विंध्याचल का इतिहास: विंध्याचल स्थान और देवी विंध्यवासिनी का उल्लेख भारत के कई प्राचीन ग्रंथो में मिलता है, इनमें से कुछ प्रमुख ग्रंथ महाभारत, वामन पुराण, मार्कंडेय पुराण, मत्स्य पुराण, देवी भागवत, हरिवंश पुराण, स्कंद पुराण, कादंबरी और कई ग्रंथ हैं, इन ग्रंथो में देवी विंध्यवासिनी का विशेष महत्व है।देवी दुर्गा और राक्षस राजा महिषासुर के बीच बहुत प्रसिद्ध युद्ध विंध्याचल में हुआ था, इस युद्ध का आध्यात्मिक और समसामयिक महत्व है,यह घटना विंध्याचल क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कहां जाता है भगवान राम अपने वनवास के दौरान पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ इस स्थान और आसपास के क्षेत्र का दौरा किया था सीता कुंड, सीता रसोई, राम गया घाट रामेश्वर मंदिर आदि यहीं हैं।
विंध्याचल क्षेत्र की विशेषता यह है, कि यह एकमात्र स्थान है जहां “देवी” की पूजा “वाम मार्ग” के सिद्धांतों के साथ-साथ शक्ति पथ के दक्षिण मार्ग के अनुसार की जाती है, यह एक महत्वपूर्ण स्थल है, जहां देवी हिंदू धर्म के शक्ति देवताओं में अपने तीन रूपों लक्ष्मी, काली और सरस्वती में प्रकट होती हैं, और इन तीनों रूपों के लिए विशिष्ट मंदिरों के साथ-साथ यह स्थान महान आध्यात्मिक को महत्व देता है।
सबसे दिलचस्प बात यह है, कि वर्तमान भारतीय मानक समय रेखा, जो पूरे भारत का समय क्षेत्र तय करती है देवी “विंध्यवासिनी” की मूर्ति से होकर गुजरती है।
पर्यटन स्थल
गंगा नदी के किनारे बसा एक रमणीय और आध्यात्मिक शहर है विंध्याचल। वाराणसी के बेहद करीब स्थित यह शहर धार्मिक महत्व रखता है, और विंध्यवासिनी देवी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जहां साल भर कई हजार पर्यटक दर्शन करने आते हैं, इस मंदिर के अलावा यहां कई अन्य दर्शनीय स्थल भी हैं, जिनकी अपनी-अपनी कहानी है, जो देखने लायक होती हैं। विंध्याचल घूमने का सबसे अच्छा समय नवरात्रि के दौरान होता है, जब इन मंदिरों को फूलों देव और दीपों से सजाया जाता है।
विंध्यवासिनी देवी मंदिर:
विंध्याचल में स्थित विंध्यवासिनी मंदिर इस क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है, और यह देवी दुर्गा के अवतार विंध्यवासिनी को समर्पित है, यह मंदिर भक्तों के बीच बहुत महत्व रखता है, कुछ तीर्थ यात्री मंदिर के ठीक बगल में स्थित गंगा नदी में स्नान करते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है, कि इससे उनके सारे पाप धुल जाते हैं, देवी का मंदिर अत्यंत अद्भुत है।
विंडहैम फॉल्स: यह मिर्जापुर उत्तर प्रदेश में स्थित एक प्राकृतिक झरना वॉटरफॉल है जो अपनी खूबसूरती के लिए बेहद प्रसिद्ध है यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जहां आपअपने परिवार और दोस्तों के साथ घूम जा सकते है, यह जगह आसपास के शहरों जैसे बनारस और इलाहाबाद से पाठकों को आकर्षित करती है।
रामगया घाट:
विंध्याचल शहर के केंद्र से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, यह रामगया घाट हिंदुओं का अत्यंत प्रसिद्ध और पवित्र स्थान है, ऐसा माना जाता है कि यहीं पर भगवान राम ने अपने पिता के लिए प्रार्थना की थी, और उनके निधन के बाद कुछ धार्मिक अनुष्ठान भी किए थे, यह घाट अत्यंत शांत है, और इसके ठीक बगल में प्रेत शिला नामक एक अन्य घाट है,जहां लोक प्रार्थना करने और अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए अंतिम संस्कार करने आते हैं।
अष्टभुजा मंदिर:
विंध्याचल में स्थित अष्टभुजा मंदिर का मुख्य रहस्य है, कि यहां माता दुर्गा के प्रतिमा एक अंधेरी गुफा में है, जहां द्वापर युग में कंस के हाथ से छूटने के बाद योग माया ने यही निवास किया था, यह 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जिसे मां विंध्यवासिनी की बहन के रूप में पूजा जाता है, जहां माता काली के रूप में दर्शन मिलते हैं।
सीता कुंड:
सीता कुंड विंध्याचल पर्वत माला की तलहटी में स्थित है, और इसके पीछे एक अद्भुत कहानी है, यह प्राकृतिक जल स्रोत रामायण काल से जुड़ा हुआ है, पौराणिक कथाओं के अनुसार इस कुंड की उत्पत्ति लक्ष्मण के कारण हुई लंका में विजय प्राप्त करने के बाद लौटते समय सीता माता को पानी पीने की इच्छा हुई लेकिन आसपास पानी नहीं था, जो लक्ष्मण ने देखा तो उन्होंने जमीन पर एक बाण चलाया, और तुरंत ही वहां से पानी की एक धारा बह निकली, जिसे अब सीता कुंड के नाम से जाना जाता है।
काली खोह मंदिर:
विंध्याचल में कई मंदिर हैं, जिनमें से लकी को मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है, यह मंदिर विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक गुफा में स्थित है, और विंध्यवासिनी देवी मंदिर से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर है, हजारों भक्त यहां आकर प्रार्थना करते हैं, और दुर्गा के अवतार देवी काली का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
संकट मोचन हनुमान मंदिर:
विंध्याचल के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक संकट मोचन हनुमान मंदिर है, जिसे आपको विंध्याचल के धाम यात्रा के द्वारा अवश्य देखना चाहिए यह प्राचीन मंदिर हनुमान जी को समर्पित है, जहां भक्त उनके बाल रूप बंधवा हनुमान जी के दर्शन और प्रार्थना करते हैं, यह मंदिर कब स्थापित हुआ या तो ज्ञात नहीं, लेकिन यह सर्वाधिक है, कि भक्त बहुत लंबे समय से यहां दर्शन करने आते रहे हैं, हां और एक दिलचस्प बात यह है, देखा गया है, कि हनुमान जी की मूर्ति हर साल कुछ इंच बढ़ रही है, जो एक चमत्कार है। इसलिए इस मंदिर में आने वाले लोग इस देवता में बहुत आस्था रखते हैं।
सीता समाहित स्थल:
रामायण महाकाव्य से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक सीता समाहित स्थल है, जो विंध्याचल में स्थित है, यह मंदिर हिंदू धर्म के प्रति गहरी आस्था रखने वाले लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, ऐसा माना जाता है कि सीता जब भी चाहती थीं, यही विलीन हो जाती थी,यह घटना वाल्मीकि के साथ रहने के दौरान घाटी जिन्होंने रामायण की रचना की थी।
रामेश्वर महादेव मंदिर:
विंध्याचल पर्वत की सुंदरता में, विंध्यवासिनी मंदिर और अष्टभुजा मंदिर के ठीक बीच में, स्थित सुंदर रामेश्वर महादेव मंदिर जो सीता कुंड के भी निकट है, यह मंदिर विंध्याचल शहर के केंद्र के पास है ,और मिर्जापुर से 8 किलोमीटर दूर है इस मंदिर के मुख्य देवता भगवान शिव है, और मंदिर के भीतर एक विशाल शिवलिंग स्थापित है।
विजयगढ़ का किला:
अगर आप आसपास के सभी मंदिरों का दर्शन कर चुके हैं, तो विंध्याचल के मौ कलां गांव में स्थित विजयगढ़ किले की ओर आपको जाना चाहिए यह किला 400 फीट ऊंचा है ,और हरियाली से गिरा हुआ है, जो इसके समृद्ध अतीत की झलक दिखाता है, इसकी स्थापना पांचवी शताब्दी में कैमूर पर्वतमाला की पहाड़ियों में हुई थी, किले में प्रवेश करते ही आपको प्राचीन काल का अनुभव होगा, क्योंकि यहां आपको विभिन्न गुफा चित्र, नक्शेदार मूर्तियां और शिलाचित्र देखने को मिलेंगे।
विंध्याचल पहुंचने के मुख्य साधन
ट्रेन द्वारा: विंध्याचल रेलवे स्टेशन यह स्टेशन दिल्ली–हावड़ा और मुंबई–हावड़ा मुख्य लाइन पर है, कई एक्सप्रेस ट्रेन यहां रुकती हैं।
हवाई मार्ग द्वारा: वाराणसी (बाबतपुर) हवाई अड्डा सबसे निकट लगभग 72 किमी० है, वहां से टैक्सी या बस से दो-तीन घंटे में पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग: विंध्याचल राष्ट्रीय राजमार्ग NH2 के माध्यम से वाराणसी लगभग 63 किमी० और प्रयागराज मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
स्थानीय परिवहन: स्टेशन से मंदिर तक जाने के लिए ऑटो–रिक्शा, ई–रिक्शा और टैक्सी उपलब्ध है।
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