शून्य गरीबी का लक्ष्य(International Day for the Eradication of Poverty)2026:अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस पर विशेष आर्थिक गाइड जानें 17 अक्टूबर का इतिहास

एक उज्ज्वल और विकासशील पृष्ठभूमि में बैंक पासबुक और डिजिटल वित्तीय सहायता (DBT) प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाती ग्रामीण महिलाएँ, जो गरीबी उन्मूलन की सफलता को दर्शाती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty): इतिहास, महत्व, वैश्विक गरीबी के कारण और उन्मूलन के स्वर्णिम उपाय

गरीबी केवल धन का अभाव नहीं है, बल्कि यह मानवीय गरिमा, बुनियादी अधिकारों और अवसरों के छिन जाने का नाम है। जब कोई व्यक्ति भोजन, स्वच्छ पानी, सुरक्षित घर, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों से वंचित रह जाता है, तो वह अत्यंत दयनीय स्थिति में जीने को मजबूर होता है। वर्तमान में दुनिया भर में करोड़ों लोग ऐसे हैं जो हर दिन अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) से जूझ रहे हैं, जबकि दूसरी ओर दुनिया में असीम संसाधनों का संचय हो रहा है।

वैश्विक स्तर पर फैली इस आर्थिक और सामाजिक असमानता को समाप्त करने, गरीबी से पीड़ित लोगों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने और भूख व अभाव मुक्त विश्व का निर्माण करने के उद्देश्य से हर साल 17 अक्टूबर को पूरी दुनिया में ‘अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस’ (International Day for the Eradication of Poverty) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि गरीबी को समाप्त करना कोई परोपकार या दान का कार्य नहीं है, बल्कि यह न्याय, समानता और बुनियादी मानवाधिकारों (Human Rights) की बहाली का सबसे बड़ा माध्यम है।

इस विस्तृत लेख में हम अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस के इतिहास, इसके महत्व, वैश्विक गरीबी के मुख्य कारणों, भारत में गरीबी की स्थिति, सरकारी प्रयासों और इस वैश्विक अभिशाप को पूरी तरह समाप्त करने के व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।


1. अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस का संक्षिप्त विवरण (Overview)

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-1 (SDG 1 – No Poverty) को प्राप्त करने के लिए देशों को प्रेरित करना है, जिसके तहत दुनिया से हर रूप में गरीबी को पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लिया गया है।

महत्वपूर्ण पहलूविवरण
उत्सव का नामअंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty)
आयोजन की तिथि17 अक्टूबर (प्रतिवर्ष)
स्थापना वर्ष17 अक्टूबर 1987 (पेरिस में पहला ऐतिहासिक प्रदर्शन)
यूएन आधिकारिक घोषणा22 दिसंबर 1992 (संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 47/196)
मुख्य संचालक संस्थासंयुक्त राष्ट्र (United Nations – UN)
मुख्य उद्देश्यवैश्विक स्तर पर अत्यधिक गरीबी, सामाजिक बहिष्कार और असमानता का उन्मूलन

2. इतिहास और स्थापना (History and Establishment)

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस को मनाए जाने की शुरुआत फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुए एक बेहद भावुक और ऐतिहासिक नागरिक आंदोलन से जुड़ी हुई है।

क. 17 अक्टूबर 1987 का पेरिस प्रदर्शन:

इस दिवस की नींव 17 अक्टूबर 1987 को रखी गई थी, जब फ्रांस के पेरिस में स्थित ‘ट्रोकाडेरो’ (Trocadéro) में एक लाख से अधिक लोग इकट्ठा हुए थे। इसी स्थान पर 1948 में ‘मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा’ पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह जनसमूह ‘एटीडी फोर्थ वर्ल्ड’ (ATD Fourth World) के संस्थापक फादर जोसेफ व्रेसिंस्की (Father Joseph Wresinski) के आह्वान पर उमड़ा था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अत्यधिक गरीबी मानवाधिकारों का उल्लंघन है और दुनिया को इसे समाप्त करने के लिए एकजुट होना होगा।

ख. संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक मंजूरी (1992):

पेरिस में हुए इस आंदोलन की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी और धीरे-धीरे कई देशों में 17 अक्टूबर को ‘अत्यधिक गरीबी के खिलाफ विश्व दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा। इस आंदोलन की प्रासंगिकता और गंभीरता को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 22 दिसंबर 1992 को अपने प्रस्ताव 47/196 के माध्यम से आधिकारिक तौर पर 17 अक्टूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस’ के रूप में घोषित किया। पहला आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र दिवस 17 अक्टूबर 1993 को मनाया गया।


3. अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस का महत्व और उद्देश्य

संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस विशेष दिवस को मनाने के पीछे निम्नलिखित गहरे मानवीय और सामाजिक उद्देश्य छिपे हैं:

  • पीड़ितों की आवाज बनना: गरीबी और सामाजिक बहिष्कार से जूझ रहे लोगों के संघर्षों, उनके साहस और उनकी आवाज को दुनिया के सामने लाना।
  • मानवीय गरिमा की रक्षा: यह स्थापित करना कि हर इंसान को बिना किसी भेदभाव के भोजन, आश्रय, शिक्षा और सम्मान के साथ जीने का कानूनी अधिकार है।
  • नीति-निर्माताओं को जगाना: दुनिया भर की सरकारों, उद्योगपतियों और नीति-निर्माताओं को ऐसी आर्थिक नीतियां बनाने के लिए मजबूर करना जो समावेशी विकास (Inclusive Growth) को बढ़ावा देती हों।
  • असमानता की खाई को पाटना: अमीर और गरीब के बीच बढ़ती जा रही गहरी आर्थिक व सामाजिक खाई को कम करने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाना।

4. वैश्विक गरीबी के सामने प्रमुख चुनौतियाँ और कारण

21वीं सदी में भी दुनिया के सामने गरीबी एक विकराल समस्या बनी हुई है। इसके पीछे कई जटिल और परस्पर जुड़े हुए कारण जिम्मेदार हैं:

क. बेरोजगारी और कौशल का अभाव (Unemployment and Skill Gap):

विकासशील देशों में जनसंख्या की तुलना में रोजगार के अवसरों की भारी कमी है। इसके अलावा, आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुसार तकनीकी रूप से कुशल (Skilled) न होने के कारण युवा कम वेतन वाली और असुरक्षित दिहाड़ी नौकरियों (Unorganized Sector) में काम करने को मजबूर होते हैं, जिससे वे गरीबी के दुष्चक्र (Vicious Cycle of Poverty) से बाहर नहीं निकल पाते।

ख. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता:

गरीबी का सबसे बड़ा कारण और परिणाम दोनों शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं का न मिलना है। जब एक गरीब परिवार का बच्चा पैसों की कमी के कारण स्कूल नहीं जा पाता, तो बड़ा होकर उसके पास बेहतर कमाई के अवसर नहीं होते। इसी तरह, परिवार में किसी गंभीर बीमारी के आने पर इलाज का खर्च (Out-of-pocket expenditure) अच्छे-खासे परिवारों को गरीबी रेखा के नीचे धकेल देता है।

ग. जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं:

ग्लोबल वार्मिंग, बेमौसम बाढ़, सूखा और चक्रवातों के कारण सबसे अधिक मार गरीब और सीमांत किसानों पर पड़ती है। उनकी फसलें और घर तबाह हो जाते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और भुखमरी का संकट अचानक बहुत गहरा हो जाता है।

घ. भू-राजनीतिक संघर्ष और युद्ध:

विभिन्न देशों में होने वाले युद्धों (जैसे यूक्रेन संकट या मध्य पूर्व के तनाव) के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला टूट जाती है। इसके परिणामस्वरूप तेल, अनाज और उर्वरकों की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। महंगाई की सबसे पहली और सीधी मार समाज के सबसे गरीब और मजदूर वर्ग पर पड़ती है।


5. भारतीय संदर्भ: गरीबी से लड़ाई और वर्तमान स्थिति

भारत के लिए गरीबी उन्मूलन हमेशा से एक राष्ट्रीय प्राथमिकता रहा है। आजादी के समय भारत की एक बहुत बड़ी आबादी अत्यधिक गरीबी और भुखमरी की स्थिति में जी रही थी।

क. बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) में ऐतिहासिक सुधार:

नीति आयोग और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले डेढ़ दशक में गरीबी उन्मूलन के मामले में दुनिया का सबसे सफल और ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। देश में बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) में भारी गिरावट दर्ज की गई है। करोड़ों लोग स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के पैमानों पर बेहतर होकर गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।

ख. भारत सरकार के क्रांतिकारी प्रयास और योजनाएं:

भारत सरकार ने गरीबी के खिलाफ चौतरफा हमला करते हुए दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क स्थापित किए हैं:

  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA): यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को साल में कम से कम 100 दिनों के गारंटीकृत अकुशल रोजगार की कानूनी गारंटी देती है। इसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वित्तीय मजबूती प्रदान की है।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY): देश के लगभग 80 करोड़ से अधिक जरूरतमंद नागरिकों को हर महीने पूरी तरह से मुफ्त राशन (गेहूं/चावल) दिया जा रहा है, जिसने भुखमरी और खाद्य असुरक्षा के कारण होने वाली गरीबी को पूरी तरह रोक दिया है।
  • प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY): इसके तहत देश के करोड़ों गरीबों के शून्य-बैलेंस बैंक खाते खोले गए। इस डिजिटल वित्तीय समावेश (Financial Inclusion) के कारण अब सरकारी सब्सिडी (DBT) का पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे गरीबों के खातों में पहुँच रहा है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और उज्ज्वला योजना: गरीबों को मुफ्त पक्के घर, शौचालय और मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे उनके जीवन स्तर (Living Standard) में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।

6. गरीबी उन्मूलन और ‘नो पावर्टी’ (No Poverty) प्राप्त करने के स्वर्णिम उपाय

संयुक्त राष्ट्र के एजेंडा 2030 के तहत दुनिया को पूरी तरह गरीबी से मुक्त करने के लिए निम्नलिखित रणनीतियों पर वैश्विक स्तर पर काम करना अनिवार्य है:

क. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास (Skill Development):

गरीबी की जंजीरों को तोड़ने का एकमात्र और सबसे शक्तिशाली हथियार शिक्षा है। युवाओं को केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय आधुनिक तकनीकी शिक्षा, कोडिंग, रोबोटिक्स और व्यावसायिक कौशल (Vocational Training) का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि वे सीधे रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ सकें।

ख. सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा (Universal Health Coverage):

अस्पतालों के इलाज का भारी खर्च किसी भी गरीब परिवार की कमर तोड़ देता है। भारत की ‘आयुष्मान भारत योजना’ (जिसके तहत गरीबों को ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलता है) की तर्ज पर वैश्विक स्तर पर मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि बीमारी के कारण कोई परिवार गरीब न बने।

ग. महिला सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूह (SHGs):

जब घर की महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होती है, तो पूरा परिवार गरीबी के जाल से बाहर निकल आता है। ग्रामीण महिलाओं को छोटे उद्योगों, सिलाई, डेयरी फार्मिंग और कुटीर उद्योगों के लिए कम ब्याज दर पर बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

घ. समावेशी आर्थिक नीतियां (Inclusive Economic Policies):

सरकारों को ऐसी टैक्स और आर्थिक नीतियां बनानी चाहिए जो कॉर्पोरेट मुनाफे के साथ-साथ न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage) में वृद्धि सुनिश्चित करें। आर्थिक विकास का लाभ केवल कुछ अमीर परिवारों तक सीमित रहने के बजाय समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए।


7. एक नागरिक के रूप में हमारा कर्तव्य: हम क्या कर सकते हैं?

गरीबी का उन्मूलन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील समाज के रूप में हमारी भी व्यक्तिगत जिम्मेदारी बनती है:

  1. शिक्षा का दान दें: अपने आस-पास के किसी गरीब बच्चे, आपके घर काम करने वाले सहायक या मजदूर के बच्चों की स्कूली शिक्षा, किताबों या फीस में आर्थिक मदद करें।
  2. भोजन और संसाधनों की बर्बादी रोकें: शादियों और होटलों में खाना बर्बाद करने के बजाय उसे सुरक्षित रखें और जरूरतमंदों तक पहुँचाएं। आपके द्वारा बचाई गई छोटी सी राशि किसी के घर का चूल्हा चला सकती है।
  3. रोजगार के अवसर दें: अपने छोटे व्यवसायों या घरों में स्थानीय लोगों को उचित मजदूरी और सम्मानजनक कार्य वातावरण के साथ काम पर रखें।

निष्कर्ष (Conclusion)

गरीबी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है जिसे बदला न जा सके। यह मानव निर्मित व्यवस्थाओं, नीतियों में कमियों और सामाजिक उदासीनता का परिणाम है। जैसा कि दक्षिण अफ्रीका के महान नेता नेल्सन मंडेला ने कहा था — “गरीबी गुलामी और रंगभेद की तरह ही कोई प्राकृतिक घटना नहीं है। यह मानव निर्मित है और इसे मनुष्यों के प्रयासों से ही दूर और परास्त किया जा सकता है।”

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस पूरी मानवता को यह आत्मनिरीक्षण करने की चेतावनी देता है कि जब तक दुनिया का एक भी नागरिक भूखा, अशिक्षित या बेघर है, तब तक हमारी आधुनिक प्रगति अधूरी है। आइए, इस 17 अक्टूबर को हम सब मिलकर यह कड़ा संकल्प लें कि हम न केवल अपने जीवन को समृद्ध बनाएंगे, बल्कि अपने आस-पास के वंचित भाई-बहनों को भी आगे बढ़ने के समान अवसर और संबल प्रदान करेंगे, ताकि एक शोषण मुक्त, समतामूलक और समृद्ध विश्व का सपना हकीकत में बदल सके।

“गरीबी से मुक्ति, समाज की प्रगति — अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!”


अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) से जुड़े कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):

Q1. अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस हर साल 17 अक्टूबर को ही क्यों मनाया जाता है?

उत्तर: फ्रांस की राजधानी पेरिस में 17 अक्टूबर 1987 को अत्यधिक गरीबी, भुखमरी और सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ एक लाख से अधिक लोगों ने मानवाधिकारों की बहाली के लिए पहला ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में और गरीबी के खिलाफ वैश्विक चेतना जगाने के लिए प्रतिवर्ष 17 अक्टूबर को यह दिवस मनाया जाता है।

Q2. इस दिवस को संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा आधिकारिक मान्यता कब दी गई थी?

उत्तर: पेरिस आंदोलन की व्यापक सफलता को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 22 दिसंबर 1992 को अपने प्रस्ताव 47/196 के माध्यम से 17 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर ‘अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस’ घोषित किया। पहला आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र दिवस 17 अक्टूबर 1993 को मनाया गया था।

Q3. संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में गरीबी उन्मूलन का कौन सा लक्ष्य है?

उत्तर: संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य संख्या 1 (SDG 1 – No Poverty) का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 तक दुनिया से हर रूप में और हर जगह फैली अत्यधिक गरीबी को पूरी तरह समाप्त करना है।

Q4. ‘बहुआयामी गरीबी’ (Multidimensional Poverty) क्या होती है?

उत्तर: पारंपरिक रूप से गरीबी को केवल किसी व्यक्ति की आय (प्रतिदिन की कमाई) के आधार पर मापा जाता था। लेकिन बहुआयामी गरीबी के अंतर्गत केवल आय नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में तीन प्रमुख क्षेत्रों में होने वाले अभावों को मापा जाता है: स्वास्थ्य (पोषण/शिशु मृत्यु दर), शिक्षा (स्कूल जाने के वर्ष/उपस्थिति) और जीवन स्तर (पीने का पानी, पक्का मकान, बिजली, स्वच्छता, ईंधन)।

Q5. भारत सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के जरिए गरीबी मिटाने के लिए चलाई जा रही सबसे बड़ी योजना कौन सी है?

उत्तर: भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही सबसे बड़ी योजना मनरेगा (MGNREGA – महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक परिवार के अकुशल वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के गारंटीकृत वेतन रोजगार की कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है।

Q6. भारत में गरीबों को मुफ़्त चिकित्सा सहायता प्रदान करने वाली योजना का क्या नाम है?

उत्तर: इस योजना का नाम ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB-PMJAY) है। यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसके तहत देश के लगभग 55 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर नागरिकों को हर साल प्रति परिवार ₹5 लाख तक का मुफ्त कैशलेस इलाज सूचीबद्ध अस्पतालों में प्रदान किया जाता है, ताकि इलाज के खर्च के कारण कोई परिवार गरीब न बने।

Q7. वित्तीय समावेश (Financial Inclusion) किस प्रकार गरीबी दूर करने में मदद करता है?

उत्तर:‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ (PMJDY) के तहत गरीबों के शून्य-बैलेंस बैंक खाते खोले गए और उन्हें डिजिटल बैंकिंग से जोड़ा गया। वित्तीय समावेश की मदद से अब सरकार द्वारा भेजी जाने वाली विभिन्न सब्सिडी, पेंशन और वित्तीय सहायता (Direct Benefit Transfer – DBT) बिना किसी बिचौलिए या भ्रष्टाचार के सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुँचती है, जिससे गरीबों की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ती है।


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