प्रयागराज खास: सभी तीर्थ में प्रयागराज को क्यों कहा गया है “तीर्थराज”

Prayagraj Khas

प्रयागराज इलाहाबाद को तीर्थ का राजा यानी तीर्थराज इसलिए कहा गया है क्योंकि यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का पवित्र संगम है जिसे त्रिवेणी संगम के नाम से जाना जाता है।

वेद पुराणों के अनुसार कहा जाता है कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि का पहला यज्ञ यही किया था और यहां भगवान विष्णु विश्व के पालन करता स्वयं माधव रूप में विराजमान है, जिससे यह स्थान सभी तीर्थ में से सर्वश्रेष्ठ माना जाता है,यह भूमि केवल भौगोलिक धरोहर नहीं बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से परिपूर्ण है। गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम इसे मोक्ष और आत्म चिंतन की भूमि बनता है।

मुख्य कारण:–                                                                   त्रिवेणी संगम: गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम प्रयागराज को विशेष आध्यात्मिक शक्ति देता है जिससे यह अन्य तीर्थ में से सर्वश्रेष्ठ हो जाता है।

ब्रह्मा जी का पहला यज्ञ (प्रयाग): “प्रयाग” शब्द “प्र” (श्रेष्ठ) और “याग” (यज्ञ) से बना है, क्योंकि ब्रह्मा जी ने सृष्टि के आरंभ में यही पहले और सबसे महत्वपूर्ण यज्ञ किया था।

भगवान विष्णु का वास: भगवान विष्णु स्वयं यहां माधव रूप में वास करते हैं,और उनके 12 स्वरूप यहां मौजूद हैं,जिससे इस स्थान की महिमा और बढ़ जाती है।

अमृत की बूंदे: पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान अमृत की बूंदे प्रयाग सहित कुछ स्थानों पर गिरी थी और प्रयाग को सबसे पवित्र माना गया है।

मोक्ष का केंद्र: शास्त्रों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत की बूंदे इसी स्थान पर गिरी। और त्रिवेणी संगम में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं, और मोक्ष मिलता है। जो इस तीर्थ में सर्वोच्च स्थान देता है।

इन सभी पौराणिक और आध्यात्मिक कारणों से प्रयागराज को “तीर्थराज” यानी तीर्थों का राजा कहा जाता है, जो “सनातन धर्म” में इसके अद्वितीय स्थान को दर्शाता है।

     प्रयागराज में प्रसिद्ध मंदिर

प्रयागराज में कई प्रमुख देवताओं के मंदिर हैं, जिनमें संगम तट पर स्थित हनुमान जी (बड़े हनुमान जी /लेटे हनुमान जी), भगवान विष्णु (वेणी माधव) और भगवान शिव (सोमेश्वर नाथ) के मंदिर दर्शनीय है,जो संगम नगरी को धार्मिक महत्व देते हैं।

प्रमुख मंदिर और देवता:

बड़े हनुमान जी का मंदिर:– यह गंगा किनारे संगम के पास स्थित है,और लेटी हुई अवस्था में हनुमान जी की विशाल मूर्ति प्रसिद्ध है, इन्हें “किले वाले हनुमान जी”के नाम से भी जानते हैं, उनकी प्रतिमा जमीन से नीचे है, जिसे गंगा स्नान करते हैं।

श्री वेणी माधव मंदिर (विष्णु जी):– इन्हें प्रयागराज का पहला देवता माना जाता है।यहां भगवान विष्णु के 12 स्वरूपों की स्थापना है,जिसकी स्थापना ब्रह्मा जी ने की थीं।

पाताल पुरी मंदिर:– प्रयागराज किले के अंदर एक प्राचीन मंदिर है। जिसका महत्व बहुत अधिक है।

सोमेश्वर नाथ मंदिर:– यमुना तट पर स्थित यह मंदिर भगवान शंकर को मनचंदा समर्पित है, और माना जाता है कि यह मंदिर चंद्रदेव द्वारा स्थापित किया गया था।

शंकर विमान मंडपम (भगवान शिव):– त्रिवेणी संगम पर स्थित यह भव्य मंदिर दक्षिण भारतीय शैली में बना है।यह मंदिर 130 फीट ऊंचा 4 मंजिला है,और शंकराचार्य के स्मृति में बनाया गया है।

नाग वासुकी मंदिर:– यह पौराणिक मंदिर है जो नागों के राजा वासुकी को समर्पित है।यहां नाराज गणेश पार्वती और भीष्म पितामह की मूर्तियां हैं।

इस्कॉन मंदिर:– यह मंदिर यमुना नदी के किनारे बना है।राधा वेणी माधव को समर्पित है।

अक्षय वट (बरगद का पेड़):– यह कोई मंदिर नहीं है बल्कि एक पवित्र प्राचीन वृक्ष है,जो अकबर के किले में है, और संगम स्थान के बाद दर्शन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

अन्य महत्वपूर्ण स्थान:–

भारद्वाज आश्रम: माना जाता है कि भगवान राम अपने वनवास के समय यहां आए थे।

अलोपी देवी मंदिर: यह एक अनोखा और विचित्र मंदिर है जिसे शक्तिपीठ मंदिर कहा जाता है जहां देवी की मूर्ति एक लकड़ी के झूले के रूप में है।

प्रयागराज के अन्य पर्यटन स्थल

प्रयागराज का त्रिवेणी संगम है: हिंदू धर्म में तीन सबसे महत्वपूर्ण नदियों का मिलन,त्रिवेणी संगम इलाहाबाद में स्थित एक पवित्र स्थान है,जो हर 12 साल में इस स्थान पर कुंभ मेला नामक एक अविश्वसनीय रूप से आयोजित किया जाता है,जो एक त्यौहार के रूप में माना जाता है।

      प्रयागराज का कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा जमावड़ा है। 2025 में महाकुंभ का आयोजन हुआ था जो 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चला जिसमें करोड़ों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई,यह आस्था, संस्कृति और परंपरा का एक अभूतपूर्व संगम था।

कुंभ मेले की कुछ मुख्य बातें:

स्थान: प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) का त्रिवेणी संगम ।

अवधि: हर 12 साल में,2025 में 45 दिनों तक चला ।

महत्व: यह आस्था का सबसे बड़ा पर्व है,जहां गंगा स्नान करने के बाद मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती  है ।

विशेषता: 2025 का महाकुंभ 144 वर्षों बाद एक दुर्लभ ज्योतिषीय सहयोग के कारण था |

पवित्र स्नान: मकर संक्रांति,मौनी आमावस्या,बसंत पंचमी और माघ पूर्णिमा ।

2025 महाकुंभ की विशेष बातें:

यह दुनिया का सबसे बड़ा जमावड़ा था जिसमें 66 करोड़ लोगों ने डुबकी लगाई “यूनेस्को” ने इसे अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी ।

प्रयागराज का खुसरो बाग: लुकरगंज में स्थित,खुसरो बाग इलाहाबाद के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है ।

प्रयागराज का आनंद भवन: 1930 के दशक में मूल स्वराज भवन जो आज एक प्रसिद्ध इलाहाबाद पर्यटन स्थल है।

प्रयागराज का किला: यह प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में मौजूद है, कहा जाता है की प्रसिद्ध मुगल सम्राट अकबर इलाहाबाद की आभा से बहुत प्रभावित हुआ था।

प्रयागराज का जवाहर तारामंडल:  आनंद भवन के बगल में स्थित सन् 1979 में निर्मित जवाहर तारामंडल विज्ञान और इतिहास का संगम है।

अल्फ्रेड पार्क इलाहाबाद: अल्फ्रेड पार्क अब चंद्रशेखर आजाद पार्क के नाम से जाना जाता है, प्रयागराज का एक ऐतिहासिक और विशाल पार्क है,जो शहर के केंद्र में स्थित है,और स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा है, इन्होंने यही अंग्रेजों से लड़ते हुए अपनी शहादत दी थी।

त्रिवेणी संगम प्रयागराज कैसे पहुंचे: त्रिवेणी संगम प्रयागराज पहुंचने के लिए आपको पहले प्रयागराज शहर आना होगा और इलाहाबाद यानी प्रयागराज आने के लिए आपको देश-विदेश कहीं से भी हवाई जहाज रेलगाड़ी तथा बस की सुविधा मिल जाती है। प्रयागराज शहर में आप हवाई जहाज (प्रयागराज एयरपोर्ट) ट्रेन (प्रयागराज जंक्शन)बस स्टैंड (सिविल लाइंस) से आप यात्रा कर सकते हैं।

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज हवाई अड्डा

कनेक्टिविटी: दिल्ली,मुंबई, लखनऊ से सीधी उड़ने उपलब्ध दूरी लगभग 15 से 17 किलोमीटर

रेल मार्ग: प्रयागराज जंक्शन सबसे करीब देश के लगभग सभी शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है स्टेशन से संगम की दूरी लगभग 7 से 8 किलोमीटर

सड़क मार्ग: राष्ट्रीय और राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है और आप शहर के किसी भी सड़क मार्ग से प्रयागराज के लिए आ सकते हैं

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