बनारस में बनेगा विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग और 20 एकड़ का ऑक्सीजन पार्क!
बनारस में बनेगा विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग: काशी विश्वनाथ की नगरी में 20 एकड़ का हाईटेक ऑक्सीजन पार्क, सौ करोड़ होंगे खर्च
भूमिका: बदलती काशी में एक नया कीर्तिमान
बाबा विश्वनाथ की त्रिलोक से न्यारी नगरी काशी, जिसे अध्यात्म, संस्कृति और सनातन परंपरा का शाश्वत केंद्र माना जाता है, अब अपने नाम एक और अभूतपूर्व ऐतिहासिक अध्याय जोड़ने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में धार्मिक पर्यटन और आधुनिक शहरी विकास (Urban Development) के अद्भुत समन्वय का एक नया उदाहरण सामने आया है। काशी के भेलूपुर स्थित ब्रिटिश काल के जलकल परिसर की 20 एकड़ भूमि पर लगभग 104 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य, आधुनिक ‘अर्बन महादेव पार्क’ (हाईटेक ऑक्सीजन पार्क) का निर्माण किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण इसके ठीक मध्य में स्थापित होने वाला 130 फीट ऊंचा विशालकाय शिवलिंग होगा, जो पूर्ण रूप से निर्मित होने के बाद आधिकारिक तौर पर विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग बन जाएगा।
यह परियोजना केवल एक धार्मिक प्रतीक का निर्माण नहीं है, बल्कि यह काशी को एक ऐसा वैश्विक पर्यटन हब (Global Tourism Hub) बनाने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है, जहां आने वाले समय में देश-विदेश के पर्यटकों को अध्यात्म के साथ-साथ अत्याधुनिक सुविधाएं और एक शुद्ध, हरा-भरा वातावरण एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेगा।
परियोजना का मुख्य आकर्षण: 130 फीट का ऐतिहासिक शिवलिंग
इस भव्य शिव थीम पार्क का केंद्रीय आकर्षण यहां बनने वाला दिव्य शिवलिंग है। वर्तमान में दुनिया के सबसे ऊंचे निर्मित शिवलिंग का रिकॉर्ड केरल के तिरुवनंतपुरम (111.2 फीट) के नाम दर्ज है। लेकिन बनारस के भेलूपुर में बनने वाला यह 130 फीट ऊंचा शिवलिंग पूर्व के सभी रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ते हुए पूरी दुनिया में सनातन संस्कृति का गौरव बढ़ाएगा।
- डिजाइन और स्थापत्य: इस दिव्य शिवलिंग को एक बेहद खूबसूरत और विशाल आधुनिक फव्वारे (Musical Fountain) के ठीक बीचों-बीच स्थापित किया जाएगा। जब फव्वारे से पानी की धाराएं उठेंगी, तो ऐसा प्रतीत होगा मानो महादेव साक्षात जल तरंगों के बीच विराजमान हैं।
- भव्य लेजर लाइट शो: इस परियोजना की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका रोजाना होने वाला लेजर लाइट शो (Laser Light Show) होगा। प्रत्येक शाम इस 130 फीट ऊंचे शिवलिंग पर अत्याधुनिक 3D लेजर मैपिंग के जरिए एक लाइट एंड साउंड शो का प्रदर्शन किया जाएगा。 इस शो के माध्यम से काशी का पौराणिक इतिहास, गंगा अवतरण की कथा और भगवान शिव की महिमा को सजीव रूप में पर्यटकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
- अद्भुत नज़ारा: शिवलिंग के चारों तरफ एक व्यापक और सुंदर पाथवे (घूमने का रास्ता) बनाया जाएगा ताकि श्रद्धालु और पर्यटक इस अलौकिक संरचना की परिक्रमा कर सकें और इसे हर कोण से निहार सकें।
20 एकड़ का ‘महा ऑक्सीजन ज़ोन’: प्रकृति और अध्यात्म का मेल
वाराणसी नगर निगम द्वारा इस परियोजना को ‘अर्बन पार्क’ के साथ-साथ एक विशेष ‘ऑक्सीजन पार्क’ के रूप में डिजाइन किया जा रहा है। घनी आबादी वाले बनारस शहर के बीचों-बीच 20 एकड़ का यह विशाल हरा-भरा क्षेत्र शहर के फेफड़ों (Lungs of the City) के रूप में कार्य करेगा।
- सघन वृक्षारोपण: इस पार्क के ‘महा ऑक्सीजन ज़ोन’ में हजारों की संख्या में औषधीय, पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। इनमें पीपल, बरगद, नीम, और विशेष रूप से भगवान शिव को अत्यंत प्रिय ‘बेलपत्र’ के पेड़ों की विशाल वाटिकाएं शामिल होंगी। ये पौधे न केवल वातावरण को शुद्ध करेंगे बल्कि शहर के प्रदूषण स्तर को भी काफी हद तक कम करने में मदद करेंगे।
- शहरी कंक्रीट के बीच हरियाली का द्वीप: बनारस जैसी प्राचीन और सघन रूप से बसी नगरी में इतनी बड़ी खुली हरित भूमि (Green Space) का मिलना दुर्लभ है। भेलूपुर जलकल विभाग की इस अनुपयोगी भूमि का कायाकल्प कर इसे एक ऐसे जीवंत ईको-सिस्टम में बदला जा रहा है, जहां सुबह-शाम स्थानीय नागरिक शुद्ध हवा का आनंद ले सकेंगे。
₹104 करोड़ का बजट और विश्वस्तरीय अत्याधुनिक सुविधाएं
उत्तर प्रदेश शासन और वाराणसी नगर निगम (Varanasi Municipal Corporation) की ओर से इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और ₹104 करोड़ से अधिक के बजट को पूर्ण मंजूरी मिल चुकी है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, इस शिव थीम पार्क के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया जा रहा है, जिसे अगले 8 से 9 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस बजट के अंतर्गत पार्क के भीतर निम्नलिखित विश्वस्तरीय सुविधाएं (World-Class Amenities) विकसित की जा रही हैं:
- 1,000 मीटर लंबा आधुनिक वॉक-वे (Walkway): सुबह और शाम की सैर करने वालों के लिए पार्क में लगभग 1 किलोमीटर लंबा एक विशेष सिंथेटिक वॉकिंग ट्रैक तैयार किया जाएगा। इसके चारों तरफ आकर्षक लैंडस्केपिंग और फूलों की क्यारियां होंगी।
- डिजिटल म्यूजियम और ओपन आर्ट गैलरी (Digital Museum): इस पार्क में एक आधुनिक डिजिटल गैलरी बनाई जाएगी, जहां बनारस की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन संगीत घराने और यहां की महान कला परंपराओं को संजोया जाएगा。
- बनारस की विभूतियों को सम्मान: ओपन आर्ट गैलरी में काशी के उन महान महापुरुषों, साहित्यकारों और पद्म पुरस्कार से सम्मानित हस्तियों (जैसे उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पंडित रविशंकर आदि) की जीवन यात्रा और उनकी उपलब्धियों को वॉल म्यूरल्स (Wall Murals) और स्कल्पचर्स के माध्यम से जीवंत किया जाएगा। इससे युवा पीढ़ी अपनी मिट्टी के गौरव से परिचित हो सकेगी।
- हैंडीक्राफ्ट स्टॉल्स और लोकल वोकल: पर्यटकों को आकर्षित करने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए पार्क के भीतर विशेष ‘लोकल हैंडीक्राफ्ट स्टॉल’ लगाए जाएंगे। यहां विश्वप्रसिद्ध बनारसी साड़ी, गुलाबी मीनाकारी और लकड़ी के खिलौनों जैसे जीआई (GI) उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की व्यवस्था होगी।
- हाईटेक चिल्ड्रन प्ले ज़ोन और कम्युनिटी स्पेस: बच्चों के मनोरंजन के लिए पार्क में कई प्रकार के हाईटेक झूले और सुरक्षित खेल क्षेत्र (Play Area) बनाए जाएंगे。 साथ ही, बुजुर्गों के बैठने के लिए सुंदर गज़ीबो (Gazebo), एक आधुनिक लाइब्रेरी (पुस्तकालय) और सामुदायिक गतिविधियों के लिए कम्युनिटी स्पेस भी तैयार किया जाएगा।
- फूड कोर्ट और प्लाजा: देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के खान-पान की उत्तम व्यवस्था के लिए एक हाइजीनिक और विशाल फूड कोर्ट बनाया जाएगा, जहां लोग बनारस के प्रसिद्ध व्यंजनों (जैसे कचौड़ी-जलेबी, चाट और लस्सी) का लुत्फ उठा सकेंगे。
धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Kashi Vishwanath Dham) के निर्माण के बाद से वाराणसी में पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे में यह नया शिव थीम पार्क काशी के पर्यटन उद्योग को एक नया आयाम देगा।
- पर्यटन का वि Decentralization (विकेंद्रीकरण): वर्तमान में काशी आने वाले अधिकांश पर्यटक मुख्य रूप से दशाश्वमेध घाट, गंगा आरती और विश्वनाथ मंदिर के आसपास ही केंद्रित रहते हैं। भेलूपुर में इस भव्य पार्क के बनने से शहर के दूसरे हिस्सों में भी पर्यटन का विस्तार होगा, जिससे मुख्य मंदिर क्षेत्र पर भीड़ का दबाव कम होगा।
- रोजगार के नए अवसर: ₹104 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से न केवल निर्माण कार्य के दौरान सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि इसके पूरा होने के बाद गाइड्स, दुकानदारों, हस्तशिल्पियों, सुरक्षाकर्मियों और रखरखाव से जुड़े हजारों स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे。
निष्कर्ष: नव्य-भव्य काशी का भविष्य
बनारस में बनने जा रहा यह 20 एकड़ का हाईटेक ऑक्सीजन पार्क और 130 फीट का विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग इस बात का साक्षात प्रमाण है कि विकास और विरासत को साथ लेकर कैसे आगे बढ़ा जा सकता है। यह परियोजना प्राचीन परंपराओं को संजोते हुए आधुनिक और टिकाऊ (Sustainable) शहरी नियोजन का एक अनुपम उदाहरण बनेगी। जब अगले कुछ महीनों में यह भव्य परिसर पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा, तब शाम के समय लेजर लाइट की रोशनी में चमकता हुआ दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग और हवा में तैरती मंत्रोच्चार की ध्वनियां हर आने वाले श्रद्धालु को एक दिव्य और अलौकिक अनुभूति कराएंगी। ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के साथ, काशी का यह नया कीर्तिमान वैश्विक पटल पर भारत की सांस्कृतिक चेतना को और अधिक सुदृढ़ करेगा.
बनारस के इस ऐतिहासिक शिव थीम पार्क और विश्व के सबसे ऊंचे शिवलिंग प्रोजेक्ट से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs) दिए गए हैं:
Q1. बनारस में बनने वाले शिवलिंग की कुल ऊंचाई कितनी होगी और इसका क्या रिकॉर्ड है?
- उत्तर: इस पार्क में बनने वाले शिवलिंग की कुल ऊंचाई 130 फीट होगी। इसके पूर्ण होने के बाद यह आधिकारिक तौर पर विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग बन जाएगा। वर्तमान में सबसे ऊंचे शिवलिंग का रिकॉर्ड केरल के तिरुवनंतपुरम (111.2 फीट) के नाम है।
Q2. यह हाईटेक ऑक्सीजन पार्क वाराणसी में किस स्थान पर बनाया जा रहा है?
- उत्तर: यह पार्क वाराणसी के भेलूपुर स्थित ब्रिटिश काल के जलकल विभाग (Water Works) परिसर की अनुपयोगी भूमि पर विकसित किया जा रहा है।
Q3. इस पूरी परियोजना की कुल लागत कितनी है और इसे कौन बना रहा है?
- उत्तर: इस मेगा प्रोजेक्ट पर लगभग 104 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका निर्माण उत्तर प्रदेश शासन की मंजूरी के बाद वाराणसी नगर निगम (VMC) द्वारा कराया जा रहा है।
Q4. इस पार्क को ‘ऑक्सीजन पार्क’ क्यों कहा जा रहा है?
- उत्तर: यह पार्क 20 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला है। शहर के घने और कंक्रीट वाले इलाके के बीच, इसमें हजारों की संख्या में औषधीय और पर्यावरण-अनुकूल पेड़-पौधे (जैसे पीपल, नीम, बरगद और बेलपत्र) लगाए जा रहे हैं, जो शहर के लिए ‘फेफड़ों’ (Lungs of the city) की तरह काम करेंगे।
Q5. 130 फीट ऊंचे शिवलिंग के पास मुख्य तकनीकी आकर्षण क्या होगा?
- उत्तर: शिवलिंग को एक विशाल म्यूजिकल फाउंटेन (संगीतज्ञ फव्वारे) के बीच स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, रोज़ाना शाम को इस पर अत्याधुनिक 3D लेजर मैपिंग शो (Laser Light Show) होगा, जिसमें काशी का इतिहास और शिव महिमा दिखाई जाएगी।
Q6. पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए पार्क में क्या सुविधाएं होंगी?
- उत्तर: पार्क के भीतर कई विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी:
- 1 किलोमीटर लंबा सिंथेटिक वॉक-वे / जॉगिंग ट्रैक
- बनारस की संस्कृति और विभूतियों को दर्शाने वाला डिजिटल म्यूजियम
- स्थानीय जीआई (GI) उत्पादों के लिए हैंडीक्राफ्ट स्टॉल्स
- पारंपरिक बनारसी व्यंजनों के लिए विशाल फूड कोर्ट
- बच्चों के लिए हाईटेक प्ले ज़ोन और बुजुर्गों के लिए रीडिंग लाइब्रेरी
Q7. इस परियोजना के पूरा होने की समयसीमा (Deadline) क्या तय की गई है?
- उत्तर: नगर निगम के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को 8 से 9 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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