National Cancer Awareness Day: भारत में कैंसर के लक्षण, कारण और उपचार की संपूर्ण जानकारी
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राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस (National Cancer Awareness Day): महत्व, इतिहास, चुनौतियाँ और निवारण
प्रस्तावना
राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस भारत में हर साल 7 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिवस देश में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने, इसके शुरुआती लक्षणों की पहचान करने, और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समर्पित है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में कैंसर एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है। विकासशील देशों, विशेषकर भारत में, चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद जागरूकता की कमी और देर से बीमारी का पता चलने के कारण मृत्यु दर काफी अधिक है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कैंसर दुनिया भर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। भारत में भी कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। ऐसे में राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में शुरुआती पहचान और रोकथाम ही सबसे बड़ा हथियार है।
1. राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस का इतिहास और पृष्ठभूमि
भारत में राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस की शुरुआत सबसे पहले वर्ष 2014 में की गई थी। देश के तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने देश में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस विशेष दिवस की स्थापना की थी। भारत आधिकारिक तौर पर कैंसर के प्रति इस स्तर पर एक समर्पित राष्ट्रीय दिवस घोषित करने वाले दुनिया के शुरुआती देशों में से एक है।
7 नवंबर की तिथि का महत्व: मैडम क्यूरी का योगदान
यह दिवस प्रतिवर्ष 7 नवंबर को मनाने का एक बेहद खास और ऐतिहासिक कारण है। इस दिन महान और नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक मैडम मैरी क्यूरी (Marie Curie) की जयंती होती है। मैडम क्यूरी ने विज्ञान के क्षेत्र में रेडियोधर्मिता (Radioactivity) की खोज की थी, जिसके तहत उन्होंने रेडियम और पोलोनियम जैसे तत्वों की पहचान की। उनकी इस अभूतपूर्व खोज ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में कैंसर के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली रेडियोथेरेपी (Radiotherapy) और कैंसर स्क्रीनिंग की नींव रखी। मैडम क्यूरी के इसी महान योगदान को सम्मान देने और याद करने के लिए 7 नवंबर की तिथि को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस के रूप में चुना गया।
2. कैंसर क्या है? (What is Cancer?)
कैंसर कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह बीमारियों का एक समूह है। हमारे शरीर का निर्माण अरबों कोशिकाओं (Cells) से होता है। सामान्य परिस्थितियों में, शरीर की कोशिकाएं एक नियंत्रित तरीके से विभाजित और विकसित होती हैं। जब पुरानी या क्षतिग्रस्त कोशिकाएं मर जाती हैं, तो उनकी जगह नई कोशिकाएं ले लेती हैं।
लेकिन कैंसर की स्थिति में यह प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित हो जाती है। कोशिकाएं असामान्य और अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं। ये पुरानी और मृतप्राय कोशिकाएं नष्ट होने के बजाय बची रहती हैं और लगातार नई असामान्य कोशिकाएं बनती जाती हैं। धीरे-धीरे ये कोशिकाएं एक गांठ या ट्यूमर (Tumor) का रूप ले लेती हैं।
कैंसर मुख्य रूप से दो प्रकार के ट्यूमर बनाता है:
- बेनाइन ट्यूमर (Benign Tumor): ये ट्यूमर गैर-कैंसरयुक्त होते हैं। ये शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैलते और इन्हें सर्जरी से हटाने के बाद आमतौर पर ये दोबारा नहीं होते।
- मैलिग्नेंट ट्यूमर (Malignant Tumor): ये कैंसरयुक्त ट्यूमर होते हैं। ये आसपास के ऊतकों (Tissues) पर हमला करते हैं और रक्त या लिम्फ प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों में भी फैल सकते हैं। इस प्रक्रिया को मेटास्टेसिस (Metastasis) कहा जाता है।
3. भारत में कैंसर की वर्तमान स्थिति और सांख्यिकी
भारत में कैंसर एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बन चुका है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) की रिपोर्टों के अनुसार, भारत में कैंसर के मामलों की संख्या हर साल तेजी से बढ़ रही है।
भारत में सबसे आम कैंसर:
- पुरुषों में: पुरुषों में सबसे ज्यादा मामले मुंह का कैंसर (Oral Cancer), फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer), और पेट के कैंसर के देखे जाते हैं। भारत में तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और गुटखे का अत्यधिक सेवन मुंह के कैंसर का मुख्य कारण है।
- महिलाओं में: महिलाओं में स्तन कैंसर (Breast Cancer) और गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर (Cervical Cancer) सबसे आम हैं। पिछले कुछ दशकों में शहरी क्षेत्रों में स्तन कैंसर के मामलों में भारी उछाल आया है।
एक चिंताजनक तथ्य यह है कि भारत में लगभग 60 से 70 प्रतिशत कैंसर के मामलों का पता तीसरी या चौथी स्टेज (Advanced Stage) में चलता है। अंतिम चरणों में बीमारी का पता चलने के कारण इलाज जटिल, खर्चीला और कम प्रभावी हो जाता है, जिससे मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है।
4. कैंसर के प्रमुख कारण और जोखिम कारक (Causes and Risk Factors)
कैंसर होने के पीछे कई आनुवंशिक, पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारण हो सकते हैं। मुख्य कारणों को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:
(क) अस्वस्थ जीवनशैली (Lifestyle Factors)
- तंबाकू और धूम्रपान का सेवन: कैंसर के लगभग 30-40% मामलों का सीधा संबंध तंबाकू से है। धूम्रपान करने से फेफड़ों, गले और श्वासनली का कैंसर होता है, जबकि खैनी, गुटखा चबाने से मुंह का कैंसर होता है।
- शराब का अत्यधिक सेवन: शराब का नियमित सेवन लिवर, स्तन और पेट के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।
- खराब खान-पान और मोटापा: अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, रिफाइंड शुगर और रेड मीट का सेवन करने से पाचन तंत्र का कैंसर होने का खतरा बढ़ता है। शारीरिक सक्रियता की कमी और मोटापा भी कैंसर के बड़े कारक हैं।
(ख) पर्यावरणीय और व्यावसायिक कारक (Environmental Factors)
- प्रदूषण: हवा और पानी में मौजूद हानिकारक रसायन और जहरीली गैसें फेफड़ों के कैंसर को बढ़ावा देती हैं।
- विकिरण (Radiation): सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों के अत्यधिक संपर्क में रहने से त्वचा का कैंसर हो सकता है। इसके अलावा, एक्स-रे या औद्योगिक रेडिएशन का अत्यधिक एक्सपोजर भी खतरनाक है।
- रसायन और कीटनाशक: खेती में उपयोग होने वाले कीटनाशक (Pesticides) और फैक्ट्रियों से निकलने वाले एस्बेस्टस, बेंजीन जैसे रसायन शरीर में कैंसरकारी तत्वों (Carcinogens) को बढ़ाते हैं।
(ग) जैविक और आनुवंशिक कारक (Genetic Factors)
- पारिवारिक इतिहास (Genetics): लगभग 5 से 10% कैंसर आनुवंशिक म्यूटेशन के कारण होते हैं जो माता-पिता से बच्चों में स्थानांतरित होते हैं (जैसे BRCA1 और BRCA2 जीन स्तन कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं)।
- बढ़ती उम्र: उम्र बढ़ने के साथ कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त होने और प्रतिरक्षा प्रणाली के कमजोर होने के कारण कैंसर का जोखिम स्वतः बढ़ जाता है।
(घ) संक्रमण (Infections)
- ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV): यह वायरस महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा (Cervical) के कैंसर का मुख्य कारण है।
- हेपेटाइटिस बी और सी: ये वायरस लिवर में दीर्घकालिक संक्रमण पैदा करते हैं, जो आगे चलकर लिवर कैंसर का रूप ले सकता है।
5. कैंसर के शुरुआती लक्षण (Early Symptoms of Cancer)
कैंसर के लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है ताकि समय रहते डॉक्टर से परामर्श किया जा सके। यदि निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण शरीर में दिखाई दे और कुछ हफ्तों तक ठीक न हो, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
- अचानक वजन कम होना: बिना किसी प्रयास या डाइटिंग के अचानक शरीर का वजन तेजी से घटना (विशेषकर 4-5 किलो या उससे अधिक)।
- शरीर में गांठ या सूजन: स्तन, अंडकोश, गले या शरीर के किसी भी अन्य हिस्से में दर्द रहित गांठ का होना।
- लगातार थकान: भरपूर आराम करने के बाद भी अत्यधिक और लगातार कमजोरी महसूस होना।
- त्वचा में बदलाव: किसी मस्से या तिल के रंग, आकार या बनावट में अचानक बदलाव आना या घाव का न भरना।
- लगातार खांसी या आवाज में भारीपन: हफ्तों तक रहने वाली खांसी या थूक में खून आना, जो फेफड़ों के कैंसर का संकेत हो सकता है।
- पाचन क्रिया में बदलाव: लगातार कब्ज, दस्त या मल-मूत्र त्याग के समय खून आना।
- असामान्य रक्तस्राव: महिलाओं में मेनोपॉज (मासिक धर्म बंद होने) के बाद या पीरियड्स के अलावा असामान्य ब्लीडिंग होना।
6. शीघ्र निदान और स्क्रीनिंग का महत्व (Importance of Early Detection)
राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस का मुख्य संदेश यही है कि “कैंसर लाइलाज नहीं है, बशर्ते इसका पता सही समय पर चल जाए”। कैंसर को चार चरणों (Stages) में बांटा जाता है। स्टेज 1 और 2 में कैंसर केवल उसी अंग तक सीमित रहता है जहाँ से वह शुरू हुआ था। इस चरण में इलाज की सफलता दर 80-90% तक होती है।
नियमित कैंसर स्क्रीनिंग परीक्षण (Cancer Screening Tests):
कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए कुछ प्रमुख जांचें निम्नलिखित हैं:
- मैमोग्राफी (Mammography): 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए हर एक या दो साल में मैमोग्राफी करानी चाहिए। इसके अतिरिक्त मैमोग्राम और सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन (स्वयं स्तन परीक्षण) के माध्यम से भी शुरुआती गांठों को पकड़ा जा सकता है।
- पैप स्मियर (Pap Smear): यह महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की पहचान के लिए किया जाने वाला एक सरल और अत्यंत प्रभावी परीक्षण है।
- बायोप्सी (Biopsy): जब डॉक्टर को किसी गांठ पर संदेह होता है, तो कोशिका का एक छोटा सा टुकड़ा लेकर उसकी प्रयोगशाला में जांच की जाती है।
- एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी: पेट और आंतों के कैंसर की जांच के लिए इन तकनीकों का प्रयोग किया जाता है।
- सीटी स्कैन, एमआरआई और पेट स्कैन (PET Scan): शरीर के आंतरिक अंगों में कैंसर के प्रसार और सटीक स्थान की जांच के लिए इन उन्नत इमेजिंग तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
7. कैंसर के उपचार के आधुनिक विकल्प (Modern Cancer Treatment Options)
चिकित्सा विज्ञान ने पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के इलाज में अभूतपूर्व प्रगति की है। आज कैंसर का इलाज मरीज की स्थिति, कैंसर के प्रकार और उसके स्टेज के आधार पर तय किया जाता है। मुख्य उपचार पद्धतियां निम्नलिखित हैं:
- सर्जरी (Surgery): यदि कैंसर एक ही स्थान पर सीमित है, तो ऑपरेशन के जरिए उस प्रभावित हिस्से या ट्यूमर को शरीर से सुरक्षित बाहर निकाल दिया जाता है।
- कीमोथेरेपी (Chemotherapy): इसमें शक्तिशाली दवाओं (दवाइयों) का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है या उनके विभाजन को रोका जाता है। इसके कुछ दुष्प्रभाव (जैसे बाल झड़ना, कमजोरी) हो सकते हैं, जो इलाज पूरा होने के बाद ठीक हो जाते हैं।
- रेडियोथेरेपी (Radiotherapy): इस तकनीक में उच्च ऊर्जा वाली एक्स-रे किरणों (Radiation) का उपयोग करके सीधे ट्यूमर की कोशिकाओं को लक्षित कर नष्ट किया जाता है।
- इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy): यह चिकित्सा विज्ञान की एक आधुनिक और क्रांतिकारी खोज है। इसमें मरीज की खुद की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को इस तरह मजबूत और प्रशिक्षित किया जाता है कि वह कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर खुद ही नष्ट करने लगे।
- लक्षित थेरेपी (Targeted Therapy): यह सामान्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना केवल कैंसर की विशिष्ट जीन या प्रोटीन कोशिकाओं पर हमला करती है, जिससे साइड इफेक्ट्स बहुत कम होते हैं।
8. कैंसर से बचाव: जीवनशैली में आवश्यक सुधार
कैंसर के लगभग एक-तिहाई मामलों को केवल अपनी दैनिक आदतों और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव करके रोका जा सकता है।
| रोकथाम के उपाय | क्रियान्वयन के तरीके |
|---|---|
| नशीले पदार्थों का त्याग | तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और अत्यधिक शराब का सेवन पूरी तरह बंद करें। |
| संतुलित आहार | अपने भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। प्रोसेस्ड और जंक फूड से दूरी बनाएं। |
| नियमित व्यायाम | प्रतिदिन कम से कम 30-45 मिनट योग, वॉक या व्यायाम करें ताकि शरीर का वजन नियंत्रित रहे। |
| प्रदूषण और रसायनों से सुरक्षा | तेज धूप में निकलते समय सनस्क्रीन का प्रयोग करें और औद्योगिक रसायनों के सीधे संपर्क में आने से बचें। |
| टीकाकरण (Vaccination) | सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों को HPV वैक्सीन अवश्य लगवानी चाहिए। इसी प्रकार, लिवर कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाना अनिवार्य है। |
9. भारत सरकार की पहल और स्वास्थ्य नीतियां
कैंसर के बढ़ते बोझ को कम करने और गरीब से गरीब नागरिक तक इलाज पहुंचाने के लिए भारत सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
- राष्ट्रीय कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NPCDCS): इस कार्यक्रम के तहत जिला स्तर पर बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जा रहा है और लोगों की मुफ्त स्क्रीनिंग की जा रही है।
- आयुष्मान भारत योजना (Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana – PMJAY): इस योजना के तहत देश के करोड़ों गरीब परिवारों को प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा दिया जाता है। इसमें कैंसर की महंगी सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के पैकेजेस भी शामिल हैं, जिससे आम जनता पर वित्तीय बोझ बहुत कम हुआ है।
- प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP): इस योजना के तहत संचालित जनऔषधि केंद्रों पर कैंसर की बेहद महंगी कीमोथेरेपी की दवाएं बेहद रियायती और सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
- क्षेत्रीय कैंसर केंद्र (RCC) और एम्स (AIIMS): देश के विभिन्न राज्यों में अत्याधुनिक कैंसर संस्थानों और नए एम्स की स्थापना की गई है ताकि मरीजों को अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय इलाज मिल सके।
10. कैंसर से जुड़े सामाजिक कलंक और मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियां
भारतीय समाज में आज भी कैंसर को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और सामाजिक कलंक (Stigma) जुड़े हुए हैं। ग्रामीण और अशिक्षित क्षेत्रों में लोग इसे पूर्व जन्मों का पाप या एक संक्रामक (छूने से फैलने वाली) बीमारी मान लेते हैं, जो कि पूरी तरह से गलत है। इस सामाजिक बहिष्कार के डर से कई लोग अपने लक्षणों को छिपाते हैं और डॉक्टर के पास जाने से कतराते हैं।
मानसिक संबल की आवश्यकता:
कैंसर न केवल मरीज के शरीर को प्रभावित करता है बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी तोड़ देता है। अवसाद (Depression), एंग्जायटी (चिंता) और भविष्य का डर मरीज और उनके परिवार को घेर लेता है।
- कैंसर से जंग जीतने के लिए मरीज को सकारात्मक माहौल, परिवार का अटूट सहयोग और मानसिक परामर्श (Counseling) की अत्यंत आवश्यकता होती है।
- समाज में इस जागरूकता को फैलाना होगा कि कैंसर का मरीज सहानुभूति का नहीं, बल्कि हमारे सहयोग और सम्मान का पात्र है।
निष्कर्ष और आह्वान (Conclusion)
राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान है। कैंसर जैसी बीमारी से समाज को मुक्त कराने के लिए सरकार, डॉक्टरों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और प्रत्येक नागरिक को मिलकर प्रयास करने होंगे।
राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस और कैंसर की बीमारी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
यह दिवस भारत में हर साल 7 नवंबर को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2014 में देश में कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने और शुरुआती पहचान को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। 7 नवंबर को महान वैज्ञानिक मैडम मैरी क्यूरी की जयंती होती है, जिनकी रेडियोधर्मिता (Radioactivity) की खोज ने कैंसर के इलाज (रेडियोथेरेपी) में क्रांतिकारी बदलाव लाया।
2. क्या कैंसर एक संक्रामक (छूने से फैलने वाली) बीमारी है?
जी नहीं, कैंसर संक्रामक बीमारी नहीं है। यह किसी कैंसर पीड़ित मरीज के पास बैठने, साथ खाना खाने, हाथ मिलाने या उनकी देखभाल करने से दूसरे व्यक्ति में बिल्कुल नहीं फैलता है।
3. भारत में पुरुषों और महिलाओं में सबसे आम कैंसर कौन से हैं?
- पुरुषों में: भारत में पुरुषों में सबसे ज्यादा मुंह का कैंसर (Oral Cancer) और फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) देखा जाता है, जिसका मुख्य कारण तंबाकू और धूम्रपान है।
- महिलाओं में: महिलाओं में स्तन कैंसर (Breast Cancer) और गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर (Cervical Cancer) सबसे आम हैं।
4. कैंसर के शुरुआती मुख्य लक्षण क्या हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
यदि शरीर में निम्नलिखित बदलाव दिखें और कुछ हफ्तों तक ठीक न हों, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें:
- शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द रहित गांठ या सूजन होना।
- बिना किसी कारण के अचानक वजन कम होना।
- लगातार अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना।
- मस्से या तिल के रंग और आकार में बदलाव होना या घाव का न भरना।
- हफ्तों तक लगातार खांसी रहना या आवाज में भारीपन आना।
- मल, मूत्र, उल्टी या खांसी में खून आना।
5. क्या कैंसर पूरी तरह से ठीक हो सकता है?
हाँ, कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है, बशर्ते इसका पता पहली या दूसरी स्टेज (Early Stages) में चल जाए। शुरुआती चरणों में ट्यूमर छोटा होता है और शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैला होता, जिससे सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन के जरिए इसे पूरी तरह खत्म करना आसान होता है। अंतिम चरणों (Advanced Stages) में भी आधुनिक दवाओं से मरीज की उम्र और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है।
6. कैंसर स्क्रीनिंग (Cancer Screening) क्या है और यह क्यों जरूरी है?
कैंसर स्क्रीनिंग का मतलब है शरीर में कैंसर के लक्षण दिखने से पहले ही उसकी जांच करना। इससे बीमारी को बहुत शुरुआती स्तर पर पकड़ा जा सकता है। उदाहरण के लिए:
- स्तन कैंसर के लिए मैमोग्राफी या सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन।
- सर्वाइकल कैंसर के लिए पैप स्मियर (Pap Smear) टेस्ट।
7. क्या कैंसर आनुवंशिक (Genetic) होता है?
केवल 5% से 10% कैंसर ही आनुवंशिक (वंशानुगत) होते हैं, जो परिवार में माता-पिता से बच्चों में जीन म्यूटेशन (जैसे BRCA1 या BRCA2) के जरिए ट्रांसफर होते हैं। अधिकांश कैंसर (90-95%) जीवनशैली, पर्यावरण, तंबाकू के सेवन और बढ़ती उम्र के कारण होते हैं।
8. क्या कैंसर से बचाव के लिए कोई टीका (Vaccine) उपलब्ध है?
हाँ, कुछ प्रकार के कैंसर जो वायरस के संक्रमण से होते हैं, उनके लिए टीके उपलब्ध हैं:
- HPV वैक्सीन: यह महिलाओं को सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर से बचाता है। इसे 9 से 14 वर्ष की किशोरियों को लगाने की सलाह दी जाती है।
- हेपेटाइटिस बी वैक्सीन: यह लिवर के संक्रमण को रोकता है, जिससे आगे चलकर होने वाले लिवर कैंसर का खतरा कम हो जाता है।
9. क्या भारत सरकार कैंसर के इलाज के लिए कोई वित्तीय सहायता देती है?
हाँ, भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना (PM-JAY) के तहत पात्र गरीब और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों को प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलता है, जिसमें कैंसर की कीमोथेरेपी, रेडिएशन और सर्जरी शामिल हैं। इसके अलावा, जनऔषधि केंद्रों पर कैंसर की दवाएं बहुत ही रियायती दरों पर मिलती हैं।
10. कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए जीवनशैली में क्या बदलाव करने चाहिए?
- तंबाकू, गुटखा, सिगरेट और शराब का सेवन पूरी तरह बंद करें।
- अपने आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें; जंक फूड और प्रोसेस्ड मीट से बचें।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक व्यायाम या योग करें और वजन नियंत्रित रखें।
- तेज धूप के सीधे प्रभाव और हानिकारक औद्योगिक रसायनों से खुद को बचाएं।
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