UP ODOP Market Promotion Scheme 2026: व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों के लिए सरकार देगी मुफ्त स्टॉल और यात्रा भत्ता

उत्तर प्रदेश ग्लोबल ट्रेड शो में सजे ओडीओपी (ODOP) स्टॉल पर विदेशी और राष्ट्रीय खरीदारों से संवाद करते यूपी के स्थानीय हस्तशिल्पी और बुनकर।

उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) विपणन प्रोत्साहन योजना’ के तहत राज्य के पारंपरिक उद्यमियों, बुनकरों और हस्तशिल्पियों को उनके विशिष्ट स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में विपणन (Marketing) हेतु वित्तीय सहायता और स्टॉल सब्सिडी प्रदान की जाती है। उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग द्वारा संचालित यह योजना राज्य के सभी 75 जिलों के ऐतिहासिक उत्पादों (जैसे भदोही के विश्वप्रसिद्ध कालीन, लखनऊ की महीन चिकनकारी, आगरा के शानदार चमड़ा उत्पाद और कन्नौज के प्राकृतिक इत्र) को वैश्विक बाजारों से सीधे जोड़ने के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुई है। इस योजना का मुख्य दर्शन वैश्विक बाजार के मानकों के अनुरूप ‘मेक इन यूपी’ उत्पादों की विजिबिलिटी बढ़ाना और बिचौलियों के जाल को तोड़कर सीधे खरीदारों (Direct Buyers & Exporters) तक पहुंच बनाना है।

यदि आप उत्तर प्रदेश के एक ओडीओपी (ODOP) कारीगर, बुनकर या छोटे उद्यमी हैं और अपने स्थानीय उत्पादों को देश और दुनिया के बड़े व्यापार मेलों (Trade Fairs) में प्रदर्शित कर अपनी बिक्री को कई गुना बढ़ाना चाहते हैं, तो इस योजना के नियम, पात्रता और वित्तीय दावों की पूरी प्रक्रिया को समझना आपके लिए बेहद आवश्यक है।


1. योजना की पृष्ठभूमि और विपणन (Marketing) का महत्व

उत्तर प्रदेश की ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ODOP) योजना ने राज्य के पारंपरिक शिल्पों को एक नई पहचान दी है। लेकिन किसी भी उत्पाद की सफलता केवल उसके निर्माण तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी वास्तविक परीक्षा बाजार में होती है। छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों के उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह आती है कि वे बेहतरीन गुणवत्ता का उत्पाद तो बना लेते हैं, लेकिन उनके पास आधुनिक विपणन (Marketing), ब्रांडिंग और बड़े शहरों में होने वाले मेलों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन और ज्ञान नहीं होता।

एक ग्रामीण कारीगर के लिए दिल्ली, मुंबई, या विदेशों में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में स्टॉल बुक करना, वहां तक माल ले जाना और रहने-खाने का खर्च उठाना आर्थिक रूप से लगभग असंभव होता है। इसी कमजोरी को दूर करने और छोटे उद्यमियों को बड़े कॉरपोरेट खरीदारों के समकक्ष खड़ा करने के लिए ODOP विपणन प्रोत्साहन योजना (ODOP Market Promotion Scheme) की शुरुआत की गई। सरकार इन मेलों के खर्चों का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन करती है ताकि ‘लोकल’ उत्पादों को ‘ग्लोबल’ मंच मिल सके।


2. योजना के मुख्य उद्देश्य

इस महत्वाकांक्षी विपणन प्रोत्साहन कार्यक्रम के पीछे उत्तर प्रदेश सरकार के निम्नलिखित रणनीतिक उद्देश्य हैं:

  • बाजार का विस्तार (Market Expansion): ओडीओपी उत्पादों को जिला और राज्य स्तर से बाहर निकाल कर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना।
  • बिचौलियों का उन्मूलन: कारीगरों को सीधे थोक खरीदारों (Wholesalers) और निर्यातकों (Exporters) से मिलाना ताकि उन्हें अपने उत्पाद का शत-प्रतिशत वास्तविक मूल्य मिले।
  • ब्रांडिंग और पैकेजिंग में सुधार: अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों के मानकों को देखकर उद्यमियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लोगो और ब्रांडिंग को आधुनिक बनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स लिंकेज: शिल्पकारों को सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM पोर्टल) और बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ना ताकि मेलों के बाद भी उनकी ऑनलाइन बिक्री जारी रहे।

3. योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता और भत्ते (Financial Assistance & Subsidies)

इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत ओडीओपी हितधारकों को विभिन्न स्तरों पर व्यापक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिसका विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:

सहायता का प्रकारविवरण और अधिकतम वित्तीय सीमा
स्टॉल किराए पर सब्सिडी (Stall Subsidy)देश के भीतर आयोजित मेलों (जैसे प्रगति मैदान दिल्ली, सूरजकुंड मेला) में स्टॉल के किराए का 50% से 100% तक पुनर्भुगतान (Reimbursement)।
अंतरराष्ट्रीय मेलों में सहायतायदि कोई उद्यमी विदेश में आयोजित मेले में भाग लेता है, तो स्टॉल किराए और स्पेस शुल्क पर नियमों के अनुसार भारी सब्सिडी।
माल ढुलाई भत्ता (Freight Allowance)उत्पादों को अपने जिले से मेला स्थल तक ले जाने और वापस लाने के वास्तविक परिवहन खर्च (परिवहन रसीद के आधार पर) पर वित्तीय सहायता।
यात्रा भत्ता (Traveling Allowance – TA)मेले में भाग लेने के लिए उद्यमी और उसके एक सहयोगी को द्वितीय श्रेणी (2nd Class) रेल टिकट या बस किराए की प्रतिपूर्ति।
दैनिक भत्ता (Daily Allowance – DA)मेले के दिनों के दौरान भोजन और ठहरने के खर्चों को पूरा करने के लिए एक निश्चित दैनिक भत्ता।
  • विशेष श्रेणियों को वरीयता: महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अल्पसंख्यक और दिव्यांग कारीगरों को स्टॉल आवंटन और भत्तों के दावों में विशेष प्राथमिकता और उच्चतर स्लैब का लाभ दिया जाता है।

4. पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)

योजना का लाभ केवल उन्हीं हितधारकों को मिल सकता है जो निम्नलिखित पात्रता शर्तों को पूरी तरह संतुष्ट करते हैं:

  • मूल निवासी: आवेदक का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
  • ओडीओपी उत्पाद से सीधा जुड़ाव: आवेदक द्वारा उत्पादित वस्तु उसी जिले के लिए अधिसूचित ओडीओपी (ODOP) सूची का हिस्सा होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, कन्नौज का इत्र निर्माता या अलीगढ़ का ताला निर्माता ही क्रमशः अपने जिलों से पात्र होंगे।
  • वैध पंजीकरण: उद्यमी का उद्यम ‘उद्यम पंजीकरण’ (Udyam Registration) पोर्टल पर पंजीकृत होना चाहिए अथवा उसके पास हस्तशिल्प विभाग द्वारा जारी वैध शिल्पकार पहचान पत्र (Artisan ID Card) होना चाहिए।
  • समूह और संस्थाएं: व्यक्तिगत कारीगरों के अलावा स्वयं सहायता समूह (SHG), सहकारी समितियां, प्रोड्यूसर कंपनियां (FPOs) और ओडीओपी क्लस्टर्स भी सामूहिक रूप से इस योजना के तहत मेलों में भाग लेने के लिए पात्र हैं।
  • कर अनुपालन: आवेदक का उद्यम वित्तीय रूप से स्वच्छ होना चाहिए और किसी भी बैंक ऋण में डिफॉल्टर नहीं होना चाहिए।

5. आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Required Documents List)

किसी मेले या विपणन सहायता का लाभ उठाने अथवा मेले के बाद भत्तों का दावा (Claim) करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  1. आधार कार्ड और पैन कार्ड (व्यक्तिगत और व्यावसायिक)।
  2. उद्यम पंजीकरण प्रमाणपत्र या शिल्पकार पहचान पत्र (Artisan Card)।
  3. निवास प्रमाण पत्र (उत्तर प्रदेश के निवासी होने का साक्ष्य)।
  4. मेला आयोजक का आमंत्रण पत्र / स्टॉल आवंटन पत्र।
  5. स्टॉल किराए के भुगतान की मूल रसीद / इनवॉइस।
  6. वास्तविक यात्रा टिकट (Train/Bus Tickets) और माल ढुलाई (Transport/Courier) की रसीदें।
  7. बैंक पासबुक या कैंसिल चेक की प्रति (आधार से लिंक खाता, जिसमें डीबीटी के जरिए पैसा आएगा)।
  8. मेले के दौरान स्टॉल की दो रंगीन तस्वीरें (प्रमाण के तौर पर कि आवेदक ने वास्तव में प्रतिभाग किया था)।

6. आवेदन और चयन की प्रक्रिया (Step-by-Step Application Process)

उत्तर प्रदेश सरकार के MSME विभाग ने इस योजना की प्रक्रिया को बेहद सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल और भौतिक दोनों माध्यमों को एकीकृत किया है:

  1. विज्ञप्ति की निगरानी: राज्य के जिला उद्योग केंद्र (District Industries Centre – DIC) द्वारा समय-समय पर आगामी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों (जैसे- इंटरनेशनल ट्रेड शो, दिल्ली हाट, ताज महोत्सव आदि) के लिए ओडीओपी कारीगरों से आवेदन मांगे जाते हैं।
  2. ऑनलाइन पंजीकरण: इच्छुक उद्यमी उत्तर प्रदेश उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय के आधिकारिक पोर्टल (diupmsme.upsdc.gov.in) पर जाकर ‘ओडीओपी विपणन प्रोत्साहन योजना’ के तहत लॉग-इन करके अपना आवेदन पत्र भर सकते हैं।
  3. प्रदर्शनी का चयन: फॉर्म भरते समय आपको उस विशिष्ट मेले की जानकारी देनी होती है जिसमें आप भाग लेना चाहते हैं। साथ ही अपने उत्पादों की सूची और प्रोजेक्ट रिपोर्ट (यदि मांग की गई हो) संलग्न करनी होती है।
  4. जिला स्तरीय चयन: प्राप्त आवेदनों की जांच जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक (GM, DIC) द्वारा की जाती है। यदि सीटें सीमित हैं, तो एक समिति उत्पादों की विशिष्टता और गुणवत्ता के आधार पर योग्य कारीगरों का चयन कर उन्हें अनापत्ति/अनुशंसा पत्र जारी करती है।
  5. प्रतिभागिता और क्लेम सबमिशन: मेले में सफलतापूर्वक भाग लेने और अपने उत्पादों को बेचने के बाद, उद्यमी को 30 दिनों के भीतर अपने सभी वास्तविक बिल (किराया, माल ढुलाई, टिकट) पोर्टल पर अपलोड करने होते हैं। विभाग भौतिक सत्यापन के बाद स्वीकृत धनराशि सीधे उद्यमी के बैंक खाते में भेज देता है।

7. ओडीओपी विपणन योजना का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

इस योजना के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बाद से उत्तर प्रदेश के निर्यात और ग्रामीण रोजगार में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच: उत्तर प्रदेश के इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) और दिल्ली के प्रगति मैदान में लगने वाले व्यापार मेलों के माध्यम से यूपी के छोटे बुनकरों और पीतल कारीगरों को अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों के बड़े खरीदार मिले हैं, जिससे उनका निर्यात कई गुना बढ़ गया है।
  • डिजिटल ब्रांडिंग का उदय: मेलों में मिलने वाले एक्सपोजर के कारण पारंपरिक कारीगरों ने अपने ब्रांड के बारकोड, आधुनिक पैकेजिंग और सोशल मीडिया मार्केटिंग को अपनाना शुरू कर दिया है।
  • आर्थिक आत्मनिर्भरता: बिचौलियों के पूरी तरह समाप्त होने से कारीगरों का शुद्ध मुनाफा सीधे बढ़ा है, जिससे वे अपने कार्यशालाओं (Workshops) का विस्तार कर पा रहे हैं और नए स्थानीय युवाओं को रोजगार दे रहे हैं।

निष्कर्ष और आगे की राह

उत्तर प्रदेश एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) विपणन प्रोत्साहन योजना राज्य के स्वदेशी हुनर को दुनिया के सबसे बड़े कॉपोरेट और उपभोक्ता बाजारों से जोड़ने का एक बेहद सशक्त और दूरदर्शी माध्यम है। यह योजना इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे सरकार और स्थानीय उद्यमी मिलकर किसी पारंपरिक कला को एक मुनाफे वाले वैश्विक व्यवसाय में बदल सकते हैं।

यदि आप भी उत्तर प्रदेश के एक ओडीओपी उत्पाद निर्माता हैं, तो आपको इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने दस्तावेज़ और उद्यम पंजीकरण हमेशा अपडेट रखने चाहिए। सरकार के इस विपणन मंच का सही उपयोग करके आप न केवल अपने व्यवसाय को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और ‘वोकल फॉर लोकल’ के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में अपनी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


उत्तर प्रदेश एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) विपणन प्रोत्साहन योजना से जुड़े कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

प्रश्न 1: उत्तर प्रदेश एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) विपणन प्रोत्साहन योजना क्या है?
उत्तर: यह उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग द्वारा संचालित एक विशेष योजना है। इसके तहत राज्य के 75 जिलों में चिन्हित विशिष्ट ओडीओपी (ODOP) उत्पादों (जैसे अलीगढ़ के ताले, कन्नौज के इत्र, भदोही के कालीन आदि) से जुड़े कारीगरों, बुनकरों और उद्यमियों को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों (Exhibitions) और मेलों में अपने उत्पादों की ब्रांडिंग, विपणन (Marketing) और सीधी बिक्री के लिए वित्तीय सहायता और मुफ्त स्टॉल की सुविधा प्रदान की जाती है।

प्रश्न 2: इस योजना के अंतर्गत मुख्य रूप से कौन-कौन से वित्तीय लाभ मिलते हैं?
उत्तर: योजना के अंतर्गत पंजीकृत ओडीओपी कारीगरों को निम्नलिखित वित्तीय सहायता दी जाती है:

  • स्टॉल किराया सब्सिडी: राष्ट्रीय/राज्यीय प्रदर्शनियों और मेलों में लगने वाले स्टॉल के किराए पर 50% से लेकर 100% तक का पुनर्भुगतान (Reimbursement)।
  • यात्रा भत्ता (TA): मेले में आने-जाने के लिए द्वितीय श्रेणी (Second Class) रेल किराया या बस किराए की सुविधा।
  • माल ढुलाई (Freight Charges): उत्पादों को अपने गृह जनपद से मेला स्थल तक सुरक्षित ले जाने और वापस लाने के परिवहन खर्च पर सब्सिडी।
  • दैनिक भत्ता (DA): मेले की अवधि के दौरान बुनियादी दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए निश्चित भत्ता।

प्रश्न 3: इस योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे अनिवार्य पात्रता क्या है?
उत्तर: सबसे अनिवार्य शर्त यह है कि आवेदक द्वारा निर्मित उत्पाद उसी जिले के लिए निर्धारित आधिकारिक ओडीओपी (ODOP) सूची के अंतर्गत आना चाहिए। इसके अतिरिक्त, आवेदक के पास केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी वैध शिल्पकार पहचान पत्र (Artisan ID Card) या एमएसएमई (MSME) उद्यम पंजीकरण प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।

प्रश्न 4: क्या इस योजना के तहत ई-कॉमर्स (Online Marketing) के लिए भी कोई सहायता मिलती है?
उत्तर: हाँ, इस योजना के आधुनिक विंग के तहत पारंपरिक कारीगरों और उद्यमियों को डिजिटल बनाने के लिए अमेज़न, फ्लिपकार्ट और सरकारी GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जाता है। इसके लिए उन्हें डिजिटल कैटलॉग बनाने, बारकोडिंग और ऑनलाइन ऑनबोर्डिंग के खर्चों पर भी सरकारी प्रोत्साहन मिलता है।

प्रश्न 5: क्या महिला और आरक्षित वर्ग के उद्यमियों को इस योजना में कोई विशेष छूट मिलती है?
उत्तर: हाँ, समाज के समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के लिए योजना के तहत महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PH) वर्ग के कारीगरों को स्टॉल आवंटन में विशेष प्राथमिकता दी जाती है और कई बड़े मेलों में उन्हें स्टॉल के किराए पर 100% की पूरी छूट (पूर्ण सब्सिडी) प्रदान की जाती है।

प्रश्न 6: योजना के तहत प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए आवेदन कैसे और कहाँ करना होता है?
उत्तर: इस योजना की अधिकांश प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल कर दिया गया है। इच्छुक उद्यमी उत्तर प्रदेश उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय के आधिकारिक पोर्टल (diupmsme.upsdc.gov.in) पर जाकर ‘ओडीओपी विपणन प्रोत्साहन योजना’ के तहत ऑनलाइन पंजीकरण कर आगामी मेलों की सूची देख सकते हैं। इसके अलावा, अपने जिले के विकास भवन स्थित जिला उद्योग केंद्र (District Industries Centre – DIC) के महाप्रबंधक कार्यालय में जाकर ऑफलाइन माध्यम से भी आवेदन पत्र और आगामी प्रदर्शनियों की सटीक समय-सारणी प्राप्त की जा सकती है।


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