UP Free Boring Scheme 2026: लघु सिंचाई विभाग ऑनलाइन आवेदन व पात्रता गाइड

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उत्तर प्रदेश उथले नलकूप फ्री बोरिंग योजना 2026-27: एक विस्तृत एवं संपूर्ण मार्गदर्शिका
उत्तर प्रदेश उथले नलकूप फ्री बोरिंग योजना 2026-27 (UP Shallow Tube Well Free Boring Scheme) राज्य सरकार के नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग तथा लघु सिंचाई विभाग (Minor Irrigation Department) द्वारा संचालित एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं किसान-कल्याणकारी पहल है। उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ की लगभग 70% से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है। फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए सबसे बुनियादी आवश्यकता समय पर उचित सिंचाई (Irrigation) की होती है।
राज्य के कई क्षेत्रों में छोटे और सीमांत किसानों के पास सिंचाई के निजी साधन (जैसे ट्यूबवेल या पंपसेट) नहीं हैं, और वे सिंचाई के लिए मानसून की बारिश या बड़े काश्तकारों के महंगे साधनों पर निर्भर रहते हैं। इसी समस्या को जड़ से समाप्त करने और गरीब किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निःशुल्क बोरिंग (फ्री बोरिंग) योजना चलाई जा रही है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के नए बजट प्रावधानों के अनुसार, योजना के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़े व सामान्य वर्ग के लघु व सीमांत किसानों को अपने खेतों में उथले नलकूप (Shallow Tube Well) लगवाने के लिए बोरिंग के खर्च पर भारी सब्सिडी और वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इस लेख में हम इस योजना के उद्देश्य, पात्रता, वित्तीय ढांचे, आवश्यक दस्तावेजों और ऑनलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
🎯 योजना का मुख्य उद्देश्य और विजन
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित उथले नलकूप फ्री बोरिंग योजना के पीछे एक सुव्यवस्थित कृषि एवं सामाजिक दृष्टिकोण है:
- सिंचाई सुविधाओं का विस्तार: राज्य के उन क्षेत्रों में जहाँ भूजल स्तर (Ground Water Level) अनुकूल है, वहाँ उथले नलकूपों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाना।
- किसानों की आय दोगुनी करना: समय पर और कम लागत में सिंचाई उपलब्ध होने से फसलों की पैदावार बढ़ती है, जिससे किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि होती है।
- छोटे किसानों को आर्थिक राहत: निजी तौर पर बोरिंग कराने में आने वाले हजारों रुपये के भारी खर्च से लघु और सीमांत किसानों को मुक्त करना।
- जल संचयन और कुशल उपयोग: फ्री बोरिंग योजना के साथ-साथ किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर (टपकदार एवं फव्वारा) सिंचाई प्रणालियों के लिए भी प्रेरित करना ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके।
💰 वित्तीय सहायता और सब्सिडी की संरचना (Subsidy Structure)
वित्तीय वर्ष 2026-27 के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता और अनुदान को श्रेणियों (Categories) के आधार पर विभाजित किया गया है ताकि समाज के सबसे कमजोर वर्ग को अधिकतम लाभ मिल सके:
1. सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के किसान
- लघु किसान (Small Farmers): जिन किसानों के पास 1 हेक्टेयर से 2 हेक्टेयर तक कृषि योग्य भूमि है, उन्हें बोरिंग कार्य के लिए अधिकतम ₹5,000 तक का अनुदान दिया जाता है।
- सीमांत किसान (Marginal Farmers): जिन किसानों के पास 1 हेक्टेयर से कम भूमि है, उन्हें बोरिंग कार्य के लिए अधिकतम ₹7,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है।
2. अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के किसान
- इस वर्ग के लघु और सीमांत किसानों के लिए सरकार ने विशेष उदारता दिखाई है। इन्हें बोरिंग कार्य के लिए अधिकतम ₹10,000 तक की अनुदान राशि दी जाती है।
- अतिरिक्त लाभ: यदि बोरिंग के दौरान पथरीली जमीन या कोई तकनीकी समस्या आती है, तो इन वर्गों के किसानों को इन-वेल बोरिंग (In-Well Boring) के लिए भी अतिरिक्त सहायता का प्रावधान है।
3. पंपसेट (Pump-set) खरीद पर अतिरिक्त सब्सिडी
बोरिंग सफल होने के बाद पानी निकालने के लिए पंपसेट खरीदने हेतु सरकार द्वारा अलग से बैंक लोन की व्यवस्था कराई जाती है और उस पर भी सब्सिडी दी जाती है:
- सामान्य और ओबीसी वर्ग के किसानों को पंपसेट पर अधिकतम ₹4,500 तक का अनुदान।
- अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के किसानों को पंपसेट खरीद पर अधिकतम ₹6,000 तक का अनुदान।
👥 विस्तृत पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) 2026-27
योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक ही पहुंचे, इसके लिए लघु सिंचाई विभाग ने निम्नलिखित पात्रता शर्तें तय की हैं:
- मूल निवास: आवेदक किसान अनिवार्य रूप से उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- जोत सीमा (Land Holding): यह योजना विशेष रूप से लघु और सीमांत किसानों के लिए है। आवेदक के पास न्यूनतम 0.2 हेक्टेयर और अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की ही कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए। बड़े जमींदार इस योजना के पात्र नहीं हैं।
- सामूहिक बोरिंग (Cluster Boring) का विकल्प: यदि किसी अकेले सीमांत किसान के पास भूमि 0.2 हेक्टेयर से कम है, तो ऐसे छोटे किसान आपस में मिलकर (न्यूनतम 3-4 किसान) सामूहिक रूप से एक ही नलकूप के लिए आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उनकी कुल मिलाकर भूमि जोत की सीमा शर्तों को पूरा करती हो।
- डार्क ज़ोन (Dark Zone) में प्रतिबंध: भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए, उत्तर प्रदेश के जिन विकास खंडों (Blocks) को भूगर्भ जल विभाग द्वारा ‘डार्क ज़ोन’ या ‘अतिदोहित क्षेत्र’ घोषित किया गया है, वहाँ इस योजना के तहत नई बोरिंग की अनुमति नहीं दी जाती है।
- पहले लाभ न लिया हो: किसान ने पिछले 5 से 10 वर्षों के भीतर केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य सरकारी नलकूप या बोरिंग योजना का लाभ न लिया हो।
📄 आवश्यक दस्तावेज (Important Documents)
ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करते समय किसानों को निम्नलिखित वैध दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
- आवेदक किसान का आधार कार्ड (पहचान और पते के सत्यापन हेतु)
- निवास प्रमाण पत्र (उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होने का साक्ष्य)
- भूमि के दस्तावेज (अत्यंत महत्वपूर्ण): जमीन की नवीनतम खतौनी (भूलेख नकल) और खेत का नक्शा (गाटा संख्या स्पष्ट होना चाहिए)।
- जाति प्रमाण पत्र: अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के किसानों के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी डिजिटल जाति प्रमाण पत्र।
- बैंक पासबुक की प्रति: किसान का अपना व्यक्तिगत बैंक खाता होना चाहिए जो आधार से लिंक और NPCI पर मैप हो ताकि सब्सिडी राशि सीधे खाते में आ सके।
- लघु/सीमांत किसान होने का प्रमाण पत्र: तहसील के राजस्व अधिकारी (लेखपाल) द्वारा जारी लघु/सीमांत कृषक प्रमाण पत्र।
- नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो और एक सक्रिय मोबाइल नंबर।
📝 ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन की विस्तृत प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है। किसान इसे ऑनलाइन लघु सिंचाई विभाग के आधिकारिक पोर्टल या ऑफलाइन विकास खंड कार्यालय के माध्यम से कर सकते हैं।
क. ऑनलाइन आवेदन के चरण:
- उत्तर प्रदेश लघु सिंचाई विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या राज्य के ई-डिस्ट्रिक्ट (e-District UP) पोर्टल पर जाएं।
- होमपेज पर “उथले नलकूप फ्री बोरिंग योजना हेतु आवेदन” या “नया पंजीकरण” लिंक पर क्लिक करें।
- फॉर्म में अपनी व्यक्तिगत जानकारी, मोबाइल नंबर, जाति श्रेणी और अपने खेत का विवरण (गाटा संख्या/खतौनी नंबर) सही-सही दर्ज करें।
- अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों (खतौनी, आधार, जाति प्रमाण पत्र) को स्पष्ट रूप से स्कैन करके अपलोड करें।
- फॉर्म को रीव्यू करने के बाद “Submit” बटन पर क्लिक करें और जेनरेट हुई आवेदन रसीद (Acknowledgement Slip) का प्रिंटआउट ले लें।
ख. ऑफलाइन आवेदन के चरण (ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सबसे सुलभ):
- अपने विकास खंड (Block) के लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता (Assistant Engineer) या खंड विकास अधिकारी (BDO) कार्यालय में जाएं।
- वहां से योजना का आधिकारिक आवेदन पत्र मुफ्त प्राप्त करें।
- फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियां स्पष्ट अक्षरों में भरें और अपनी खतौनी, आधार व जाति प्रमाण पत्र की स्व-प्रमाणित फोटोकॉपी संलग्न करें।
- भरे हुए फॉर्म को अपने क्षेत्र के राजस्व लेखपाल से सत्यापित कराएं (लेखपाल फॉर्म पर रिपोर्ट लिखेगा कि भूमि जोत सीमा सही है और जमीन पर पहले से कोई सरकारी बोरिंग नहीं है)।
- सत्यापित फॉर्म को विकास खंड कार्यालय या तहसील के लघु सिंचाई कार्यालय में जमा कर दें।
⚙️ सत्यापन और बोरिंग निर्माण की प्रक्रिया (Execution)
- तकनीकी जांच: आवेदन जमा होने के बाद लघु सिंचाई विभाग के बोरिंग तकनीशियन (Boring Technician) आपके खेत का दौरा करते हैं। वे देखते हैं कि स्थल पर पानी का स्तर (Water Table) कैसा है और क्या वहाँ बोरिंग मशीन आसानी से पहुँच सकती है।
- स्वीकृति और वर्क ऑर्डर: पात्रता और तकनीकी जांच सफल होने पर विभाग द्वारा ‘बोरिंग ऑर्डर’ जारी किया जाता है।
- बोरिंग का कार्य: विभाग द्वारा पंजीकृत कुशल मिस्त्रियों और रिग मशीनों के माध्यम से किसान के खेत में बोरिंग का कार्य संपन्न कराया जाता है। इसमें लगने वाली पाइप (PVC Pipes) और फिल्टर सामग्री के लिए अनुदान की राशि सीधे वेंडर या किसान के खाते में समायोजित की जाती है।
🌟 निष्कर्ष (Conclusion)
उत्तर प्रदेश उथले नलकूप फ्री बोरिंग योजना 2026-27 राज्य के लघु और सीमांत किसानों के लिए एक वरदान की तरह है। खेती में सिंचाई की उच्च लागत को कम करके यह योजना छोटे किसानों को कर्ज के जाल से बचाती है। अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों के लिए ₹10,000 तक की बढ़ी हुई सहायता राशि और पंपसेट पर अतिरिक्त सब्सिडी सरकार की सामाजिक न्याय के प्रति कटिबद्धता को दर्शाती है।
सभी पात्र किसानों को यह सलाह दी जाती है कि वे अपने नजदीकी विकास खंड कार्यालय में जाकर चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत अपना आवेदन जल्द से जल्द जमा करें, ताकि समय रहते रबी या खरीफ की फसल की बुवाई से पहले वे अपने खेतों में निजी सिंचाई साधन स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकें।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या फ्री बोरिंग योजना के तहत मिलने वाला पैसा नकद (Cash) में मिलता है?
नहीं। बोरिंग कार्य के लिए स्वीकृत की जाने वाली अनुदान राशि किसी भी रूप में नकद नहीं दी जाती है। यह राशि डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे किसान के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में भेजी जाती है या बोरिंग के लिए अधिकृत सामग्री (जैसे पाइप और फिल्टर) की आपूर्ति करने वाली नोडल एजेंसी/फर्म को हस्तांतरित की जाती है।
Q2. मेरे पास केवल 0.1 हेक्टेयर जमीन है, क्या मुझे इस योजना का लाभ मिल सकता है?
व्यक्तिगत रूप से आवेदन करने के लिए न्यूनतम सीमा 0.2 हेक्टेयर है। लेकिन यदि आपकी भूमि कम है, तो आप अपने आस-पास के 2 या 3 अन्य छोटे किसानों के साथ मिलकर ‘सामूहिक बोरिंग’ (Cluster Boring) के तहत आवेदन कर सकते हैं। इस स्थिति में बोरिंग एक ही खेत में होगी लेकिन उसका उपयोग सभी संबंधित किसान मिलकर कर सकेंगे।
Q3. क्या पथरीले या पहाड़ी क्षेत्रों (जैसे बुंदेलखंड) में भी उथली बोरिंग कराई जा सकती है?
नहीं। यह योजना केवल ‘उथले नलकूपों’ के लिए है जो मैदानी और उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं जहाँ भूजल स्तर ऊपर (लगभग 30 से 60 फीट) है। बुंदेलखंड, विंध्याचल या पथरीले क्षेत्रों के लिए सरकार द्वारा ‘मध्यम गहरे नलकूप’ या ‘गहरे नलकूप’ (Deep Tube Well) की अलग योजनाएं चलाई जाती हैं, क्योंकि वहां रिग मशीनों और हैवी ब्लास्टिंग की आवश्यकता होती है।
Q4. क्या फ्री बोरिंग कराने के बाद सरकार बिजली का कनेक्शन भी मुफ्त देती है?
फ्री बोरिंग योजना के अंतर्गत केवल नलकूप की बोरिंग और पंपसेट खरीद पर ही सब्सिडी दी जाती है। नलकूप को चलाने के लिए बिजली कनेक्शन या सौर ऊर्जा पंप (जैसे प्रधानमंत्री कुसुम योजना) के लिए किसान को विद्युत विभाग या कृषि विभाग के पोर्टल पर अलग से नियमानुसार आवेदन करना होता है।
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