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Rupee vs Dollar: पहली बार 96 के पार निकला रुपया, डॉलर के मुकाबले ₹96.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसला

ऐतिहासिक गिरावट: पहली बार 96 के पार निकला रुपया, डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड ₹96.05 के सबसे निचले स्तर पर फिसला

मुंबई/नई दिल्ली (15 मई 2026): वैश्विक मोर्चे पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल के बाजार में लगी आग के बीच भारतीय करेंसी रुपये में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को घरेलू विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Forex Market) में कारोबार के दौरान भारतीय रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर को पार करते हुए ₹96.05 के सर्वकालिक निचले स्तर (Record Low) पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया ₹95.95 पर बंद हुआ था।

लगातार बने दबाव के चलते रुपये का इस मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे जाना भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू बाजारों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

रुपये में ऐतिहासिक गिरावट! वैश्विक संकट और ब्रेंट क्रूड के 109 डॉलर पार जाने से भारतीय करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹96.05 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंची।

  1. मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में गहराता सैन्य संकट:
    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर बनी अनिश्चितता ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण दुनिया भर के निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की ओर भाग रहे हैं, जिससे डॉलर लगातार मजबूत और रुपया कमजोर हो रहा है।
  2. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उबाल:
    वैश्विक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude Oil) की कीमत उछलकर 109 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) भी 105 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ चुका है।

भारत पर क्यों पड़ेगा इसका सबसे बुरा असर? (The Import Bill Factor)

भारत अपनी कुल पेट्रोलियम और ईंधन जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात (Import) करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की खरीद और भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जाता है।

ऐसे में जब कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हों और साथ ही रुपया भी कमजोर हो रहा हो, तो देश का आयात बिल (Import Bill) बहुत भारी हो जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो, अब भारत को उतनी ही मात्रा में तेल खरीदने के लिए पहले से कहीं अधिक डॉलर और भारतीय रुपया खर्च करना पड़ रहा है, जिससे देश का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़ रहा है।

आपकी जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर रुपये की गिरावट का असर:

रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर जाने से आम आदमी से लेकर कॉर्पोरेट जगत तक प्रभावित होगा:

आगे क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बाजार विश्लेषकों और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द शांत नहीं हुआ और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही, तो भारतीय करेंसी पर यह दबाव आगे भी बना रह सकता है। हालांकि, रुपये को और अधिक गिरने से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपने विदेशी मुद्रा भंडार की मदद से बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।

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