की जांच (Scrutiny by DIC): आपके जिले के जिला उद्योग केंद्र (DIC) के अधिकारी आपके ऑनलाइन आवेदन और अपलोड किए गए दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच करते हैं। यदि पारंपरिक कारीगर होने का प्रमाण पत्र सही पाया जाता है, तो फॉर्म को आगे बढ़ाया जाता है।
- साक्षात्कार/स्क्रीनिंग टेस्ट: यदि किसी जिले में सीटों की संख्या से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो जिला स्तरीय चयन समिति आवेदकों को एक संक्षिप्त साक्षात्कार या भौतिक सत्यापन के लिए बुला सकती है ताकि वास्तविक पारंपरिक कारीगरों की पहचान की जा सके।
- ट्रेनिंग बैच का आवंटन: चयनित उम्मीदवारों को एसएमएस और फोन कॉल के माध्यम से उनके नजदीकी सरकारी प्रशिक्षण केंद्र पर 6 दिवसीय ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाता है।
- भव्य टूलकिट वितरण समारोह: ट्रेनिंग की समाप्ति और मूल्यांकन के बाद, जिला प्रशासन या राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले भव्य समारोह में मुख्य अतिथियों द्वारा सभी सफल कारीगरों को उनके ट्रेड की चमचमाती हुई फ्री आधुनिक टूलकिट और ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
मुख्यमंत्री विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, उत्तर प्रदेश राज्य के उन लाखों पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों के जीवन में नई रोशनी लाने वाली एक बेजोड़ और बेहद सफल योजना है जो अपने पुश्तैनी हुनर के बल पर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। 6 दिनों का निशुल्क आधुनिक प्रशिक्षण और उसके बाद मिलने वाली एडवांस टूलकिट इन छोटे कारीगरों को बाजार में बड़े उद्योगों के सामने मजबूती से खड़े होने का संबल प्रदान करती है। डिजिटल युग में साल 2026 में पूरी प्रक्रिया के ऑनलाइन हो जाने से अब बिना किसी बिचौलिए के सीधे वास्तविक जरूरतमंदों तक योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंच रहा है। यदि आप भी एक दर्जी, बढ़ई, लोहार, कुम्हार या नाई हैं और उत्तर प्रदेश में रहते हैं, तो बिना समय गंवाए तुरंत diupmsme.upsdc.gov.in पोर्टल पर जाएं और इस कल्याणकारी योजना का लाभ उठाकर अपने हुनर को एक नई और आधुनिक पहचान दें।
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना (VSSY) के तहत मुख्य रूप से क्या लाभ मिलता है?
उत्तर: इस योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों को उनके ट्रेड से संबंधित 6 दिवसीय निःशुल्क आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाता है, ट्रेनिंग के दौरान दैनिक मानदेय (Stipend) मिलता है, और ट्रेनिंग पूरी होने पर ₹10,000 से ₹15,000 मूल्य की आधुनिक टूलकिट (Free Toolkit) पूरी तरह मुफ्त प्रदान की जाती है।
प्रश्न 2: क्या इस योजना के तहत आवेदन करने के लिए किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता (पढ़ाई) की आवश्यकता है?
उत्तर: नहीं, इस योजना के लिए शैक्षणिक योग्यता की कोई बाध्यता नहीं है। उत्तर प्रदेश के कम पढ़े-लिखे या पूरी तरह अनपढ़ पारंपरिक कारीगर भी इस योजना का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह पात्र हैं।
प्रश्न 3: योजना के तहत कौन-कौन से पारंपरिक कारीगर आवेदन कर सकते हैं?
उत्तर: योजना के अंतर्गत दर्जी, बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, मोची, नाई, राजमिस्त्री, टोकरी बुनकर, हलवाई, धोबी, ताला बनाने वाले और मूर्तिकार सहित कुल 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े श्रमिक आवेदन कर सकते हैं।
प्रश्न 4: आवेदन करने के लिए न्यूनतम आयु सीमा क्या निर्धारित की गई है?
उत्तर: आवेदन करने की तिथि को आवेदक की आयु न्यूनतम 18 वर्ष होनी चाहिए। अधिकतम आयु की कोई निश्चित सीमा तय नहीं की गई है।
प्रश्न 5: पारंपरिक कारीगर होने का प्रमाण पत्र (Artisan Certificate) कैसे और कहाँ से बनवाना होगा?
उत्तर: ऑनलाइन फॉर्म भरते समय एक निर्धारित प्रारूप का फॉर्म डाउनलोड करना होता है, जिस पर अपने ग्राम प्रधान (ग्रामीण क्षेत्रों के लिए) या वार्ड पार्षद/नगर पालिका अध्यक्ष (शहरी क्षेत्रों के लिए) के हस्ताक्षर और मुहर लगवानी होती है। यह पत्र यह प्रमाणित करता है कि आप वास्तव में वह पारंपरिक काम करते हैं।
प्रश्न 6: क्या एक ही परिवार के दो लोग इस योजना के तहत मुफ्त टूलकिट प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर: नहीं, योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का लाभ एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति को प्रदान किया जा सकता है।
प्रश्न 7: क्या टूलकिट मिलने के बाद अपना खुद का बड़ा काम शुरू करने के लिए लोन भी मिल सकता है?
उत्तर: हाँ, जो कारीगर ट्रेनिंग पूरी कर लेते हैं, उन्हें जिला उद्योग केंद्र (DIC) द्वारा प्राथमिकता के आधार पर प्रधानमंत्री मुद्रा योजना या अन्य स्वरोजगार योजनाओं के समन्वय से ₹10,000 से ₹10 लाख तक का कम ब्याज दर पर बिजनेस लोन बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है।
प्रश्न 8: योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किस पोर्टल पर करना होगा?
उत्तर: इसके लिए आवेदकों को उत्तर प्रदेश के उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट diupmsme.upsdc.gov.in पर जाना होगा। वहाँ “विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना” लिंक पर जाकर नवीन पंजीकरण करना होगा और अपने दस्तावेजों को अपलोड करना होगा।
#VishwakarmaYojanaUP, #FreeToolkitScheme, #UPGovtSchemes, #SarkariYojana2026, #UPMSMEJobs, #TraditionalArtisans, #VSSYUP2026, #YogiAdityanathSchemes, #TailoringFreeMachine, #UPEconomy2026