मथुरा– वृंदावन में घूमने की प्रसिद्ध जगह, दर्शनीय स्थल जाने का समय
मथुरा: दर्शनीय स्थल
मथुरा–वृंदावन में घूमने की जगह: मथुरा–वृंदावन एक प्राचीन तथा ऐतिहासिक नगर है, जो उत्तर प्रदेश राज्य में “यमुना” नदी के किनारे पर स्थित है। मथुरा भगवान श्री कृष्ण का जन्म स्थान है, जहां श्री कृष्ण के लीलाओं का अदभुत वर्णन और संयोग देखने को मिलता है, जिससे मन प्रफुल्लित हो उठता है। पुराणों के अनुसार रामायण में भी यह उल्लेख मिलता है कि मथुरा पहले मधुवन के नाम से जाना जाता था, यह ब्राह्मणवाद, बौद्ध धर्म और जैन धर्म का केंद्र रहा है लेकिन बाद में सिकंदर लोदी और औरंगजेब जैसे शासकों के हमला का शिकार हुआ ,फिर भी मथुरा अपने धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखी, और आज मथुरा–वृंदावन अपनी भारतीय संस्कृति, कला, साहित्य का केंद्र है तथा यहां कई महान संत कवि हुए हैं।
प्राचीन काल और पौराणिक महत्व:
नामकरण: प्राचीन तथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, मथुरा की स्थापना मधु नाम राक्षस ने की थी और बाद में यह मधुवन के नाम से जाना जाता था और फिर मधुवन तथा बाद में मथुरा कहलाया ।
रामायण: वाल्मीकि रामायण में मथुरा को मधुपुर या मधुदानव का नगर कहा गया है, और यहां लवणासुर (मधु का पुत्र) की राजधानी थी, जिसे शत्रुघ्न ने हराया था ।
कृष्ण जन्मभूमि: यह भगवान कृष्ण की जन्मस्थली है, जहां कंस के कारागार में उनका जन्म हुआ था, और बाद में कृष्ण ने कंस का संहार करके अग्रसेन को मथुरा का राजा बनाया ।
मथुरा–वृंदावन में घूमने लायक दर्शनीय स्थल:
धार्मिक स्थल
1– श्री कृष्ण जन्मभूमि
2– बांके बिहारी मंदिर
3–राधा रमन मंदिर
4–प्रेम मंदिर वृंदावन
5– इस्कॉन मंदिर
6– राधा वल्लभ मंदिर
7– निधिवन वृंदावन
8–गोवर्धन पर्वत
9– द्वारकाधीश मंदिर
10– श्री लाडली मंदिर बरसाना
11– वैष्णो देवी धाम
12– रमण रेती
13– कीर्ति मंदिर
श्री कृष्ण जन्म भूमि: श्री कृष्ण जन्म जन्म स्थान मंदिर मंदिर उत्तर प्रदेश की सबसे पवित्र शहर मथुरा में है। जहां उसके दुष्ट मामा कंस ने भगवान श्री कृष्ण के परिवार माता देवकी और पिता वासुदेव को कैद किया था,हिंदुओं के लिए यह मंदिर बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे भगवान श्री कृष्ण का जन्म स्थान माना जाता है।
मंदिर खुलने का समय: सुबह 05:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक , शाम 04:00 बजे से रात 09:00 बजे तक (गर्मियों में)
सुबह 05:30 से दोपहर 12:00 बजे तक ,दोपहर 03:00 बजे से रात 08:30 बजे तक (सर्दियों में)
बांके बिहारी मंदिर: बांके बिहारी मंदिर की कहानी स्वामी हरिदास से जुड़ी है, जिन्होंने भगवान कृष्ण को निधिवन से प्रकट कर यहां स्थापित किया और मूर्ति का त्रिभंग रूप भक्तों को आकर्षित करता है, मंदिर की खास बात यह है कि यहां पर्दा बार-बार हटाया जाता है क्योंकि भक्त भगवान के साथ चले जाते हैं, और मंगला आरती भी विशेष अवसरों पर होती है, क्योंकि भगवान रात भर रास में थक जाते हैं।
राधा रमन मंदिर: भगवान श्री कृष्ण को समर्पित इस मंदिर में राधा रमन की पूजा की जाती है, जिसका अर्थ है राधा का प्रेमी। राधा रमन मंदिर वृंदावन में स्थित एक प्रारंभिक आधुनिक काल का हिंदू मंदिर है,इसे वृंदावन के साथ सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में गिना जाता है।
प्रेम मंदिर वृंदावन: प्रेम मंदिर वृंदावन का इतिहास “जगत गुरु कृपालु महाराज” द्वारा 2001 में शुरू किए गए एक सपना से जुड़ा है, जो प्रेम और भक्ति का प्रतीक है यह मंदिर भगवान राधा कृष्ण और सीताराम को समर्पित है ,जो 12 साल के अथक निर्माण (लगभग 150 करोड़ की लागत और 1000 कारीगरों) के बाद 2012 में बनकर तैयार हुआ और दुनिया भर के भक्तों के लिए शांति व आध्यात्मिक केंद्र बन गया।
इस्कॉन मंदिर: वृंदावन का इस्कॉन मंदिर (श्री कृष्णा बलराम) मंदिर 1975 में श्री लाल प्रभुपाद (इस्कॉन के संस्थापक) द्वारा स्थापित किया गया था,जो भारत में इस्कॉन का पहला मंदिर था, और भगवान कृष्ण और उनके भाई बलराम को समर्पित है, इसकी भव्य संगमरमर की वास्तुकला और भक्ति संगीत इसे आध्यात्मिक शांति का केंद्र बनाते है।
राधा वल्लभ मंदिर: वृंदावन में सात मंदिरों में से एक राधा वल्लभ का मंदिर जो गौतम नगर के पास बांके बिहारी मंदिर की चट्टान पर स्थित है यह मंदिर राधा और कृष्ण की पवित्र और आध्यात्मिक भक्ति का प्रतीक है।
निधिवन वृंदावन: वृन्दावनकानिधिवन एक अत्यंत पवित्र और रहस्यमयी जगह है, माना जाता है आज भी रात में श्री कृष्ण और राधा रानी गोपियों संग रासलीला करते है | यहाँ तुलसी के पेड़ जोड़े में होते है और शाम होते ही सभी भक्त, जानवर चले जाते है,और रात में यहाँ कोई नही रुकता क्योकि कहा जाता है कि रात में रुकने वाला या तो अंधे हो जाते या फिर उनकी मृत्यु हो जाती है |
गोवर्धन पर्वत: गोवर्धन पर्वत या गिरिराज,वृंदावन से 22 किमी० दूर है ।भगवान कृष्ण ने पवित्र ग्रंथ भगवद् गीता में उल्लेख किया है, कि गोवर्धन पर्वत स्वयं भगवान श्री कृष्ण से अलग नहीं है, इसलिए उनके सभी उपासक इस पर्वत के साधारण पत्थरों की पूजा करते हैं जैसे वह उनकी मूर्ति की पूजा करते हैं। यह पत्थर बलुआ पत्थर से बना है।
द्वारकाधीश मंदिर: गोमतीतट पर भगवान श्री कृष्ण का एक पवित्र मंदिर है, जिसे द्वारिकाधीश मंदिर के नाम से जाना जाता है | यह मंदिर 1200 वर्ष पुराना है |
श्री लाडली मंदिर: श्री लाडली मंदिर (राधा रानी मंदिर), जो बरसाना में भानुगढ़ पहाड़ी पर स्थित है ,राधा रानी और श्री कृष्ण को समर्पित है,जिसका ऐतिहासिक महत्व है, और वर्तमान स्वरूप (1675 ईस्वी) में राजा वीर सिंह और राजा टोडरमल द्वारा बनवाया गया था, यहां राधा कृष्ण को लाडली लाल प्रिय (पुत्री–पुत्र) के रूप में पूजा जाता है, और यहां लठमार होली व राधा अष्टमी के लिए प्रसिद्ध है,जहां भक्त सीढ़ियां चढ़कर दर्शन करते हैं।
वैष्णो देवी धाम: वैष्णो देवी की जीवंत मूर्ति के कारण यह मथुरा के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है वैष्णो देवी धाम सिर्फ एक मंदिर नहीं है, माना जाता है कि अगर आप सच्चे मन से यहां प्रार्थना करते हैं,तो देवी वैष्णो आपकी सही मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं, धाम के अंदर मुख्य केंद्रीय हाल है जिसका उपयोग ध्यान के लिए किया जाता है।
रमण रेती: यह स्थान भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा है,जहां वे ग्वाल–बालों के साथ खेला करते थे यह स्थान संत ज्ञान दास जी (18वीं) सदी की तपस्या से प्रसिद्ध हुआ, जहां श्री कृष्णा प्रकट हुए और अब यह एक शांत तीर्थ स्थल है,जहां भक्त कृष्ण की पवित्र मिट्टी में लोटकर और रमणबिहारी जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
कीर्ति मंदिर: कीर्तिमंदिर, बरसाना जो राधा रानी की माता, कीर्ति देवी को समर्पित है , यह दुनिया का पहला मंदिर है जहां राधा रानी को माँ की गोंद में बाल रूप में दिखाया गया है, जिसका निर्माण जगदगुरु कृपालु जी महाराज की प्रेरणा से हुआ और उनकी बेटियों ने इस मंदिर का निर्माण पूर्ण करवाया |
ऐतिहासिक स्थान
15– कुसुम सरोवर
16– राजा भरतपुर पैलेस
17– राधा कुंड
18– कंस किला
महत्वपूर्ण स्थल
19– बरसाना
20– नन्द गांव
मनोरंजन की जगहे
21– डॉल्फिन वाटर पार्क
22– सरकारी संग्रहालय मथुरा
23–कृष्ण नगर मार्केट
मथुरा में घूमने का सबसे अच्छा समय: श्री कृष्ण जन्माष्टमी, कृष्ण के जन्मदिन का जश्न मनाना यहां का विशेष दिन होता है, मथुरा और बरसाना की लंठ मार होली एक अलग ही अनुभव कराती है, यहां बताया गया है कि आप मथुरा कब जा सकते है:–
मथुरा में गर्मी:
मथुरा गर्मियों के मौसम में अत्यधिक गर्म मौसम होता है अतः मेरा अनुभव है कि आप दर्शनार्थियों को गर्मियों के मौसम में मथुरा जाने से बचना
चाहिए, ऐसी जलवायु परिस्थितियाँ दर्शनीय स्थलों की यात्रा करने में असुविधा पैदा करती है ।
मथुरा में मानसून:
मथुरा में मानसून का मौसम गर्मियों के मौसम से कुछ अच्छा माना गया है और राहत भी देता है, लेकिन नमी के कारण मौसम स्थिर रहता है। इस मौसम में मथुरा की यात्रा की योजना बनाई जा सकती है क्योंकि मौसम सुहावना होता है और दौरान अगस्त या सितंबर में मनाया जाने वाले कृष्ण
जन्माष्टमी के लिए प्रसिद्ध त्योहार को देखने का मौका मिलता है, जो बहुत ही मनमोहक और अतुल्यनीय होता है।
मथुरा में सर्दी:
मथुरा में जाने के लिए सर्दी का महीना सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि मथुरा में मनाए जाने वाले सभी प्रमुख त्योहार सर्दियों के मौसम में ही होते हैं दिसंबर और जनवरी के दौरान अत्यधिक सब मौसम रहता है यदि आपको मथुरा यात्रा सुकून भरा करना है तो आप जनवरी लास्ट महीने से मार्च महीने तक बड़े ही आरामदायक तरीके से कर सकते है।
कैसे पहुँचे
उत्तर प्रदेश में स्थित मथुरा, आप हवाई मार्ग, रेलवे और सड़क मार्ग से आसानी से मथुरा पहुंच सकते हैं, मथुरा दुनिया के बाकी हिस्सों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
हवाई मार्ग
उत्तर प्रदेश में आगरा हवाई अड्डा मथुरा का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है, नई दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मथुरा के नजदीक एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, हवाई अड्डे से आप कैब या टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या मथुरा के लिए बस ले सकते हैं।
रेल मार्ग
मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन और मथुरा छावनी रेलवे स्टेशन मथुरा शहर के दो नजदीकी रेलवे स्टेशन है। उसके बाद आप अपने गंतव्य तक ऑटो ले सकते हैं।
सड़क मार्ग
मथुरा के लिए से दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं, मथुरा के भीतर यात्रा करने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा और साइकिल रिक्शा उपलब्ध है।
विशेष अनुभव:
यदि आप ऐसी जगह जाने की सोच रहे हैं, जहां आप अपनी आत्मा, मन और शरीर को एक साथ ला सके, तो मथुरा आपके लिए सबसे अच्छी जगह है। इतनी शांति और सुकून के साथ दुनिया भर के यात्रियों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। आपको मथुरा की यात्रा की योजना अवश्य बनानी चाहिए और इन स्थानों पर अवश्य जाना चाहिए।
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