UP Rashtriya Parivarik Labh Yojana (NFBS) 2026: पात्रता, दस्तावेज और स्टेटस चेक गाइड

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (NFBS): एक विस्तृत और संपूर्ण मार्गदर्शिका
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (Uttar Pradesh National Family Benefit Scheme – NFBS) राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग (Social Welfare Department) द्वारा संचालित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील लोक-कल्याणकारी योजना है। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य समाज के उन अत्यंत गरीब और असहाय परिवारों को तात्कालिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है, जिनके घर के एकमात्र कमाने वाले मुख्य सदस्य (Breadwinner) की असामयिक मृत्यु हो जाती है।
किसी भी निर्धन परिवार के लिए मुख्य आयोजक या कमाने वाले सदस्य का अचानक चले जाना न केवल एक गहरा भावनात्मक आघात होता है, बल्कि यह उन्हें भुखमरी, कर्ज और गंभीर आर्थिक संकट के दलदल में भी धकेल देता है। ऐसी संकटपूर्ण स्थिति में उत्तर प्रदेश सरकार इस योजना के माध्यम से पीड़ित परिवार को ₹30,000 की एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है, ताकि वे इस कठिन समय में गरिमा के साथ संभल सकें और अपने तात्कालिक खर्चों को पूरा कर सकें।
इस विस्तृत लेख में हम इस योजना के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं, जैसे इसकी पृष्ठभूमि, उद्देश्य, पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेज, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, और इसके सामाजिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
Table of Contents
1. योजना की पृष्ठभूमि और मुख्य उद्देश्य
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना मूल रूप से केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme – NSAP) का एक हिस्सा है, जिसे प्रत्येक राज्य में वहां की राज्य सरकारों के समाज कल्याण विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। उत्तर प्रदेश में इसे राज्य सरकार के वित्तीय सहयोग और प्रशासनिक देखरेख में बेहद सक्रियता से चलाया जा रहा है।
इस योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- तात्कालिक वित्तीय सुरक्षा: परिवार के मुख्य अर्जनकर्ता (कमाने वाले सदस्य) की मृत्यु के तुरंत बाद परिवार को अचानक आने वाले वित्तीय संकट से बचाना।
- गरीबी के दुष्चक्र को रोकना: कमाने वाले के न रहने पर गरीब परिवार अक्सर साहूकारों के कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। यह योजना उन्हें तत्काल नकद सहायता देकर कर्ज के जाल से बचाती है।
- आश्रितों का संबल: मृतक के आश्रितों (जैसे विधवा पत्नी, नाबालिग बच्चे या वृद्ध माता-पिता) को नए सिरे से जीवन की शुरुआत करने के लिए एक बुनियादी आर्थिक आधार प्रदान करना।
- सामाजिक सुरक्षा का दायित्व: राज्य के सबसे कमजोर और वंचित वर्गों तक सीधे तौर पर सरकारी मदद पहुंचाना, जिससे समाज में सुरक्षा और समावेशन की भावना सुदृढ़ हो सके।
2. योजना की मुख्य विशेषताएं और लाभ
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य कल्याणकारी योजनाओं से अलग और अधिक प्रभावी बनाती हैं:
- एकमुश्त वित्तीय सहायता (Lump Sum Assistance): इस योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थी परिवार को सीधे ₹30,000 की एकमुश्त सहायता राशि दी जाती है। यह कोई मासिक पेंशन नहीं है, बल्कि एक संकटकालीन वित्तीय पैकेज है।
- सीधा बैंक हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer – DBT): भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त करने के लिए योजना की पूरी राशि लाभार्थी के सत्यापित बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर की जाती है।
- लिंग-तटस्थ नीति (Gender-Neutral Policy): योजना के नियमों के अनुसार, मृतक सदस्य पुरुष या महिला कोई भी हो सकता है, बशर्ते वह परिवार का मुख्य कमाने वाला व्यक्ति रहा हो और उसकी आय पर ही परिवार निर्भर था।
- पूर्णतः पारदर्शी ऑनलाइन प्रणाली: आवेदन से लेकर जांच और धनराशि की स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है, जिससे लाभार्थी अपने आवेदन की स्थिति को घर बैठे ट्रैक कर सकते हैं।
3. योजना के लिए पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)
यह योजना विशेष रूप से अत्यंत निर्धन और बेसहारा परिवारों के लिए आरक्षित है। अतः इसका लाभ उठाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने कड़े लेकिन व्यावहारिक पात्रता मानदंड निर्धारित किए हैं:
- स्थायी निवासी: आवेदक और मृतक का परिवार उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
- गरीबी रेखा से नीचे (BPL): आवेदक का परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाला होना चाहिए। इसके सत्यापन के लिए आय सीमा तय की गई है:
- शहरी क्षेत्रों के लिए: परिवार की वार्षिक आय ₹56,460 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- ग्रामीण क्षेत्रों के लिए: परिवार की वार्षिक आय ₹46,080 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- कमाने वाले सदस्य की आयु: मृतक (मुख्य अर्जनकर्ता) की आयु मृत्यु के समय 18 वर्ष से अधिक और 60 वर्ष से कम (यानी 18 से 59 वर्ष के बीच) होनी चाहिए। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की मृत्यु पर यह योजना लागू नहीं होती, क्योंकि उनके लिए वृद्धावस्था पेंशन जैसी अन्य योजनाएं उपलब्ध हैं।
- मुख्य अर्जनकर्ता की परिभाषा: मृत व्यक्ति परिवार का मुख्य कमाने वाला होना चाहिए, जिसकी आय से घर का खर्च चलता था।
4. आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने और सत्यापन के समय किसी भी प्रकार की रिजेक्शन (अस्वीकृति) से बचने के लिए आवेदकों के पास निम्नलिखित दस्तावेजों का होना अत्यंत आवश्यक है:
अ. मृतक से संबंधित दस्तावेज:
- मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate): किसी मान्यता प्राप्त सरकारी संस्था, अस्पताल, नगर निगम, नगर पालिका या ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा जारी किया गया आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र।
- आयु का प्रमाण (Age Proof): मृतक की आयु 18 से 59 वर्ष के बीच सिद्ध करने के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, या स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC)।
ब. आवेदक से संबंधित दस्तावेज:
- पहचान और निवास का प्रमाण: आवेदक का आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र या राशन कार्ड।
- आय प्रमाण पत्र (Income Certificate): सक्षम प्राधिकारी (तहसीलदार) द्वारा जारी किया गया डिजिटल आय प्रमाण पत्र, जो तय की गई वार्षिक आय सीमा के भीतर हो।
- बैंक पासबुक की प्रति: बैंक खाता राष्ट्रीयकृत बैंक में होना चाहिए और वह आधार से लिंक (Aadhaar Seeded) होना अनिवार्य है। पासबुक के पहले पन्ने की स्पष्ट फोटोकॉपी जिसमें खाता संख्या और IFSC कोड साफ दिखाई दे।
- आवेदक का पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर/अंगूठे का निशान।
- परिवार रजिस्टर की नकल: यह साबित करने के लिए कि आवेदक और मृतक एक ही परिवार के सदस्य थे और आवेदक उनका वैध कानूनी उत्तराधिकारी या आश्रित है।
5. ऑनलाइन आवेदन की चरण-दर-चरण प्रक्रिया (Online Application Process)
उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग ने आवेदन प्रक्रिया को बेहद सरल और सुलभ बना दिया है। कोई भी पात्र व्यक्ति स्वयं या अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से नीचे दिए गए चरणों का पालन करके आवेदन कर सकता है:
चरण 1: आधिकारिक पोर्टल पर जाना
सबसे पहले समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं (पारिवारिक लाभ योजना का आधिकारिक वेब पोर्टल: nfbs.upsdc.gov.in)।
चरण 2: नया पंजीकरण (New Registration)
- होमपेज पर आपको “नया पंजीकरण” (New User Registration) का विकल्प दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।
- आपके सामने एक पंजीकरण फॉर्म खुलेगा। यहाँ आपको अपने जिले का चयन करना होगा और यह चुनना होगा कि आप ग्रामीण क्षेत्र से हैं या शहरी क्षेत्र से।
- इसके बाद आवेदक का नाम, मोबाइल नंबर, आधार संख्या और अन्य बुनियादी विवरण भरकर सबमिट करें। आपके मोबाइल पर एक यूजर आईडी और पासवर्ड प्राप्त होगा।
चरण 3: आवेदन फॉर्म भरना (Filling the Application Form)
- प्राप्त क्रेडेंशियल्स की मदद से पोर्टल पर लॉगिन करें।
- अब स्क्रीन पर मुख्य आवेदन फॉर्म (Application Form) खुल जाएगा। इसे चार मुख्य भागों में विभाजित किया गया है:
- आवेदक का विवरण: नाम, पिता/पति का नाम, लिंग, जाति श्रेणी और मृतक से संबंध।
- मृतक का विवरण: नाम, मृत्यु की तिथि, मृत्यु का कारण, और मृत्यु के समय उनकी सटीक आयु।
- आय का विवरण: तहसीलदार द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र का आवेदन नंबर और सर्टिफिकेट नंबर।
- बैंक खाते का विवरण: बैंक का नाम, शाखा, खाता संख्या और IFSC कोड (इसे अत्यंत सावधानी से भरें)।
चरण 4: दस्तावेज अपलोड करना (Uploading Documents)
मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेजों (जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति और फोटो) को निर्दिष्ट साइज और फॉर्मेट (आमतौर पर PDF या JPEG, 20KB से 100KB के बीच) में स्कैन करके अपलोड करें।
चरण 5: फॉर्म की समीक्षा और फाइनल सबमिट
- फॉर्म को पूरी तरह भरने और दस्तावेज अपलोड करने के बाद, “Preview” बटन पर क्लिक करके पूरे फॉर्म की दोबारा जांच कर लें कि कहीं कोई वर्तनी (Spelling) या अंक की गलती तो नहीं हुई है।
- सब कुछ सही होने पर “Final Submit” पर क्लिक करें।
- सबमिट करते ही स्क्रीन पर एक एकनॉलेजमेंट स्लिप (Acknowledgement Slip) या पंजीकरण रसीद जनरेट होगी, जिसमें आपका आवेदन क्रमांक (Application Number) दर्ज होगा। इसका प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें।
6. आवेदन के बाद सत्यापन और प्रशासनिक प्रक्रिया
फाइनल सबमिट करने के बाद, आपके आवेदन की एक हार्ड कॉपी सभी संलग्न दस्तावेजों के साथ 30 दिनों के भीतर अपने संबंधित जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय या विकास खंड (Block) / तहसील कार्यालय में जमा करनी होती है। इसके बाद की प्रशासनिक प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में होती है:
- स्थानीय सत्यापन (Field Verification): जिला समाज कल्याण अधिकारी आपके आवेदन को संबंधित उपजिलाधिकारी (SDM) या खंड विकास अधिकारी (BDO) को भेजते हैं। उनके निर्देश पर लेखपाल (Patwari) या ग्राम विकास अधिकारी आवेदक के घर जाकर भौतिक सत्यापन करते हैं कि मृतक वास्तव में परिवार का मुख्य कमाने वाला था और परिवार की आर्थिक स्थिति पात्रता के अनुकूल है या नहीं।
- दस्तावेजों की संवीक्षा (Scrutiny): लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर दस्तावेजों की सत्यता की जांच की जाती है, विशेषकर मृत्यु प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र के डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान किया जाता है।
- अनुमोदन (Approval): यदि जांच में सब कुछ सही पाया जाता है, तो जिला समाज कल्याण अधिकारी आवेदन को स्वीकृत (Approve) कर देते हैं।
- धनराशि का प्रेषण: स्वीकृति मिलने के बाद, सरकार के कोषागार (Treasury) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ₹30,000 की राशि डीबीटी के जरिए ट्रांसफर कर दी जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर 45 से 60 दिनों का समय लगता है।
7. आवेदन की स्थिति (Application Status) कैसे ट्रैक करें?
यदि आपने योजना के लिए आवेदन किया है और आप जानना चाहते हैं कि आपकी फाइल प्रशासनिक स्तर पर कहाँ तक पहुँची है, तो आप इसे आसानी से ऑनलाइन चेक कर सकते हैं:
- NFBS के आधिकारिक पोर्टल (
nfbs.upsdc.gov.in) पर जाएं। - होमपेज पर “आवेदन पत्र की स्थिति” (Application Status / Track Application) के विकल्प पर क्लिक करें।
- अपने जिले का चयन करें और अपनी अकाउंट संख्या या आवेदन क्रमांक (Application Number) दर्ज करें।
- “Search” बटन पर क्लिक करते ही आपके आवेदन की वर्तमान स्थिति (जैसे – लेखपाल स्तर पर लंबित, स्वीकृत, या धनराशि प्रेषित) स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगी।
8. योजना की सीमाएं और महत्वपूर्ण सावधानियां
योजना का लाभ बिना किसी बाधा के प्राप्त करने के लिए आवेदकों को कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि छोटी सी लापरवाही के कारण आवेदन निरस्त (Reject) भी हो सकता है:
- समय सीमा का ध्यान रखें: मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने के अधिकतम 1 वर्ष के भीतर इस योजना के लिए आवेदन कर देना अनिवार्य है। मृत्यु के एक वर्ष बीत जाने के बाद किए गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाता है।
- गलत जानकारी के परिणाम: यदि कोई आवेदक गलत आय प्रमाण पत्र या फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर लाभ पाने की कोशिश करता है, तो जांच में पकड़े जाने पर न केवल आवेदन निरस्त होगा, बल्कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है और दी गई राशि भू-राजस्व की भांति वसूल की जाएगी।
- बैंक खाते की सक्रियता: सुनिश्चित करें कि जो बैंक खाता फॉर्म में दिया गया है, वह चालू (Active) स्थिति में हो, उसमें मिनिमम बैलेंस की समस्या न हो, और उसकी केवाईसी (KYC) और आधार सीडिंग पूरी हो। अक्सर देखा गया है कि खाता निष्क्रिय होने के कारण सरकारी राशि ट्रांजैक्शन फेल हो जाती है।
9. सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना ने राज्य के ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों के जीवन में एक अत्यंत सुरक्षात्मक नेट (Safety Net) की भूमिका निभाई है। इसके सामाजिक प्रभावों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
- बाल श्रम और शोषण पर रोक: जब किसी गरीब परिवार का मुखिया शांत हो जाता है, तो अक्सर बच्चों को पढ़ाई छोड़कर मजदूरी में लगना पड़ता है। ₹30,000 की तत्काल सहायता मिलने से परिवार को कुछ महीनों के लिए राशन और बुनियादी जरूरतों की चिंता नहीं होती, जिससे बच्चों का भविष्य पूरी तरह तबाह होने से बच जाता है।
- महिला सशक्तिकरण: अधिकांश मामलों में मुख्य अर्जनकर्ता पुरुष की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी इस योजना की आवेदक बनती है। सीधे महिला के खाते में राशि आने से उसे परिवार के भरण-पोषण के निर्णय लेने में वित्तीय स्वायत्तता और संबल मिलता है।
- मानवीय गरिमा की रक्षा: संकट के समय यह योजना किसी भी गरीब परिवार को दूसरों के सामने हाथ फैलाने या अपनी आत्म-गरिमा को दांव पर लगाने से बचाती है। सरकार द्वारा दी जाने वाली यह मदद खैरात नहीं, बल्कि नागरिकों के प्रति राज्य का सामाजिक सुरक्षा दायित्व है।
10. निष्कर्ष और सुझाव
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना लोक-कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को धरातल पर उतारने वाला एक अनुकरणीय प्रयास है। ₹30,000 की राशि भले ही किसी बिछड़े हुए सदस्य की कमी को पूरा नहीं कर सकती, लेकिन यह एक डूबते हुए गरीब परिवार को तिनके का सहारा अवश्य देती है।
इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, क्योंकि जागरूकता के अभाव में कई बार पात्र परिवार मृत्यु के एक वर्ष के भीतर आवेदन नहीं कर पाते और इस लाभ से वंचित रह जाते हैं। यदि आपके आसपास भी कोई ऐसा परिवार है जिसने अपने मुख्य अर्जनकर्ता को खोया है, तो एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते आपको उन्हें इस योजना की जानकारी देकर आवेदन करने में उनकी सहायता अवश्य करनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (NFBS) से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):
1. राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना क्या है और इसमें कितनी सहायता मिलती है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा चलाई जाने वाली एक सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसके तहत यदि किसी गरीब परिवार के एकमात्र कमाने वाले मुख्य सदस्य की असामयिक मृत्यु हो जाती है, तो सरकार पीड़ित परिवार को संभलने के लिए ₹30,000 की एकमुश्त (Lump Sum) वित्तीय सहायता देती है।
2. इस योजना का लाभ लेने के लिए मुख्य कमाने वाले (मृतक) की उम्र कितनी होनी चाहिए?
योजना के नियमानुसार, मृत्यु के समय मुख्य अर्जनकर्ता (कमाने वाले सदस्य) की आयु 18 वर्ष से अधिक और 60 वर्ष से कम (यानी 18 से 59 वर्ष के बीच) होनी अनिवार्य है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की मृत्यु पर यह लाभ नहीं मिलता है।
3. आवेदन करने के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा क्या तय की गई है?
इस योजना का लाभ केवल गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले परिवारों को ही मिलता है। इसके लिए तहसीलदार द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र के अनुसार वार्षिक आय सीमा निम्न प्रकार है:
- ग्रामीण क्षेत्रों के लिए: परिवार की वार्षिक आय ₹46,080 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- शहरी क्षेत्रों के लिए: परिवार की वार्षिक आय ₹56,460 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
4. कमाने वाले सदस्य की मृत्यु के कितने समय के भीतर आवेदन करना जरूरी है?
यह इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण नियम है। परिवार के मुख्य सदस्य की मृत्यु होने के अधिकतम 1 वर्ष (12 महीने) के भीतर आपको पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। मृत्यु के 1 वर्ष बीत जाने के बाद किए गए आवेदनों को सिस्टम स्वीकार नहीं करता है।
5. क्या परिवार के मुखिया के रूप में किसी महिला की मृत्यु होने पर भी लाभ मिलेगा?
हाँ, बिल्कुल। यदि वह महिला परिवार की मुख्य कमाने वाली सदस्य थी और पूरा परिवार उनकी आय पर निर्भर था, तो उनकी मृत्यु होने पर भी वैध आश्रित (जैसे पति या बच्चे) इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। यह योजना पूरी तरह लिंग-तटस्थ (Gender-Neutral) है।
6. आवेदन के लिए कौन-कौन से मुख्य दस्तावेज अपलोड करने होते हैं?
आवेदन को सफल बनाने के लिए आपके पास ये डिजिटल दस्तावेज होने चाहिए:
- आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)।
- मृतक की आयु का प्रमाण (आधार कार्ड, वोटर आईडी या स्कूल टीसी)।
- तहसीलदार द्वारा जारी डिजिटल आय प्रमाण पत्र।
- आवेदक का आधार कार्ड और बैंक पासबुक की कॉपी (खाता आधार से लिंक होना चाहिए)।
- आवेदक का पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर।
7. क्या ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद उसकी हार्ड कॉपी जमा करनी होती है?
हाँ। ऑनलाइन आवेदन फाइनल सबमिट करने के बाद, आपको उस आवेदन पत्र का प्रिंटआउट (रसीद) निकालना होगा। उस प्रिंटआउट के साथ सभी आवश्यक दस्तावेजों की फोटोकॉपी संलग्न करके 30 दिनों के भीतर अपने संबंधित जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय, या तहसील/विकास खंड (Block) कार्यालय में जमा करना अनिवार्य है।
8. स्वीकृत होने के बाद योजना का पैसा कितने दिनों में और कैसे आता है?
स्थानीय लेखपाल (पटवारी) द्वारा भौतिक सत्यापन और समाज कल्याण अधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद, पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर 45 से 60 दिनों का समय लगता है। सरकार बिचौलियों को रोकने के लिए सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से ट्रांसफर करती है।
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