ITR Filing 2026-27: वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए फॉर्म 16 (Part A & Part B) की गाइड
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आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग 2026-27: वेतनभोगी करदाताओं के लिए फॉर्म 16 (Part A और Part B) की संपूर्ण मार्गदर्शिका
वित्तीय वर्ष 2025-26 (निर्धारण वर्ष / Assessment Year 2026-27) के लिए आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने का समय आ गया है। भारत में करोड़ों वेतनभोगी (Salaried) करदाताओं के लिए यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। एक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में, जब आप अपना टैक्स रिटर्न दाखिल करने की योजना बनाते हैं, तो सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज जो आपके सामने आता है, वह है फॉर्म 16 (Form 16)।
फॉर्म 16 को अक्सर वेतनभोगी कर्मचारियों का ‘टैक्स सर्टिफिकेट’ या ‘सैलरी सर्टिफिकेट’ भी कहा जाता है। यह दस्तावेज आपके नियोक्ता (Employer) द्वारा जारी किया जाता है, जो इस बात का आधिकारिक प्रमाण है कि आपके वेतन से कितना टैक्स (TDS) काटा गया है और उसे सरकार के पास जमा किया गया है।
अक्सर करदाता फॉर्म 16 को देखकर भ्रमित हो जाते हैं क्योंकि यह दो मुख्य भागों में विभाजित होता है: भाग ए (Part A) और भाग बी (Part B)। ITR Filing 2026-27 को बिना किसी गलती के पूरा करने के लिए इन दोनों भागों को विस्तार से समझना अनिवार्य है। इस लेख में हम फॉर्म 16, इसके दोनों भागों (Part A & Part B), और ITR-1 या ITR-2 दाखिल करते समय इनके उपयोग के बारे में हर बारीक जानकारी को विस्तार से समझेंगे।
फॉर्म 16 क्या है? (What is Form 16?)
सरल शब्दों में, फॉर्म 16 आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 203 के तहत जारी किया जाने वाला एक प्रमाण पत्र है। यदि आपकी वित्तीय वर्ष में कुल आय कर योग्य सीमा से अधिक है, तो आपका नियोक्ता आपके वेतन से एक निश्चित राशि टैक्स के रूप में काटता है, जिसे TDS (Tax Deducted at Source) कहा जाता है।
आपका नियोक्ता इस कटे हुए टैक्स को हर महीने या तिमाही आधार पर सरकार के खाते में जमा करता है। वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद, नियोक्ता आपको यह प्रमाणित करने के लिए फॉर्म 16 देता है कि आपका टैक्स सही तरीके से काटा और जमा किया गया है।
फॉर्म 16 की मुख्य विशेषताएं:
- नियोक्ता द्वारा जारी: इसे केवल आपका नियोक्ता ही जारी कर सकता है। यदि आपने एक वित्तीय वर्ष में दो कंपनियों में काम किया है, तो आपको दोनों कंपनियों से अलग-अलग फॉर्म 16 प्राप्त करना होगा।
- जारी करने की अंतिम तिथि: आम तौर पर, नियोक्ताओं के लिए फॉर्म 16 जारी करने की वैधानिक अंतिम तिथि हर साल 15 जून होती है। निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए भी यह समयसीमा लागू होती है।
- ITR फाइलिंग का आधार: यह आपके द्वारा अर्जित वेतन आय और उस पर चुकाए गए टैक्स का सबसे प्रामाणिक दस्तावेज है।
फॉर्म 16 का विभाजन: Part A और Part B क्यों?
आयकर विभाग ने फॉर्म 16 को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए इसे दो भागों में विभाजित किया है।
- भाग ए (Part A): यह मुख्य रूप से टैक्स कटौती (TDS) और सरकार के पास जमा किए गए टैक्स के वित्तीय लेन-देन से संबंधित होता है। यह आयकर विभाग के केंद्रीय सिस्टम (TRACES) द्वारा प्रमाणित होता है।
- भाग बी (Part B): यह आपके वेतन के विस्तृत ब्रेक-अप (Detailed Break-up), भत्तों (Allowances), कटौतियों (Deductions) और कर गणना (Tax Computation) का एक व्यापक विवरण है। इसे नियोक्ता द्वारा स्वयं तैयार किया जाता है।
आइए अब इन दोनों भागों को अत्यंत विस्तार से समझते हैं।
फॉर्म 16 का भाग ए (Part A of Form 16) – विस्तृत विवरण
फॉर्म 16 का Part A वह हिस्सा है जो सीधे आयकर विभाग के TRACES (TDS Reconciliation Analysis and Correction Enabling System) पोर्टल से डाउनलोड किया जाता है। इसका एक विशिष्ट ‘सर्टिफिकेट नंबर’ होता है। यह इस बात का सबूत है कि नियोक्ता ने जो टैक्स काटा था, वह सरकार के खजाने में पहुंच चुका है।
Part A में शामिल मुख्य जानकारियां:
- नियोक्ता की जानकारी (Employer Details): इसमें आपकी कंपनी या नियोक्ता का कानूनी नाम और उनका पूरा पता दर्ज होता है।
- कर्मचारी की जानकारी (Employee Details): इसमें कर्मचारी का नाम, उसका पद (यदि लागू हो) और वर्तमान पता लिखा होता है।
- पैन और टैन नंबर (PAN and TAN Numbers):
- Employer’s TAN: नियोक्ता का टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर (TAN), जो टैक्स काटने के लिए अनिवार्य है।
- Employer’s PAN: नियोक्ता का स्थायी खाता संख्या (PAN)।
- Employee’s PAN: करदाता (कर्मचारी) का पैन नंबर। यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि यह नंबर बिल्कुल सही हो, अन्यथा टैक्स क्रेडिट आपको नहीं मिलेगा।
- कर निर्धारण वर्ष (Assessment Year – AY): वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारण वर्ष 2026-27 दर्ज होगा।
- रोजगार की अवधि (Period of Employment): इसमें उस समयावधि का उल्लेख होता है जिसके लिए यह फॉर्म जारी किया जा रहा है (जैसे: 01-Apr-2025 से 31-Mar-2026)।
- तिमाही-वार टीडीएस विवरण (Quarterly TDS Summary): इसमें एक तालिका (Table) होती है जो दिखाती है कि हर तिमाही (Q1, Q2, Q3, Q4) में नियोक्ता ने आपको कितना कुल वेतन दिया और उस पर कितना टैक्स काटा।
- टैक्स जमा करने का विवरण (Challan Details): इसमें उन चालान नंबरों, बीडएसआर कोड (BSR Code) और तारीखों का विवरण होता है, जिनके माध्यम से बैंक में टैक्स जमा किया गया था।
Part A का महत्व:
जब आप अपना Form 26AS या AIS (Annual Information Statement) आयकर पोर्टल पर देखते हैं, तो उसमें दिखने वाला टीडीएस विवरण फॉर्म 16 के Part A से पूरी तरह मेल खाना चाहिए। यदि इनमें कोई अंतर है, तो इसका मतलब है कि नियोक्ता ने टैक्स जमा करने में या रिटर्न दाखिल करने में कोई गलती की है।
फॉर्म 16 का भाग बी (Part B of Form 16) – विस्तृत विवरण
यदि Part A टैक्स जमा करने का प्रमाण है, तो Part B आपके वेतन की जन्मकुंडली है। यह भाग आपके लिए सबसे अधिक उपयोगी होता है जब आप स्वयं या किसी सीए (CA) के माध्यम से अपना ITR फॉर्म (ITR-1 या ITR-2) भर रहे होते हैं। इसमें आपके वेतन के हर एक हिस्से की विस्तृत गणना होती है।
Part B में शामिल मुख्य घटक (Components):
1. सकल वेतन का विवरण (Gross Salary Details):
- धारा 17(1) के तहत वेतन: इसमें आपका मूल वेतन (Basic Salary), महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), बोनस, ग्रेच्युटी और अन्य सभी नकद भत्ते शामिल होते हैं।
- धारा 17(2) के तहत अनुलाभ (Perquisites): यदि कंपनी आपको कार, मुफ्त आवास, ड्राइवर, या कोई अन्य गैर-नकद सुविधा दे रही है, तो उसका मौद्रिक मूल्य यहाँ दर्शाया जाता है।
- धारा 17(3) के तहत वेतन के बदले लाभ (Profits in lieu of Salary): इसमें रोजगार की समाप्ति या अन्य विशेष परिस्थितियों में मिलने वाली वित्तीय राशियां शामिल होती हैं।
2. कर-मुक्त भत्ते (Exempt Allowances under Section 10):
वेतन के कई हिस्से ऐसे होते हैं जिन पर सरकार टैक्स नहीं लेती (यदि आप पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं)। Part B में इनका स्पष्ट उल्लेख होता है:
- HRA (House Rent Allowance) – धारा 10(13A): यदि आप किराए के मकान में रहते हैं और नियोक्ता को रेंट रसीदें दी हैं, तो छूट की राशि यहाँ दिखाई देगी।
- LTA (Leave Travel Allowance) – धारा 10(5): यात्रा भत्ते पर मिलने वाली छूट।
- अन्य भत्ते: जैसे बच्चों की शिक्षा का भत्ता, वर्दी भत्ता आदि (धारा 10 के विभिन्न उप-नियमों के तहत)।
3. वेतन से कटौतियां (Deductions from Salary under Section 16):
सकल वेतन में से कुछ मानक कटौतियां घटाई जाती हैं, जिससे शुद्ध वेतन (Net Salary) निकलता है:
- स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction): यह एक निश्चित छूट है जो सभी वेतनभोगी कर्मचारियों को मिलती है। (बजट संशोधनों के अनुसार यह राशि पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में लागू होती है)।
- एंटरटेनमेंट अलाउंस (Entertainment Allowance) – धारा 16(ii): (केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए)।
- प्रोफेशनल टैक्स (Professional Tax) – धारा 16(iii): राज्य सरकारों द्वारा लिया जाने वाला टैक्स, जो आपके वेतन से कटता है।
4. अन्य स्रोतों से आय (Income from Other Sources):
यदि आपने अपने नियोक्ता को अपने अन्य निवेशों या आय की जानकारी दी थी (जैसे बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज, बचत खाते का ब्याज, या होम लोन का ब्याज), तो नियोक्ता उसे भी इस सेक्शन में शामिल करता है।
- हाउस प्रॉपर्टी से आय/हानि: होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट (धारा 24B)।
5. अध्याय VI-A के तहत कटौतियां (Deductions under Chapter VI-A):
यह वह सेक्शन है जहाँ आपके द्वारा किए गए सभी टैक्स-बचत निवेश (Tax Saving Investments) दर्ज होते हैं (यह मुख्य रूप से पुरानी टैक्स व्यवस्था यानी Old Tax Regime चुनने वालों पर लागू होता है):
- धारा 80C / 80CCC / 80CCD: PPF, EPF, LIC प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस, ELSS म्यूचुअल फंड, और होम लोन के मूलधन (Principal) के भुगतान पर ₹1.5 लाख तक की छूट।
- धारा 80CCD(1B): NPS (National Pension System) में अतिरिक्त ₹50,000 का निवेश।
- धारा 80D: स्वयं, परिवार या माता-पिता के लिए चुकाया गया मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम।
- धारा 80E: उच्च शिक्षा के लिए लिए गए लोन के ब्याज पर छूट।
- धारा 80G: मान्यता प्राप्त चैरिटेबल ट्रस्ट या फंड में दिया गया दान।
- धारा 80TTA/80TTB: बचत खाते या एफडी के ब्याज पर मिलने वाली छूट।
6. कर की गणना (Computation of Tax Liability):
सभी कटौतियों को घटाने के बाद, आपकी कुल कर योग्य आय (Total Taxable Income) निकाली जाती है। इसके बाद वर्तमान आयकर स्लैब (Tax Slabs 2026-27) के अनुसार आपके टैक्स की गणना की जाती है।
- इसमें लागू टैक्स, धारा 87A के तहत मिलने वाली रिबेट (Rebate), और 4% का स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर (Health and Education Cess) शामिल होता है।
- अंत में, ‘कुल देय टैक्स’ (Total Tax Payable) की तुलना ‘काटे गए कुल टीडीएस’ (Net Tax Payable/Refundable) से की जाती है। आदर्श स्थिति में यह शून्य होना चाहिए, जिसका मतलब है कि आपका पूरा टैक्स कट चुका है।
Part A और Part B में मुख्य अंतर क्या है?
करदाताओं की आसानी के लिए, नीचे दी गई तालिका में दोनों भागों के मुख्य अंतरों को स्पष्ट किया गया है:
| विशेषता (Features) | भाग ए (Part A) | भाग बी (Part B) |
|---|---|---|
| स्रोत (Source) | यह आयकर विभाग के TRACES पोर्टल से जनरेट होता है। | यह नियोक्ता (Employer) द्वारा स्वयं तैयार किया जाता है। |
| सामग्री (Content) | इसमें टीडीएस (TDS) कटौती, पैन, टैन और सरकारी चालान की जानकारी होती है। | इसमें वेतन का ब्रेक-अप, भत्ते, कटौतियां और टैक्स गणना होती है। |
| प्रमाणीकरण (Authentication) | इस पर एक विशिष्ट डिजिटल सिग्नेचर और सर्टिफिकेट नंबर होता है। | इस पर नियोक्ता के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के साइन होते हैं। |
| परिवर्तनशीलता (Flexibility) | इसे नियोक्ता आसानी से बदल नहीं सकता, इसके लिए टीडीएस रिटर्न को संशोधित करना पड़ता है। | इसमें नियोक्ता आंतरिक गणना के आधार पर विवरण दर्ज करता है। |
ITR Filing 2026-27 में फॉर्म 16 का उपयोग कैसे करें?
जब आप निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए अपना आयकर रिटर्न दाखिल करने बैठते हैं, तो फॉर्म 16 आपके लिए एक रेडी-रेकनर (Ready Reckoner) की तरह काम करता है। अधिकांश वेतनभोगी कर्मचारी ITR-1 (सहज – Sahaj) फॉर्म भरते हैं। आइए देखें कि फॉर्म 16 के आंकड़ों को आईटीआर फॉर्म में कहाँ और कैसे भरना है:
स्टेप 1: सकल वेतन (Gross Salary) दर्ज करना
आयकर पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद, जब आप ‘Income from Salary’ सेक्शन में जाते हैं, तो आपको फॉर्म 16 के Part B के बिंदु संख्या 1 (Gross Salary) को देखना होगा। धारा 17(1), 17(2) और 17(3) के तहत जो भी राशियां फॉर्म 16 में लिखी हैं, उन्हें हुबहू आईटीआर फॉर्म के संबंधित कॉलम में भरें।
स्टेप 2: कर-मुक्त भत्तों को घटाना
यदि आपने पुरानी कर व्यवस्था चुनी है, तो फॉर्म 16 के Part B में दिखाई दे रहे धारा 10 के तहत छूट प्राप्त भत्तों (जैसे HRA, LTA) को आईटीआर के ‘Exempt Allowances’ ड्रॉपडाउन मेनू से चुनकर दर्ज करें।
स्टेप 3: स्टैंडर्ड डिडक्शन और प्रोफेशनल टैक्स
आईटीआर फॉर्म में स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) और प्रोफेशनल टैक्स (Professional Tax) के लिए अलग से कॉलम होते हैं। फॉर्म 16 के Part B (Section 16) से इन आंकड़ों को देखकर वहां भरें।
स्टेप 4: निवेश और कटौतियों (Chapter VI-A) का मिलान
यदि आप पुरानी व्यवस्था में हैं, तो धारा 80C, 80D, 80G आदि के तहत किए गए निवेशों की राशि को आईटीआर के ‘Deductions’ शेड्यूल में भरें। सुनिश्चित करें कि यह आपके फॉर्म 16 के Part B से मेल खाती हो।
स्टेप 5: TDS विवरण का सत्यापन (Part A का उपयोग)
आईटीआर फॉर्म के ‘Tax Paid’ या ‘TDS Schedule’ में जाएं। वहां आपके नियोक्ता का TAN नंबर और काटा गया टैक्स पहले से ही प्री-फिल्ड (Pre-filled) दिखाई दे सकता है। इसे अपने फॉर्म 16 के Part A से मिलाएं। यदि कोई विसंगति है, तो उसे मैन्युअल रूप से ठीक करें या नियोक्ता से संपर्क करें।
फॉर्म 16 और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का मिलान (Cross-Verification)
आज के डिजिटल युग में, आयकर विभाग के पास आपके वित्तीय लेन-देन की हर जानकारी पहले से मौजूद होती है। इसलिए, केवल फॉर्म 16 पर निर्भर रहने के बजाय, आपको रिटर्न फाइल करने से पहले निम्नलिखित दो दस्तावेजों से इसका मिलान अवश्य करना चाहिए:
- Form 26AS: यह आपका वार्षिक टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट है। फॉर्म 16 के Part A में दिखने वाला कुल टीडीएस अमाउंट Form 26AS के टीडीएस अमाउंट से ₹1 का भी अंतर नहीं होना चाहिए।
- AIS (Annual Information Statement) और TIS (Taxpayer Information Summary): आयकर विभाग अब आपके शेयर बाजार के निवेश, म्यूचुअल फंड, बचत खाते के ब्याज, और विदेशों से आई आय का पूरा विवरण AIS में रखता है। सुनिश्चित करें कि फॉर्म 16 में घोषित अन्य आय (यदि कोई हो) AIS के आंकड़ों से मेल खाती हो।
सामान्य गलतियाँ जिनसे ITR Filing के दौरान बचना चाहिए
- गलत पैन (PAN) नंबर: यदि आपके फॉर्म 16 के Part A में पैन नंबर गलत दर्ज है, तो काटा गया टीडीएस आपके आयकर खाते में रिफ्लेक्ट नहीं होगा। फॉर्म मिलते ही सबसे पहले अपना पैन चेक करें।
- नियोक्ता बदलने पर जानकारी छुपाना: यदि आपने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान नौकरी बदली है, तो आपको दोनों नियोक्ताओं से फॉर्म 16 (Part A & B) लेना होगा। दोनों की आय को जोड़कर ही टैक्स रिटर्न भरें। अक्सर लोग केवल वर्तमान नियोक्ता का फॉर्म 16 अपलोड कर देते हैं, जिससे बाद में आयकर विभाग से धारा 143(1) के तहत टैक्स डिमांड का नोटिस आ जाता है।
- टैक्स व्यवस्था (Tax Regime) का गलत चयन: बजट नियमों के अनुसार, अब नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को ‘डिफ़ॉल्ट’ (Default) माना जाता है। यदि आप पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) का लाभ उठाना चाहते हैं और कटौतियों (जैसे 80C, HRA) का दावा करना चाहते हैं, तो आईटीआर फाइल करते समय सावधानीपूर्वक ‘Old Tax Regime’ का विकल्प चुनें। फॉर्म 16 के Part B में नियोक्ता ने किस व्यवस्था के आधार पर टैक्स काटा है, इसे ध्यान से देखें।
निष्कर्ष (Conclusion)
फॉर्म 16 केवल एक कागज़ का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह वेतनभोगी करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की नींव है। इसके दो भाग—Part A (जो टीडीएस जमा होने की सरकारी मुहर है) और Part B ( जो आपके वेतन और निवेश का विस्तृत गणित है)—एक दूसरे के पूरक हैं।
निर्धारण वर्ष 2026-27 (ITR Filing 2026-27) के लिए अपना रिटर्न दाखिल करते समय इन दोनों भागों की हर प्रविष्टि का बारीकी से अध्ययन करें, उनका मिलान Form 26AS और AIS से करें, और एक त्रुटिहीन (Error-free) रिटर्न दाखिल करें। समय पर और सही तरीके से टैक्स रिटर्न दाखिल करना न केवल आपको भविष्य के कानूनी नोटिसों से बचाता है, बल्कि आपके सिबिल स्कोर (CIBIL Score) और लोन पात्रता को भी मजबूत करता है।
फॉर्म 16 (Part A और Part B) तथा ITR Filing 2026-27 से जुड़े कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):
फॉर्म 16 (Form 16) से जुड़े सामान्य प्रश्न
Q1. क्या फॉर्म 16 के बिना भी ITR दाखिल किया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, यदि आपके पास फॉर्म 16 नहीं है, तब भी आप अपना ITR फाइल कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपनी सैलरी स्लिप (Salary Slips), बैंक स्टेटमेंट (ब्याज आय के लिए), Form 26AS और AIS (Annual Information Statement) की मदद लेनी होगी। इन दस्तावेजों के आधार पर आप अपनी सकल आय और कटे हुए TDS की गणना करके रिटर्न भर सकते हैं।
Q2. मुझे Part A मिल गया है लेकिन Part B नहीं मिला, क्या मैं रिटर्न फाइल कर सकता हूँ?
उत्तर: रिटर्न फाइल करने के लिए दोनों भागों का होना जरूरी है क्योंकि Part B में आपके वेतन का विस्तृत ब्रेक-अप और कटौतियां (Deductions) होती हैं। यदि नियोक्ता ने Part B जारी नहीं किया है, तो आप अपनी मासिक सैलरी स्लिप्स और निवेश के सबूतों के आधार पर मैन्युअल रूप से आंकड़े भर सकते हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से अपने नियोक्ता से Part B की मांग करना ही बेहतर विकल्प है।
Q3. यदि मैंने वित्तीय वर्ष में नौकरी बदली है, तो मुझे फॉर्म 16 कैसे मिलेगा?
उत्तर: यदि आपने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनियां बदली हैं, तो आपको दोनों (या सभी) नियोक्ताओं से अलग-अलग फॉर्म 16 (Part A और Part B दोनों) प्राप्त करना होगा। ITR फाइल करते समय आपको दोनों फॉर्म 16 की आय को जोड़कर अपनी कुल आय दर्शानी होगी।
Q4. फॉर्म 16 और फॉर्म 16A (Form 16A) में क्या अंतर है?
उत्तर:
- फॉर्म 16: यह केवल वेतनभोगी कर्मचारियों (Salaried Individuals) के लिए उनके नियोक्ता द्वारा जारी किया जाता है।
- फॉर्म 16A: यह गैर-सैलरी आय पर काटे गए टीडीएस का प्रमाण पत्र होता है, जैसे बैंक एफडी पर मिलने वाला ब्याज (FD Interest), रेंट, या फ्रीलांसिंग/प्रोफेशनल फीस पर काटा गया टैक्स। इसे बैंक या भुगतान करने वाली संस्था जारी करती है।
Part A और Part B से जुड़े तकनीकी प्रश्न
Q5. अगर फॉर्म 16 के Part A में मेरा पैन (PAN) नंबर गलत है, तो मुझे क्या करना चाहिए?
उत्तर: यदि पैन नंबर गलत है, तो आपका काटा गया टीडीएस (TDS) आपके Form 26AS में दिखाई नहीं देगा। ऐसी स्थिति में आपको तुरंत अपने नियोक्ता (HR या एकाउंट्स विभाग) से संपर्क करना चाहिए। नियोक्ता को अपना टीडीएस रिटर्न संशोधित (Revised TDS Return) करना होगा, जिसके बाद आपको सही पैन वाला नया फॉर्म 16 जारी किया जाएगा।
Q6. फॉर्म 16 के Part B में दिख रहा टैक्स और मेरे Form 26AS का टैक्स मैच नहीं कर रहा है, क्या करूँ?
उत्तर: हमेशा Form 26AS और AIS में दिख रहे आंकड़े को ही अंतिम माना जाता है क्योंकि आयकर विभाग का सिस्टम इसी को ट्रैक करता है। यदि फॉर्म 16 (Part B) में टैक्स ज्यादा दिख रहा है और 26AS में कम, तो इसका मतलब है कि नियोक्ता ने टैक्स तो काटा लेकिन सरकार के पास जमा नहीं किया या गलत चालान भर दिया। आपको तुरंत नियोक्ता से इसे ठीक करने (TDS Correction) के लिए कहना चाहिए।
Q7. क्या नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) चुनने पर भी फॉर्म 16 का Part B महत्वपूर्ण है?
उत्तर: हाँ, बिल्कुल महत्वपूर्ण है। भले ही नई टैक्स व्यवस्था में आपको धारा 80C या HRA जैसी अधिकांश कटौतियां नहीं मिलती हैं, लेकिन Part B में मिलने वाला स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction – ₹50,000 या बजट अनुसार संशोधित राशि) और आपके सकल वेतन (Gross Salary) का सटीक विवरण आपके बहुत काम आता है। इसी विवरण को देखकर आपको ITR फॉर्म भरना होता है।
ITR Filing 2026-27 से जुड़े प्रश्न
Q8. असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए फॉर्म 16 प्राप्त करने और ITR फाइल करने की अंतिम तारीख क्या है?
उत्तर:
- नियोक्ताओं के लिए अपने कर्मचारियों को फॉर्म 16 जारी करने की वैधानिक अंतिम तिथि 15 जून 2026 है।
- वेतनभोगी करदाताओं (जिनके खातों का ऑडिट होना जरूरी नहीं है) के लिए बिना किसी लेट फीस के ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि आम तौर पर 31 जुलाई 2026 होती है।
Q9. फॉर्म 16 में कुछ टैक्स-बचत निवेश (जैसे LIC या PPF) छूट गए हैं, क्या मैं अब भी ITR में उनका दावा कर सकता हूँ?
उत्तर: हाँ, यदि आप वित्तीय वर्ष के दौरान नियोक्ता को निवेश के प्रमाण (Investment Proofs) जमा नहीं कर पाए थे और इस वजह से वे फॉर्म 16 के Part B में दर्ज नहीं हैं, तो चिंता की कोई बात नहीं है। यदि आपने पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनी है, तो आप ITR फाइल करते समय उन निवेशों (जैसे 80C, 80D आदि) का दावा सीधे कर सकते हैं। इसके बाद यदि आपका कोई अतिरिक्त टैक्स कटा होगा, तो वह आपको रिफंड (Refund) के रूप में वापस मिल जाएगा।
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