Site icon Khas Press

One India One Emergency Number: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश, 3 महीने में बदल जाएगी पूरी व्यवस्था!

भारत में ‘एक देश, एक इमरजेंसी नंबर’: अब संकट में केवल ‘112’ ही होगा एकमात्र सहारा

भारत में किसी भी आपातकालीन स्थिति में अब केवल एक ही नंबर ‘112’ काम करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आगामी 3 महीने के भीतर सभी पुराने आपातकालीन नंबरों (जैसे 100, 101, 102, 108, 1033, 1091) को पूरी तरह से बंद कर उन्हें राष्ट्रीय आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 (ERSS) में मर्ज करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है [131377657.cms].

न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि समय पर चिकित्सा और आपातकालीन सहायता मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के ‘जीवन के अधिकार’ (Right to Life) का अभिन्न हिस्सा है. संकट की स्थिति में देरी को खत्म करने के लिए मोदी सरकार के ‘वन इंडिया, वन इमरजेंसी नंबर’ विजन को अब पूरे देश में अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है.


विभिन्न नंबरों का भ्रम और पुरानी व्यवस्था की खामियां

वर्तमान समय तक भारत के अलग-अलग राज्यों में आपातकालीन सेवाओं के लिए अलग-अलग नंबर सक्रिय थे. उदाहरण के लिए:

सड़क दुर्घटना, आगजनी या किसी गंभीर चिकित्सा आपातकाल के समय पीड़ित या पास खड़े लोग अक्सर घबराहट और सदमे (Shock) में होते हैं. ऐसे समय में यह याद रखना कि किस सेवा के लिए कौन सा नंबर घुमाना है, काफी मुश्किल होता है. कई बार एम्बुलेंस के लिए पुलिस को फोन लग जाता है तो कभी राजमार्ग पर स्थानीय नंबर काम नहीं करते। प्रतिक्रिया समय (Response Time) में होने वाली इसी देरी के कारण देश में हर साल हजारों लोग ‘गोल्डन ऑवर’ (दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा) में दम तोड़ देते हैं.


सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश और गाइडलाइंस

सेवलॉइफ फाउंडेशन (SaveLIFE Foundation) नामक संस्था द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह बड़ा फैसला सुनाया है [131377657.cms, india-to-adopt-single-emergency-helpline-number-across-all-states-within-3-months-here-is-what-we-know-so-far/]. अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “गंभीर दुर्घटनाओं में बिना चिकित्सा हस्तक्षेप के बीतने वाला हर एक मिनट जीवन बचने की संभावना को कम कर देता है। आपातकालीन स्थितियों में तेजी ही वास्तविक दवा है।”

न्यायालय ने इस व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निम्नलिखित कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  1. 3 महीने के भीतर सभी राज्यों में पुराने हेल्पलाइनों का 112 में विलय किया जाए [131377657.cms, india-to-adopt-single-emergency-helpline-number-across-all-states-within-3-months-here-is-what-we-know-so-far/].
  2. केंद्र सरकार द्वारा 3 महीने में एक राष्ट्रीय ‘मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल’ जारी किया जाए [131377657.cms].
  3. देश की सभी एम्बुलेंस में अनिवार्य रूप से GPS और नेशनल कोड (AIS-125) लागू हो.
  4. ‘गुड समैरिटन’ (नेक मददगारों) की सुरक्षा के लिए जिला स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र बने.
  5. सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए ‘PM RAHAT’ कैशलेस इलाज योजना को देश भर में लागू किया जाए.

क्या है 112 (ERSS) और यह कैसे काम करता है?

हेल्पलाइन 112, भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है जिसे इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) कहा जताई है [emergency-response-support-system-erss]. यह विश्व भर में अपनाए जा रहे एकीकृत आपातकालीन प्रणालियों की तर्ज पर काम करता है. इसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) द्वारा विकसित किया गया है।

यह प्रणाली अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है:

  1. मल्टी-चैनल सपोर्ट: नागरिक केवल वॉयस कॉल ही नहीं, बल्कि SMS, ईमेल, पैनिक बटन, और ‘112 India’ मोबाइल ऐप के जरिए भी मदद मांग सकते हैं [emergency-response-support-system-system].
  2. पब्लिक सेफ्टी आंसरिंग पॉइंट (PSAP): हर राज्य में एक केंद्रीय कंट्रोल रूम (PSAP) होता है, जहाँ कॉल आते ही पीड़ित की वास्तविक लोकेशन (GPS के माध्यम से) ट्रेस हो जाती है.
  3. कंप्यूटर एडेड डिस्पैच (CAD): लोकेशन मिलते ही सिस्टम पीड़ित के सबसे नजदीक मौजूद इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल (ERV), पुलिस पीसीआर या एम्बुलेंस को घटनास्थल के लिए रवाना कर देता है.

मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल और एम्बुलेंस सुधार

सुप्रीम कोर्ट ने केवल नंबर बदलने का आदेश नहीं दिया, बल्कि जमीनी स्तर पर चिकित्सा ढांचे को सुधारने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्रालय को 3 महीने के भीतर एक मानकीकृत मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल बनाने का जिम्मा दिया है [131377657.cms].

इसके तहत देश की सभी पंजीकृत एम्बुलेंसों के लिए नेशनल एम्बुलेंस कोड (AIS-125) का पालन करना अनिवार्य होगा. सड़कों पर चलने वाली हर एम्बुलेंस में लाइव व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD/GPS) लगा होना चाहिए, जो सीधे 112 हेल्पलाइन से जुड़ा हो. इसके अलावा, आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियनों (EMT) के लिए एक समान पाठ्यक्रम तय किया जाएगा ताकि मरीजों को अस्पताल पहुँचने से पहले सही प्राथमिक उपचार मिल सके. अदालती आदेश के तहत अब हर महीने राज्यों को इसकी प्रगति रिपोर्ट और ऑडिट ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना होगा.


गुड समैरिटन (नेक मददगार) और PM RAHAT योजना

अक्सर देखा जाता है कि सड़क पर किसी घायल व्यक्ति को देखकर भी लोग कानूनी पचड़ों, पुलिस पूछताछ या कोर्ट-कचहरी के डर से मदद करने आगे नहीं आते. सुप्रीम कोर्ट ने इस डर को दूर करने के लिए राज्यों को जिला स्तर पर एक ‘गुड समैरिटन ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम’ (शिकायत निवारण तंत्र) स्थापित करने का आदेश दिया है. यदि कोई पुलिसकर्मी या अस्पताल प्रशासन किसी मददगार को परेशान करता है, तो उसके खिलाफ इस तंत्र के तहत तुरंत कार्रवाई होगी.

इसके साथ ही, सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए केंद्र सरकार की कैशलेस उपचार योजना ‘PM RAHAT’ (प्रधानमंत्री राहत) को सभी राज्यों में 3 महीने के भीतर पूरी तरह से लागू करने का निर्देश दिया है. इसके तहत दुर्घटना के शुरुआती घंटों में पीड़ितों को बिना किसी अग्रिम भुगतान (Advance Payment) के तुरंत मुफ्त ट्रॉमा केयर इलाज मिलेगा.


जन जागरूकता की आवश्यकता

यद्यपि 112 सेवा पिछले कुछ वर्षों से कई राज्यों में आंशिक रूप से काम कर रही है, लेकिन देश की एक बड़ी आबादी आज भी इस एकल नंबर की उपयोगिता से अनजान है. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को समझते हुए सरकार को निर्देश दिया है कि टीवी, रेडियो, समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से बहुभाषी और व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि देश के हर कोने में बैठे नागरिक को पता हो कि संकट के समय केवल 112 ही उनका सबसे बड़ा मददगार है.

निष्कर्ष

‘एक देश, एक आपातकालीन नंबर 112’ केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह देश के हर नागरिक के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला एक क्रांतिकारी कदम है. तकनीकी एकीकरण, एम्बुलेंसों की रियल-टाइम ट्रैकिंग, मददगारों को कानूनी सुरक्षा और कैशलेस इलाज के इस साझा तंत्र से भारत की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली वैश्विक मानकों के समकक्ष खड़ी हो जाएगी. अब संकट चाहे जो भी हो— देश का उत्तर हो या दक्षिण, हर नागरिक के लिए सुरक्षा का बस एक ही पता होगा और वह है 112.

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद भारत में 100, 101, 102 और 108 जैसे सभी पुराने आपातकालीन नंबर बंद हो रहे हैं। जानिए कैसे ‘एक देश, एक इमरजेंसी नंबर 112’ (ERSS) योजना आपके जीवन को सुरक्षित बनाएगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)


#SupremeCourt #EmergencyHelplineNumber #ModiGovernment #SingleHelplineNumber #India #OneNationOneNumber #PublicSafety #Article21


Exit mobile version