उत्तर प्रदेश सोलर पंप योजना 2026: ऑनलाइन टोकन बुकिंग, पात्रता और सब्सिडी की पूरी जानकारी

उत्तर प्रदेश में अपने खेत पर लगे नए सब्सिडी वाले सोलर पैनल और सौर ऊर्जा संचालित वॉटर पंप के पास खड़ा एक मुस्कुराता हुआ भारतीय किसान (A smiling Indian farmer standing next to his newly installed subsidized solar panels and solar-powered water pump in Uttar Pradesh)

Table of Contents

उत्तर प्रदेश सोलर पंप योजना (PM-KUSUM): सौर ऊर्जा, कृषि यंत्रीकरण और किसानों की समृद्धि का नया महा-अभियान

१. प्रस्तावना (Introduction)

भारत की कृषि व्यवस्था में सिंचाई (Irrigation) सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी आवश्यकता है। जब तक फसलों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलता, तब तक उन्नत बीजों और महंगे उर्वरकों का उपयोग भी निष्फल साबित होता है। उत्तर प्रदेश, जो देश का अग्रणी कृषि उत्पादक राज्य है, यहाँ की खेती मुख्य रूप से मानसून की अनिश्चितता और भूजल संसाधनों पर निर्भर है।

पारंपरिक रूप से, ग्रामीण उत्तर प्रदेश में सिंचाई के लिए डीजल इंजन (Diesel Pump sets) या बिजली से चलने वाले नलकूपों (Electric Tube wells) का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने खेती की लागत (Cost of Production) को अत्यधिक बढ़ा दिया है। वहीं दूसरी ओर, बिजली की अनियमित आपूर्ति, ग्रामीण अंचलों में बार-बार लो-वोल्टेज की समस्या और भारी-भरकम बिजली बिलों के कारण किसान हमेशा कर्ज और मानसिक तनाव के बोझ तले दबे रहते हैं।

इस दोहरे संकट से उत्तर प्रदेश के अन्नदाताओं को मुक्ति दिलाने, पर्यावरण का संरक्षण करने और कृषि उत्पादन को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से ‘सोलर पंप योजना’ (PM-KUSUM – Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evam Utthan Mahabhiyan) को एक बड़े मिशन के रूप में संचालित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UPNEDA) द्वारा चलाई जा रही यह योजना आज ग्रामीण इलाकों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित क्रांति का सबसे बड़ा माध्यम बन चुकी है।


२. योजना की पृष्ठभूमि और पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) का जुड़ाव

उत्तर प्रदेश में सोलर पंप वितरण की शुरुआत पूर्व में राज्य सरकार की अपनी योजनाओं के माध्यम से हुई थी, लेकिन इसे व्यापक गति तब मिली जब भारत सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (PM-KUSUM) की घोषणा की। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना को ‘पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल’ से जोड़कर पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बना दिया।

यह योजना बहुआयामी दृष्टिकोण पर काम करती है, जिसके मुख्य रूप से तीन घटक (Components) हैं:

  1. घटक अ (Component A): बंजर या कम उपजाऊ कृषि भूमि पर लघु सौर ऊर्जा संयंत्रों (५०० किलोवाट से २ मेगावाट) की स्थापना करना।
  2. घटक ब (Component B): ग्रिड-विहीन ग्रामीण क्षेत्रों में डीजल पंपों को हटाकर स्टैंडअलोन ऑफ-ग्रिड सोलर पंप (Standalone Off-grid Solar Pumps) स्थापित करना।
  3. घटक स (Component C): पहले से मौजूद बिजली से चलने वाले कृषि पंपों का सौर ऊर्जीकरण (Solarization) करना।

उत्तर प्रदेश में वर्तमान समय में घटक ब (Component B) के तहत २ एचपी (HP) से लेकर १० एचपी तक के सोलर पंपों पर किसानों को भारी सब्सिडी देकर ग्रामीण क्षेत्रों का पूरी तरह से कायाकल्प किया जा रहा है।


३. सोलर पंप योजना के मुख्य उद्देश्य (Core Objectives)

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना को आक्रामक तरीके से लागू करने के पीछे निम्नलिखित दूरगामी आर्थिक और पर्यावरणीय उद्देश्य शामिल हैं:

  • कृषि लागत में भारी कमी: डीजल और बिजली की निर्भरता को समाप्त कर किसानों के सिंचाई खर्च को शून्य के स्तर पर लाना, जिससे उनकी शुद्ध आय में सीधे तौर पर वृद्धि हो सके।
  • दिन के समय निर्बाध सिंचाई: बिजली आपूर्ति की अनिश्चितता से निजात दिलाना। सोलर पंप के माध्यम से किसानों को दिन के उजाले में बिना किसी लो-वोल्टेज या बिजली कटौती के फसलों को पानी देने की सुविधा मिलती है, जिससे रात में खेतों में सिंचाई करने का जोखिम खत्म हो जाता है।
  • ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रिड पर दबाव कम करना: ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि लोड को बिजली ग्रिड से हटाकर सौर ऊर्जा पर स्थानांतरित करना, जिससे डिस्कॉम (Discoms) का घाटा कम हो और घरेलू बिजली की आपूर्ति में सुधार हो।
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी (Environmental Protection): डीजल पंपों से निकलने वाले हानिकारक धुएं और प्रदूषण को रोकना। यह योजना जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खिलाफ लड़ाई में भारत के नेट-जीरो (Net-Zero) लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करती है।
  • जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा: सोलर पंपों के साथ ड्रिप (Drip) और स्प्रिंकलर (Sprinkler) सिंचाई पद्धतियों को एकीकृत करना ताकि भूजल का अंधाधुंध दोहन न हो और ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (Per Drop More Crop) का सिद्धांत साकार हो सके।

४. सोलर पंपों की श्रेणियां और तकनीकी विनिर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की भूमि की उपलब्धता, जल स्तर (Water Table) और फसलों की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग क्षमता के सोलर पंपों पर अनुदान प्रदान करती है। प्रमुख श्रेणियां निम्नलिखित हैं:

  • २ एचपी (2 HP) डीसी/एसी सरफेस व सबमर्सिबल पंप: यह पंप उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयुक्त है जिनके पास कम भूमि है और जहाँ जल स्तर २० से ३० फीट तक उपलब्ध है।
  • ३ एचपी (3 HP) सबमर्सिबल पंप: यह मध्यम श्रेणी के किसानों के लिए उपयुक्त है, जहाँ पानी का स्तर ३० से ५० फीट तक की गहराई पर होता है।
  • ५ एचपी (5 HP) सबमर्सिबल पंप: जहाँ जल स्तर ५० से १०० फीट या उससे अधिक गहरा है, वहाँ सिंचाई की बड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
  • ७.५ एचपी और १० एचपी सबमर्सिबल पंप: यह बड़े भू-भाग वाले किसानों, गन्ना उत्पादकों या सामूहिक सिंचाई (Community Irrigation) के लिए अत्यधिक प्रभावी है, जहाँ गहरे बोरवेल की आवश्यकता होती है।

५. पात्रता के कड़े मानदंड और अनुदान संरचना (Subsidy & Eligibility)

योजना का लाभ केवल वास्तविक और जरूरतमंद किसानों तक पहुंचे, इसके लिए राज्य सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं:

क) पात्रता मानदंड

  • पंजीकरण: आवेदक किसान का उत्तर प्रदेश के कृषि विभाग के ‘पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल’ (upagriculture.com) पर वैध पंजीकरण होना अनिवार्य है।
  • बोरिंग की उपलब्धता: सोलर सबमर्सिबल पंप प्राप्त करने के लिए किसान के पास अपने खेत में पहले से ही एक चालू बोरिंग (Borewell) होना आवश्यक है। बोरिंग का व्यास (Diameter) पंप की क्षमता के अनुसार (जैसे ४ इंच, ६ इंच या ८ इंच) होना चाहिए।
  • भूमि स्वामित्व: किसान के नाम पर वैध खतौनी (Land Records) होनी चाहिए। यदि भूमि संयुक्त (Shared) है, तो अन्य सह-खातेदारों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) आवश्यक होता है।

ख) अनुदान और सब्सिडी संरचना (Subsidy Percentage)

उत्तर प्रदेश सरकार इस योजना के तहत किसानों को देश में सबसे आकर्षक सब्सिडी ढांचा प्रदान करती है। सामान्य तौर पर:

  • सोलर पंप की कुल लागत पर ६० प्रतिशत (60%) तक की भारी छूट दी जाती है, जिसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों का अंशदान शामिल होता है।
  • अत्यंत पिछड़े क्षेत्रों (जैसे बुंदेलखंड) या अनुसूचित जाति (SC) व अनुसूचित जनजाति (ST) के किसानों के लिए राज्य सरकार अतिरिक्त टॉप-अप सब्सिडी भी प्रदान करती है, जिससे किसानों का वित्तीय अंशदान केवल ४० प्रतिशत या उससे भी कम रह जाता है।

६. पारदर्शी ऑनलाइन बुकिंग और ई-लॉटरी चयन प्रक्रिया

अतीत में सब्सिडी वाली योजनाओं में भाई-भतीजावाद और बिचौलियों की बड़ी भूमिका होती थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना में शत-प्रतिशत निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पूरी आवेदन प्रक्रिया को ‘पहले आओ-पहले पाओ’ (First Come First Served) और ‘ई-लॉटरी’ (E-Lottery) के मिश्रण पर आधारित डिजिटल मोड में बदल दिया है।

चरण-दर-चरण प्रक्रिया:

  1. ऑनलाइन विज्ञापन और लक्ष्य: कृषि विभाग समाचार पत्रों और पोर्टल के माध्यम से जिलावार और पंप क्षमतावार लक्ष्यों की घोषणा करता है।
  2. टोकन बुकिंग: किसान पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल पर जाकर अपनी किसान आईडी के माध्यम से सोलर पंप का ‘ऑनलाइन टोकन’ जनरेट करते हैं।
  3. टोकन मनी जमा करना: टोकन बुक होने के बाद, किसान को एक निर्धारित समय सीमा (आमतौर पर एक सप्ताह) के भीतर बैंक चालान या ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से ₹५,००० की बुकिंग राशि (टोकन मनी) जमा करनी होती है।
  4. ई-लॉटरी (यदि आवश्यक हो): यदि किसी जिले में लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो पूरी तरह कंप्यूटरीकृत पारदर्शी ई-लॉटरी के माध्यम से लाभार्थियों का चयन किया जाता है।
  5. कृषक अंश का भुगतान: चयन होने के बाद, किसान को शेष कृषक अंश (किसान का हिस्सा) ऑनलाइन जमा करना होता है।
  6. सत्यापन और स्थापना: राशि जमा होने के बाद, कृषि विभाग और UPNEDA द्वारा नामित वेंडर (जैसे शक्ति, जैन इरिगेशन, टाटा सोलर आदि) किसान के खेत पर जाकर बोरिंग का भौतिक सत्यापन करते हैं और १५ से ३० दिनों के भीतर सोलर पैनल, स्ट्रक्चर और पंप सेट की स्थापना कर देते हैं।

७. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि पर योजना के क्रांतिकारी प्रभाव

उत्तर प्रदेश सोलर पंप योजना ने राज्य के ग्रामीण परिदृश्य में अभूतपूर्व सामाजिक-आर्थिक बदलाव पेश किए हैं:

१. डीजल के खर्च से पूर्ण मुक्ति

उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए डीजल का खर्च सबसे बड़ा सिरदर्द था। एक हेक्टेयर गन्ना या धान की फसल की एक बार सिंचाई करने में हजारों रुपये का डीजल जल जाता था। सोलर पंप लग जाने के बाद किसानों का यह मासिक और सालाना खर्च पूरी तरह समाप्त हो गया है। जो पैसा पहले तेल कंपनियों के पास जाता था, वह अब किसान के घर में बच रहा है।

२. फसलों की समय पर सिंचाई और उत्पादकता में वृद्धि

चूंकि सौर ऊर्जा पूरी तरह निःशुल्क है और दिन के समय उपलब्ध रहती है, इसलिए किसान अपनी फसलों को आवश्यकतानुसार सही समय पर पानी दे पा रहे हैं। पानी की कमी के कारण फसलों के सूखने या पैदावार कम होने का जोखिम न्यूनतम हो गया है, जिससे प्रति हेक्टेयर कृषि उत्पादकता (Crop Yield) में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

३. ‘वाटर सेलर’ (Water Sellers) के रूप में नए रोजगार का उदय

जिन प्रगतिशील किसानों ने ७.५ एचपी या १० एचपी के बड़े सोलर पंप लगाए हैं, वे न केवल अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं, बल्कि बेहद कम दामों पर अपने आस-पास के छोटे पड़ोसी किसानों के खेतों में भी पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। इससे गांवों में एक अनौपचारिक ‘जल बाजार’ (Water Market) विकसित हुआ है, जिससे सोलर पंप मालिक किसान को एक अतिरिक्त नियमित आय प्राप्त हो रही है।

४. महिलाओं और बुजुर्गों के जीवन में सुगमता

पारंपरिक डीजल इंजनों को चालू करने के लिए अत्यधिक शारीरिक श्रम (हैंडल मारना) की आवश्यकता होती थी, जो महिलाओं और बुजुर्ग किसानों के लिए बेहद कठिन था। सोलर पंप पूरी तरह से स्वचालित या सिंगल-स्विच (Single Switch) आधारित होते हैं। सुबह सूरज निकलते ही पंप स्वतः चालू हो जाता है, जिससे घर की महिलाएं और बुजुर्ग भी आसानी से सिंचाई का प्रबंधन कर रहे हैं।


८. योजना के सफल क्रियान्वयन में प्रमुख चुनौतियाँ

यद्यपि यह योजना अत्यंत लोकप्रिय और सफल है, परंतु धरातल पर कुछ व्यावहारिक और तकनीकी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं:

  • भूजल स्तर का तेजी से गिरना: सोलर पंपों के माध्यम से दिन भर मुफ्त पानी मिलने के कारण कुछ क्षेत्रों में किसान जरूरत से ज्यादा सिंचाई कर रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और डार्क ज़ोन (Dark Zones) वाले ब्लॉकों में इसके कारण भूजल स्तर (Water Table) चिंताजनक रूप से नीचे जा रहा है।
  • चोरी और सुरक्षा की समस्या: गांवों में खेतों में सुनसान इलाकों में लगे महंगे सोलर पैनलों और तांबे की केबलों की चोरी होने का खतरा हमेशा बना रहता है। हालांकि बीमा (Insurance) की व्यवस्था होती है, लेकिन चोरी होने पर किसानों की सिंचाई बाधित होती है।
  • आफ्टर-सेल्स सर्विस (After-sales Service) में देरी: सोलर पंपों पर सामान्यतः ५ वर्ष की वारंटी होती है। लेकिन सुदूर देहाती इलाकों में यदि कंट्रोलर (Controller) या इनवर्टर में कोई तकनीकी खराबी आ जाती है, तो कंपनियों के इंजीनियरों को पहुँचने में कई दिन लग जाते हैं, जिससे ऐन फसल के समय किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।
  • सीमित लक्ष्य और भारी मांग: योजना की लोकप्रियता इतनी अधिक है कि टोकन खुलने के कुछ ही मिनटों के भीतर सारे लक्ष्य समाप्त हो जाते हैं। सर्वर डाउन होने या तकनीकी खराबी के कारण लाखों डिजिटल रूप से कमजोर किसान टोकन बुक करने से वंचित रह जाते हैं।

९. भविष्य की राह और संधारणीय उपाय (Way Forward)

सोलर पंप योजना को अधिक संधारणीय (Sustainable) और सर्वव्यापी बनाने के लिए निम्नलिखित रणनीतियों को अपनाया जाना आवश्यक है:

  1. सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation) का अनिवार्य एकीकरण: गिरते भूजल को रोकने के लिए सरकार को यह नियम बनाना चाहिए कि ५ एचपी या उससे बड़े सोलर पंपों का आवंटन केवल उन्हीं किसानों को किया जाएगा जो अनिवार्य रूप से ‘ड्रिप’ या ‘स्प्रिंकलर’ सिंचाई प्रणाली का उपयोग करेंगे। इसके लिए दोनों योजनाओं की सब्सिडी को एक साथ क्लब (Club) किया जा सकता है।
  2. स्मार्ट ग्रिड नेट मीटरिंग (Net Metering): कुसुम योजना के घटक स (Component C) को तेजी से लागू किया जाना चाहिए। जब किसान सिंचाई नहीं कर रहा हो (जैसे सर्दियों में या फसल कटने के बाद), तो सोलर पंप द्वारा उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को स्थानीय ग्रिड को बेचा जा सके। नेट मीटरिंग के माध्यम से बिजली कंपनियां किसानों को इस बिजली का भुगतान करेंगी, जिससे किसान ‘ऊर्जा प्रदाता’ (Energy Provider) बन सकेंगे।
  3. ब्लॉक स्तर पर सर्विस सेंटर्स की स्थापना: सोलर वेंडर कंपनियों को पाबंद किया जाना चाहिए कि वे प्रत्येक तहसील या ब्लॉक स्तर पर एक त्वरित तकनीकी सहायता टीम (Quick Response Team) रखें, जो २४ से ४८ घंटों के भीतर किसी भी तकनीकी खराबी को दूर कर सके।
  4. टोकन प्रणाली का सरलीकरण: छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक विशेष कोटा आरक्षित होना चाहिए, ताकि वे बड़े साइबर कैफे संचालकों के बिना भी आसानी से अपने मोबाइल या स्थानीय राजकीय बीज गोदामों से ऑफलाइन या सरल मोड में पंजीकरण करा सकें।

१०. निष्कर्ष (Conclusion)

निष्कर्षतः, उत्तर प्रदेश सोलर पंप योजना (PM-KUSUM) राज्य के कृषि क्षेत्र को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और लागत-प्रभावी बनाने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम है। इस योजना ने उत्तर प्रदेश के अन्नदाताओं को डीजल के धुएं और महंगे बिजली बिलों के अंतहीन दुष्चक्र से निकालकर सौर ऊर्जा के स्वच्छ और असीमित प्रकाश में ला खड़ा किया है। दिन के समय निर्बाध सिंचाई और शून्य परिचालन लागत ने किसानों के जीवन में समृद्धि और मानसिक शांति का एक नया अध्याय लिखा है।

हालांकि, भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकने और आफ्टर-सेल्स सर्विस को मजबूत करने जैसी ढांचागत चुनौतियों पर निरंतर काम करने की आवश्यकता है, परंतु इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह योजना ग्रामीण उत्तर प्रदेश में आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही है। यह मूक सौर क्रांति आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को देश का सबसे समृद्ध, ऊर्जा-सुरक्षित और हरित कृषि प्रधान राज्य बनाने में रीढ़ की हड्डी साबित होगी।


उत्तर प्रदेश की सोलर पंप योजना (PM-KUSUM) से जुड़े कुछ सबसे महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

  • प्रश्न १: उत्तर प्रदेश सोलर पंप योजना (PM-KUSUM) क्या है?
    • उत्तर: यह केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की एक संयुक्त और बेहद लोकप्रिय योजना है। इसके तहत किसानों को अपने खेतों में फसलों की सिंचाई के लिए डीजल और बिजली के पंपों की जगह सौर ऊर्जा से चलने वाले सबमर्सिबल या सरफेस सोलर पंप लगाने के लिए ६० प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दी जाती है।
  • प्रश्न २: योजना के तहत किसान कितनी क्षमता (HP) के सोलर पंप के लिए आवेदन कर सकते हैं?
    • उत्तर: किसान अपनी भूमि, पानी की गहराई और जरूरत के अनुसार अलग-अलग क्षमता के पंप चुन सकते हैं:
      • २ एचपी (2 HP): छोटे किसानों और २० से ३० फीट तक के जल स्तर के लिए।
      • ३ एचपी (3 HP): मध्यम स्तर के किसानों और ३० से ५० फीट तक के जल स्तर के लिए।
      • ५ एचपी (5 HP): ५० से १०० फीट गहरे जल स्तर के लिए।
      • ७.५ एचपी और १० एचपी: बड़े खेतों, गन्ने की खेती या सामूहिक सिंचाई के लिए।
  • प्रश्न ३: सोलर पंप योजना का लाभ लेने के लिए मुख्य पात्रता क्या है?
    • उत्तर:
      • आवेदक किसान उत्तर प्रदेश का निवासी होना चाहिए।
      • किसान का ‘पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल’ (upagriculture.com) पर पंजीकरण होना अनिवार्य है।
      • किसान के खेत में अपनी खुद की एक चालू बोरिंग (Borewell) होनी चाहिए।
      • भूमि की वैध खतौनी (भूलेख रिकॉर्ड) किसान के नाम होनी चाहिए।
  • प्रश्न ४: सोलर पंप के लिए ऑनलाइन बुकिंग कैसे की जाती है?
    • उत्तर: कृषि विभाग जब योजना के तहत लक्ष्यों की घोषणा करता है, तब किसानों को पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल पर जाकर ‘ऑनलाइन टोकन’ जनरेट करना होता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से ‘पहले आओ-पहले पाओ’ या ‘ई-लॉटरी’ प्रणाली पर आधारित होती है।
  • प्रश्न ५: ‘टोकन मनी’ क्या है और इसे कब जमा करना होता है?
    • उत्तर: ऑनलाइन पोर्टल पर सोलर पंप का टोकन सफलतापूर्वक बुक होने के बाद किसान को अपनी बुकिंग पक्की करने के लिए ₹५,००० की टोकन राशि निर्धारित समय (आमतौर पर १ सप्ताह) के भीतर ऑनलाइन या बैंक चालान के माध्यम से जमा करनी होती है। यदि तय समय में यह राशि जमा नहीं होती, तो टोकन स्वतः निरस्त हो जाता है।
  • प्रश्न ६: क्या सोलर पंप पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे बैंक खाते में आती है?
    • उत्तर: नहीं, सोलर पंप योजना में डीबीटी (DBT) थोड़ा अलग तरीके से काम करता है। किसान को पंप की पूरी कीमत नहीं चुकानी होती। किसान को केवल अपना हिस्सा यानी ‘कृषक अंश’ (कुल लागत का लगभग ४०%) ही जमा करना होता है। सरकार सब्सिडी का ६०% हिस्सा सीधे सोलर वेंडर कंपनी को भुगतान करती है जो आपके खेत में पंप स्थापित करती है।
  • प्रश्न ७: क्या सोलर पंप के खराब होने पर कोई वारंटी या इंश्योरेंस मिलता है?
    • उत्तर: हाँ, योजना के तहत स्थापित किए जाने वाले सोलर पंपों पर सरकार की तरफ से ५ वर्ष की पूरी वारंटी और रख-रखाव (Maintenance) की सुविधा दी जाती है। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदा या चोरी जैसी स्थितियों के लिए शुरुआती इंश्योरेंस कवर भी प्रदान किया जाता है।

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