December 2026 Vrat Tyohar List: दिसंबर महीने के व्रत-त्योहारों की पूरी सूची, जानें सही तिथियां!

दिसंबर 2026 के प्रमुख हिंदू व्रतों और त्योहारों की तिथियों को रेखांकित करता हुआ एक पारंपरिक पंचांग इंफोग्राफिक बैनर। (A traditional panchang infographic banner outlining the dates of major Hindu fasts and festivals for December 2026.)

December 2026 Vrat Tyohar List: दिसंबर महीने के व्रत और त्योहारों की पूरी लिस्ट, जानें सही तिथि और महत्व!

हिंदू धर्म और संस्कृति में प्रत्येक महीने का अपना एक विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व होता है। साल का बारहवां और अंतिम महीना, यानी दिसंबर, न केवल अंग्रेजी कैलेंडर के समापन का प्रतीक है, बल्कि भारतीय पंचांग के अनुसार यह महीना आध्यात्मिक साधना, कठिन व्रतों, पवित्र नदी स्नानों और बड़े उत्सवों का संगम होता है।

वर्ष 2026 का दिसंबर महीना धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत पावन और अनूठा रहने वाला है। इस महीने के दौरान भारतीय पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष (अघन) और पौष के महीनों का योग बनेगा। मार्गशीर्ष का महीना भगवान श्री कृष्ण की भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, वहीं पौष का महीना सूर्य देव और पितरों की उपासना के लिए समर्पित होता है। इस महीने में विवाह पंचमी, मोक्षदा एकादशी, गीता जयंती, मार्गशीर्ष पूर्णिमा, सफला एकादशी और धनु संक्रांति जैसे कई बड़े और महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार आ रहे हैं।

यदि आप भी वर्ष 2026 के अंतिम महीने में आने वाले सभी व्रतों, त्योहारों, एकादशी, प्रदोष व्रत और पूर्णिमा-अमावस्या की सही तिथियों को लेकर उत्सुक हैं, तो यह विस्तृत लेख आपके लिए ही है। आइए, इस महा-सूची के माध्यम से दिसंबर 2026 के सभी व्रत और त्योहारों की तिथियों, शुभ मुहूर्तों और उनके धार्मिक महत्व को विस्तार से समझते हैं।


Table of Contents

दिसंबर 2026 के व्रत-त्योहारों की त्वरित तालिका (Quick View Calendar Table)

आपके पंचांग और समय की सुविधा के लिए यहाँ दिसंबर 2026 के सभी प्रमुख व्रतों और त्योहारों की तिथि-वार संक्षिप्त सूची दी जा रही है:

अंग्रेजी तारीख (2026)हिंदू तिथि व पक्षव्रत या त्योहार का नाम
3 दिसंबर (गुरुवार)मार्गशीर्ष कृष्ण नवमीपार्श्वनाथ जयंती
5 दिसंबर (शनिवार)मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशीउत्पन्ना एकादशी व्रत
6 दिसंबर (रविवार)मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशीप्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष)
7 दिसंबर (सोमवार)मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशीमासिक शिवरात्रि
9 दिसंबर (बुधवार)मार्गशीर्ष कृष्ण अमावस्यामार्गशीर्ष अमावस्या (पितृ कार्य)
10 दिसंबर (गुरुवार)मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदापौष शुक्ल पक्ष प्रारंभ / चंद्र दर्शन
13 दिसंबर (रविवार)मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थीविनायक चतुर्थी व्रत
14 दिसंबर (सोमवार)मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमीविवाह पंचमी (श्री राम-सीता विवाह)
15 दिसंबर (मंगलवार)मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठीचम्पा षष्ठी / स्कंद षष्ठी
16 दिसंबर (बुधवार)मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमीधनु संक्रांति (सूर्य का धनु राशि में प्रवेश)
18 दिसंबर (शुक्रवार)मार्गशीर्ष शुक्ल नवमीमहानंदा नवमी
20 दिसंबर (रविवार)मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशीमोक्षदा एकादशी / गीता जयंती
21 दिसंबर (सोमवार)मार्गशीर्ष शुक्ल द्वादशीअखंड द्वादशी / प्रदोष व्रत (शुक्ल पक्ष)
23 दिसंबर (बुधवार)मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशीदत्तात्रेय जयंती
24 दिसंबर (गुरुवार)मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमामार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत / अन्नपूर्णा जयंती
25 दिसंबर (शुक्रवार)पौष कृष्ण प्रतिपदापौष मास (कृष्ण पक्ष) प्रारंभ / क्रिसमस डे
28 दिसंबर (सोमवार)पौष कृष्ण चतुर्थीअखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत

दिसंबर 2026 के प्रमुख व्रतों और त्योहारों का विस्तृत विवरण व महत्व

दिसंबर 2026 में आने वाले प्रत्येक व्रत और त्योहार का अपना एक पौराणिक इतिहास और वैज्ञानिक महत्व है। आइए, इस महीने के सबसे बड़े और फलदायी व्रतों के बारे में विस्तार से जानते हैं:

1. उत्पन्ना एकादशी (5 दिसंबर 2026, शनिवार)

  • धार्मिक महत्व: मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु के शरीर से देवी एकादशी प्रकट हुई थीं और उन्होंने ‘मुरा’ नामक अत्याचारी राक्षस का वध किया था। इसलिए इसे एकादशी माता के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। जो लोग वर्षभर की एकादशियों का व्रत शुरू करना चाहते हैं, उन्हें इसी दिन से व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
  • फल: इस व्रत को करने से मनुष्य के पूर्वजन्म और इस जन्म के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता एकादशी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

2. मार्गशीर्ष अमावस्या (9 दिसंबर 2026, बुधवार)

  • धार्मिक महत्व: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की तृप्ति के लिए बेहद पवित्र माना गया है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना, त्रिवेणी) में स्नान करने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है।
  • पितृ दोष से मुक्ति: यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष या कालसर्प दोष है, तो इस दिन तर्पण, पिंड दान और तिलों का दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इस दिन तड़के सुबह गीता का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।

3. विवाह पंचमी – श्री राम-सीता विवाह (14 दिसंबर 2026, सोमावार)

  • धार्मिक महत्व: मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। त्रेतायुग में इसी पावन तिथि पर मिथिलापुरी में भगवान श्री राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ था।
  • विशेष परंपरा: इस दिन देश भर के राम मंदिरों, विशेषकर अयोध्या और जनकपुर (नेपाल) में भव्य राम-सीता विवाह उत्सव का आयोजन किया जाता है। घरों में रामायण का पाठ और राम-सीता के विवाह प्रसंग का गायन किया जाता है।
  • महत्वपूर्ण नोट: हालांकि यह एक बेहद पवित्र दिन है, लेकिन लोक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शादियां (मानवीय विवाह) नहीं की जाती हैं, क्योंकि माता सीता को विवाह के बाद अत्यधिक कष्टों और विरह का सामना करना पड़ा था। लोग इस दिन अपने सुखी वैवाहिक जीवन के लिए प्रभु राम और सीता माता की पूजा करते हैं।

4. धनु संक्रांति और खरमास का प्रारंभ (16 दिसंबर 2026, बुधवार)

  • ज्योतिषीय महत्व: जब सूर्य देव वृश्चिक राशि से निकलकर अपने गुरु बृहस्पति की राशि धनु में प्रवेश करते हैं, तो इस खगोलीय घटना को धनु संक्रांति कहा जाता है।
  • खरमास का प्रभाव: सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही देश में खरमास (या मलमास) की शुरुआत हो जाती है। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, खरमास के दौरान सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य जैसे – विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत और नए व्यापार की शुरुआत पर पूरी तरह से रोक लग जाती है। वर्ष 2026 में 16 दिसंबर से शुरू होने वाला यह खरमास अगले वर्ष 14 जनवरी 2027 (मकर संक्रांति) तक चलेगा। इस अवधि में केवल भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा, मंत्र जाप और दान करना ही श्रेष्ठ माना जाता है।

5. मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती (20 दिसंबर 2026, रविवार)

  • मोक्षदा एकादशी का महत्व: मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी ‘मोक्ष देने वाली’ है। इस दिन व्रत रखने से न केवल व्रत करने वाले को, बल्कि उसके पितरों को भी नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है और वे सीधे वैकुंठ धाम जाते हैं।
  • गीता जयंती का ऐतिहासिक संयोग: द्वापर युग में इसी महातिथि पर कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का निष्काम कर्मयोग का दिव्य संदेश दिया था। इसलिए इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है।
  • इस दिन क्या करें: इस दिन घरों और मंदिरों में गीता के श्लोकों का पाठ किया जाता है, गीता पुस्तक का दान किया जाता है और भगवान कृष्ण के ‘राधा-कृष्णा’ स्वरूप का भव्य श्रृंगार कर पूजन किया जाता है।

6. मार्गशीर्ष पूर्णिमा और दत्तात्रेय जयंती (24 दिसंबर 2026, गुरुवार)

  • धार्मिक महत्व: मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा वर्ष की सबसे पवित्र पूर्णिमा तिथियों में से एक है। इस दिन को अघहन पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन पवित्र नदियों में ‘कार्तिक स्नान’ की तरह ही भोर में स्नान करने की परंपरा है।
  • भगवान दत्तात्रेय का प्राकट्य: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के संयुक्त अंश के रूप में भगवान दत्तात्रेय का अवतार धरती पर माता अनुसूया के गर्भ से हुआ था। दत्तात्रेय जी को नौ नाथों और गुरु परंपरा का आदिगुरु माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही, इस दिन माता अन्नपूर्णा की जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए रसोई घर की सफाई कर अन्न की पूजा की जाती है।

7. अखुरथ संकष्टी चतुर्थी (28 दिसंबर 2026, सोमवार)

  • धार्मिक महत्व: पौष मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। ‘अखुरथ’ का अर्थ होता है – मूषक (चूहे) की सवारी करने वाले भगवान गणेश।
  • व्रत विधि: इस दिन महिलाएं अपने परिवार और बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला या फलाहारी व्रत रखती हैं। दिनभर भगवान गणेश के मंत्रों (ॐ गं गणपतये नमः) का जाप किया जाता है और रात में चंद्रमा के उदय होने के बाद उन्हें अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इस व्रत को करने से जीवन में आ रहे सभी विघ्न और संकट (संताप) दूर हो जाते हैं।

पंचांग के विशेष स्तंभ: एकादशी, प्रदोष और पूर्णिमा-अमावस्या तिथियां

दिसंबर 2026 के महीने में आने वाले विशिष्ट व्रत स्तंभों की तिथियां और समय नीचे स्पष्ट किए गए हैं ताकि आप अपनी पूजा की तैयारी पहले से कर सकें:

दिसंबर 2026 की एकादशी तिथियां:

  1. उत्पन्ना एकादशी (कृष्ण पक्ष): 5 दिसंबर 2026 (शनिवार)
  2. मोक्षदा एकादशी (शुक्ल पक्ष): 20 दिसंबर 2026 (रविवार)

दिसंबर 2026 के प्रदोष व्रत (भगवान शिव की विशेष पूजा):

  1. शनि प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष): 6 दिसंबर 2026 (रविवार – द्वादशी तिथि का संयोग होने से इसे रवि प्रदोष भी कहा जाएगा पंचांग भेद के अनुसार)।
  2. सोम प्रदोष व्रत (शुक्ल पक्ष): 21 दिसंबर 2026 (सोमवार) – सोमवार के दिन प्रदोष व्रत का आना अत्यंत शुभ माना जाता है, इसे ‘सोम प्रदोष’ कहते हैं जो संतान सुख के लिए अमोघ है।

अमावस्या और पूर्णिमा:

  • मार्गशीर्ष अमावस्या (पितृ तर्पण): 9 दिसंबर 2026 (बुधवार)
  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा (दत्तात्रेय जयंती): 24 दिसंबर 2026 (गुरुवार)

दिसंबर महीने में आध्यात्मिक साधना और जीवनशैली के नियम

दिसंबर का महीना कड़ाके की ठंड (शीत ऋतु) का समय होता है। हमारे सनातन धर्म में व्रतों और त्योहारों को मौसम के अनुकूल इस तरह ढाला गया है कि वे हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रख सकें:

  • जल्दी उठने का महत्व: मार्गशीर्ष और पौष के महीने में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने की महिमा है। यह ठंडे मौसम में शरीर में स्फूर्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
  • खान-पान में बदलाव (सात्विक आहार): इन महीनों में सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। एकादशी और पूर्णिमा जैसे कठिन व्रतों के दौरान अन्न का त्याग कर फलाहार (जैसे कुट्टू, सिंघाड़ा, फल, दूध) करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर डिटॉक्स होता है।
  • सूर्य देव को अर्घ्य: दिसंबर के उत्तरार्ध में जब पौष मास शुरू होता है, तब सूर्य देव कमजोर होने लगते हैं (ठंड बढ़ जाती है)। इसलिए तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देना रीढ़ की हड्डी, आंखों की रोशनी और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत वैज्ञानिक और लाभकारी माना गया है।

दिसंबर 2026 के व्रत, त्योहारों और पंचांग से जुड़े कुछ मुख्य और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

एकादशी और विशेष व्रत

  • दिसंबर 2026 में कौन-कौन सी एकादशी आ रही हैं?
    दिसंबर 2026 में दो प्रमुख एकादशी व्रत आ रहे हैं:
    1. उत्पन्ना एकादशी: 5 दिसंबर 2026 (शनिवार) – यह एकादशी माता के प्रकट होने का दिन है।
    2. मोक्षदा एकादशी: 20 दिसंबर 2026 (रविवार) – इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाएगी।
  • गीता जयंती कब है और इसका क्या महत्व है?
    साल 2026 में गीता जयंती 20 दिसंबर (रविवार) को है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी तिथि पर द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमर उपदेश दिया था।
  • दिसंबर 2026 में संकष्टी चतुर्थी व्रत कब रखा जाएगा?
    पौष मास की अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का व्रत 28 दिसंबर 2026 (सोमवार) को रखा जाएगा। यह व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने और जीवन के संकटों को दूर करने के लिए किया जाता है।

विवाह पंचमी और मांगलिक कार्य

  • विवाह पंचमी 2026 में किस तिथि को है?
    भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह का पावन उत्सव यानी विवाह पंचमी 14 दिसंबर 2026 (सोमवार) को मनाया जाएगा।
  • क्या विवाह पंचमी के दिन शादियां करना शुभ होता है?
    धार्मिक दृष्टि से विवाह पंचमी अत्यंत पवित्र तिथि है और इस दिन मंदिरों में राम-सीता विवाह का भव्य आयोजन होता है। हालांकि, लोक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार, इस दिन मानवीय विवाह (शादियां) करने से बचा जाता है, क्योंकि माता सीता को विवाह के बाद लंबा विरह और कष्ट सहना पड़ा था।

खरमास और संक्रांति

  • धनु संक्रांति कब है और खरमास कब से शुरू हो रहा है?
    सूर्य देव 16 दिसंबर 2026 (बुधवार) को धनु राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे धनु संक्रांति कहा जाता है। इसी दिन से देश भर में खरमास (मलमास) की शुरुआत हो जाएगी, जो अगले वर्ष 14 जनवरी 2027 (मकर संक्रांति) तक चलेगा।
  • खरमास के दौरान कौन से कार्य वर्जित होते हैं?
    खरमास के महीने में सूर्य का तेज कम हो जाता है, इसलिए हिंदू धर्म में इस अवधि के दौरान सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य जैसे – शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत (जनेऊ) और नए व्यापार की शुरुआत पूरी तरह से वर्जित माने जाते हैं। इस दौरान केवल पूजा-पाठ और दान करना फलदायी होता है।

पूर्णिमा, अमावस्या और जयंती उत्सव

  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा और दत्तात्रेय जयंती कब है?
    मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत और स्नान 24 दिसंबर 2026 (गुरुवार) को होगा। इसी पावन तिथि पर त्रिदेवों के अंश भगवान दत्तात्रेय की जयंती और माता अन्नपूर्णा की जयंती भी मनाई जाएगी।
  • दिसंबर 2026 में अमावस्या कब है और इस दिन क्या करना चाहिए?
    मार्गशीर्ष (अघन) मास की अमावस्या 9 दिसंबर 2026 (बुधवार) को है। यह तिथि पितृ तर्पण, पिंड दान और पवित्र नदी स्नान के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस दिन दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

निष्कर्ष

वर्ष 2026 का दिसंबर महीना आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छूने और ईश्वर की भक्ति में लीन होने का एक बेहतरीन अवसर लेकर आ रहा है। इस महीने में जहां एक तरफ हम भगवान विष्णु के जन्म से जुड़ी उत्पन्ना एकादशी का व्रत करेंगे, वहीं दूसरी तरफ भगवान श्री कृष्ण के अमर उपदेशों की साक्षी गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी का पर्व भी मनाएंगे। प्रभु राम और माता सीता के विवाह का स्मरण हमें हमारे पारिवारिक कर्तव्यों की याद दिलाएगा, तो वहीं भगवान दत्तात्रेय की जयंती हमें ज्ञान के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।

इन सभी व्रतों और त्योहारों को सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूर्ण श्रद्धा के साथ मनाने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। आशा है कि दिसंबर 2026 की यह संपूर्ण व्रत-त्योहार सूची आपके धार्मिक अनुष्ठानों को योजनाबद्ध तरीके से संपन्न करने में मददगार साबित होगी। एडवांस में आप सभी पाठकों को दिसंबर माह के सभी व्रतों और त्योहारों की हार्दिक शुभकामनाएं!

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