भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल एवं बौद्ध धर्म के चार सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक कुशीनगर कहां है?
कुशीनगर – भारत का एक पवित्र स्थल
कुशीनगर, बौद्ध धर्म के चार प्रमुख प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक अभिन्न अंग है, जो तीर्थ यात्रियों और उत्साही लोगों को भगवान बुद्ध के पवित्र पद चिन्ह पर चलने के लिए आमंत्रित करता है। यह उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में गोरखपुर से लगभग 50–51 किमी० दूर स्थित एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थ स्थल है यह प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां पर भगवान बुद्ध ने 483 ईसा पूर्व में महापरिनिर्वाण (देहवासन) प्राप्त किया था, यहां बुद्ध की अंतिम प्रतिमा रामभर स्तूप है और कई देशों के बने बौद्ध मंदिर प्रमुख आकर्षण हैं। लुंबिनी, बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर यह सभी ऐसे तीर्थ स्थल है जहां बुद्ध के जीवन की जटिल कथाओं में से एक अनूठा पहलू समेटे हुए हैं, और कुशीनगर विशेष रूप से वह पवित्र भूमि है जहां उनके सांसारिक यात्रा का समापन हुआ।
कुशीनगर क्यों प्रसिद्ध है:
(विस्तृत कारण)
महापरिनिर्वाण स्थली: यह भगवान बुद्ध के चार सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है, जहां उन्होंने अपना अंतिम उपदेश दिया था और निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया था।
महापरिनिर्वाण मंदिर: यह मंदिर 5वीं शताब्दी के प्राचीन मठ के ऊपर बना है, जिसमें भगवान बुद्ध की 6.10 मीटर लंबी लाल रेत पत्थर से बनी लेटी हुई (शयन मुद्रा ) प्रतिमा है।
रामाधार स्तूप: यह वह स्थान है जहां बुद्ध का अंतिम संस्कार किया गया था, जिसे “मुकुट बंधन चैत्य” के नाम से भी जाना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र: यहां दुनिया भर से बौद्ध अनुवाई (जापान, श्रीलंका, थाईलैंड आदि) से आते रहते हैं, और यहां कई देशों द्वारा निर्मित मंदिर भी स्थित है।
ऐतिहासिक महत्व: प्राचीन समय में यह मल्ल वंश की राजधानी और 16 महाजनपदों में से एक था और कुछ अन्य लोग इस स्थान को कौशल के राजाओं की बसाई नगरी कुशवती के रूप में भी पहचानते हैं, और कहते हैं कि यह राम के बेटे कुश द्वारा स्थापित की गई थी।
वर्तमान समय में विद्वान इसे ही उस स्थान के रूप में जानते और पहचानते हैं, कि जहां गौतम बुद्ध की मृत्यु हुई थी, और उनका अंतिम संस्कार किया गया। सम्राट अशोक ने यहां स्तूप का निर्माण करवाया और बाद में गुप्त राजाओं ने इसे विस्तृत कराया। गौतम बुद्ध की लेटी हुई मुद्रा में मूर्ति भी गुप्त काल की मानी जाती है, बाद में 12वीं सदी में मुस्लिम शासन काल में यह स्थान उपेक्षा का शिकार हुआ, और इतिहास की गर्त में खो गया। अंग्रेजों के समय में जब यहां पुराने दब चुके स्तूपों और मंदिर तथा विहार अवशेषों की खोज हुई, इसे दोबारा महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ।
इस स्थान की खोज का श्रेय जनरल कंनिघम और उनके सहयोगी कार्लाइल को जाता है।
कुशीनगर संग्रहालय: यह साइट 1992–93 के दौरान जनता के लिए खोला गया, और कुशीनगर में पाए जाने वाले विभिन्न पुरातात्विक खुदाई पेश करती है। कुशीनगर संग्रहालय में मूर्तियां, जवानों, सिक्कों और बैनर के विभिन्न प्राचीन वस्तुओं की एक विस्तृत विविधता जैसे विभिन्न कलाकृतियों में घूमता है।
सूर्य मंदिर: सूर्य भगवान को समर्पित मंदिर गुप्त की अवधि के दौरान बनवाया गया था, और पुराणों में वर्णित है यह मंदिर सूर्य भगवान की मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है, जिसे एक विशेष काले पत्थर (नीलमनी स्टोन) से बनाया गया था माना जाता है कि इस प्रतिमा को चौथी और पांचवी सदी के बीच उत्खनन के दौरान पाया गया था।
मैडिटेशन पार्क: कुशीनगर में महापरिनिर्वाण तीर्थ के निकट स्थित एक छोटा सा पार्क मेडिटेशन पार्क चमकीले हरे रंग की उत्कृष्ट के साथ जल निकायों का दावा करता है, जो इस ज्ञान के लिए एक आदर्श स्थान बनता है ।यात्री इस पार्क में शांतिपूर्ण और शांत वातावरण आराम करने के लिए आते हैं।
लुंबिनी, बोधगया और सारनाथ: बौद्ध विरासत के स्तंभ
लुंबिनी: बुद्ध की जन्म भूमि जो उनके असाधारण जीवन की शुरुआत से जुड़ी हुई है।
बोधगया: ज्ञानोदय का केंद्र जहां भगवान बुद्ध ने आध्यात्मिक जागृति की पराकाष्ठा प्राप्त की।
सारनाथ: वह पवित्र स्थान जहां बुद्ध ने अपने उपदेशों का आरंभ किया और बौद्ध धर्म की नींव रखी।
यह एक छोटा सा कस्बा है, जो उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के पूर्वी छोर पर मौजूद है, इसी नाम के जिले का मुख्यालय यहां से कुछ दूर उत्तर में पडरौना के समीप रविंद्र नगर नामक स्थान पर विकसित किया जा रहा है।
कुशीनगर में खुलेगा देश का पहला किन्नर विश्वविद्यालय: महात्मा बुद्ध की परी निर्माण स्थल कुशीनगर में देश के पहले किन्नर (ट्रांसजेंडर) विश्वविद्यालय की नींव रखी गई है, इसमें दुनिया के किन्नर विद्यार्थियों को प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा मुक्त में मिलेगी। 50 एकड़ के क्षेत्र में बनने वाले इस विश्वविद्यालय के निर्माण में दो करोड़ रूपया की लागत आएगी।
कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट: कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पूर्वांचल का दूसरा, यूपी का तीसरा और देश का 87वां लाइसेंसी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। इस एयरपोर्ट के निर्माण में 260 करोड़ रुपए की लागत से बना है। यह प्रदेश का सबसे लंबा रनवे वाला (3.2 किमी लंबा व 45 मीटर चौड़ा) एयरपोर्ट है।
कुशीनगर कैसे पहुंचे:
वायु मार्ग: वायु मार्ग से कुशीनगर सीधे नहीं पहुंचा जा सकता है, क्योंकि यहां एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा निर्माणाधीन है, वर्तमान में निकटतम हवाई अड्डा गोरखपुर में है जहां से यहां सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है। गोरखपुर हवाई अड्डा भी मुख्यत सेना के द्वारा संचालित है, और यहां नागरिक हवाई जहाज बहुत कम उतरते हैं, क्योंकि गोरखपुर हवाई अड्डे पर बहुत कम विमान उतरते हैं, अन्य विकल्प यह है कि वायु मार्ग से लखनऊ अथवा वाराणसी पहुंचा जा सकता है, और यहां से रेल अथवा सड़क मार्ग से कुशीनगर तक पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग: पडरौना यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जो गोरखपुर थावे रेल मार्ग पर स्थित है, और इस जिले का मुख्यालय भी यही है, पडरौना कुशीनगर से लगभग 15 किमी० की दूरी पर है, देवरिया और गोरखपुर यहां से अन्य नजदीकी रेलवे स्टेशन है।
कुशीनगर को जाने वाली कुछ ट्रेन: 1016(कुशीनगर एक्सप्रेस) गोरखपुर से कुर्ला (मुंबई), 2554(वैशाली एक्सप्रेस) नई दिल्ली से बरौनी, 4674(शहीद एक्सप्रेस) अमृतसर से दरभंगा, 5208(आम्रपाली एक्सप्रेस) अमृतसर से बरौनी आदि।
सड़क मार्ग: गोरखपुर और देवरिया, पडरौना से यहां सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है, यह तीनों शहर रेल स्टेशन से मुक्त हैं, गोरखपुर इस इलाके का सबसे बड़ा शहर है और रेल एवं सड़क मार्ग द्वारा पूरे भारत से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, गोरखपुर से नियमित बसें कुशीनगर के लिए जाती हैं और यात्रा में लगभग डेढ़ 2 घंटे का समय लगता है।
वाराणसी से कुछ बसें सीधे कुशीनगर (पडरौना) के लिए जाती हैं, पर यह दिन में एक या दो बसें ही हैं, और सुबह के समय वाराणसी से रवाना होती हैं।
कुशीनगर में घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी तक।
कुशीनगर में रेस्टोरेंट: न्यू रेस्टोरेंट यामाहा कैफे, बाबा बार एंड रेस्टोरेंट सिद्धार्थ रेस्टोरेंट टोक्यो मल्टी क्यूज़ीन रेस्टोरेंट आदि।
कुशीनगर किसके लिए प्रसिद्ध है: भोजन,संस्कृति और शुद्ध देशी विचार।