अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस: UNCAC का इतिहास, डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शी समाज का रोडमैप

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अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस (International Anti-Corruption Day): इतिहास, चुनौतियाँ, वैश्विक तंत्र और एक पारदर्शी समाज का रोडमैप
भ्रष्टाचार (Corruption) एक ऐसा मूक और अदृश्य दीमक है जो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था, लोकतांत्रिक संस्थाओं, सामाजिक ताने-बाने और आम नागरिक के न्याय व समानता के अधिकार को भीतर ही भीतर खोखला कर देता है। यह केवल चंद पैसों के अवैध लेन-देन या वित्तीय हेर-फेर का मामला नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक और नैतिक अपराध है, जो सबसे ज़्यादा समाज के गरीब और वंचित तबके को प्रभावित करता है। अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस (International Anti-Corruption Day) हर साल 9 दिसंबर को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह दिन केवल एक वैश्विक औपचारिकता या भाषणों तक सीमित रहने का अवसर नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एकजुट होने, इसके दुष्प्रभावों के प्रति जन-जागरूकता फैलाने और सरकारों व नागरिकों के बीच पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) को मजबूत करने का एक अंतरराष्ट्रीय जन-आंदोलन है।
वर्ष 2026 में अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस का आयोजन एक ऐसे डिजिटल और तकनीकी युग में हो रहा है, जहाँ ब्लॉकचेन (Blockchain), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल गवर्नेंस (E-Governance) ने भ्रष्टाचार को रोकने के नए द्वार खोले हैं। इसके साथ ही, शेल कंपनियों, डिजिटल मनी लॉन्ड्रिंग और सीमा पार वित्तीय अपराधों के नए रूपों ने वैश्विक जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियाँ भी खड़ी की हैं। इस विस्तृत लेख में हम अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस के इतिहास, संयुक्त राष्ट्र के भ्रष्टाचार विरोधी कन्वेंशन (UNCAC), भारत में भ्रष्टाचार नियंत्रण के कानूनी व प्रशासनिक ढांचे (जैसे लोकपाल, सीवीसी, सीबीआई), आधुनिक डिजिटल गवर्नेंस की भूमिका और व्यक्तिगत स्तर पर हमारी ज़िम्मेदारियों का 1500 से अधिक शब्दों में व्यापक विश्लेषण करेंगे।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र का संकल्प और UNCAC का जन्म
अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस को मनाए जाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने के लिए एक साझा कानूनी ढांचा तैयार करने के प्रयासों के तहत हुई थी।
[UNCAC: भ्रष्टाचार विरोधी वैश्विक संधि]
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| 31 अक्टूबर 2003: संयुक्त राष्ट्र का ऐतिहासिक संकल्प |
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v (मुख्य परिणाम) v (आधिकारिक शुरुआत)
- UNCAC संधि को अपनाया गया - 9 दिसंबर 2003 को संधि हस्ताक्षर के लिए खुली
- सीमा पार संपत्ति की वापसी का नियम बना - हर साल 9 दिसंबर को यह दिवस घोषित हुआ
विकासक्रम और महत्वपूर्ण मील के पत्थर:
- कन्वेंशन को अपनाना (31 अक्टूबर 2003): संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 31 अक्टूबर 2003 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव (58/4) पारित कर ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन’ (United Nations Convention against Corruption – UNCAC) को अपनाया। यह दुनिया की एकमात्र सार्वभौमिक और कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally Binding) भ्रष्टाचार विरोधी अंतरराष्ट्रीय संधि है।
- हस्ताक्षर और दिवस की स्थापना: यह कन्वेंशन 9 दिसंबर 2003 को मैक्सिको के मेरिडा शहर में सदस्य देशों के हस्ताक्षर के लिए खोला गया था। इसी ऐतिहासिक तारीख को याद रखने और इसके सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने हर साल 9 दिसंबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस’ के रूप में घोषित किया।
- यूएनओडीसी (UNODC) की भूमिका: संयुक्त राष्ट्र का ड्रग्स और अपराध कार्यालय (United Nations Office on Drugs and Crime – UNODC) इस कन्वेंशन के सचिवालय के रूप में कार्य करता है और दुनिया भर में भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों का नेतृत्व करता है।
🌐 UNCAC के प्रमुख स्तंभ: अंतरराष्ट्रीय सहयोग का तंत्र
भ्रष्टाचार अक्सर किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। अपराधी एक देश में जनता का पैसा लूटकर उसे दूसरे देश के गुप्त बैंक खातों (Tax Havens) या शेल कंपनियों में छुपा देते हैं। UNCAC इसी सीमा पार भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सदस्य देशों को एक कानूनी मंच प्रदान करता है, जो चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
- रोकथाम (Prevention): सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में पारदर्शिता, ईमानदारी, जवाबदेही और कानून के शासन को बढ़ावा देने वाली नीतियां बनाना।
- अपराधीकरण (Criminalization): रिश्वतखोरी, सार्वजनिक धन के गबन, प्रभाव के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे कृत्यों को घरेलू कानून के तहत गंभीर अपराध घोषित करना।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग (International Cooperation): जांच, प्रत्यर्पण (Extradition) और कानूनी सहायता के मामलों में दुनिया भर की सरकारों, पुलिस (जैसे इंटरपोल) और खुफिया एजेंसियों के बीच वास्तविक समय में सहयोग सुनिश्चित करना।
- संपत्ति की वापसी (Asset Recovery): यह इस संधि का सबसे क्रांतिकारी हिस्सा है। इसके तहत यदि कोई भ्रष्ट अधिकारी या राजनेता देश का पैसा लूटकर विदेश भाग जाता है, तो उस देश की सरकार को वह चुराई गई संपत्ति (Stolen Assets) मूल देश को वापस लौटानी होगी।
🇮🇳 भारत में भ्रष्टाचार विरोधी ढांचा: कानूनी और प्रशासनिक प्रहरी
भारत ने साल 2011 में UNCAC संधि की पुष्टि (Ratification) की थी। देश के आर्थिक विकास को गति देने और सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता लाने के लिए भारत सरकार ने एक बहुस्तरीय कानूनी और प्रशासनिक सुरक्षा चक्र तैयार किया है।
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| भारत के प्रमुख भ्रष्टाचार विरोधी कानून |
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| कानून/संस्था का नाम | मुख्य कार्य और अधिकार |
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| भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 | लोक सेवकों द्वारा रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग पर जेल व दंड|
| केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) | सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की निगरानी करने वाली सर्वोच्च संस्था|
| लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2014 | प्रधानमंत्री से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के खिलाफ जांच का अधिकार|
| केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) | भ्रष्टाचार और बड़े वित्तीय घोटालों की जांच करने वाली मुख्य एजेंसी |
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1. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act)
यह भारत में भ्रष्टाचार से निपटने का मुख्य कानूनी हथियार है। साल 2018 में इस कानून में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए, जिसके तहत रिश्वत लेने वाले के साथ-साथ रिश्र्वत देने वाले (Bribe Giver) को भी सात साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है, ताकि कॉरपोरेट स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जा सके।
2. लोकपाल और लोकायुक्त (Ombudsman)
लंबे जन-आंदोलनों के बाद अस्तित्व में आए लोकपाल (केंद्र स्तर पर) और लोकायुक्त (राज्य स्तर पर) एक स्वतंत्र और सर्वोच्च वैधानिक संस्था हैं। इनके पास कार्यपालिका के प्रभाव से मुक्त होकर किसी भी लोक सेवक, यहाँ तक कि मंत्रियों और उच्च अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों की प्रारंभिक जांच और मुकदमा चलाने का आदेश देने की असीम शक्तियां हैं।
💻 डिजिटल गवर्नेंस (E-Governance): पारदर्शिता का नया युग
2026 में भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ा और प्रभावी प्रहार किसी कानून के जरिए नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी (Technology) के माध्यम से हुआ है। डिजिटल इंडिया मिशन ने बिचौलियों और बाबू-संस्कृति (Red-Tapism) के उस तंत्र को तोड़ दिया है जो भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी नर्सरी था।
1. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT)
डीबीटी प्रणाली ने भारत के कल्याणकारी सामाजिक तंत्र में एक अभूतपूर्व क्रांति ला दी है। पहले जहाँ गरीबों के राशन, पेंशन या किसान सब्सिडी का एक बड़ा हिस्सा बिचौलियों की जेब में चला जाता था, वहीं अब जनधन बैंक खातों, आधार कार्ड और मोबाइल (JAM Trinity) के एकीकरण से सरकारी सहायता का 100% पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचता है। इससे सरकारी खजाने से होने वाले लीकेज और फर्जी लाभार्थियों (Ghost Beneficiaries) की समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है।
2. ई-टेंडरिंग और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM)
सरकारी खरीद (Public Procurement) में होने वाले बड़े घोटालों को रोकने के लिए सरकार ने संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के जरिए कोई भी छोटी-बड़ी कंपनी या स्टार्टअप पूरी तरह पारदर्शी तरीके से सीधे सरकार को अपना सामान बेच सकती है। इससे टेंडर प्रक्रिया में होने वाले भाई-भतीजावाद, साठ-गांठ (Collusion) और रिश्वतखोरी पर पूर्ण विराम लग गया है।
3. फेसलेस असेसमेंट (Faceless Assessment)
आयकर (Income Tax) और सीमा शुल्क विभागों में लागू की गई फेसलेस कर निर्धारण प्रणाली के तहत करदाताओं और टैक्स अधिकारियों के बीच का भौतिक संपर्क (Physical Interface) समाप्त कर दिया गया है। स्क्रूटनी के मामले एआई द्वारा यादृच्छिक (Random) तरीके से किसी भी अधिकारी को आवंटित किए जाते हैं, जिससे अधिकारियों द्वारा करदाताओं को डराने या अनुचित लाभ उठाने की संभावना खत्म हो गई है।
⚠️ 2026 में भ्रष्टाचार के नए रूप और वैश्विक चुनौतियाँ
जैसे-जैसे सुरक्षा और पारदर्शिता की तकनीकें उन्नत हुई हैं, वैसे-वैसे भ्रष्ट तत्वों ने भी खुद को तकनीकी रूप से अपडेट कर लिया है। 2026 में दुनिया के सामने भ्रष्टाचार के कई नए और जटिल रूप मौजूद हैं:
- क्रिप्टोकरेंसी और साइबर मनी लॉन्ड्रिंग: भ्रष्ट अधिकारी और वैश्विक अपराधी अब पारंपरिक बैंकों के बजाय क्रिप्टो संपत्तियों (Cryptocurrencies) और अनरेगुलेटेड डिजिटल वॉलेट के जरिए रिश्वत का लेन-देन कर रहे हैं। इन ब्लॉकचेन ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना और उनका वास्तविक मालिक खोजना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी तकनीकी चुनौती है।
- शेल कंपनियों का मकड़जाल (Shell Companies): कागजों पर चलने वाली फर्जी कंपनियां आज भी काले धन को सफेद करने और टैक्स चोरी का सबसे सुरक्षित जरिया बनी हुई हैं। ये कंपनियां दुनिया के किसी एक देश में पंजीकृत होती हैं, इनका बैंक खाता दूसरे देश में होता है और इनका वास्तविक लाभार्थी (Beneficial Owner) किसी तीसरे देश में छिपा बैठा होता है।
- व्हिसलब्लोअर (Whistleblowers) की सुरक्षा का संकट: जो ईमानदार कर्मचारी या पत्रकार सरकारी या निजी विभागों में चल रहे बड़े घोटालों को उजागर करते हैं, उन्हें अक्सर अपनी नौकरी, सामाजिक सुरक्षा और यहाँ तक कि अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। व्हिसलब्लोअर संरक्षण कानूनों को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत व व्यावहारिक बनाने की सख्त जरूरत है।
🤝 हमारी ज़िम्मेदारी: भ्रष्टाचार मुक्त समाज के निर्माण में नागरिकों की भूमिका
अक्सर हम सोचते हैं कि भ्रष्टाचार केवल नेताओं या बड़े अधिकारियों का विषय है, लेकिन ऐसा नहीं है। भ्रष्टाचार की शुरुआत तब होती है जब एक आम नागरिक ट्रैफिक सिग्नल पर चालान से बचने के लिए पुलिसकर्मी को पैसे देने की पेशकश करता है, या बिना कतार के काम कराने के लिए किसी क्लर्क को रिश्वत देता है।
[भ्रष्टाचार विरोधी नागरिक चक्र]
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| दैनिक जीवन में अपनाने योग्य 5 मूल संकल्प |
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v (व्यक्तिगत ईमानदारी) v (सामाजिक जागरूकता)
- न कभी रिश्वत देंगे, न कभी रिश्वत स्वीकार करेंगे। - सरकारी योजनाओं के तहत अपने अधिकारों को जानें।
- हर खरीद का पक्का बिल (Invoice) अवश्य मांगेंगे। - भ्रष्टाचार दिखने पर सतर्कता पोर्टल पर शिकायत करें।
- शॉर्टकट के बजाय हमेशा नियमबद्ध प्रक्रियाओं का पालन करेंगे। - ईमानदारी को एक कमजोरी नहीं, बल्कि गौरव मानेंगे।
हम व्यक्तिगत स्तर पर क्या कर सकते हैं?
- रिश्वत को कहें ना: चाहे काम में थोड़ी देरी ही क्यों न हो, कभी भी किसी सरकारी या निजी काम को जल्दी कराने के लिए शॉर्टकट या रिश्वत का सहारा न लें। नियमबद्ध तरीके से अपने काम के होने का इंतजार करें।
- पक्का बिल मांगें: जब भी आप बाज़ार से कोई सामान या सेवा खरीदते हैं, तो हमेशा टैक्स सहित पक्का बिल अवश्य मांगें। पक्का बिल न लेना अर्थव्यवस्था में समानांतर काले धन (Black Money) को बढ़ावा देता है, जिससे अंततः देश का ही नुकसान होता है।
- जागरूकता और आरटीआई (RTI) का उपयोग: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information) आम नागरिकों के हाथ में एक बहुत बड़ा ब्रह्मास्त्र है। यदि आपको अपने वार्ड, ग्राम पंचायत या किसी सरकारी विभाग के कार्यों में गड़बड़ी की आशंका है, तो आरटीआई के जरिए जानकारी मांगें। याद रखें, पारदर्शिता ही भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी दुश्मन है।
- शिकायत दर्ज कराएं: यदि कोई लोक सेवक आपसे काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो डरने के बजाय केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के ऑनलाइन पोर्टल या राज्य की एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की हेल्पलाइन पर इसकी शिकायत दर्ज कराएं।
🎯 निष्कर्ष: ईमानदारी और गरिमापूर्ण राष्ट्र का संकल्प
अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि एक समृद्ध, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण तब तक असंभव है जब तक कि समाज की जड़ों में भ्रष्टाचार का यह ज़हर घुला रहेगा। भ्रष्टाचार केवल पैसों की चोरी नहीं है, बल्कि यह किसी गरीब बच्चे की शिक्षा, किसी बीमार बुजुर्ग की दवा और देश के ईमानदार करदाताओं के भरोसे की चोरी है।
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG 16) में भी यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शांति, न्याय और मजबूत संस्थाओं के निर्माण के लिए भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाना अनिवार्य है। सरकारें कानून बना सकती हैं, तकनीकें बिचौलियों को हटा सकती हैं, लेकिन इस जंग का असली फैसला समाज की सामूहिक चेतना (Collective Conscience) से होगा। आइए, इस 9 दिसंबर को हम केवल भाषणों और दिवस मनाने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने दैनिक जीवन में पूर्ण ईमानदारी बरतने, व्यवस्था के प्रति जवाबदेह बनने और एक पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष व भ्रष्टाचार मुक्त भारत और विश्व के निर्माण में अपना सक्रिय व अमूल्य योगदान देने का एक सच्चा और अटूट संकल्प लें।
अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस (International Anti-Corruption Day), इसके ऐतिहासिक संदर्भ, कानूनी ढांचे और डिजिटल समाधानों से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):
📜 इतिहास और वैश्विक तंत्र
- अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस हर साल 9 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है?
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 31 अक्टूबर 2003 को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऐतिहासिक वैश्विक संधि ‘UNCAC’ (United Nations Convention against Corruption) को अपनाया था। यह संधि 9 दिसंबर 2003 को मैक्सिको में सदस्य देशों के हस्ताक्षर के लिए खोली गई थी। इसी ऐतिहासिक तारीख की याद में हर साल 9 दिसंबर को यह दिवस मनाया जाता है。
- UNCAC संधि की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
- यह दुनिया की एकमात्र कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally Binding) भ्रष्टाचार विरोधी अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसका सबसे क्रांतिकारी हिस्सा ‘संपत्ति की वापसी’ (Asset Recovery) है, जिसके तहत यदि कोई भ्रष्ट व्यक्ति देश का पैसा लूटकर विदेश भाग जाता है, तो उस देश की सरकार को वह चुराई गई संपत्ति मूल देश को वापस लौटानी होती है।
⚖️ भारत का भ्रष्टाचार विरोधी कानून
- भारत में भ्रष्टाचार की निगरानी और जांच करने वाली सर्वोच्च संस्थाएं कौन सी हैं?
- भारत में मुख्य रूप से तीन संस्थाएं काम करती हैं:
- केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC): यह सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की निगरानी करने वाली सर्वोच्च संस्था है।
- लोकपाल और लोकायुक्त: यह एक स्वतंत्र सर्वोच्च वैधानिक संस्था है, जिसे प्रधानमंत्री से लेकर उच्च अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच करने का अधिकार है।
- केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) / एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB): ये भ्रष्टाचार के मामलों की जमीनी स्तर पर जांच और छापेमारी करने वाली मुख्य एजेंसियां हैं।
- भारत में मुख्य रूप से तीन संस्थाएं काम करती हैं:
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में 2018 के संशोधन के बाद क्या बड़ा बदलाव हुआ?
- इस संशोधन के बाद कानून को और सख्त बनाया गया। अब रिश्वत लेने वाले अधिकारी के साथ-साथ रिश्वत देने वाले (Bribe Giver) व्यक्ति या कॉरपोरेट कंपनी को भी गंभीर अपराधी माना जाता है और इसके लिए 7 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।
💻 डिजिटल समाधान और तकनीक
- डिजिटल इंडिया और डीबीटी (DBT) ने भ्रष्टाचार को कैसे कम किया है?
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) प्रणाली ने सरकारी योजनाओं से बिचौलियों और बाबू-संस्कृति को पूरी तरह खत्म कर दिया है। आधार और बैंक खातों के लिंक होने से सरकारी वित्तीय सहायता (जैसे पेंशन, किसान सम्मान निधि, राशन सब्सिडी) का 100% पैसा बिना किसी कटौती के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचता है।
- गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल क्या है?
- GeM पोर्टल सरकार द्वारा सामान और सेवाओं की खरीद के लिए बनाया गया एक ऑनलाइन पारदर्शी मंच है। इसके जरिए कोई भी छोटा व्यापारी या स्टार्टअप सीधे सरकार को अपना सामान पारदर्शी ई-टेंडरिंग के माध्यम से बेच सकता है, जिससे सरकारी ठेकों में होने वाली रिश्वतखोरी और भाई-भतीजावाद पर पूरी तरह रोक लग गई है।
🤝 नागरिक अधिकार और ज़िम्मेदारी
- अगर कोई सरकारी अधिकारी काम के बदले रिश्वत मांगे, तो हमें क्या करना चाहिए?
- आपको रिश्वत बिल्कुल नहीं देनी चाहिए। आप इसकी शिकायत तुरंत अपने राज्य की एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की हेल्पलाइन पर या केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के ऑनलाइन सतर्कता पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा, आप सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 का उपयोग करके संबंधित काम में हो रही देरी की आधिकारिक जानकारी भी मांग सकते हैं।
- ‘व्हिसलब्लोअर’ (Whistleblower) कौन होते हैं?
- व्हिसलब्लोअर वे सजग नागरिक या सरकारी/निजी कर्मचारी होते हैं, जो किसी विभाग या कंपनी के भीतर चल रहे बड़े घोटालों, अवैध गतिविधियों या भ्रष्टाचार को उजागर करते हैं। भारत में उनकी पहचान को गुप्त रखने और सुरक्षा देने के लिए ‘व्हिसलब्लोअर्स संरक्षण अधिनियम’ बनाया गया है।
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