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World Hepatitis Day: 28 जुलाई को क्यों मनाया जाता है विश्व हेपेटाइटिस दिवस?

विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर स्वस्थ लीवर और जागरूकता का संदेश (Message of a healthy liver and awareness on World Hepatitis Day)

28 जुलाई: विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर अपने लीवर को स्वस्थ रखने का संकल्प लें।

Table of Contents

विश्व हेपेटाइटिस दिवस (World Hepatitis Day): इतिहास, महत्व, प्रकार, लक्षण और रोकथाम के उपाय

‘हेपेटाइटिस’ एक ऐसा शब्द है जो वैश्विक स्वास्थ्य परिदृश्य में एक गंभीर चुनौती का प्रतिनिधित्व करता है। हर साल 28 जुलाई को पूरी दुनिया में विश्व हेपेटाइटिस दिवस (World Hepatitis Day) मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य आम जनता के बीच हेपेटाइटिस (यकृत या लीवर की सूजन) के प्रति जागरूकता पैदा करना, इसके विभिन्न प्रकारों, प्रसार, रोकथाम, निदान और उपचार के बारे में शिक्षित करना है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हेपेटाइटिस दुनिया भर में मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है। हर साल लाखों लोग इस मूक हत्यारे (Silent Killer) का शिकार बनते हैं क्योंकि इसके लक्षण अक्सर तब तक प्रकट नहीं होते जब तक कि लीवर को गंभीर नुकसान न पहुंच चुका हो। इसलिए, इस बीमारी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना और समाज के हर वर्ग तक इसकी जानकारी पहुंचाना बेहद आवश्यक है।


विश्व हेपेटाइटिस दिवस का इतिहास

विश्व हेपेटाइटिस दिवस की शुरुआत वैश्विक स्तर पर हेपेटाइटिस गठबंधन (World Hepatitis Alliance) द्वारा वर्ष 2008 में की गई थी। शुरुआत में इसे 19 मई को मनाया जाता था, लेकिन बाद में वर्ष 2010 में विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) ने इसे आधिकारिक रूप से 28 जुलाई को मनाने का निर्णय लिया।

विश्व हेपेटाइटिस दिवस (World Hepatitis Day) हर साल 28 जुलाई को नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक ब्लमबर्ग (Dr. Baruch Blumberg) के जन्मदिन और उनके महान योगदान के सम्मान में मनाया जाता है।

मुख्य कारण:

  1. डॉ. बारूक ब्लमबर्ग का योगदान: डॉ. बारूक ब्लमबर्ग ने ही सबसे पहले 1967 में हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) वायरस की खोज की थी। इसके ठीक दो साल बाद, उन्होंने ही इस खतरनाक वायरस से बचने के लिए पहला टीका (Vaccine) और डायग्नोस्टिक टेस्ट भी विकसित किया। उनके इस जीवन रक्षक कार्य के लिए उन्हें 1976 में चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  2. शुरुआती इतिहास: वर्ष 2008 में जब वैश्विक स्तर पर पहली बार हेपेटाइटिस दिवस मनाने की शुरुआत हुई, तब इसके लिए 19 मई की तारीख चुनी गई थी।
  3. WHO का आधिकारिक फैसला: वर्ष 2010 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वैश्विक स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) ने आधिकारिक प्रस्ताव पारित कर डॉ. ब्लमबर्ग के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त करने के लिए उनके जन्मदिन यानी 28 जुलाई को ‘विश्व हेपेटाइटिस दिवस’ घोषित कर दिया।

28 जुलाई को ही क्यों चुना गया?

28 जुलाई की तारीख नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक ब्लमबर्ग (Dr. Baruch Blumberg) के जन्मदिन के सम्मान में चुनी गई थी। डॉ. ब्लमबर्ग ने ही हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) वायरस की खोज की थी और इसके बाद उन्होंने इस वायरस के लिए नैदानिक परीक्षण (Diagnostic Test) और प्रभावी टीके (Vaccine) का भी विकास किया। उनके इस महान योगदान ने चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में क्रांति ला दी और करोड़ों लोगों के जीवन को बचाने का मार्ग प्रशस्त किया। उनके इस अभूतपूर्व कार्य को याद करने और सम्मानित करने के लिए उनके जन्मदिन को ‘विश्व हेपेटाइटिस दिवस’ घोषित किया गया।

इस दिन को मनाने का उद्देश्य:


हेपेटाइटिस क्या है? (What is Hepatitis?)

सरल शब्दों में कहें तो ‘हेपेटाइटिस’ का अर्थ है लीवर (यकृत) में सूजन। लीवर हमारे शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है जो भोजन पचाने, ऊर्जा के भंडारण, विषाक्त पदार्थों (Toxins) को शरीर से बाहर निकालने और रक्त के थक्के जमाने वाले प्रोटीन के निर्माण जैसे सैकड़ों आवश्यक कार्य करता है। जब लीवर में सूजन आ जाती है, तो इसकी कार्यप्रणाली बाधित हो जाती है, जिससे पूरे शरीर का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।

लीवर में सूजन के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें अत्यधिक शराब का सेवन, कुछ दवाएं, विषाक्त पदार्थ और ऑटोइम्यून बीमारियां शामिल हैं। हालांकि, हेपेटाइटिस का सबसे आम और प्रमुख कारण वायरल संक्रमण (Viral Infection) है, जिसे वायरल हेपेटाइटिस कहा जाता है।


हेपेटाइटिस के विभिन्न प्रकार

वायरल हेपेटाइटिस मुख्य रूप से पांच प्रकार के वायरस के कारण होता है, जिन्हें हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई (A, B, C, D, and E) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ये सभी वायरस लीवर की बीमारी का कारण बनते हैं, लेकिन इनके फैलने का तरीका, गंभीरता और उपचार काफी भिन्न होते हैं।

1. हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A)

2. हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B)

3. हेपेटाइटिस सी (Hepatitis C)

4. हेपेटाइटिस डी (Hepatitis D)

5. हेपेटाइटिस ई (Hepatitis E)


हेपेटाइटिस के सामान्य लक्षण (Symptoms of Hepatitis)

हेपेटाइटिस के तीव्र संक्रमण के लक्षण वायरस के संपर्क में आने के कुछ हफ्तों से लेकर महीनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, क्रोनिक हेपेटाइटिस (विशेष रूप से बी और सी) में लक्षण कई वर्षों या दशकों तक प्रकट नहीं होते हैं। जब लक्षण दिखाई देते हैं, तो उनमें निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  1. अत्यधिक थकान और कमजोरी: बिना किसी कड़े परिश्रम के भी मरीज हर समय थकान महसूस करता है।
  2. पीलिया (Jaundice): त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ जाना। यह लीवर की खराबी के कारण रक्त में बिलीरुबिन (Bilirubin) का स्तर बढ़ने से होता है।
  3. गहरे रंग का मूत्र: पेशाब का रंग सामान्य से अधिक गहरा या चाय जैसा पीला हो जाना।
  4. मिट्टी के रंग का मल: मल का रंग हल्का या मिट्टी जैसा (Clay-colored) हो जाना।
  5. पेट में दर्द और सूजन: विशेष रूप से पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में जहां लीवर स्थित होता है, वहां दर्द या भारीपन महसूस होना।
  6. भूख न लगना और वजन कम होना: भोजन के प्रति अरुचि पैदा होना और अचानक वजन का घटना।
  7. मतली और उल्टी: जी मिचलाना और बार-बार उल्टी होना।
  8. हल्का बुखार और जोड़ों में दर्द: फ्लू जैसे लक्षण महसूस होना।

यदि क्रोनिक हेपेटाइटिस एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है, तो पेट में पानी भरना (Ascites), पैरों में सूजन, खून की उल्टी होना और मानसिक भ्रम (Hepatic Encephalopathy) जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं।


वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े इस बीमारी की भयावहता को दर्शाते हैं:

भारत में स्थिति

भारत में भी हेपेटाइटिस एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। भारत को हेपेटाइटिस बी के मध्यम से उच्च प्रसार वाले देशों की श्रेणी में रखा गया है। भारत में करोड़ों लोग हेपेटाइटिस बी और सी के पुराने संक्रमण से ग्रसित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, असुरक्षित इंजेक्शन प्रथाएं और दूषित पानी की समस्या इस बीमारी को बढ़ावा देने में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। भारत सरकार ने इसके समाधान के लिए राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP) की शुरुआत की है, जिसके तहत मुफ्त निदान और उपचार सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।


हेपेटाइटिस का निदान (Diagnosis)

हेपेटाइटिस का शीघ्र निदान ही लीवर को स्थायी क्षति से बचाने की कुंजी है। इसके लिए निम्नलिखित परीक्षण किए जाते हैं:


उपचार और प्रबंधन

हेपेटाइटिस का उपचार उसके प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है:

  1. हेपेटाइटिस ए और ई का उपचार: इन दोनों प्रकारों के लिए किसी विशिष्ट एंटीवायरल दवा की आवश्यकता नहीं होती है। मरीज को पर्याप्त आराम करने, संतुलित आहार लेने, प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थ पीने और शराब से पूरी तरह दूर रहने की सलाह दी जाती है। आमतौर पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वयं ही इस वायरस को समाप्त कर देती है।
  2. हेपेटाइटिस बी का उपचार: तीव्र (Acute) हेपेटाइटिस बी में केवल सहायक देखभाल की आवश्यकता होती है। लेकिन क्रोनिक हेपेटाइटिस बी के मामलों में, वायरस के गुणन को रोकने और लीवर की क्षति को कम करने के लिए जीवन भर या दीर्घकालिक एंटीवायरल दवाओं (जैसे टेनोफोविर या एंटेकाविर) का सेवन करना पड़ सकता है।
  3. हेपेटाइटिस सी का उपचार: पिछले कुछ वर्षों में हेपेटाइटिस सी का उपचार पूरी तरह बदल गया है। अब मौखिक एंटीवायरल दवाओं (Direct-Acting Antivirals – DAAs) का 8 से 12 सप्ताह का कोर्स उपलब्ध है, जो इस वायरस को शरीर से पूरी तरह समाप्त कर देता है।
  4. लीवर प्रत्यारोपण (Liver Transplant): जब हेपेटाइटिस के कारण लीवर पूरी तरह काम करना बंद कर देता है (End-stage liver disease) या लीवर कैंसर हो जाता है, तो लीवर प्रत्यारोपण ही एकमात्र जीवन रक्षक विकल्प बचता है।

रोकथाम के उपाय: खुद को और परिवार को कैसे बचाएं?

हेपेटाइटिस के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार ‘बचाव’ है। निम्नलिखित उपायों को अपनाकर इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है:

टीकाकरण (Vaccination)

स्वच्छता और शुद्ध खान-पान

सुरक्षित चिकित्सा और व्यक्तिगत प्रथाएं

सुरक्षित यौन संबंध

जीवनशैली में सुधार


विश्व हेपेटाइटिस दिवस का महत्व और थीम

प्रत्येक वर्ष, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और वैश्विक स्वास्थ्य संगठन इस दिन के लिए एक विशेष थीम (विषय) निर्धारित करते हैं। यह थीम वैश्विक प्रयासों को एक दिशा देने का काम करती है। उदाहरण के लिए, “वन लाइफ, वन लीवर” (One Life, One Liver) जैसी थीम यह याद दिलाती हैं कि हमारे पास केवल एक ही लीवर है, और इसकी सुरक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। इसी प्रकार, “हेपेटाइटिस का इंतजार नहीं हो सकता” (Hepatitis Can’t Wait) जैसी थीम इस बात पर जोर देती हैं कि हमें इसके निदान और उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए।

इस दिवस का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह राजनीतिक इच्छाशक्ति को जगाने का काम करता है। यह विभिन्न देशों की सरकारों को स्वास्थ्य नीतियों में सुधार करने, हेपेटाइटिस के इलाज को सस्ता और सुलभ बनाने तथा वर्ष 2030 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में वायरल हेपेटाइटिस को पूरी तरह समाप्त करने के WHO के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।


निष्कर्ष

विश्व हेपेटाइटिस दिवस केवल कैलेंडर का एक दिन नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक आंदोलन है। यह हमें याद दिलाता है कि अज्ञानता ही इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण है। हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसका समय पर पता चलने पर न केवल प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है, बल्कि कई मामलों में इसे पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है।

हम सभी का यह कर्तव्य है कि हम स्वयं इस बीमारी के प्रति जागरूक हों, अपने परिवार का टीकाकरण सुनिश्चित करें, सुरक्षित आदतों को अपनाएं और समाज में फैले इसके भ्रम और कलंक (Stigma) को दूर करने का प्रयास करें। आइए, इस विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने लीवर को स्वस्थ रखेंगे और एक हेपेटाइटिस-मुक्त समाज और विश्व के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान देंगे। क्योंकि हमारा स्वस्थ लीवर ही हमारे दीर्घायु और खुशहाल जीवन की आधारशिला है।


विश्व हेपेटाइटिस दिवस और इस बीमारी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

1. विश्व हेपेटाइटिस दिवस हर साल कब और क्यों मनाया जाता है?

विश्व हेपेटाइटिस दिवस हर साल 28 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिन नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक ब्लमबर्ग के जन्मदिन के सम्मान में चुना गया है, जिन्होंने हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज की थी और इसके लिए पहला टीका और नैदानिक परीक्षण विकसित किया था। इसका मुख्य उद्देश्य इस मूक बीमारी के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है।

2. हेपेटाइटिस को ‘साइलेंट किलर’ क्यों कहा जाता है?

हेपेटाइटिस (विशेष रूप से क्रोनिक हेपेटाइटिस बी और सी) को ‘साइलेंट किलर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद दशकों तक बिना किसी विशेष लक्षण के लीवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचाते रहते हैं। मरीज को अक्सर तब तक बीमारी का पता नहीं चलता जब तक कि लीवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) या लीवर कैंसर जैसी गंभीर स्थिति पैदा नहीं हो जाती।

3. क्या हेपेटाइटिस के सभी प्रकार एक जैसे होते हैं?

नहीं, वायरल हेपेटाइटिस के पाँच मुख्य प्रकार (A, B, C, D, और E) होते हैं, जो अलग-अलग वायरस के कारण होते हैं:

4. क्या हेपेटाइटिस छूने, खांसने या हाथ मिलाने से फैलता है?

नहीं, हेपेटाइटिस हवा के माध्यम से नहीं फैलता। यह सामान्य सामाजिक संपर्कों जैसे हाथ मिलाने, गले मिलने, एक ही बर्तन में खाना खाने, या संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से नहीं फैलता है। (नोट: हेपेटाइटिस A और E भोजन/पानी के माध्यम से फैलते हैं, लेकिन यह भी केवल तभी होता है जब स्वच्छता का ध्यान न रखा गया हो)।

5. किन हेपेटाइटिस वायरस के लिए टीके (Vaccine) उपलब्ध हैं?

वर्तमान में हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस B के लिए बेहद प्रभावी और सुरक्षित टीके उपलब्ध हैं। चूंकि हेपेटाइटिस D केवल हेपेटाइटिस B से संक्रमित लोगों को ही होता है, इसलिए हेपेटाइटिस B का टीका अप्रत्यक्ष रूप से हेपेटाइटिस D से भी सुरक्षा प्रदान करता है। हेपेटाइटिस C के लिए वर्तमान में कोई टीका उपलब्ध नहीं है।

6. क्या हेपेटाइटिस C का पूरी तरह से इलाज संभव है?

हाँ, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में आए बदलावों के कारण हेपेटाइटिस C का इलाज अब पूरी तरह संभव है। वर्तमान में उपलब्ध नई मौखिक एंटीवायरल दवाओं (Direct-Acting Antivirals) के 8 से 12 सप्ताह के कोर्स से 95% से अधिक मामलों में हेपेटाइटिस C वायरस को शरीर से पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।

7. हेपेटाइटिस से बचने के लिए मुझे अपनी दिनचर्या में क्या बदलाव करने चाहिए?

हेपेटाइटिस से बचने के लिए निम्नलिखित व्यावहारिक उपायों को अपनाएं:


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