एक बेबस माँ की दर्दभरी दास्तां – जब बैंक के बाबू ने खाता चेक किया, तो पता है क्या बोला? “सिर्फ ₹16 बचे हैं माता जी!”

एक बुजुर्ग भारतीय महिला धूप में पैदल चलते हुए और हाथ में बैंक की पासबुक पकड़े हुए, जो पेंशन न मिलने की लाचारी को दर्शाती है।

चिलचिलाती धूप में कई किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुँची एक बूढ़ी माँ को जब पता चला कि उसकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन ‘e-KYC’ और ‘DBT’ के तकनीकी मकड़जाल में फंसकर रुक गई है और खाते में महज़ ₹16 बचे हैं, तो व्यवस्था की संवेदनहीनता खुलकर सामने आ गई। यह लेख हमारे प्रशासनिक ढांचे और डिजिटल क्रांति के स्याह पहलू पर कुछ तीखे सवाल खड़े करता है।

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