उत्तर प्रदेश निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना 2026: ऑनलाइन क्लेम प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UPBOCW) द्वारा संचालित एक अत्यंत कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने वाली योजना है। राज्य के निर्माण क्षेत्र (जैसे भवन निर्माण, सड़क, पुल, वेल्डिंग, प्लंबिंग आदि) में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर बेहद कठिन और जोखिम भरे माहौल में काम करते हैं। इन कार्यस्थलों पर दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है। किसी आकस्मिक दुर्घटना के कारण परिवार के मुख्य कमाने वाले श्रमिक की मृत्यु अथवा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में पूरा परिवार अत्यंत गहरे वित्तीय संकट में डूब जाता है।
इसी गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम विभाग द्वारा इस महत्वाकांक्षी योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है。 योजना के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की कार्यस्थल या सामान्य परिस्थितियों में मृत्यु अथवा दिव्यांगता होने पर ₹1 लाख से लेकर अधिकतम ₹5 लाख तक की एकमुश्त वित्तीय सहायता सीधे उनके या उनके आश्रितों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से प्रदान की जाती है। इसके साथ ही, मृतक श्रमिक के परिवार को अंत्येष्टि (अंतिम संस्कार) के लिए भी अतिरिक्त आर्थिक मदद दी जाती है。
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योजना की विस्तृत रूपरेखा एवं नोडल विभाग
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना का मुख्य ढांचा निर्माण श्रमिकों के कल्याण को समर्पित बोर्ड के माध्यम से संचालित किया जाता है:
| योजना का नाम | संचालित करने वाला बोर्ड / विभाग | देय अधिकतम वित्तीय सहायता | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना | उ.प्र. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UPBOCW), श्रम विभाग [1] | ₹5,00,000 (₹5 लाख) तक [3] | दुर्घटना या सामान्य स्थिति में मृत्यु/दिव्यांगता पर श्रमिक या उसके आश्रितों को सामाजिक सुरक्षा देना。 |
योजना के अंतर्गत देय लाभ एवं सहायता राशि का वर्गीकरण (Benefits Breakdown)
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया है, ताकि प्रभावित परिवार को उनकी आवश्यकता और क्षति के अनुसार उचित मुआवजा मिल सके:
1. कार्यस्थल पर दुर्घटना के कारण मृत्यु होने पर
यदि किसी पंजीकृत निर्माण श्रमिक की निर्माण स्थल पर काम करने के दौरान किसी दुर्घटना (जैसे ऊंचाई से गिरना, मलबे में दबना, बिजली का झटका लगना आदि) के कारण असामयिक मृत्यु हो जाती है, तो बोर्ड द्वारा उसके आश्रितों (पत्नी/पति, आश्रित बच्चों या माता-पिता) को ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) की एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
2. सामान्य परिस्थितियों में मृत्यु होने पर
यदि किसी पंजीकृत श्रमिक की कार्यस्थल से अलग, सामान्य परिस्थितियों में या किसी बीमारी के कारण मृत्यु हो जाती है, तो भी योजना के तहत उसके परिवार को बेसहारा नहीं छोड़ा जाता। ऐसी स्थिति में मृतक श्रमिक के आश्रितों को ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
3. पूर्ण स्थायी दिव्यांगता (Total Permanent Disability)
यदि काम के दौरान हुई किसी दुर्घटना में श्रमिक की जान तो बच जाती है, लेकिन वह पूरी तरह से अक्षम (Disabled) हो जाता है—जैसे दोनों आंखें खो जाना, दोनों हाथ या दोनों पैर कट जाना, या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट के कारण पूरी तरह पैरालिसिस हो जाना—तो ऐसी स्थिति में श्रमिक को स्वयं के भरण-पोषण के लिए ₹4,00,000 (चार लाख रुपये) की वित्तीय सहायता दी जाती है。
4. आंशिक स्थायी दिव्यांगता (Partial Permanent Disability)
यदि दुर्घटना के कारण श्रमिक का कोई एक मुख्य अंग हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त हो जाता है (जैसे एक आंख की रोशनी जाना, एक हाथ या एक पैर का काम न करना), जिससे उसकी काम करने की क्षमता आंशिक रूप से प्रभावित होती है, तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा जारी दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर ₹1,00,000 से ₹2,00,000 तक की आनुपातिक धनराशि स्वीकृत की जाती है।
5. अंत्येष्टि सहायता (Funeral Assistance)
श्रमिक की मृत्यु होने पर उपरोक्त मुख्य दावों के साथ-साथ, बोर्ड द्वारा मृतक के अंतिम संस्कार और क्रिया-कर्म के खर्च के लिए ₹25,000 (पच्चीस हजार रुपये) की अतिरिक्त अंत्येष्टि सहायता राशि तत्काल प्रदान की जाती है。
योजना के लिए आवश्यक पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)
इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक श्रमिक या उसके आश्रितों को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है:
- मूल निवासी: प्रभावित निर्माण कामगार अनिवार्य रूप से उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- वैध बोर्ड पंजीकरण (UPBOCW Registration): सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि श्रमिक का UPBOCW (उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड) के अंतर्गत एक सक्रिय और वैध पंजीकरण होना चाहिए। दुर्घटना या मृत्यु की तिथि पर श्रमिक का पंजीकरण कार्ड नवीनीकृत (Renewed) होना आवश्यक है।
- पंजीकरण की अवधि: सामान्य मृत्यु के मामले में, यह लाभ तभी देय होता है जब श्रमिक कम से कम 1 वर्ष से बोर्ड का पंजीकृत सदस्य रहा हो। हालांकि, कार्यस्थल पर आकस्मिक दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता के मामले में यह समयावधि शिथिल की जा सकती है।
- आयु सीमा: पंजीकरण के समय श्रमिक की आयु 18 वर्ष से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- अंशदान जमा होना: श्रमिक द्वारा बोर्ड की निर्धारित वार्षिक सदस्यता शुल्क (अंशदान) का नियमित भुगतान किया गया हो।
आवश्यक दस्तावेज (Required Documents List)
दावा (Claim) प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की प्रतियों का होना अनिवार्य है:
- श्रमिक का विवरण: पंजीकृत निर्माण श्रमिक का मूल लेबर कार्ड (पंजीकरण प्रमाण पत्र) और आधार कार्ड।
- दुर्घटना से संबंधित साक्ष्य:
- पुलिस थाने में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) या पंचनामे की प्रमाणित प्रति।
- सरकारी अस्पताल या प्राधिकृत डॉक्टर द्वारा जारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Postmortem Report) (मृत्यु की स्थिति में)।
- प्रमाण पत्र:
- स्थानीय नगर निकाय या ग्राम पंचायत द्वारा जारी डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)。
- दिव्यांगता के मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) या सक्षम मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र (Disability Certificate), जिसमें अपंगता का प्रतिशत साफ तौर पर लिखा हो।
- आश्रित होने का प्रमाण: मृतक श्रमिक के साथ संबंध स्थापित करने के लिए परिवार रजिस्टर की नकल, राशन कार्ड, या कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र (Succession Certificate)।
- बैंक और वित्तीय विवरण: आश्रित या स्वयं दिव्यांग श्रमिक के बैंक खाते की पासबुक के प्रथम पृष्ठ की स्पष्ट प्रति (खाता संख्या और IFSC कोड सहित) [1] तथा आधार से लिंक होने का प्रमाण।
आवेदन एवं दावा प्रक्रिया (Step-by-Step Claim Application Process)
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत क्लेम करने की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और सुगम बना दिया है, ताकि पीड़ित परिवार को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और सीधे उनके खाते में पैसा पहुंच सके।
ऑनलाइन क्केम करने के चरण:
- पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट upbocw.in पर जाएं。
- श्रमिक लॉगिन / योजना अनुभाग: होमपेज पर दिए गए “योजनाएं” टैब के अंतर्गत “योजनाओं के अंतर्गत आवेदन करें” विकल्प को चुनें।
- लेबर कार्ड नंबर दर्ज करें: श्रमिक की 14 अंकों की पंजीकरण संख्या (लेबर कार्ड नंबर) दर्ज करें। इसके बाद पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी (OTP) के जरिए लॉगिन की पुष्टि करें।
- योजना का चयन: ड्रॉपडाउन मेनू से “निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना” का चयन करें。
- दावे का विवरण भरें: दुर्घटना की तिथि, समय, स्थान, घटना का कारण और दावा करने वाले आश्रित (Nominee) का विवरण सावधानीपूर्वक भरें।
- दस्तावेज अपलोड करें: मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेजों (FIR, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु/दिव्यांगता प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक) को स्पष्ट रूप से स्कैन करके पीडीएफ या इमेज फॉर्मेट में अपलोड करें।
- फॉर्म सबमिट करें: पूरी जानकारी की समीक्षा करने के बाद फॉर्म को फाइनल सबमिट करें और प्राप्त एप्लीकेशन नंबर (संदर्भ संख्या) को संभालकर रख लें।
ऑफलाइन या जनसेवा केंद्र (CSC) माध्यम:
यदि आश्रित ऑनलाइन फॉर्म भरने में असमर्थ हैं, तो वे अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र (CSC) पर जाकर या सीधे अपने जिले के जिला श्रम कार्यालय (Labour Department Office) में जाकर सभी भौतिक दस्तावेजों के साथ ऑफलाइन आवेदन पत्र भी जमा कर सकते हैं。
दावा करने की समय सीमा (Crucial Timeline)
श्रमिक की मृत्यु या दिव्यांगता घटित होने की तिथि से अधिकतम 1 वर्ष (12 महीने) के भीतर बोर्ड के समक्ष दावा प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। इस अवधि के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाता, जब तक कि विलंब का कोई अत्यंत ठोस और वैधानिक कारण न हो।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना राज्य के सबसे कमजोर और मेहनतकश आर्थिक वर्ग को सुरक्षा देने वाली एक अत्यंत संवेदनशील और प्रभावी ढाल है。 कार्यस्थल पर होने वाली अनहोनी किसी भी हँसते-खेलते गरीब परिवार को तबाही के कगार पर ला सकती है, लेकिन यह योजना सीधे ₹5 लाख तक की आर्थिक मदद देकर प्रभावित आश्रितों को फिर से खड़े होने और बच्चों की शिक्षा व भविष्य को सुरक्षित रखने का संबल देती है। प्रक्रियाओं के ऑनलाइन हो जाने से अब बिना किसी बिचौलिए के सहायता राशि सीधे बैंक खातों में पहुंच रही है। राज्य के प्रत्येक निर्माण श्रमिक को अपना लेबर कार्ड अनिवार्य रूप से बनवाना चाहिए और उसे समय पर नवीनीकृत रखना चाहिए ताकि संकट के समय उनका परिवार इस सामाजिक सुरक्षा का पूरा लाभ उठा सके。
उत्तर प्रदेश निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):
1. पात्रता और पंजीकरण संबंधी प्रश्न (Eligibility & Registration FAQs)
- यह योजना मुख्य रूप से किस विभाग द्वारा चलाई जाती है?
यह योजना उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के अंतर्गत आने वाले उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UPBOCW) द्वारा संचालित की जाती है। - इस योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे मुख्य शर्त क्या है?
सबसे मुख्य शर्त यह है कि पीड़ित मजदूर का UPBOCW पोर्टल पर श्रमिक के रूप में सक्रिय पंजीकरण (वैध लेबर कार्ड) होना चाहिए। दुर्घटना या मृत्यु की तिथि पर लेबर कार्ड का नवीनीकरण (Renewal) होना अनिवार्य है। - क्या सामान्य बीमारी या प्राकृतिक मृत्यु होने पर भी इस योजना के तहत मदद मिलती है?
हाँ। यदि पंजीकृत श्रमिक की सामान्य परिस्थितियों में या किसी बीमारी के कारण भी मृत्यु होती है, तो योजना के तहत उसके आश्रितों को ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) की सहायता राशि दी जाती है।
2. वित्तीय सहायता और श्रेणियाँ (Benefits & Amount FAQs)
- कार्यस्थल पर दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को कुल कितनी राशि मिलती है?
यदि निर्माण स्थल पर काम करने के दौरान किसी हादसे में श्रमिक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके आश्रितों को ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है। - क्या अंतिम संस्कार के लिए अलग से कोई पैसा मिलता है?
हाँ। श्रमिक की मृत्यु होने पर मुख्य मुआवजा राशि के साथ-साथ अंतिम संस्कार और क्रिया-कर्म के खर्च के लिए ₹25,000 (पच्चीस हजार रुपये) की अतिरिक्त अंत्येष्टि सहायता प्रदान की जाती है। - यदि श्रमिक की जान बच जाए लेकिन वह पूरी तरह अपाहिज हो जाए, तो क्या लाभ मिलेगा?
दुर्घटना में पूर्ण स्थायी दिव्यांगता (जैसे दोनों हाथ, दोनों पैर या आंखों की रोशनी चले जाना) की स्थिति में श्रमिक को स्वयं के भरण-पोषण के लिए ₹4,00,000 (चार लाख रुपये) की एकमुश्त सहायता दी जाती है।
3. आवेदन और दावा प्रक्रिया (Claim & Timeline FAQs)
- दुर्घटना या मृत्यु के कितने दिनों के भीतर क्लेम (Claim) करना जरूरी है?
श्रमिक की मृत्यु या दिव्यांगता घटित होने की तिथि से अधिकतम 1 वर्ष (12 महीने) के भीतर बोर्ड के समक्ष ऑनलाइन या ऑफलाइन दावा प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। 1 वर्ष के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाते। - मजदूर की मृत्यु होने पर क्लेम का पैसा किसे मिलता है?
श्रमिक की मृत्यु की स्थिति में सहायता राशि उसके द्वारा नामांकित व्यक्ति (Nominee) या वैधानिक कानूनी आश्रितों (जैसे पत्नी/पति, अविवाहित पुत्रियाँ, आश्रित बच्चे या माता-पिता) को दी जाती है। भुगतान सीधे बैंक खाते में DBT के माध्यम से होता है। - क्या क्लेम के लिए पुलिस स्टेशन की रिपोर्ट (FIR) होना जरूरी है?
दुर्घटनावश मृत्यु या दिव्यांगता के मामलों में पुलिस द्वारा दर्ज FIR, पंचनामा या सामान्य डायरी (GD) की प्रति और सरकारी अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अनिवार्य दस्तावेज हैं। सामान्य मृत्यु के मामले में केवल आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।
4. आवश्यक दस्तावेज (Documents FAQs)
- ऑनलाइन क्लेम करते समय कौन से मुख्य कागजात अपलोड करने होते हैं?
मुख्य दस्तावेजों में श्रमिक का मूल लेबर कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति, आश्रितों का आधार कार्ड, परिवार रजिस्टर की नकल (रिश्ता साबित करने के लिए), मृत्यु प्रमाण पत्र या मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र (प्रतिशत के साथ) शामिल हैं।
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