पर्यावरण व हरियाली की जंग लड़ता, पूर्व नौसैनिक
पर्यावरण को लेकर हर छोटे बड़े मंच पर चिंताएं झलकती है, जागरूकता अभियान चलते हैं मगर बिना ईमानदार कोशिश के कोई मिशन मुक़ाम तक पहुँच नहीं सकता। आज जब पूरा विश्व पर्यावरण दिवस माना रहा है । जगह जगह पौधारोपण के कार्यक्रम किए जा रहे हैं तब उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के एक पूर्व नौसैनिक के संघर्ष की कहानी अपने आप के मिसाल है । संदीप पांडेय जो कि एक पूर्व नौसैनिक हैं, अपने ज़िले में 2015 में एक सड़क निर्माण के दौरान काटे गये पेड़ों को लगवाने के लिये 2 सालों से संघर्षरत हैं ।

उन्नाव ज़िले में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट के अंतर्गत फ़ोरलेन बनवाई गई थी । उस दौरान लगभग ढाई हज़ार पुराने छायादार पेड़ वन विभाग ने कटवाये थे। सड़क निर्माण के चार साल बीत जाने के बाद भी जब फ़ोरलेन के किनारे किसी तरह का पौधारोपण नहीं किया गया तब संदीप पाण्डेय ने सूचना के अधिकार के तहत वन विभाग उन्नाव से इस विषय में जानकारी माँगी।

जो जानकारी विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई उसे सुन कर सभी स्तब्ध रह गये, वन विभाग के अनुसार उक्त स्थान पर 2235 छायादार पेड़ों का पतन किया गया था और उसके स्थान पर मार्ग के दोनो ओर 4500 ब्रिकगॉर्ड पौधारोपण का कार्य प्रस्तावित था, और उसके लिए लगभग 3 करोड़ 12 लाख 93 हज़ार की धनराशि पी डब्लू डी ने क्षतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंध एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA ) विभाग के कोष में जमा कराया था । इन सभी जानकरियों को इकट्ठा करके इस पूर्व नौ सैनिक ने केंद्र , राज्य सरकार से ले कर ज़िले के डीएम और डीएफओ तक पत्राचार किया और गहरी नींद में सो रहे शासन प्रशासन को जगाने का कार्य किया ।

वन रिपोर्ट 2017 के अनुसार आज देश के मात्र 21.54% भूभाग पर ही वन शेष बचे हैं जबकि पर्यावरण संतुलन के लिये 33.33% भूभाग पर इनका विस्तार होना चाहिये और उत्तर प्रदेश की हालत तो और भी खराब है यहाँ पर मात्र 9.18% भूभाग ओर ही वन हैं ।

ऐसे में एक पूर्व नौसैनिक की मुहिम काबिले तारीफ़ है कम से कम अधिकारियों को भूलने नहीं दिया कि उनकी ज़िम्मेदारी क्या है और जवाब एक बार नहीं, बार बार माँगा । मगर सवाल उन ज़िम्मेदार विभागों पर खड़ा होता है, उनका रवैया अगर ये है तो पर्यावरण बचाव में नारे किस काम के हैं, उसकी सार्थकता क्या है?
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