भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार! बरेली में पानी की टंकी गिरने के मामले में कई अधिकारी बर्खास्त, कंपनी पर जुर्माना
बरेली, उत्तर प्रदेश:
बरेली में जल जीवन मिशन की पानी की टंकी ढही: जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का कड़ा प्रहार!
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में जल जीवन मिशन के तहत ₹3.62 करोड़ की लागत से निर्मित पानी की टंकी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। सोमवार शाम को हुए इस भीषण हादसे में करीब 7 ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से एक की हालत नाजुक बनी हुई है। घटना का संज्ञान लेते हुए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए अधिकारियों और निर्माण कंपनियों पर “बड़ा एक्शन” लिया है।
दोषियों पर गाज: FIR, बर्खास्तगी और निलंबन
हादसे के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने सख्त कार्रवाई की है, जिसके तहत कई अधिकारियों की छुट्टी कर दी गई है। मंत्री द्वारा की गई मुख्य कार्रवाइयां निम्नलिखित हैं:
- निर्माण कंपनी पर FIR: निर्माणदायी संस्था एनसीसी लिमिटेड (NCC Limited) के खिलाफ लापरवाही और घटिया निर्माण के लिए प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है।
- इंजीनियरों पर कार्रवाई:
- राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के एक असिस्टेंट इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त (बर्खास्त) कर दी गई हैं।
- जल निगम ग्रामीण के संबंधित जूनियर इंजीनियर को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है।
- जल निगम ग्रामीण के असिस्टेंट इंजीनियर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
- अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
- निरीक्षण एजेंसी पर जुर्माना: थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (TPI) एजेंसी बीएलजी (BLG) के बरेली में तैनात सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को हटा दिया गया है। साथ ही, कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया गया है और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी करोड़ों की योजना
सरदार नगर ग्राम पंचायत में बनी यह ओवरहेड टंकी करीब डेढ़ से दो साल पहले ही बनकर तैयार हुई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के समय से ही सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब थी, जिसकी वजह से टंकी चालू होने के कुछ समय बाद ही भरभराकर गिर गई। हादसे के समय कुछ ग्रामीण भीषण गर्मी से बचने के लिए टंकी के नीचे बैठे थे, जो अचानक मलबे में दब गए।
मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से समझौता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने इस पूरे मामले की तकनीकी जांच के लिए एक ऑडिट समिति का गठन भी किया है।
बरेली के सरदारनगर में हुए इस हादसे के बाद जाँच की कार्रवाई तेज कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन और जलशक्ति विभाग ने निम्नलिखित ताजा अपडेट्स दिए हैं:
- 24 घंटे में जाँच रिपोर्ट: जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने एक टेक्निकल ऑडिट कमेटी (Technical Audit Committee) का गठन किया है, जिसे घटना के 24 घंटे के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
- निर्माण सामग्री के नमूने: मंगलवार को जल निगम और निर्माण कंपनी (NCC Limited) की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का दौरा किया। टीम ने मलबे से कंक्रीट, ईंट, सीमेंट और सरिया के नमूने एकत्र किए हैं, जिन्हें परीक्षण के लिए PWD लैब भेजा जा रहा है।
- लोहे की चादर की जाँच: टंकी के निर्माण में इस्तेमाल की गई लोहे की चादर के नमूनों को विशेष परीक्षण के लिए कानपुर स्थित जीएनएलएम कंपनी भेजा जाएगा।
- तालाब की जमीन पर निर्माण: जाँच टीम इस बिंदु पर भी गौर कर रही है कि टंकी का निर्माण एक तालाब के किनारे जमीन भरकर किया गया था, जो संरचनात्मक कमजोरी का एक मुख्य कारण हो सकता है।
- ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी: मंत्री ने निर्माणदायी संस्था NCC Limited और थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेंसी BLG को काली सूची (Blacklist) में डालने के लिए नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
बरेली के सरदारनगर में पानी की टंकी गिरने के मामले में शासन ने कानूनी कार्रवाई और घायलों की मदद के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
NCC लिमिटेड के खिलाफ दर्ज FIR की धाराएं
एसपी (दक्षिण) अंशिका वर्मा के अनुसार, निर्माणदायी संस्था NCC Limited के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है:
- धारा 125 (BNS): दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य।
- धारा 316 (BNS): आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust)।
- सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (Prevention of Damage to Public Property Act): सरकारी संपत्ति को क्षति पहुँचाने से संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं.
FIR में स्पष्ट कहा गया है कि इतनी कम अवधि में टंकी का गिरना घटिया सामग्री के उपयोग और तकनीकी लापरवाही का परिणाम है
घायलों के लिए सहायता और मुआवजा
- मुफ्त इलाज: जिलाधिकारी (DM) अविनाश सिंह ने घायलों को सिद्धिविनायक अस्पताल में भर्ती कराया है और उनके निःशुल्क इलाज के निर्देश दिए हैं।
- संभावित मुआवजा: उत्तर प्रदेश सरकार के पिछले समान मामलों (जैसे मथुरा हादसा) में मृतकों के परिवारों को ₹2 लाख और गंभीर घायलों को ₹50,000 तक की आर्थिक सहायता दी गई है। बरेली मामले में प्रशासन फिलहाल घायलों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहा है और जल्द ही मुआवजे की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
घायलों की स्थिति
इस हादसे में डोरी लाल, अर्जुन, वीरपाल, रवींद्र और वेदपाल सहित कुल 7-8 ग्रामीण घायल हुए हैं। इनमें से तीन की हालत नाजुक बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए शहर के निजी अस्पतालों में भेजा गया है।
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