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Chinese App Behind Viral E-Rickshaw Shutdown: सावधान ई-रिक्शा चालक! इन चीनी ऐप्स से तुरंत बचाएं अपनी लिथियम बैटरी!

An electric e-rickshaw stopped on an Indian road with a smartphone displaying a Chinese battery management app

चीनी बैटरी मैनेजमेंट ऐप्स (BMS) में सुरक्षा चूक के कारण सड़कों पर अचानक थम रही है ई-रिक्शा की रफ्तार।

भारत सरकार ने एक बड़े डिजिटल सुरक्षा एक्शन के तहत देश भर में ई-रिक्शा चालकों के लिए बड़ी मुसीबत बने 7 चीनी बैटरी मैनेजमेंट ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर से हटाने का सख्त आदेश दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने यह कदम तब उठाया जब देश के कई राज्यों से लगातार ऐसी शिकायतें और वीडियो सामने आए कि शरारती तत्व राह चलते ई-रिक्शों की बैटरी को ब्लूटूथ के जरिए दूर बैठे ही लॉक (रिमोट शटडाउन) कर रहे थे। इन प्रतिबंधित ऐप्स में BAT-BMS, Smart BMS, Lossigy, और Epoch Li-ion जैसे नाम प्रमुखता से शामिल हैं, जिन्होंने भारत के सबसे बड़े अनौपचारिक परिवहन नेटवर्क यानी ई-रिक्शा (स्थानीय भाषा में ‘टिटरी’) की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लगा दिया था।

तकनीक की इस गंभीर सुरक्षा चूक ने न केवल हजारों गरीब ई-रिक्शा चालकों की दैनिक आजीविका को संकट में डाला, बल्कि सड़कों पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी एक अभूतपूर्व साइबर खतरा पैदा कर दिया। आइए इस विस्तृत लेख के माध्यम से पूरी घटना, इन ऐप्स के काम करने के तरीके, भारतीय सड़कों पर इसके असर और सरकार द्वारा की गई बड़ी डिजिटल स्ट्राइक को गहराई से समझते हैं।


Table of Contents

संकट की शुरुआत: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और रहस्यमयी पड़ाव

जुलाई 2026 की शुरुआत में, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और राजस्थान के कई शहरों से सोशल मीडिया पर कई हैरान करने वाले वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। इन वीडियो में देखा गया कि चलती हुई सड़क पर बिना किसी तकनीकी खराबी या एक्सीडेंट के अचानक ई-रिक्शा एकदम बंद हो जाते थे।

गाड़ी चला रहे चालक पूरी तरह से असहाय और भ्रमित नजर आ रहे थे। वे बार-बार चाबी घुमाते, तारों को चेक करते, लेकिन गाड़ी में न तो कोई लाइट जलती और न ही वह टस से मस होती। वहीं दूसरी तरफ, सड़क के किनारे या किसी गाड़ी में बैठे कुछ लोग मोबाइल स्क्रीन पर एक सिंगल क्लिक करके इन ई-रिक्शों को बंद करने का तमाशा देख रहे थे और इसे ‘प्रैंक’ (मजाक) के तौर पर रिकॉर्ड कर रहे थे।

शुरुआत में इसे सामान्य प्रैंक समझा गया, लेकिन बहुत जल्द यह एक संगठित परेशानी और जबरन वसूली का माध्यम बन गया। हरियाणा के हांसी और दिल्ली के मालवीय नगर जैसे इलाकों में ऐसे शरारती गैंग सक्रिय हो गए, जो सड़कों पर ई-रिक्शा को चलते-चलते रिमोटली बंद कर देते थे और फिर गाड़ी को अनलॉक करने के एवज में गरीब ड्राइवरों से पैसों की मांग करते थे।

वायरल वीडियो का पूरा सच: सड़कों पर क्या हो रहा है?

जुलाई 2026 के शुरुआती हफ्तों में दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार और राजस्थान के कई प्रमुख शहरों से लगातार कुछ अजीबोगरीब वीडियो इंटरनेट पर सामने आने लगे। इन वीडियो में देखा जा सकता है कि:

शुरुआत में इन वीडियो को सोशल मीडिया पर केवल एक मनोरंजक ‘प्रैंक’ (मजाक) और व्यूज बटोरने के माध्यम से देखा गया। लेकिन बहुत जल्द यह प्रैंक एक बड़े सिरदर्द में बदल गया। कई शहरों में कुछ शरारती तत्वों और स्थानीय लड़कों ने इसे एक खेल बना लिया, जिससे हर दिन सैकड़ों ई-रिक्शा चालक बीच सड़क पर बिना किसी कसूर के परेशान होने लगे।


ये 7 ऐप्स कैसे काम करते थे? तकनीकी चूक का विश्लेषण

यह पूरा खेल लिथियम-आयन (Lithium-ion) बैटरी और उसमें लगे बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) के बीच की एक बहुत बड़ी सुरक्षा खामी (Vulnerability) पर आधारित था। दरअसल, आधुनिक ई-रिक्शा में जो लिथियम बैटरियां इस्तेमाल की जाती हैं, उनकी सेहत, तापमान, वोल्टेज और चार्जिंग स्टेटस को मॉनिटर करने के लिए चीन निर्मित ‘स्मार्ट बीएमएस’ सॉफ्टवेयर लगा होता है।

इन 7 चीनी ऐप्स (जैसे BAT-BMS और Lossigy) को इसी मकसद से डिजाइन किया गया था ताकि यूजर बिना किसी तार के ब्लूटूथ के जरिए सीधे बैटरी के मापदंडों को देख सकें। लेकिन, इन ऐप्स में तीन बेहद खतरनाक तकनीकी खामियां थीं:

  1. कोई ऑथेंटिकेशन या पासवर्ड सुरक्षा न होना: अधिकांश ई-रिक्शा जब खरीदे जाते हैं, तो उनकी बैटरी का ब्लूटूथ पासवर्ड या तो होता ही नहीं है, या फिर ‘12345’ या ‘00000’ जैसा बेहद आसान डिफॉल्ट पासवर्ड होता है।
  2. बिना आईडी लॉगिन के उपयोग: इन चीनी ऐप्स की सबसे बड़ी खासियत (या कमजोरी) यह थी कि इन्हें फोन में डाउनलोड करने के बाद किसी भी तरह का अकाउंट, ईमेल आईडी या रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होती थी। कोई भी व्यक्ति बिना अपनी पहचान उजागर किए इसका सीधा इस्तेमाल कर सकता था।
  3. 15 मीटर की रेंज और रिमोट डिस्चार्ज स्विच: जैसे ही कोई व्यक्ति इस ऐप को ऑन करता था, उसे 10 से 15 मीटर के दायरे में मौजूद सभी लिथियम बैटरियों के सिग्नल और नाम अपनी स्क्रीन पर दिखाई देने लगते थे। ऐप के भीतर एक ‘डिस्चार्ज स्विच’ (Discharge Switch) बटन होता था। इस बटन पर एक सिंगल टैप करते ही बैटरी से मिलने वाली पावर सप्लाई पूरी तरह कट जाती थी और गाड़ी बीच रास्ते में ठप हो जाती थी।

गाड़ी को दोबारा तभी चालू किया जा सकता था, जब उसी ऐप के जरिए डिस्चार्ज स्विच को वापस ऑन किया जाए, या फिर किसी अधिकृत सर्विस सेंटर पर जाकर भारी-भरकम फीस देकर बैटरी का लॉक खुलवाया जाए।


गरीब चालकों और सार्वजनिक सुरक्षा पर पड़ा गंभीर असर

भारत में ई-रिक्शा केवल एक वाहन नहीं है, बल्कि यह लाखों परिवारों की रोजी-रोटी का इकलौता साधन है। इस तकनीकी हमले ने जमीनी स्तर पर व्यापक नुकसान पहुंचाया:


भारत सरकार का कड़ा एक्शन: नई डिजिटल स्ट्राइक

इस पूरे मामले की गंभीरता और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने तुरंत आपातकालीन कदम उठाए। सरकार ने गूगल और एप्पल को तत्काल प्रभाव से नोटिस जारी कर इन सभी 7 बैटरी-लिंक्ड ऐप्स को अपने-अपने ऐप स्टोर से ब्लॉक और डिलीट करने के निर्देश दिए।

आईटी सचिव एस. कृष्णन ने एक साइबर सुरक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान स्पष्ट किया कि ऐप स्टोर प्लेटफॉर्म्स को अपने स्टोर पर मौजूद ऐप्स की सख्त जांच-पड़ताल (Due Diligence) करनी होगी, विशेष रूप से उन ऐप्स की जो सीधे तौर पर भौतिक उपकरणों (Connected Devices) को प्रभावित करते हैं और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। सरकार ने चेतावनी भी दी है कि यदि इस तरह की हरकत करने वाला कोई अन्य ऐप भी पाया जाता है, तो उसे भी तुरंत प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

यह प्रतिबंध वर्ष 2020 में गलवान घाटी गतिरोध के बाद चीनी ऐप्स (जैसे टिकटॉक, पबजी, शैन) पर की गई डिजिटल स्ट्राइक से काफी अलग और अधिक गंभीर है। पहले के प्रतिबंध मुख्य रूप से डेटा चोरी, संप्रभुता और वित्तीय धोखाधड़ी पर आधारित थे। लेकिन यह पहली बार है जब किसी विदेशी ऐप द्वारा भारत की सड़कों पर चल रहे वाहनों को भौतिक रूप से नियंत्रित या प्रभावित (Remote Interference) करने के कारण प्रतिबंध लगाया गया है।


ई-रिक्शा चालकों के लिए सुरक्षा गाइडलाइन: खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

भले ही सरकार ने इन प्राथमिक 7 ऐप्स को स्टोर से हटा दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी रूप से सुरक्षा को पूरी तरह पुख्ता करने के लिए वाहन मालिकों और चालकों को भी जागरूक होना पड़ेगा। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने जरूरी हैं:

सुरक्षा उपायविवरण और उठाए जाने वाले कदम
डिफॉल्ट पासवर्ड बदलेंई-रिक्शा खरीदने के तुरंत बाद अपने ईवी डीलर या अधिकृत सर्विस सेंटर के पास जाएं और बैटरी का इन-बिल्ट ब्लूटूथ पासवर्ड बदलवाएं।
मजबूत पासवर्ड रखें‘1234’ जैसे सामान्य पासवर्ड की जगह एक जटिल पासवर्ड सेट करें ताकि कोई भी नजदीकी ऐप आपकी बैटरी से कनेक्ट न हो सके।
ब्लूटूथ बंद रखेंयदि आपकी बैटरी में ब्लूटूथ को मैनुअली ऑफ करने का विकल्प है, तो जरूरत न होने पर उसे हमेशा बंद रखें।
अधिकृत ऐप्स का ही उपयोग करेंअपनी बैटरी की निगरानी के लिए केवल वाहन निर्माता द्वारा सुझाए गए प्रमाणित और सुरक्षित भारतीय ऐप्स का ही इस्तेमाल करें।
साइबर सेल में शिकायत करेंयदि ऐप स्टोर से हटने के बावजूद किसी के पास पहले से डाउनलोडेड ऐप के जरिए आपकी गाड़ी को कोई बंद करता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं।

भविष्य की राह: ईवी सेक्टर में मानकीकरण (Standardisation) की जरूरत

इस घटना ने भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग के सामने एक बड़ा सबक पेश किया है। वर्तमान में भारत में बिकने वाले कई सस्ते ई-रिक्शों में जो क्रिटिकल कंपोनेंट्स (जैसे बैटरी और BMS) इस्तेमाल होते हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से चीन से आयात किए जाते हैं या उनके सॉफ्टवेयर सर्वर विदेशी होते हैं।

भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार अब ईवी कंपोनेंट्स के लिए सख्त स्थानीयकरण और कड़े सुरक्षा मानकों (Cybersecurity Standards) पर काम कर रही है। इंटरनेट और ब्लूटूथ से जुड़े किसी भी वाहन प्रबंधन प्रणाली में अब अनिवार्य बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण या अनिवार्य पासवर्ड परिवर्तन जैसे नियम लागू किए जा सकते हैं। तकनीकी प्रगति निश्चित रूप से देश को आगे ले जा रही है, लेकिन जब तक इसके साथ सुरक्षा की दीवार मजबूत नहीं होगी, तब तक इस तरह के डिजिटल खतरे देश की रफ्तार को रोकते रहेंगे।


यदि आप एक ई-रिक्शा मालिक हैं या आपके परिचित इसका संचालन करते हैं, तो क्या आपने अपनी गाड़ी की बैटरी का ब्लूटूथ पासवर्ड बदला है? सुरक्षा संबंधी किसी भी अन्य समस्या या तकनीकी सहायता के लिए आप अपने वाहन डीलर से तुरंत संपर्क कर सकते हैं। इस विषय में अधिक जानकारी या अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए आप सरकार के आधिकारिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का भी उपयोग कर सकते हैं।


लिथियम बैटरी का ब्लूटूथ पासवर्ड बदलने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

यदि आपके पास वह ऐप (जैसे आधिकारिक निर्माता का ऐप) मौजूद है जो आपकी बैटरी को सपोर्ट करता है, तो आप खुद भी पासवर्ड बदल सकते हैं। सुरक्षा के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करें:

नोट: यदि आपको ऐप चलाने में कोई दिक्कत आ रही है, तो खुद जोखिम न लें। तुरंत अपने ई-रिक्शा डीलर या बैटरी के सर्विस सेंटर पर जाएं, वे कंप्यूटर या टूल के जरिए 2 मिनट में इसका पासवर्ड बदल देंगे।


साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने का तरीका

यदि कोई शरारती तत्व ऐप के जरिए आपकी चलती गाड़ी को बंद करता है, आपको परेशान करता है या गाड़ी चालू करने के बदले पैसों की मांग (जबरन वसूली) करता है, तो आप इस तरह ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं:

शिकायत दर्ज होते ही आपको स्क्रीन पर और आपके मोबाइल नंबर पर एक Complaint Reference Number (पावती संख्या) मिल जाएगी। इस नंबर के जरिए पुलिस मामले की जांच करेगी और आप अपनी शिकायत का स्टेटस भी ट्रैक कर सकेंगे।

यहाँ इन चीनी ऐप्स और ई-रिक्शा रिमोट शटडाउन विवाद से जुड़े कुछ सबसे महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) दिए गए हैं:

⚙️ तकनीकी और कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल

प्रश्न 1: चीनी ऐप्स किसी ई-रिक्शा को दूर से कैसे बंद कर सकते थे?

प्रश्न 2: इन ऐप्स की ब्लूटूथ रेंज कितनी होती है, यानी कोई कितनी दूर से गाड़ी बंद कर सकता था?

प्रश्न 3: सरकार ने किन चीनी बैटरी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया है?


🛡️ सुरक्षा और बचाव से जुड़े सवाल

प्रश्न 4: मैं कैसे जान सकता हूँ कि मेरे ई-रिक्शा की बैटरी सुरक्षित है या नहीं?

प्रश्न 5: कोई अजनबी मेरी बैटरी का पासवर्ड कैसे जान जाता था?

प्रश्न 6: मैं अपनी गाड़ी की बैटरी को इस डिजिटल खतरे से कैसे सुरक्षित करूँ?


⚖️ कानूनी और शिकायत संबंधी सवाल

प्रश्न 7: क्या ऐप स्टोर से हटने के बाद यह खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है?

प्रश्न 8: यदि कोई मेरी गाड़ी को इस तरह बंद करके पैसे मांगता है, तो मुझे क्या करना चाहिए?


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