Site icon Khas Press

कुल्फा, नोनी या अमलोनी: वह “जादुई साग” जिसे हम खरपतवार समझकर फेंक देते हैं!

कुल्फा, नोनी या अमलोनी साग (Purslane): प्रकृति का अनमोल उपहार

अक्सर जिसे हम अपने बगीचों या खेतों के किनारे एक साधारण “खरपतवार” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, वह वास्तव में धरती पर मौजूद सबसे पौष्टिक पौधों में से एक है। हम बात कर रहे हैं कुल्फा की, जिसे भारत के अलग-अलग हिस्सों में नोनी, अमलोनी, नोनिया या लूणी साग के नाम से जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे पर्सलेन (Purslane) कहते हैं।

यह रसीली भाजी न केवल स्वाद में अनोखी है, बल्कि आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों की दृष्टि से एक ‘सुपरफूड’ है।

1. पोषक तत्वों का भंडार

कुल्फा साग अपनी पोषण संबंधी विशेषताओं के कारण अन्य सभी हरी सब्जियों से अलग है:

2. औषधीय लाभ

आयुर्वेद में कुल्फा का उपयोग सदियों से कई बीमारियों के उपचार में किया जा रहा है:

3. सांस्कृतिक महत्व (नोनी का साग)

बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में ‘नोनी के साग’ का विशेष धार्मिक महत्व है। जीमूतवाहन व्रत (जीतिया) के दौरान माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखती हैं और अगले दिन पारण में नोनी का साग खाना अनिवार्य परंपरा माना जाता है।

4. रसोई में उपयोग

इसका स्वाद हल्का खट्टा और नमकीन होता है, जो खाने में बहुत स्वादिष्ट लगता है। इसे कई तरह से बनाया जा सकता है:

कुल्फा या नोनी का साग प्रकृति का वह वरदान है जो बिना किसी विशेष देखरेख के उगता है, लेकिन लाभ किसी महंगे सप्लीमेंट से कम नहीं देता। अगर आपको अगली बार यह बाजार में या खेत के किनारे दिखे, तो इसे अपनी थाली का हिस्सा जरूर बनाएं।

पारंपरिक कुल्फा-चना दाल रेसिपी

सामग्री:

बनाने की विधि:

  1. दाल पकाएं: कुकर में भिगोई हुई चना दाल, कटा हुआ साग, नमक और थोड़ी हल्दी डालकर 2-3 सीटी आने तक पका लें। (ध्यान रहे दाल पूरी तरह न गले, दाने दिखने चाहिए)।
  2. तड़का तैयार करें: एक कड़ाही में सरसों का तेल गरम करें। इसमें जीरा और हींग का तड़का लगाएं।
  3. भूनें: अब प्याज और हरी मिर्च डालकर सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद अदरक-लहसुन का पेस्ट और टमाटर डालकर गलने तक पकाएं।
  4. मसाले: सभी सूखे मसाले डालें और जब मसाला तेल छोड़ने लगे, तो पका हुआ साग और दाल का मिश्रण इसमें डाल दें।
  5. फिनिशिंग: इसे धीमी आंच पर 5 मिनट तक पकने दें ताकि मसाले रच-बस जाएं। अंत में थोड़ा गरम मसाला और हरा धनिया डालें। इसे चावल या गरम रोटी के साथ परोसें। 

अन्य क्षेत्रीय नाम (Regional Names)

कुल्फा को भारत के विभिन्न कोनों में इन नामों से भी पुकारा जाता है:

एक खास बात: कुल्फा की तासीर ठंडी होती है, इसलिए इसे गर्मियों में खाना सेहत के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

Exit mobile version