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UNSC विस्तार: बिना वीटो के भी स्थायी सदस्यता को तैयार G4 देश

UNSC Expansion G4 Proposal

G4 UNSC Reform 2026

UNSC विस्तार: बिना वीटो पावर के भी स्थायी सदस्यता के लिए तैयार हैं G4 देश

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बड़े सुधारों को लेकर एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के समूह ‘G4’ ने संयुक्त राष्ट्र में एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में G4 देशों ने वैश्विक शांति और प्रतिनिधित्व के लिए एक बड़ा समझौता करने की इच्छा जताई है।

क्या है G4 देशों का नया प्रस्ताव?

संयुक्त राष्ट्र में जी4 देशों ने साफ किया है कि वे सुरक्षा परिषद (UNSC) के विस्तार में गतिरोध को तोड़ने के लिए लचीला रुख अपनाने को तैयार हैं।

इस समझौते के पीछे की रणनीति

सुरक्षा परिषद के वर्तमान स्थायी सदस्य (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन) आसानी से अपनी वीटो पावर साझा नहीं करना चाहते। जी4 का यह कदम इसी गतिरोध को समाप्त करने की एक सोची-समझी रणनीति है।

सुरक्षा परिषद में सुधार क्यों हैं जरूरी?

जी4 देशों का मानना है कि वर्तमान सुरक्षा परिषद 1945 के भू-राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाती है, जो आज के समय में अप्रासंगिक हो चुकी है।

G4 का यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय कूटनीनीति में एक बड़ा दांव है। अब गेंद संयुक्त राष्ट्र के अन्य सदस्य देशों और वर्तमान P5 देशों के पाले में है कि वे इस ऐतिहासिक बदलाव को स्वीकार करते हैं या नहीं।

G4 देशों का UNSC प्रस्ताव: भारत का रुख, चीन की चालबाजी और विशेषज्ञों का विश्लेषण

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार के लिए भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान (G4) ने एक अभूतपूर्व कूटनीतिक दांव चला है। इंटरगवर्नमेंटल नेगोशिएशंस (IGN) की बैठक में G4 की ओर से रखे गए मॉडल में सुरक्षा परिषद की संख्या 15 से बढ़ाकर 25-26 करने की मांग की गई है, जिसमें 6 नए स्थायी सदस्य शामिल करने का प्रस्ताव है।

प्रस्ताव की सबसे बड़ी बात यह है कि G4 देशों ने शुरुआत में बिना वीटो पावर के स्थायी सदस्यता स्वीकार करने की इच्छा जताई है, बशर्ते 15 साल बाद इस पर समीक्षा की जाए

1. भारत का रुख: ‘दो-स्तरीय’ व्यवस्था का विरोध और व्यावहारिक कूटनीति

इस प्रस्ताव पर भारत का रुख बहुत स्पष्ट और रणनीतिक है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने साफ किया है कि भारत स्थायी और अस्थायी के बीच किसी ‘तीसरी श्रेणी’ का समर्थन नहीं करता:

2. चीन की चालबाजी और अन्य देशों की प्रतिक्रिया

G4 के इस कूटनीतिक दांव ने सुरक्षा परिषद के वर्तमान ‘P5’ (विशेष रूप से चीन) को बैकफुट पर धकेल दिया है।

3. वैश्विक विशेषज्ञों का क्या कहना है?

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, G4 का यह प्रस्ताव एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ है:

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