प्रशासन गांव की ओर: दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े और एसपी सूरज कुमार वर्मा ने बीकर गांव में खटिया पर गुजारी रात
सादगी की मिसाल: जब आलीशान बंगला छोड़ गांव की ‘खटिया’ पर सोए कलेक्टर और एसपी
दतिया, मध्य प्रदेश: अक्सर देखा जाता है कि बड़े अधिकारी जब किसी गांव के दौरे पर जाते हैं, तो उनके रुकने और खाने-पीने के लिए महीनों पहले से वीआईपी इंतजाम किए जाते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के दतिया जिले में प्रशासन का एक बिल्कुल अलग और संवेदनशील चेहरा सामने आया है। दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े और एसपी सूरज कुमार वर्मा ने पूरी रात गांव में एक साधारण खटिया पर बिताकर सादगी की नई मिसाल पेश की है।
रात्रि चौपाल में सुनीं जनसमस्याएं
मामला दतिया जिले के बीकर गांव का है, जहां ‘प्रशासन गांव की ओर’ अभियान के तहत जिले के आला अधिकारी पहुंचे थे। कलेक्टर और एसपी ने केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं किया, बल्कि देर रात तक ‘रात्रि चौपाल’ लगाई। इस चौपाल में गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी बुनियादी समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखा। कलेक्टर वानखेड़े ने कई शिकायतों का निपटारा मौके पर ही कर दिया।
खुले आसमान के नीचे खाट पर बिताई रात
चौपाल खत्म होने के बाद जब अधिकारियों के रुकने की बात आई, तो उन्होंने किसी सर्किट हाउस या गेस्ट हाउस जाने के बजाय गांव में ही रुकने का फैसला किया। गांव वालों ने जब उनके लिए बिस्तर लगाने की पेशकश की, तो उन्होंने मना कर दिया और खुले आसमान के नीचे बिछी लकड़ी की साधारण खटिया (खाट) पर ही सोने चले गए। उनके साथ आए अन्य विभाग के अधिकारी भी पास ही सोए।
सुबह ग्रामीणों ने जब देखा तो रह गए दंग
जैसे ही सुबह हुई और ग्रामीणों ने देखा कि जिले के सबसे बड़े अधिकारी उनके बीच एक साधारण ग्रामीण की तरह सोकर उठे हैं, तो वे अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पाए। अधिकारियों की इस सहजता और सादगी को देख ग्रामीणों ने तालियों के साथ उनकी तारीफ की। सोशल मीडिया पर भी इस घटना की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं, जहां लोग इसे “जमीनी प्रशासन” का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।
बच्चों से संवाद और गांव का भ्रमण
सुबह उठने के बाद कलेक्टर और एसपी ने गांव की गलियों में पैदल भ्रमण किया। उन्होंने स्थानीय स्कूल का निरीक्षण किया और बच्चों से बात कर उन्हें मन लगाकर पढ़ने और जीवन में बड़े लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित किया।
अधिकारियों के इस व्यवहार ने न केवल ग्रामीणों का दिल जीता, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सरकारी तंत्र और आम जनता के बीच की दूरी को संवेदनशीलता और सादगी से कम किया जा सकता है।
ग्रामीणों की विशेष प्रतिक्रिया
गांव के एक बुजुर्ग, रामप्रसाद, ने भावुक होकर कहा— “हमने आज तक कई कलेक्टर देखे, जो लाल बत्ती वाली गाड़ियों में आते थे और धूल उड़ाते निकल जाते थे। लेकिन ये पहले साहब हैं जिन्होंने न केवल हमारी खाट पर बैठकर रोटी खाई, बल्कि हमारे साथ ही सो गए। अब हमें विश्वास है कि हमारी समस्याओं का समाधान जरूर होगा।”
वहीं गांव की महिलाओं ने कहा कि अधिकारियों के गांव में रुकने से उन्हें सुरक्षा और सम्मान का अहसास हुआ।
कलेक्टर द्वारा दिए गए प्रमुख आदेश
निरीक्षण और चौपाल के दौरान कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने मौके पर ही ये कड़े निर्देश जारी किए:
राशन वितरण में सुधार: कुछ ग्रामीणों ने राशन डीलर की शिकायत की थी, जिस पर कलेक्टर ने तत्काल जांच के आदेश दिए और चेतावनी दी कि यदि लापरवाही मिली तो लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।
स्कूल की बाउंड्री वॉल: गांव के स्कूल में सुरक्षा की कमी देख उन्होंने तत्काल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्कूल की बाउंड्री वॉल और शौचालय की मरम्मत का प्रस्ताव भेजने को कहा।
राजस्व मामलों का निपटारा: नामांतरण और बंटवारे के लंबित मामलों को लेकर उन्होंने पटवारी को अगले 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने का अल्टीमेटम दिया।
बिजली बिलों की जांच: बिजली विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गलत आए हुए भारी-भरकम बिलों की दोबारा जांच करें और ग्रामीणों को राहत दें।