बनारस क्यों है खास – पवित्र काशी में दर्शन की सही जानकरी
आइए जाने इसकी कहानी क्या है?
अगर आप सोच रहे हैं कि Banaras में घूमने की जगह कौन-कौन सी है तो यकीन मानिए यह शहर एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि एक अनुभव है | जी हां!
बनारस वह जगह है जहां सुबह की सूर्योदय से लेकर शाम के गंगा आरती तक हर पल एक अलग कहानी सुनाता है |
बनारस किस राज्य में है:– यह उत्तर प्रदेश में स्थित है और “बनारस” को ही “वाराणसी” कहते हैं जी हां, बिल्कुल! “बनारस”, “वाराणसी” और “काशी” तीनों एक ही शहर के नाम है | यह विश्व का सबसे पुराना शहर माना जाता है जहां भगवान शिव जी का निवास स्थान माना जाता है
यहां आने के लिए आपको तीनों मार्गों की सुविधा उपलब्ध है रेल मार्ग, हवाई मार्ग और जल मार्ग की भी सुविधा कर दी गई है | आपको देश के किसी भी कोने से बनारस आना है, तो भारत के हर राज्य से रेल मार्ग की सुविधा भारत सरकार ने उपलब्ध कराया है |
काल भैरव मंदिर: वाराणसीका काल भैरव मंदिर भगवान शिव के उग्र रूप को समर्पित एक प्राचीन और महत्वपूर्ण स्थान है,जिसे हम “काशी-कोतवाल” के नाम से जानते हैं और उनके दर्शन के बिना बनारस की यात्रा अधूरी मानी जाती है|
ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व:
काशी के कोतवाल: यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है जो शिव जी के रौद्र रूप को दर्शाया गया है,जो काशी बनारस के संरक्षक माने जाते हैं इसलिए उन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है कि ब्रह्मा विष्णु विवाद पुरानी कथाओं के अनुसार ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता के विवाद को सुलझाने के लिए शिव जी ने भैरव रूप धारण किया, और क्रोध में ब्रह्मा जी का सिर काट दिया था | जिससे भैरव को ब्रह्म हत्या का दोष लग गया और काशी में आने पर ही उनकों इस पाप से मुक्ति मिली |
प्रतीक: यह मंदिर अहंकार पर ऐश्वर्या एवं सत्य की विजय का प्रतीक है |
वास्तु कला: मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली की है जिसमें विस्तृत और जटिल नक्काशी की मूर्तियां हैं जो तांत्रिक दर्शन पर आधारित है |
गर्भगृह: गर्भ गृह में चांदी की मूर्ति है जिसके सिर पर एक विशेष आभूषण होता है जो समय-समय पर बदलता रहता है |
पूजा और मान्यताएं:
पवित्र दिन: रविवार और मंगलवार काल भैरव के लिए महत्वपूर्ण दिन माना जाता है |
अकाल मृत्यु से बचाव: भक्तों का मानना है की काल भैरव की पूजा से सुख समृद्धि मिलती है और अकाल मृत्यु से बचाव होता है |
शराब और तंबाकू: काल भैरव को शराब और तंबाकू चढ़ाने की प्राचीन परंपरा है |
निर्माण: यह मंदिर वाराणसी काशी की सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है जिसका निर्माण 17वीं शताब्दी के आसपास शुरू माना जाता है |
वाराणसी के काल भैरव मंदिर में कैसे पहुंचे: काल भैरव मंदिर वाराणसी के एक आध्यात्मिक स्थल पर स्थित है यहां पहुंचने के तीन रास्ते हैं |
हवाई मार्ग से: आप देश-विदेश किसी भी हवाई अड्डे से वाराणसी स्थित “लाल बहादुर शास्त्री बाबतपुर वाराणसी” के लिए उड़ान बुक कर सकते हैं हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी 24.4 किलोमीटर है |
ट्रेन द्वारा: वाराणसी में कुल मुख्य रुप से तीन रेलवे स्टेशन है |
| रेलवे स्टेशन | काल भैरव मन्दिर से दूरी |
| वाराणसी-कैंट | 3 km |
| बनारस | 3.6 km |
| वाराणसी सिटी | 2.5 km |
सड़क मार्ग: यदि आप वाराणसी पहुंचने के लिए बस ले रहे हैं तो कैंट-बस स्टैंड मंदिर से 3.5 किलोमीटर दूर है | वाराणसी कैंट रेलवे-स्टेशन एवं बस-स्टैंड के बीच की दूरी 0.5 किमी से भी km है |
काल भैरव मंदिर के आसपास के आकर्षण:
| स्थान का नाम | काल भैरव मन्दिर से दूरी |
| काशी विश्वनाथ मंदिर | 1 km |
| संकथा मंदिर | 1 km |
| मृत्युंजय मंदिर | 1.2 km |
| दशामेश्वर घाट | 2.5 km |
| बनारस हिंदू विश्वविद्यालय | 5 km |
| रामनगर किला | 7.6 km |
| सारनाथ मंदिर | 7.8 km |
काशी विश्वनाथ मंदिर आस्था का केंद्र:
काशी विश्वनाथ मंदिर भारत और बनारस वाराणसी की सबसे पवित्र और प्राचीन जगह है भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक यहां हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है यह आकर्षण का केंद्र है क्योंकि यह मंदिर का गुंबद सोने का और इसकी अद्भुत वास्तुकला देखते ही बनती है अगर आप बनारस घूमने की जगह तलाश या खोज रहे हैं तो शुरुआत आप काशी के विश्वनाथ मंदिर से कर सकते है
टिप: हां अगर आपको काशी विश्वनाथ मंदिर का दर्शन कम भीड़ भाड़ वाले समय में करना चाहते हैं तो सुबह 4:00 से 6:00 और शाम को 03:00 से 04:00 के बीच दर्शन करें
काल भैरव मंदिर का आरती का समय:
विस्तृत आरती का समय:
मंगला आरती (सुबह): 5:30बजे, मंदिर खुलने के बाद
भोग आरती (दोपहर): 1:00 बजे
संध्या आरती (शाम): रात 8:00 बजे
शयन आरती (रात): 12:00 बजे