ओखली और मूसल का इतिहास: जानिए अवधी संस्कृति में ‘पहरुवा’ का महत्व और पारंपरिक रस्में!

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“जब ओखरी में मूड़ परि गय, तव पहरुवा कौन गिनती!”—जानिए अवध की लोक संस्कृति और गृहस्थी के सबसे मजबूत स्तंभ ‘पहरुवा’ (मूसल) की पूरी कहानी। धान कूटने और चावल निखारने के पारंपरिक तौर-तरीकों से लेकर शादी-ब्याह की मांगलिक रस्मों तक, कैसे यह पारंपरिक उपकरण आज भी हमारी जड़ों का मूक पहरेदार बना हुआ है।

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