- राज्यसभा में राष्ट्रिय पार्टी का डिप्टी लीडर या उपनेता उस राष्ट्रिय पार्टी का सबसे बढ़ा संसदीय पद होता है।
- यदि मुख्य नेता किसी कारणवश राज्यसभा में अनुपस्थित है तो उपनेता का ही पद पार्टी को लीड करता है।
- यह उपनेता का पद किसी भी प्रकार के चुनाव द्वारा नहीं चुना जाता है।
- राज्यसभा में राष्ट्रिय पार्टी के डिप्टी लीडर को उसी पार्टी का सर्वोच्च पदाधिकारी ही नियुक्त करता है।
- डिप्टी लीडर का मुख्य कार्य होता है कि वह अपनी राष्ट्रिय पार्टी के विचारों और जनता कि समस्याओं के अनुसार महत्वपूर्ण नीतियों एवं योजना को बनाने में मुख्य भूमिका निभाए।
राज्यसभा सचिवालय में उपनेता के कार्य एवं महत्ता :
- यदि राष्ट्रिय पार्टी का नेता राज्यसभा सदन में अनुपस्थित पाया जाता है तो सदन में उपनेता ही अपनी राष्ट्रिय पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
- उपनेता की नियुक्ति के लिए राष्ट्रिय पार्टी के संसदीय दल के सदस्यों की पूर्ण सहमति से या उस पार्टी का सर्वोच्च पदाधिकारी चुनता है। चुने हुए व्यक्ति का नाम राष्ट्रिय पार्टी द्वारा राजयसभा सचिवालय को प्रेषित कर दिया जाता है। यदि चुने हुए व्यक्ति को हटाना है तो उसकी सूचना भी राष्ट्रिय पार्टी के द्वारा राजसभा सचिवालय को प्रेषित कर दी जाती है।
- सदन में उपनेता मुख्य रूप से अपनी राष्ट्रिय पार्टी के विचारों का प्रतिनिधित्व करता है और जनता के प्रतिनिधियों (संसदों ) के साथ मिलकर योजना बनाते है।
- राज्यसभा में किसी भी राष्ट्रिय पार्टी के ‘सदन के नेता‘ एवं ‘उपनेता‘ का पदनाम होता है। यह जानकारी के लिए आवश्यक है कि ये दोनों ही पद संविधान में लिखे नहीं है यह सिर्फ संवैधानिक परम्परा है। इससे यह लाभ है की किसी भी राष्ट्रिय पार्टी को सदन में एक आवाज़ मिलती है जिससे वह पार्टी जनता कि आवाज़ राज्यसभा सचिवालय तक पहुंचा सके।

