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शिकायत नहीं, शुरुआत की: ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने सराहा बस्ती के आकाश गुप्ता का मनोरमा नदी सफाई अभियान
मनुष्य के संकल्प में वह शक्ति है जो सूखती और दम तोड़ती नदियों को भी नया जीवन दे सकती है। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के एक छोटे से गांव से निकली यह कहानी आज पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। रविवार को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बस्ती जिले के लानघटा गांव के रहने वाले युवा आकाश गुप्ता और उनकी टीम के प्रयासों की जमकर सराहना की।
प्रधानमंत्री ने आकाश गुप्ता के हौसले की तारीफ करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया: “आकाश ने शिकायत नहीं, शुरुआत की।” यह वाक्य आज के उस युवा समाज के लिए एक बड़ा सबक है जो अक्सर व्यवस्थाओं को कोसने में समय गंवा देता है, जबकि कुछ विरले ऐसे होते हैं जो खुद बदलाव की इबारत लिखने जमीन पर उतर जाते हैं।
पुराणों में वर्णित मनोरमा नदी की दुर्दशा और आकाश का संकल्प
बस्ती जिले की मनोरमा नदी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व अद्वितीय है। आकाश गुप्ता बताते हैं कि मनोरमा नदी का जिक्र हमारे प्राचीन पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है। यह नदी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और जीवनरेखा रही है। लेकिन, समय के साथ बढ़ते प्रदूषण, प्रशासनिक उपेक्षा और जन-जागरूकता की कमी के कारण यह ऐतिहासिक नदी एक गंदे नाले और कचरे के ढेर में तब्दील होने लगी थी।
लानघटा गांव के रहने वाले 12वीं पास आकाश गुप्ता अक्सर अपने दोस्तों के साथ इस नदी के किनारे टहलने और बैठने जाया करते थे। लेकिन नदी की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि वहां बैठना तो दूर, खड़े होना भी दूभर था। चारों तरफ से आती तीखी बदबू और पानी की सतह पर तैरती जलकुंभी व प्लास्टिक के कचरों ने नदी का दम घोंट दिया था। इस दुर्दशा को देखकर आकाश का मन व्यथित हो उठा। उन्होंने व्यवस्था की शिकायत करने या प्रशासन के भरोसे बैठने के बजाय खुद कदम उठाने का एक साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लिया।
जाल, फावड़ा और टोकरी: सीमित संसाधन, असीमित संकल्प
जब आकाश ने नदी साफ करने की ठानी, तो उनके पास न तो कोई बड़ा फंड था और न ही कोई आधुनिक मशीनें। उनके पास था तो बस अपने कुछ वफादार दोस्तों का साथ और कुछ बेहद साधारण उपकरण। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके इसी जज्बे को रेखांकित करते हुए कहा:
“उनके पास सिर्फ जाल था, फावड़ा था, टोकरी थी और सबसे बड़ी ताकत थी कुछ बदलने का संकल्प।”
आकाश गुप्ता और उनके दोस्तों की टोली ने किसी तामझाम के बिना सीधे मनोरमा नदी के गंदे पानी में उतरने का फैसला किया। शुरुआत में यह काम बेहद कठिन और थका देने वाला था। नदी की सतह पर जमी जिद्दी जलकुंभी को हाथों से खींचकर निकालना, दलदल जैसी मिट्टी में से फावड़े की मदद से गाद हटाना और टोकरियों में भरकर उसे किनारे लाना कोई आसान काम नहीं था।
प्रतिदिन 50-60 किलो कचरे का निष्कासन
यह युवा टोली हर रोज सुबह-सुबह नदी में उतर जाती थी। पानी के भीतर छिपे प्लास्टिक के थैले, बोतलें, पूजा सामग्री का कचरा और जहरीली जलकुंभी को ये बाहर खींच लाते थे। आकाश और उनकी टीम के कड़े परिश्रम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बार उन्होंने एक ही दिन में 50 से 60 किलो तक कचरा मनोरमा नदी से बाहर निकाला। धीरे-धीरे, दिन-ब-दिन किए गए इस भगीरथ प्रयास का असर दिखने लगा। मनोरमा नदी का वह हिस्सा, जो कभी गंदगी और बदबू का केंद्र था, एक बार फिर से साफ, सुंदर और निर्मल दिखाई देने लगा।
पीएम मोदी का देश को संदेश: “शिकायत नहीं, शुरुआत की नीति अपनाएं”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में आकाश गुप्ता के इस जमीनी कार्य को पूरे देश के सामने एक मॉडल के रूप में पेश किया। पीएम ने कहा कि समाज में दो तरह के लोग होते हैं— एक वे जो केवल समस्याओं की शिकायत करते हैं, और दूसरे वे जो चुपचाप समाधान की शुरुआत कर देते हैं। आकाश दूसरी श्रेणी के नायक हैं।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के हर गांव और हर शहर में कुछ-न-कुछ ऐसा सकारात्मक हो रहा है जो हमें आगे बढ़ने और कुछ अच्छा करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने देश की जनता से अपील की कि वे अपने आस-पास की जन-समस्याओं को केवल सरकार या प्रशासन के भरोसे न छोड़ें, बल्कि आकाश गुप्ता की तरह छोटे-छोटे समूहों में संगठित होकर स्थानीय स्तर पर बदलाव के अभियानों से जुड़ें। जल संरक्षण, नदी सफाई और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर जनभागीदारी ही एकमात्र रास्ता है जो भारत को एक स्वच्छ और समृद्ध राष्ट्र बना सकती है।
आकाश गुप्ता का अभियान: देश के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शिका
आज जब देश के बड़े-बड़े शहरों में युवा उच्च शिक्षा और आधुनिक सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहे हैं, वहीं बस्ती के लानघटा गांव के 12वीं पास आकाश गुप्ता ने यह साबित कर दिया है कि बदलाव लाने के लिए किसी बड़ी डिग्री या भारी-भरकम बैंक बैलेंस की जरूरत नहीं होती। इसके लिए केवल एक संवेदनशील दिल और अटूट इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।
आकाश गुप्ता के इस अभियान से हमें कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं:
- स्थानीय धरोहरों का सम्मान: हमारे देश की ग्रामीण नदियां और तालाब हमारी असली पूंजी हैं। आकाश ने अपनी इस ऐतिहासिक धरोहर (मनोरमा नदी) के महत्व को समझा और उसे बचाने के लिए आगे आए।
- टीम वर्क की ताकत: अकेले शुरू हुए इस सफर में जब दोस्त जुड़ते गए, तो एक कारवां बनता गया। सामूहिक प्रयास से असंभव दिखने वाले काम भी संभव हो जाते हैं।
- आत्मनिर्भरता का संदेश: सरकारी तंत्र अपनी जगह काम करता है, लेकिन नागरिकों के रूप में हमारे भी कुछ कर्तव्य हैं। अपनी नदियों को साफ रखना और पर्यावरण को बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
बस्ती जिले की मनोरमा नदी से शुरू हुई यह छोटी सी लहर आज ‘मन की बात’ के जरिए पूरे देश में गूंज रही है। आकाश गुप्ता और उनकी टीम का यह प्रयास आने वाले समय में देश के लाखों युवाओं को अपने गांवों और शहरों की सुध लेने के लिए प्रेरित करेगा।
यहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सराहे गए बस्ती के आकाश गुप्ता और उनके मनोरमा नदी सफाई अभियान से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) दिए गए हैं:
सामान्य और परिचय संबंधी प्रश्न
- आकाश गुप्ता कौन हैं और वे कहाँ के रहने वाले हैं?
आकाश गुप्ता उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के लानघटा गांव के रहने वाले एक युवा हैं। उन्होंने केवल 12वीं तक पढ़ाई की है। - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में आकाश गुप्ता की तारीफ क्यों की?
आकाश गुप्ता और उनके दोस्तों द्वारा बिना किसी सरकारी मदद के, सिर्फ साधारण उपकरणों से पौराणिक मनोरमा नदी को साफ करने के भगीरथ प्रयास के लिए पीएम ने उनकी सराहना की। - मनोरमा नदी का ऐतिहासिक या धार्मिक महत्व क्या है?
आकाश गुप्ता के अनुसार, मनोरमा नदी का उल्लेख भारत के प्राचीन पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में मिलता है, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर है।
अभियान और कार्यप्रणाली
- आकाश ने नदी सफाई अभियान की शुरुआत क्यों की?
वे जब भी अपने साथियों के साथ नदी किनारे जाते थे, तो वहां उपेक्षा के कारण भारी गंदगी और बदबू आती थी। इस दुर्दशा को देखकर उन्होंने नदी को साफ करने का संकल्प लिया। - सफाई अभियान के दौरान युवाओं के पास क्या संसाधन थे?
पीएम मोदी के शब्दों में, इन युवाओं के पास कोई आधुनिक मशीन नहीं थी। उनके पास केवल एक जाल, फावड़ा, टोकरी और कुछ बदलने का मजबूत संकल्प था। - यह टीम हर रोज नदी से कितना कचरा निकालती थी?
आकाश गुप्ता और उनके साथी प्रतिदिन नदी के पानी में उतरकर जलकुंभी, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट बाहर लाते थे। कई बार उन्होंने एक दिन में 50 से 60 किलो तक कचरा बाहर निकाला।
पीएम मोदी का संदेश और प्रभाव
- प्रधानमंत्री ने आकाश गुप्ता के इस प्रयास से देश को क्या संदेश दिया?
पीएम मोदी ने कहा कि “आकाश ने शिकायत नहीं, शुरुआत की।” उन्होंने देशवासियों से व्यवस्थाओं को कोसने के बजाय स्थानीय स्तर पर ऐसे स्वच्छता अभियानों से जुड़ने की अपील की। - क्या मनोरमा नदी का वह हिस्सा अब पूरी तरह साफ हो गया है?
हाँ, इन युवाओं के लगातार प्रयासों के कारण मनोरमा नदी का वह उपेक्षित हिस्सा अब पूरी तरह से साफ, निर्मल और सुंदर दिखाई देने लगा है।
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